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मेयर शपथ ग्रहण करने के बाद नहीं बैठे और न ही आगे बैठेंगे अपनी कुर्सी पर, जानिए क्या है माजरा

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मेयर रामपालरुद्रपुर, 2 दिसंबर 2018।  रुद्रपुर के नवनियुक्त मेयर रामपाल सिंह रविवार को शपथ लेने के बाद दोपहर करीब 1:15 बजे नगर निगम कार्यालय स्थित अपने कक्ष में पहुंचे, लेकिन वहां वह अपनी कुर्सी पर बैठने के बजाय बगल में दूसरी कुर्सी लगाकर बैठ गए। उन्होंने कहा कि जब तक नजूल भूमि पर मालिकाना हक नहीं दिलवा देते तब तक अपनी कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि नजूल का मुद्दा कोर्ट में विचाराधीन है। जरूरत पड़ी तो सरकार के साथ इस मामले में अध्यादेश लाया जाएगा। कहा कि जिन मुद्दों और जनता से किए गए वादों के आधार पर उन्होंने चुनाव जीता है, उसका लेमिनेशन कर फ्रेम करवा लिया है। ये मुद्दे और वादे हमेशा उनके सामने उनका आइना बनकर रहेंगे । उन्होंने कहा कि इंदौर नगर निगम की तर्ज पर रुद्रपुर नगर निगम को आदर्श नगर निगम बनाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि  नवनियुक्त मेयर रामपाल सिंह सत्तारूढ़ भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते हैं।

exclusive पूर्व समाचार : 2 दिसंबर को होगी पूरे प्रदेश के नगर-निकायों की पहली नई बोर्ड की बैठक, इससे पहले दिलानी होगी नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ

देहरादून, 27 नवंबर 2018। प्रदेश के 92 में से 84 नगर निकायों के चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवनिर्वाचित सदस्यों का शपथ ग्रहण अब तक न होने को लेकर लोग सवाल उठाने लगे थे, लेकिन अब राज्य निर्वाचन आयोग ने निकायों के निर्वाचन और निर्वाचित प्रतिनिधियों के संबंध में (संभवतया काफी देरी होने के कारण ) बीती 26 नवंबर की देर शाम विधिवत सूचना शासन को सौंपी, और इसके साथ ही शासन ने भी देर शाम इन सभी निकायों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। इधर इसके बाद बुधवार को अपर सचिव भूपाल सिंह मनराल ने पूरे प्रदेश के नगर-निकायों की पहली नई बोर्ड की बैठक 2 दिसंबर रविवार के दिन आयोजित करने एवं इससे पहले नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने के आदेश जारी कर दिए हैं। 

मालूम हो कि नगर निकायों के चुनाव की मतगणना 20 नवंबर को शुरू हुई और 21 नवंबर तक चली। जबकि पोखरी नगर पंचायत में अगले दिन बाद एक वार्ड में पुनमर्तदान और मतगणना होने के बाद वहां के नतीजे भी घोषित कर दिए गए। इस तरह निकाय चुनाव की पूरी प्रक्रिया 22 नवंबर को संपन्न हुई। नियमानुसार चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग प्रक्रिया पूर्ण होने के साथ ही नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों की विधिवत सूची शासन को सौंपता है। फिर सरकार निकायों के बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी करती है। आयोग ने सोमवार को विधिवत सूचना शासन को सौंप दी है। शहरी विकास सचिव शैलेश बगोली के अनुसार सभी 84 निकायों के बोर्ड गठन के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। अब इनके शपथ ग्रहण की तय की जाएंगी। शपथ ग्रहण के साथ ही सभी निकायों के बोर्ड कार्यभार ग्रहण कर कामकाज शुरू कर देंगे।

रुड़की नगर निगम के सीमा विस्तार की अनंतिम अधिसूचना जारी

कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद शासन ने सोमवार को रुड़की नगर निगम के सीमा विस्तार की अनंतिम अधिसूचना भी जारी कर दी है। दो गांवों को निगम से बाहर किया गया है, जबकि तीन गांव को आंशिक रूप से शामिल किया गया है। इस सिलसिले में सप्ताह के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। रुड़की नगर निगम के पूर्व में हुए सीमा विस्तार में शासन ने दो गांवों पाडली गूजर और रामपुर को निगम से बाहर कर दिया था। अदालत के आदेश के बाद तब इस संबंध में अधिसूचना निरस्त कर दी गई थी। तर्क दिया गया था कि निकायों से किसी क्षेत्र को बाहर निकालने का कोई प्रावधान नहीं है। इस पर सरकार ने बाद में नगर निगम एक्ट में संशोधन कर यह प्रावधान किया कि नगर निगम क्षेत्र से किसी भी इलाके को बाहर निकाला जा सकता है। यह अधिकार मिलने के बाद नए सिरे से सीमा विस्तार का मसौदा तैयार हुआ। इसमें पाडली गूजर व रामपुर को निगम से बाहर करने और ग्रामसभा हसनअलीपुर के आकाशदीप, ओम विहार व सेवंथ डे स्कूल क्षेत्र, मोहनपुरा के मोहनपुर, फूलविहार व साउथ सिविल लाइन और आसफनगर के निशु एन्क्लेव क्षेत्र को निगम में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया। कैबिनेट से इस पर मुहर लगने के बाद शासन ने सीमा विस्तार की अनंतिम अधिसूचना जारी कर दी। अपर सचिव शहरी विकास भूपाल सिंह मनराल की ओर से जारी अनंतिम अधिसूचना के अनुसार प्रस्तावित क्षेत्रों को निकालने और शामिल करने के संबंध में सात दिन के भीतर आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। जिलाधिकारी हरिद्वार इनका निस्तारण कर आख्या शहरी विकास निदेशालय को प्रेषित करेंगे।

यह भी पढ़ें : 4 सीटें हारने पर भाजपा जिलाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, कोई मनाये नहीं इसलिये गए अज्ञातवास पर

चम्पावत, 21 नवंबर 2018। निकाय चुनाव में चम्पावत जिले की चारों निकाय सीटें गंवाने के बाद से भाजपा के जिलाध्यक्ष राम दत्त जोशी ने पद से इस्तीफा दे दिया है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल ही जोशी को जिलाध्यक्ष मनोनीत किया गया था। निकाय चुनाव में गुटबाजी और भितरघात के चलते भाजपा चम्पावत और टनकपुर पालिका के अलावा लोहाघाट और बनबसा यानी चारों निकाय सीटें हार गई। इससे पार्टी में घमासान मचा है। भितरघात के कारण हुई हार से खफा जिलाध्यक्ष जोशी ने बुधवार सुबह अपना इस्तीफा प्रदेश आलाकमान को भेज दिया। बताया जा रहा है कि इस्तीफा वापस लेने का दबाव बनाने के संबंध में उनके पास पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के फोन आ रहे थे। लेकिन जोशी की बस एक ही मांग है कि भितरघातियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाए। मांग पूरी न होने से नाराज जोशी मोबाइल स्विच ऑफ कर अज्ञातवास पर चले गए हैं। बता दें कि जिले में कुछ बड़े नेताओं के स्तर से भी गुटबाजी और भितरघात की चर्चा है। जोशी का कहना है कि चम्पावत जिले में भाजपा चारों निकाय सीटें जीतने की स्थिति में थी। ऐन मौके पर पार्टी के कुछ भितरघातियों के विश्वासघात के चलते भाजपा को जिले में निकाय की सभी सीटें गंवानी पड़ीं। ऐसे लोगों की मौजूदगी में मैं पार्टी की कमान नहीं संभालना चाहता हूं। इसीलिए मैंने प्रदेश आला कमान को अपना इस्तीफा भेज दिया है।

यह भी पढ़ें : निकाय चुनाव में नैनीताल जिले में इतना हुआ मतदान

नैनीताल, 18 नवंबर 2018। नैनीताल जनपद के विभिन्न नगर निकायों में शाम पांच बजे तक हुए मतदान के आंकड़ों के अनुसार जनपद में तीन लाख एक हजार 666 मतदाताओं में से एक लाख 666 महिलाओं एवं एक लाख दो हजार 341 पुरुषों यानी कुल मिलाकर दो लाख तीन हजार 7 यानी औसतन 67.3 फीसद मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। वहीं नगर निगम हल्द्वानी-काठगोदाम के लिए 65.79, नगर पालिका रामनगर के लिए 72.68 फीसद, नैनीताल के लिए जिले में सबसे कम 63.81 फीसद, भवाली के लिए 71.76 फीसद, भीमताल के लिए 68.39, लालकुआं के लिए सर्वाधिक 84.21 एवं कालाढुंगी के लिए जिले में सर्वाधिक 85.41 फीसद मतदान हुआ है। हल्द्वानी के आंकड़े जारी नहीं हो पाये हैं।
कुल मिलाकर हल्द्वानी-काठगोदाम नगर निगम के लिए दो लाख 13 हजार 41 मतदाताओं में से 69802 महिलाओं व 70352 पुरुषों सहित कुल 1 लाख 40 हजार 154 मतदाताओं, रामनगर में 35,191 मतदाताओं में 12681 महिलाओं व 12897 पुरुषों सहित कुल 25,578 मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। वहीं नैनीताल नगर पालिका में 28,165 मतदाताओं में से 8784 महिलाओं एवं 9187 पुरुषों सहित 17,971 मतदाताओं, भवाली में 5,747 में से 2054 महिला व 2070 पुरुषों सहित कुल 4124 मतदाताओं ने, भीमताल में 8413 मतदाताओं में से 2800 महिलाओं व 2954 पुरुषों सहित 5754 मतदाताओं, लालकुआं में 5207 मतदाताओं में से 2037 महिलाओं व 2348 पुरुषों सहित कुल 4385 मतदाताओं तथा कालाढुंगी में 5,902 मतदाताओं में से 2508 महिलाओं व 2533 पुरुषों सहित 5041 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।

सीआरएसटी व जीमखाना में सर्वाधिक तेजी शैले हॉल में सबसे धीमा हुआ मतदान

नैनीताल। नगर पलिका के चुनावों के लिए रविवार को मतदान के दौरान नगर के मल्लीताल जीमखाना कक्ष संख्या एक और सीआरएसटी कक्ष संख्या में मतदान की गति सबसे तेज रही, जबकि दुर्गापुर में मतदान की गति सबसे धीमी रही। जीमखाना कक्ष एक में सुबह 10 बजे तक 11.03, 12 बजे तक 23.75, 2 बजे तक 41.93 व 4 बजे तक 62.61 फीसद, सीआरएसटी कक्ष एक में 10 बजे तक 11, 12 बजे तक 28.5, 2 बजे तक 47.68 व 4 बजे तक 62..2 फीसद तक मतदान हो चुका था। जबकि इसके उलट शैले हॉल नैनीताल क्लब के कक्ष 1 में शाम चार बजे तक 39.75 फीसद, प्रांतीय खंड लोनिवि कक्ष 1 में मात्र 40.46 फीसद, प्राथमिक विद्यालय दुर्गापुर कक्ष में 41.3 फीसद, कन्या इंटर कॉलेज मल्लीताल के कक्ष 1 में 42.46 फीसद, नर्सरी स्कूल के कक्ष 2 में 42.85 फीसद, प्राथमिक पाठशाला मल्लीताल के कक्ष 1 में 43.17 फीसद, प्राथमिक पाठशाला ल्योनार्ड विला में 44.81 फीसद व सीआरएसटी के कक्ष 3 में शाम 4 बजे तक केवल 46.97 फीसद मतदान हुआ था।

भवाली, भीमताल से धीमी रही नैनीताल में मतदान की गति

नैनीताल। नैनीताल नगर के औसत मतदान की बात करें तो सुबह 10 बजे तक मात्र 9.79 फीसद, भीमताल में 11.39 फीसद व भवाली में 11.15 फीसद, 12 बजे तक नैनीताल में 22.57 फीसद, भीमताल में 24.48 फीसद व भवाली में 25.44 फीसद और शाम चार बजे तक नैनीताल में 52.09 फीसद, भीमताल में 53.98 फीसद व भवाली में 57.4 फीसद मतदान हो चुका था।
जबकि अपराह्न दो बजे तक नैनीताल में 36.78 फीसद, भीमताल में 39.47 फीसद व भवाली में 40.8 फीसद मतदान हुआ था।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भट्ट ने वोटों की खातिर कह दी ऐसी बड़ी बात कि विरोधियों को नहीं मिल रही काट

-कहा-विकास के लिये निकायों में भी भाजपा जरूरी, दूसरे जीतेंगे तो बनाएंगे सरकार से सहयोग न मिलने का बहाना, बेहतर है भाजपा प्रत्याशी को ही जितायें  
-नगर के आपदा प्रभावित सात नंबर क्षेत्र में कहा-किसी को विस्थापित नहीं होने देंगे, बस्तियों के नियमितीकरण का अध्यादेश भी लायी है सरकार

बृहस्पतिवार को रामलीला मैदान सात नंबर में जनता को संबोधित करते भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट।

नैनीताल, 15 नवंबर 2018। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि निकायों में विकास कार्यों के लिए भाजपा प्रत्याशियों का जीतना जरूरी है। कहा कि पिछले चुनावों में निर्वाचित अध्यक्ष विकास कार्य न करा पाने के लिए राज्य में अन्य पार्टी की सरकार होने का बहाना बनाते रहे हैं। आगे भी ऐसा न हो, इसलिए भाजपा प्रत्याशियों का जीतना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सत्ता होती है, तभी कार्य हो पाते हैं। याद दिलाया कि नगर के सात नंबर क्षेत्र के लोगों पर विस्थापन की तलवार लटकी तो भाजपा सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री से मिलकर समस्या से निजात दिलायी। भाजपा द्वारा मलीन बस्तियों के नियमितीकरण हेतु लाये गये अध्यादेश का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार किसी को भी विस्थापित नहीं होने देगी। इस मौके पर प्रत्याशी अरविंद पडियार, विधायक संजीव आर्य, नगर अध्यक्ष मनोज जोशी, विवके साह सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
श्री भट्ट ने यह बात नगर के सात नंबर क्षेत्र स्थित रामलीला मैदान में आयोजित जनसभा में बृहस्पतिवार दोपहर कही, और इसकी गूंज नगर में पूरे दिन सुनाई देती रही। लोग इसे भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने का बड़ा सफल प्रयास मान रहे हैं, वहीं विरोधी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया भी व्यक्त कर रहे हैं। कांग्रेस नेता व पूर्व दायित्वधारी रईश भाई ने कहा कि अजय भट्ट एक तरह से ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार की बात कर रहे हैं, जबकि उनकी डबल इंजन की सरकार ही ठीक से नहीं चल रही है।
इधर भवाली के बाद काबीना मंत्री एवं प्रदेश के बड़े दलित नेता यशपाल आर्य भी बृहस्पतिवार अपराह्न नैनीताल पहुंच गये हैं, और नगर के अनुसूचित जाति बहुल नारायणनगर व अन्य क्षेत्रों में जनसंपर्क कर पार्टी प्रत्याशी अरविंद पडियार के चुनाव अभियान को गति दे सकते हैं।

तो नगर निकायों में पर्यावरण मित्रों के पद चौथाई से भी कम करना चाहती है कांग्रेस !

-प्रदेश प्रभारी ने कहा-‘हेल्थ मैन्युअल’ के अनुसार सफाई कार्मिकों की संख्या बढ़ाने की पक्षधर है कांग्रेस

पत्रकार वार्ता में कांग्रेस प्रत्याशी का घोषणा पत्र दिखाते वरिष्ठ नेता।

नैनीताल, 14 नवंबर 2018। उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी नगर निकायों में सफाई का कार्य करने वाले पर्यावरण मित्रों के पद ‘हेल्थ मैन्युअल’ के अनुसार करने की पक्षधर है। बताया कि ‘हेल्थ मैन्युअल’ के अनुसार 10 हजार की जनसंख्या पर 14 पर्यावरण मित्र होने चाहिए। इस कसौटी पर नैनीताल नगर पालिका में सफाई कर्मियों के पदों की गणना करें तो 2011 की जनगणना की अनुसार नैनीताल की जनसंख्या 41 हजार 377 है। इस प्रकार हेल्थ मैन्युअल के अनुसार नगर में 58 पर्यावरण मित्र ही होनी चाहिए। इसमें भी यदि नगर में आने वाले सैलानियों की ‘फ्लोटिंग’ यानी घटती-बढ़ती जनसंख्या को भी जोड़ा जाए तो नगर में हेल्थ मैन्युअल के अनुसार नगर में पर्यावरण मित्रों के 83 पद ही हो सकते हैं, जबकि नगर में अंग्रेजी दौर से सफाई कर्मियों के 263 पद रहे हैं, और प्रदेश की पिछली कांग्रेस सरकार नगर निकायों का नये ढांचे में सफाई कर्मियों के पद नाम को ‘पर्यावरण मित्र’ करके पदों की संख्या 83 तक सीमित कर चुकी है। अलबत्ता, लिका  गया है कि नगर में अब तक ‘हेल्थ मैन्युअल’ लागू नहीं हुआ है, और पर्यावरण मित्रों के दबाव एवं नगर की आवश्यकताओं को देखते हुए 263 पद तो बने ही हुए हैं, पर्यटन सीजन व अन्य मौकों पर इससे अलग भी अतिरिक्त पर्यावरण मित्रों की तैनाती की जाती रही है। ऐसे में यदि कांग्रेस अपने प्रदेश प्रभारी के अनुसार जीतने पर कार्य करती है तो पर्यावरण मित्रों के पद मौजूदा 263 के मुकाबले घटकर एक चौथाई रह सकते हैं।

निकाय चुनाव में भी मोदी पर राफेल को लेकर निशाना

नैनीताल। बुधवार को नगर निकाय चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सचिन नेगी के प्रचार के लिए आये कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी प्रदेश व स्थानीय मुद्दों को छूने के बजाय राफेल लड़ाकू विमानों को लेकर केंद्र सरकार व मोदी पर निशाना साधते रहे। कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के भारी दबाव के बाद बमुश्किल केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को राफेल विमानों के दाम बताये हैं, जनता को अभी भी दाम नहीं बताये गये हैं। इससे लगता है कि मामले मंे जरूर गड़बड़ी है। साथ ही राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में निकाय चुनाव हाईकोर्ट की सख्ती के बाद हो रहे हैं। राज्य सरकार चुनाव कराना ही नहीं चाहती थी। ऐसे में कई बड़े नेताओं के होते हुए प्रत्याशी सचिन नेगी पर ही स्थानीय मुद्दे बताने की जिम्मेदारी छोड़ दी गयी। सचिन ने कहा कि पर्यावरण मित्रों की संख्या बढ़ाना, आवारा कुत्तों व बंदरों के आतंक से निजात दिलाना, नगर में नये पार्किंग स्थलों का विकास, कूड़ा खड्ड के पास सुंदर पार्क विकसित करना और कृष्णापुर के लिए अतिशीघ्र मार्ग का निर्माण कराना उनकी प्राथमिकता में होगा। इस मौके पर पूर्व सांसद डा. महेंद्र पाल, पूर्व विधायक सरिता आर्या, डा. रमेश पांडे, जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल, किशन लाल साह कोनी, सैयद नदीम मून, जया बिष्ट, मुकेश जोशी, जेके शर्मा व मुन्नी तिवारी सहित कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : मतदाता सूची से हजारों नाम गायब, लोग नहीं कर पाएंगे अपने मताधिकार का प्रयोग, प्रभावित हो सकते हैं चुनाव परिणाम

नवीन समाचार ब्यूरो, नैनीताल, 30 अक्तूबर 2018। नगर निकाय चुनाव में शासन-प्रशासन की ओर से जल्दबाजी और अधूरी तैयारियां साफ नजर आ रही हैं। खासकर नैनीताल नगर पालिका के चुनाव में सैकड़ों से लेकर हजारों लोगों के नाम मतदाता सूचियों से गायब बताये जा रहे हैं। चुनाव में सभासद से लेकर अध्यक्ष पद के प्रत्याशी वार्डों में ही सैकड़ों लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब बता रहे हैं। ऐसे में 13 वार्डों में यह संख्या हजारों में हो सकती है। यानी नगर के हजारों मतदाता नगर पालिका के चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सकेंगे। इसका अर्थ होगा कि चुनाव परिणाम शासन-प्रशासन की कामचोरी की वजह से मतदाताओं के द्वारा मताधिकार का प्रयोग न कर पाने के कारण प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए भी अच्छा नहीं है।
मतदाता सूचियों से कई घरों में रहने वाले परिवारों के सभी सदस्यों के नाम गायब हैं। इसे कुछ लोग साजिश भी करार दे रहे हैं। भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य व अध्यक्ष पद के दावेदार रहे सूखाताल वार्ड निवासी गोपाल रावत ने बताया कि उनके पूरे परिवार के करीब एक दर्जन सदस्यों का नाम मतदाता सूची से गायब थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा साजिशन हो सकता है। अलबत्ता उन्होंने समय रहते सतर्कता बरतकर अपने परिवार का नाम मतदाता सूची में जुड़वा दिया। लेकिन पूर्व दायित्वधारी कांग्रेस नेता माल रोड निवासी रईश भाई सहित अनेक लोग इतने खुशकिस्मत नहीं रहे, जो समय रहते नाम गायब होने की जानकारी मिल जाने से अपने नाम जुड़वा पाये हों। नगर के नैनीताल क्लब वार्ड से सभासद प्रत्याशी कुंदन नेगी ने बताया कि क्षेत्र में चुनाव प्रचार को जाने पर उन्हें पता चल रहा है कि सैकड़ों लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब हैं। वहीं मतदाता सूची तैयार करने से जुड़े लोग भी अनौपचारिक तौर पर स्वीकार कर रहे हैं कि बीएलओ के स्तर से कई परिवारों को छोड़ देने की चूक हो सकती हैं।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में निकाय चुनावों की प्रक्रिया आरक्षण को लेकर दायर याचिका हाईकोर्ट से खारिज

-70 प्रतिशत निगमों में मेयर पद के लिए आरक्षण लागू करने को दी गयी थी हाई कोर्ट में चुनौती, पीठ ने याचिका को पाया दोषपूर्ण

नैनीताल, 25 अक्तूबर 2018। उत्तराखंड के नगर निगमों में मेयर पद के लिए आरक्षण को हाई कोर्ट में दी चुनौती याचिका न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ से ख़ारिज हो गयी है। मामले की सुनवाई शुक्रवार 26 अक्टूबर को हुई, और याचिका को खारिज कर दिया गया।

मामले के अनुसार हाईकोर्ट के अधिवक्ता डीके त्यागी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार प्रदेश के सात नगर निगमों में मेयर पद के लिए चुनाव करा रही है, और इनमें गलत तरीके से आरक्षण तय किया है। इन निगमों में मेयर के सात पदों में से पांच पद आरक्षित कर दिये हैं और केवल दो पद ही अनारक्षित हैं। यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार किसी भी पद के लिए आरक्षण पचास प्रतिशत से अधिक नही हो सकता परंतु सरकार ने यह 70 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया है जो नियम विरुद्ध है। लिहाजा आरक्षण की प्रक्रिया को दुबारा से तय किया जाये।

ओपिनियन पोल : नैनीताल नगर पालिका के लिए कौन बनना चाहिए अगला अध्यक्ष

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नगर निकाय चुनाव में किस आधार पर देंगे आप अपना कीमती वोट, यहां ऑनलाइन बताएं

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यह भी पढ़ें : रुड़की नगर निगम के बाद बाजपुर पालिका के चुनाव भी 31 दिसंबर से पहले कराने के HC ने दिए आदेश

नैनीताल, 23 अक्तूबर 2018।  उत्तराखंड हाई कोर्ट ने रुड़की नगर निगम के बाद बाजपुर नगर पालिका के चुनाव 31 दिसंबर से पहले कराने के आदेश दिए हैं। इसके बाद रुड़की नगर निगम के बाद बाजपुर पालिका चुनावों को लेकर भी जारी असमंजस अब समाप्त हो गया है। बाजपुर की पूर्व पालिकाध्यक्ष जसबीर कौर ने याचिका दायर कर पालिका बोर्ड को भंग कर प्रशासक नियुक्त करने को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि या तो बाजपुर में अन्य निकायों के साथ चुनाव कराए जाएं, या जब तक चुनाव नहीं होते तब तक उन्हें ही पालिका संचालन की जिम्मेदारी दी जाए। मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ में याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डॉ. महेंद्र पाल ने कहा कि सरकार ने अन्य निकायों के चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी, मगर बाजपुर को तकनीकी कारणों से छोड़ दिया। खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद सरकार को 31 दिसंबर से पहले चुनाव कराने के आदेश पारित किए हैं। उल्लेखनीय है कि कोर्ट ने सोमवार को रुड़की नगर निगम के चुनाव भी 31 दिसंबर से पहले कराने के आदेश दिए थे।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस मुख्यालय में पहाड़-मैदान को लेकर मारपीट, आपस मे भिड़े वरिष्ठ नेता

देहरादून, 22 अक्तूबर 2018। निकाय चुनाव में टिकट वितरण को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार को कांग्रेस नेताओं ने कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में न केवल जमकर हंगामा किया, वरन आपस में मारपीट ही कर दी। विवाद का कारण पहाड़ और मैदान की राजनीति बतायी जा रही है। रविवार को देहरादून कांग्रेस भवन में उपेक्षा को लेकर हंगामा करने वाले नेता राजेंद्र शाह सोमवार को धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि टिकट बंटबारे में उत्तराखंडियों की उपेक्षा की जा रही है। जिसके बाद उन्हें समझाने के लिए अनुशासन समिति के अध्यक्ष प्रमोद कुमार, मानवेंद्र सिंह के साथ उनसे बात करने पहुंचे। उस वक्त मामला शांत हो गया। एक बार फिर मामला गरमाने लगा तो मानवेंद्र ने राजेंद्र शाह के समर्थक कमर खान को थप्पड़ रसीद कर दिया। आईटी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अमरजीत सिंह, महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा व पूर्व दर्जा प्राप्त अजय सिंह आदि ने कई बार बीच-बचाव करने का प्रयास किया लेकिन स्थिति नहीं संभली। मामला इतना बढ़ गया कि पार्टी नेताओं को पुलिस को बुलाना पड़ा। इस पर नजदीकी पुलिस चौकी से थानाध्यक्ष दलबल के साथ कांग्रेस भवन पहुंचे और मामले को शांत कराया।

यह भी पढ़ें : सबसे पहले ‘नवीन समाचार’ पर देखें कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची, देखें किसे मिला आपके शहर से कांग्रेस का टिकट

नैनीताल, 21 अक्टूबर 2018। रविवार दोपहर कांग्रेस ने प्रदेश की 84 में से 76 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। सूची के अनुसार देहरादून में कांग्रेस की तरफ से पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल को मेयर पद का प्रत्याशी घोषित किया है। जबकि ऋषिकेश से लक्ष्मी सजवाण, हरिद्वार से अनीता शर्मा, कोटद्वार से हेमलता नेगी, हल्द्वानी से सुमित हृदयेश, काशीपुर से मुक्ता सिंह को प्रत्याशी बनाया गया हैं। वहीं नैनीताल से नगर अध्यक्ष मारुति नंदन साह पर सचिन नेगी को प्रत्याशी बनाया गया है। जारी सूची से संकेत मिल रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह व नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश अपने समर्थकों को टिकट दिलाने में सफल रहे हैं, जबकि पूर्व सीएम हरीश रावत की नहीं चल पाई है। सचिन नेगी को भी आखिरी समय मे इंदिरा की ओर जाने का लाभ टिकट के रूप में मिला है।

नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत पद के लिए कांग्रेस की तरफ से जारी सूची :

नगर निगम के प्रत्याशी : 1.विकासनगर- देवानंद पासी, 2.मसूरी -मेघ सिंह कंडारी 3.हरबर्टपुर- देवेंद्र बिष्ट, 4.डोईवाला- सुमित्रा मनवाल 5. मंगलोर- चौधरी इस्लाम 6.लक्सर – जगदेव सिंह 7-शिवालिक नगर – महेश प्रताप सिंह राणा 8. उत्तरकाशी- रमेश सेमवाल 9. बड़कोट-लालदेई 10. बिनालीसौंड़- मनोरमा रमोला 11.चमोली- सुरेंद्र लाल 12. जोशीमठ- शैलेंद्र पवार 13.गोचर- इंदु पवार 14.कर्णप्रयाग-मनोरमा देवली 15.नरेंद्र नगर -राजेन्द्र सिंह राणा 16. चंबा-सुमना रमोला 17. देवप्रयाग – मुकेश प्रयागवाल 18. मुनिकीरेती-डालनवाला- दिनेश व्यास 19.रुद्रप्रयाग- गीता झिंकवाण 20. पिथौरागढ़ -जगत सिंह खाती 21.धारचूला -लक्ष्मी गुंज्याल 22.डीडीहाट – हेमंती भंडारी 23. चंपावत – विजय शर्मा 24. टनकपुर-हरीश भट्ट 25.पौड़ी- विनोद बिष्ट 26. दुगड्डा- जसोदा बडोला 27. अल्मोड़ा- प्रकाश जोशी 28.बागेश्वर- महेश कंडवाल 29.नैनीताल -सचिन नेगी 30.रामनगर- मोहम्मद अकरम 31.भवाली- पुष्पेश पांडे 32. गदरपुर- दिशा बांगा 33. जसपुर- नौशाद 34. किच्छा- दर्शन कोली 35. सितारगंज-अनवार 36. खटीमा- सोनी राणा 37.महुआखेड़ागंज नसीमा बेगम
नगर पंचायत के प्रत्याशी : झबरेड़ा चौधरी गौरव सिंह, लंढौरा मोहम्मद आसिफ, भगवानपुर मास्टर सत्यपाल, पुरोला हरिमोहन सिंह नेगी, नौगांव राजेश, नंदप्रयाग कनिज सिद्दीकी, पोखरी जगदीश भट्ट गैरसैंण पुष्कर सिंह रावत, थराली कुंती देवी, पीपलकोटी बिहारी लाल, कीर्ति नगर बृजेश्वरी देवी, घनसाली नागेंद्र सजवाण, लंबगांव अनिता रावत, गजा उषा देवी, चमियाला ममता पवार, अगस्तमुनि राधा देवी, उखीमठ प्रकाश, तिलवाड़ा रेखा भंडारी, स्वर्गआश्रम जांक माधव अग्रवाल, सतपुली किरन रौतेला, गंगोलीहाट सुनीता रावल, बेरीनाग रविंद्र बोरा, बनबसा सुधा बिष्ट, द्वाराहाट निर्मल कुमार मठपाल, भिकियासैंण कमला देवी, कपकोट गोविंद सिंह, कालाढूंगी दीप सती, लालकुआं भाजपा नेता नेतराम, भीमताल दीपक चुनौतिया, महुआडाबरा शाहजहां खातून, सुल्तानपुर पट्टी मोहम्मद रफी, केलाखेड़ा मोहम्मद शफी, दिनेशपुर लक्ष्मी देवी राय, शक्तिगढ़ रमेश राय, नानकमत्ता प्रेम सिंह दुरना व गूलरभोज रेवती देवी।

हो गयी भाजपा प्रत्याशियों की घोषणा, देखें किसे मिला आपके शहर से भाजपा का टिकट

भाजपा ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है, जिसमें नगर निगम (मेयर) के पदों के लिए 1-देहरादून- श्री सुनील उनियाल गामा, 2- हरिद्वार- श्रीमती अन्नु कक्कड़, 3-कोटद्वार- श्रीमती नीतू रावत, 4- हल्द्वानी- श्री जोगेन्दर रौतेला, 5- काशीपुर- श्रीमती उषा चौधरी, 6-रूद्रपुर – श्री रामपाल सिंह, 7-ऋषिकेश- श्रीमती अनीता ममगाई।

नगर पालिका परिषद (अध्यक्ष) के पदों के लिए 1- विकास नगर- श्रीमती शान्ति जुवाठा, 2- मसूरी- श्री ओ॰पी॰उनियाल, 3-हरबर्टपुर- श्रीमती नीरु देवी, 4- डोईवाला- श्रीमती नगीना रानी, 5-मंगलौर- श्री जमीर हसन अंसारी, 6-लक्सर- श्री सचिन अग्रवाल, 7-शिवालिक नगर- श्री राजीव शर्मा, 8- उत्तरकाशी- श्री हरीश सेमवाल, 9-बड़कोट- श्रीमती जसोदा राणा, 10- चिन्यालीसौड़- श्रीमती जैनी बिष्ट, 11-गोपेश्वर- श्रीमती पुष्पा पासवान,12- जोशीमठ-श्री गोविन्द पंवार, 13- गौचर- श्रीमती अंजू बिष्ट, 14- कर्णप्रयाग- श्रीमती दमयंती रतूड़ी,15- टिहरी- श्रीमती बेबी असवाल, 16- चम्बा- श्रीमती मनोज नकोटी, 17- देवप्रयाग- श्री सुधीर मिश्रा, 18- रूद्रप्रयाग- श्रीमती सरस्वती त्रिवेदी, 19- पौड़ी- श्री यशपाल बेनाम, 20- दुगड्डा- श्रीमती उमा जुयाल, 21-पिथौरागढ़- श्री राजेन्द्र सिंह रावत,22- धारचूला- श्रीमती राजेश्वरी, 23- डीडीहाट- श्रीमती कमला चुफाल,24- टनकपुर- श्री दीप चन्द्र पाठक, 25- चम्पावत- श्री सज्जन वर्मा, 26- अल्मोड़ा- श्री कैलाश गुरूरानी, 27-रानीखेत चिलियानौला- श्रीमती विमला देवी, 28-बागेश्वर- श्री कुंदन सिंह परिहार, 29- नैनीताल- श्री अरविन्द पडियार, 30-रामनगर- श्रीमती रूचि गिरी शर्मा, 31-भवाली- श्री संजय वर्मा, 32-गदरपुर- श्री संतोष गुप्ता, 33-जसपुर- श्रीमती दमयंती देवी, 34-किच्छा- श्रीमती रेखा सागर, 35- सितारगंज- श्री संजय गोयल, 36- खटीमा- श्रीमती मीना देवी तथा

नगर पंचायत(अध्यक्ष) के पदों के लिए 1-झबरेड़ा- श्री मानवेन्द्र सिंह, 2- भगवानपुर- श्रीमती सहती देवी, 3-पुरोला- श्री पवन नौटियाल, 4-नौगाँव- श्री शशि मोहन राणा, 5-नंदप्रयाग- श्रीमती हिमानी वैष्णव, 6-पौखरी-श्री विजय पाल सिंह रावत,7- गैरसैण- श्रीमती जानकी रावत, 8-थराली- श्रीमती दीपा देवी भारती, 9-पीपलकोटी- श्री रमेश लाल वंडवाल, 10- कीर्तिनगर- श्रीमती कैलाशी देवी, 11- घनसाली- श्री पारेश्वर बडूनी, 12- लम्बगॉव- श्रीमती ममता पंवार, 13- चमियाला- श्रीमती दिलदेई राणा, 14- गजा- श्रीमती मीना खाती, 15- अगस्तमुनी- श्रीमती बीना बिष्ट, 16- ऊखीमठ-श्री विजय सिंह राणा, 17- तिलवाड़ा- श्रीमती वीरा देवी, 18- स्वर्गआश्रम जौंक- श्री मनीष राजपूत, 19- सतपुली- श्रीमती अंजना देवी वर्मा, 20- गंगोलीहाट- श्रीमती जयश्री पाठक, 21- बेरीनाग- श्री महेश चन्द्र पंत, 22- लोहाघाट- श्री दीपक ओली, 23- बनवसा- श्रीमती विमला सजवाण, 24-द्वाराहाट- श्री मुकुल शाह, 25-भिक्यासैंण- श्रीमती अम्बुली देवी गोस्वामी, 26- कपकोट- श्री गिरीश चन्द्र जोशी, 27- कालाढूंगी- श्री पुष्कर कत्यूरा, 28- लालकुआँ- श्री अरुण प्रकाश वाल्मीकि, 29- भीमताल- श्री दिनेश सांगुड़ी, 30- महुआ डाबरा- श्री योगेन्द्र चौधरी, 31- सुल्तानपुर पट्टी- श्री देवेन्द्र कुमार मौर्य, 32- दिनेशपुर- श्रीमती सीमा सरकार, 33-शक्तिगढ़- श्री सुकान्त ब्रह्यम, 34-नानकमत्ता- श्री गुरूप्रीत सिंह, 35-गुलरभोज- श्रीमती अनीता दुबे शामिल हैं।

बड़ी खबर : निकाय चुनाव प्रक्रिया को फिर हाईकोर्ट में दी गयी चुनौती

नैनीताल, 16 अक्तूबर 2018। प्रदेश में निकाय चुनाव का मामला एक बार फिर से उच्च न्यायालय में पहुंच गया है। रुड़की नगर निगम के निर्वतमान मेयर यशपाल राणा ने अपनी पूर्व में की गयी घोषणा के अनुरूप रुड़की को आसन्न चुुनावों में शामिल न किये जाने पर चुनाव की अधिसूचना को याचिका दायर कर उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दे दी है। मामले में नवरात्र के अवकाश के बावजूद न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने राज्य सरकार से आगामी 22 अक्तूबर को सुनवाई की अगली तिथि घोषित करते हुए इस तिथि तक जवाब पेश करने के आदेश दिये हैं। पूछा है कि सरकार रुड़की में चुनाव क्यों नहीं करवा रही है। अलबत्ता, एकलपीठ ने राज्य में गतिमान चुनाव की प्रक्रिया पर किसी तरह की रोक नहीं लगायी है। इसके साथ ही माना जा रहा है कि इस याचिका के बावजूद फिलहाल चुनाव प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने जा रहा है। अलबत्ता अगली सुनवाई पर सरकार पीठ को रुड़की में चुनाव न करा पाने की मजबूरी बता सकती है, और पीठ सरकार को रुड़की में भी शीघ्र अथवा किसी तिथि तक चुनाव कराने के आदेश दे सकती है।

इधर, निकाय चुनाव के लिए बुधवार यानी 17 अक्टूबर से नामांकन पत्रों की बिक्री प्रारम्भ हो जाएगी। और आगे  20 से 23 अक्टूबर तक नामांकन किये जायेंगे। 25 व 26 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, 27 अक्टूबर को नाम वापसी की जा सकेगी। चुनाव 18 नवंबर को कराए जाएंगे,और 20 नवंबर को चुनाव के नतीजे घोषित होंगे।

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देहरादून, 15 अक्तूबर 2018। उत्तराखण्ड में करीब 7 माह के विलंब के बाद आखिरकार निकाय चुनाव की आचार संहिता सोमवार शाम से लागू हो गयी है। राज्य निर्वाचन आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट ने शनिवार शाम पत्रकार वार्ता कर आचार संहिता लागू होने तथा चुनाव कार्यक्रम की जानकारी दी। बताया कि प्रदेश के 92 निकायों में से 84 में एक ही चरण में चुनाव 18 नवंबर को कराए जाएंगे, और 20 नवंबर को परिणाम घोषित होंगे। शेष बचे तीन निकाय में आरक्षण जारी न होने के कारण चुनाव नही होंगे। बाकी तीन अन्य निकायों में सदस्य मनोनीत किये जाते हैं। जबकि 84 निकायों में से 3 निकायों गंगोत्री, बद्रीनाथ व केदारनाथ में आरक्षण घोषित न होने की वजह से चुनाव नहीं होग, बल्कि चुनाव की जगह सदस्य मनोनीत होंगे। 

राज्य में निकाय चुनाव ईवीएम मशीन पर नहीं बल्कि मतपत्रों के माध्यम से होंगे। नगर निगम रुड़की में परिसीमन का मामला उच्च न्यायालय में होने तथा शासन से परिसीमन न होने, नगर पालिका बाजपुर का परिसीमन शासन से न होने व श्रीनगर की मतदाता सूची का पुनरीक्षण जारी होने तथा नगर पंचायत बद्रीनाथ, केदारनाथ-गंगोत्री के इस मौसम में हिमाच्छादित होने भतरौजखान व सेलाकुनी नगर पंचायतों के मामले उच्च न्यायालय में लंबित होने के कारण चुनाव नहीं होंगे। कुल 1064 वार्डों में 1256 मतदान केंद्रों के 2659 मतदान स्थलों पर मतदान होगा। इनमें से 305 मतदान केंद्र व 569 मतदान स्थल संवेदनशील तथा 236 मतदान केंद्र व 533 मतदान स्थल अतिसंवेदनशील हैं। निकाय चुनावों में 11 लाख 48 हजार 27 महिलाओं व 12 लाख नौ हजार 813 पुरुषों सहित कुल 23 लाख 57 हजार 840 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

नगर पालिका के वार्डों के आरक्षण पर अधिसूचना से स्थिति हुई साफ

नैनीताल। प्रदेश की सभी नगर पालिकाओं के साथ जिले की नगर पालिकाओं के लिए आरक्षण की स्थिति अधिसूचना जारी होने के साथ साफ हो गयी है। प्रदेश की राज्यपाल की ओर से 14 अक्टूबर को जारी एवं सोमवार को सार्वजनिक हुई अधिसूचना के अनुसार नैनीताल नगर के कुल 15 वार्डों में से स्टाफ हाउस व शेर का डांडा वार्ड अनुसूचित जाति, राजभवन व हरीनगर अनुसूचित जाति की महिलाओं, सूखाताल वार्ड पिछड़ी जाति की महिलाओं तथा सैनिक स्कूल व तल्लीताल बाजार वार्ड महिलाओं के के लिए आरक्षित कर दिये गये हैं, जबकि शेष स्नो व्यू, नारायण नगर, अयारपाटा, अपर माल, नैनीताल क्लब, श्री कृष्णा पुर, आवागढ़ व मल्लीताल बाजार वार्ड अनारक्षित रखे गये हैं।
इसी तरह निकटवर्ती भवाली नगर के 7 वार्डों में से सैनिटोरियम वार्ड व मल्ली बाजार वार्ड महिलाओं, रेहड़ वार्ड अनुसूचित जाति की महिलाओं तथा भौनियाधार वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किये गये हैं, तथा गांधी कालोनी, श्यामखेत कहलक्वीरा व दुगई स्टेट वार्ड अनारक्षित हैं। इसी तरह रामनगर के 20 वार्डों में से दुर्गापुरी भरतपुरी, बड़ी मस्जिद, ईदगाह, गुलरघट्टी व मोतीमहल-बंबाघेर वार्ड महिलाओं, शिल्पकार बस्ती-टेढ़ा रोड वार्ड अनुसूचित जाति की महिलाओं, कोटद्वार रोड व गुलरघट्टी पश्चिमी पिछड़ी जाति, प्राथमिक विद्यालय पिछड़ी जाति की महिलाओं तथा जाटव बस्ती अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं, जबकि लोनिवि विश्राम भवन, लखनपुर फॉरेस्ट कंपाउंड, शांतिकुंज, ताज मस्जिद, मोती मस्जिद, ब्लॉक ऑफिस, टाउन हॉल, रेलवे पड़ाव, बाजार व वाटर वर्क्स कंपाउंड वार्ड अनारक्षित हैं।

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देहरादून, 14 अक्तूबर 2018। रविवार शाम प्रदेश के राज्यपाल के सचिव आरके सुधांशु की ओर से प्रदेश के प्रस्तावित नगर निकाय चुनावों के लिए बहुप्रतीक्षित अधिसूचना जारी कर दी गयी है। अधिसूचना के मुख्य बिंदु निम्नवत् हैं:
नगर पंचायत सीटों का आरक्षण : 

सामान्य –  झबरेड़ा, लंढौरा, पोखरी, गैरसैंण, घनसाली, ऊखीमठ, स्वर्गाश्रम-जौंक, गंगोलीहाट, बेरीनाग, लोहाघाट, द्वाराहाट, भीमताल, सुल्तानपुर पट्टी, केलाखेड़ा, दिनेशपुर, शक्तिगढ़, कालाढूंगी, कपकोट

महिला –  लंबगांव, गजा, चमियाला, अगस्त्यमुनि, तिलवाड़ा, सतपुली, बनबसा, गूलरभोज
एससी – भगवानपुर, लालकुआं, पीपलकोटी, थराली (महिला), कीर्तिनगर (महिला)
ओबीसी –  पुरोला, पिरान कलियर, नौगांव,  नंदप्रयाग (ओबीसी महिला), भिकियासैंण (ओबीसी महिला)

नगर पालिका परिषद सीटों का आरक्षण : 

सामान्य सीट –  मसूरी, हरबटेपुर, लक्सर, मंगलौर, देवप्रयाग, मुनिकीरेती (ढालवाला), शिवालिक नगर, उत्तरकाशी, जोशीमठ, नरेंद्रनगर, पौड़ी, पिथौरागढ़, टनकपुर, चंपावत, अल्मोड़ा,भवाली, बागेश्वर, नैनीताल, जसपुर, सितारगंज
महिला आरक्षित सीट –  डीडीहाट, दुगड्डा, बड़कोट, गौचर, कर्णप्रयाग, चंबा, रुद्रप्रयाग, महुआखेड़ागंज
एससी आरक्षित सीट –  चमोली-गोपेश्वर, किच्छा, धारचूला (महिला) रानीखेत-चिनियानौला (महिला)
ओबीसी आरक्षित सीट – गदरपुर, रामनगर, डोईवाला, चिन्यालीसौड़ (महिला), टिहरी (महिला)

नगर निगम सीटों का आरक्षण : 

अनारक्षित – देहरादून व  हल्द्वानी ।
महिला आरक्षण- ऋषिकेश, हरिद्वार व कोटद्वार ।
पिछड़ी जाति – काशीपुर ।
अनुसूचित जाति- रुद्रपुर।

पूर्व समाचार : निकाय चुनाव की उल्टी गिनती शुरू, केवल इन निकायों का बदल रहा है आरक्षण

देहरादून, 13   अक्टूबर 2018। निकाय चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होने के साथ ही शहरी विकास विभाग ने 84 निकायों में आरक्षण को अंतिम रूप दे दिया है। सूत्रों के अनुसार अप्रैल में घोषित प्रारंभिक आरक्षण में सिर्फ हरबर्टपुर, कपकोट, गूलरभोज, महुआखेड़ा गंज, पुरोला और कालाढूंगी नगर पंचायत में अध्यक्ष पद पर आरक्षण बदल रहा है। शेष निकायों में मेयर, अध्यक्ष पद का आरक्षण जस का तस है।

मालूम हो कि शहरी विकास विभाग ने 28 अप्रैल को नगर पालिका और नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद आरक्षण की प्रारंभिक अधिसूचना जारी की थी। विभाग ने 11 मई को सात नगर निगम में भी मेयर पद पर आरक्षण की प्रारंभिक अधिसूचना जारी करते हुए, लोगों से आपत्तियां मांगी थीं। इन दावे आपत्तियों का निपटारा जिलास्तर पर हो गया है। इस आधार पर विभाग अब अंतिम अधिसूचना जारी कर रहा है।  सूत्रों के अनुसार पूर्व में घोषित आरक्षण में मामूली बदलाव हुआ है। इसमें नगर पालिका हरबर्टपुर में अध्यक्ष की सीट महिला से सामान्य हो गई है, जबकि महुआखेड़ा गंज सामान्य से महिला हो रही है। इसी तरह नगर पंचायत पुरोला महिला से ओबीसी, कालाढूंगी ओबीसी से सामान्य, कपकोट महिला से सामान्य और गूलरभोज सामान्य से महिला हो गई है। आरक्षण की अंतिम अधिसूचना शनिवार को जारी हो सकती है। इसके बाद 15 अक्तूबर को निर्वाचन आयोग चुनाव की विधिवत अधिसूचना जारी कर सकता है। प्रदेश में 15 नवंबर को मतदान और फिर 17 नवंबर को मतगणना प्रस्तावित है।

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देहरादून, 11  अक्टूबर 2018। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सरकार ने 15 नवम्बर को नगर निकाय चुनाव कराने का मन बना लिया है। सूत्रों के अनुसार बृहस्पतिवार को देश सरकार के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने राज्य निर्वाचन आयुक्त सहित अधिकारियों के साथ हाईकोर्ट के आदेश के बाद की स्थिति पर चर्चा करते हुए बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है। सूत्रों के अनुसार 15 अक्टूबर को अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। 17, 18 व 20 अक्टूवर को नामांकन के साथ 22 व 23 अक्टूबर को स्क्रूटनी होगी। इसके बाद 25 अक्टूबर को नाम वापसी, 26 को चुनाव चिह्न आवंटन किया जाएगा। 15 नवम्बर को मतदान व 17 को मतगणना की योजना बनी है। यह भी माना जा रहा है कि तीन निकायों रुड़की, बाजपुर, श्रीनगर से सम्बंधित जिलों में पूर्व घोषित आरक्षण में मामूली परिवर्तन हो सकता है, अलबत्ता राज्य के अन्य जिलों में एवं अधिकाँश निकायों में आरक्षण की स्थिति पूर्ववत रह सकती है। 

बैठक के बाद सरकार इस निर्णय पर पहुंची है हालांकि अभी इस चुनाव कराने में कई नगर पंचायत व नगर पालिका व नगर निगम में पेच फंसे हैं। प्रश्न यह भी है कि जिन निकायों में अभी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पायी वहां समय से कार्यक्रम के अनुसार चुनाव हो पाएंगे या नहीं। नगर निगम रुड़की वह नगर पालिका बाजपुर की चुनाव कराने की गई प्रक्रिया अभी अधूरी है। सूत्रों के अनुसार नामांकन से पहले रुड़की में आरक्षण तय कर दिया जायेगा और सीमा विस्तार की प्रक्रिया चलती रहेगी वहीं बाजपुर व श्रीनगर नगर पालिका के आरक्षण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर दी जायेगी। इसके साथ ही 41 नगर पालिकाओं में चुनाव करा दिये जाएंगे। वहीं नगर पंचायत सेलाकुई पर अभी न्यायालय का स्थगन आदेश होने के कारण नगर पंचायत बन नहीं पायी है। नगर पंचायत भतरौंजखान पर भी कई कानूनी अड़ंगे हैं। चुनाव से अलग रहने वाली नगर पंचायत बद्रीनाथ, केदारनाथ व गंगोत्री को छोड़कर अभी तक 85 नगर निकायों की स्थिति ही साफ हो पायी है। तीन निकायों रुड़की, बाजपुर, श्रीनगर की प्रक्रिया पूरी हो पायी तो 88 निकायों में चुनाव का बिगुल बज जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक व एडवोकेट एटर्नी जनरल एसएल बाबुलकर, न्याय विभाग के प्रमुख सचिव आलोक वर्मा, निदेशक शहरी विकास बीएस मनराल के साथ ही राज्य निर्वाचन आयुक्त के चंद्रशेखर भट्ट के साथ हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि उच्च न्यायालय के आदेश को सवरेपरि रखते हुए अधिसूचना जारी कर दी जाए।

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नैनीताल, 10 अक्टूबर 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में लगातार टल रहे निकाय चुनावों पर बहुप्रतीक्षित निर्णायक फैसला दे दिया है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से नगर पालिकाओं व नगर निगमो में आरक्षण की प्रक्रिया 15 अक्टूबर तक पूरी करने व उसके बाद चुनाव आयोग से एक सप्ताह के भीतर चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए है। इस आधार पर इसी माह 22 अक्टूबर से चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ करने की बाध्यता राज्य सरकार व चुनाव आयोग के समक्ष हो गयी है।
मामले के अनुसार उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने 25 मई 2018 को राज्य सरकार द्वारा 11 मई 2018 को जारी नगर निगमो के आरक्षण से सबंधित नोटिफिकेशन को निरस्त कर दिया था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने खंडपीठ में विशेष अपील दायर की थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने सरकार को निर्देश दिए थे कि आरक्षण व परिसीमन सम्बंधित नोटिफिकेशन को एक साथ नए सिरे से जारी करें। इधर बुधवार को सुनवाई के दौरान महाधिक्वता द्वारा खंडपीठ को बताया कि नगर निगम रुड़की के आरक्षण को लेकर भ्रम है। शेष नगर निगमों के आरक्षण की प्रक्रिया 15 अक्टूबर तक पूरी कर ली जायेगी। इस आधार पर कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिए कि नगर निकायों के चुनाव की प्रक्रिया को सात दिन के भीतर शुरू करें। साथ ही खंडपीठ ने महाधिवक्ता की सहमति पर रुड़की नगर निगम के आरक्षण की प्रक्रिया शीघ्र सम्पन्न करने को भी कहा, और उसके बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू करते हुए भारतीय संविधान के अनुछेद 243 आर व 243यू और यूपी म्युनिसिपल कारपोरेशन एक्ट 1959 के अनुसार नगर पालिकाओं के कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व चुनाव हो जाने चाहिए थे। इसके अलावा महाअधिक्वता ने खंडपीठ को बताया कि राज्य की 39 नगर पालिकाओं और नगर पंचायतांे के आरक्षण की प्रक्रिया पहले ही तय हो चुकी है, और श्रीनगर व बाजपुर पालिकाओं के आरक्षण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जा रही है। महा अधिक्वता के इस वक्तव्य के आधार पर खण्डपीठ ने सरकार की विशेष अपीलों को निस्तारित कर दिया है।

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-उच्च न्यायालय की खंडपीठ 10 दिन बाद करेगी मामले की सुनवाई
नैनीताल, 17 जुलाई 2018। उत्तराखण्ड राज्य में निकाय चुनाव अभी होते नहीं दिख रहे है। राज्य की नगर पालिकाओं में आरक्षण की अधिसूचना को निरस्त करने को सरकार ने डबल बैंच में चुनौती दे दी है। वहीं याचिका पर सुनवाई के लिये याचिकाकर्ता ने आपत्ति दाखिल करने के लिये कोर्ट से समय मांगा है। अब कोर्ट पूरे मामले की सुनवाई 10 दिनों के बाद करेगी।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड सरकार ने इस वर्ष 28 अप्रैल 2018 को निकायों में आरक्षण की अधिसूचना जारी की थी, जिसमें बाजपुर और श्रीनगर को छोड़कर 39 पालिकाओं में आरक्षण की स्थिति साफ की गयी थी। इसके किच्छा के मुस्ताक अहमद ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। याचिका में कहा गया था कि सरकार ने बाजपुर और श्रीनगर को छोड़कर 39 पालिकाओं में आरक्षण जारी किया है। जबकि सरकार को सभी पालिकाओं में एक साथ आरक्षण तय करना चाहिये था। यदि राज्य सरकार इन्हें भी शामिल नहीं करती है तो इससे राज्य की पालिकाओं में आरक्षण का क्रम प्रभावित हो सकता है। हाई कोर्ट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता का तर्क माना और सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को निरस्त कर दिया। अब सरकार ने हाई कोर्ट के एकलपीठ के फैसले को खंडपीठ में चुनौती दे दी है। इस पर न्यायालय अब 10 दिनों बाद सुनवाई करेगी।

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नैनीताल, 28 मई 2018। उत्तराखंड  हाईकोर्ट ने सरकार को प्रदेश के नगर पालिकाओं में नये सिरे से आरक्षण की स्थिति तय करने के आदेश दिए है।  इससे राज्य सरकार द्वारा घोषित आरक्षण के अनुसार तैयारी कर रहे प्रत्याशियों को गहरा झटका लग सकता है, वहीं अन्य आरक्षण की उम्मीद पाल रहे उम्मीदवारों की बांछें खिल सकती हैं। साथ ही इससे एक बार फिर निकाय चुनावों के और पीछे खिसकने की संभावना पैदा हो गयी है।

दरअसल सरकार ने 28 अप्रैल 2018 को आरक्षण की अंतिम अधिसूचना जारी कर प्रदेश की 41 नगर पालिकाओं में से 39 नगर पालिकाओं में आरक्षण घोषित कर दिया था, जबकि श्रीनगर व बाजपुर को इस परिधि से बाहर रखा था।  किच्छा निवासी मुश्ताक अहमद ने सरकार की इस कमी को रिट याचिका दायर कर हाईकोर्ट में चुनौती दी।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सरकार ने जानबूझकर दो नगर पालिकाओं को आरक्षण की परिधि से बाहर रखा है। जो कि गलत है। सरकार की ओर से इस मामले में कोई संतोषजनक जवाब पेश नहीं किया गया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ में हुई। इस पर कोर्ट ने सरकार की 28 अप्रैल 2018 की अधिसूचना को निरस्त कर दिया है, और सरकार को श्रीनगर व बाजपुर नगर पालिकाओं को भी सूची में शामिल कर नये सिरे से नगर पालिकाओं में आरक्षण की स्थिति तय करने को कहा है।

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नैनीताल। आज का दिन त्रिवेन्द्र सरकार के लिए काॅफी राहत भरा रहा। कारण निकाय चुनाव को लेकर आए नैनीताल हाईकोर्ट के बड़े फैसले से त्रिवेन्द्र सरकार को आज बहुत बड़ी राहत मिली गई। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट ने निकायों को अपग्रेड करने और परिसीमन की अधिसूचना को सही ठहराते हुए एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट के फैसले से राज्य में निकाय चुनाव को लेकर छाया कुहासा पूरी तरह साफ हो गया है। कोर्ट के फैसले के बाद समय से चुनाव कराने की उम्मीद बढ गई है।

41 निकायों के सीमा विस्तार का था मामला
गौरतलब है कि एकलपीठ ने राज्य सरकार की परिसीमन संबंधी अधिसूचना को रद कर दिया था, जिसके बाद सरकार ने विशेष अपील दायर कर इस फैसले को चुनौती दी। त्रिवेन्द्र सरकार की ओर से महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर और मुख्य स्थाई अधिवक्ता परेश त्रिपाठी द्वारा बहस की गई। जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया। आपको बता दें राज्य के 41 निकायों का सीमा विस्तार किया गया था। हाईकोर्ट के फैसले से राज्य में निकाय चुनाव को लेकर छाया कुहासा पूरी तरह साफ हो गया है। कोर्ट के फैसले के बाद समय से चुनाव कराने की उम्मीद बढ गई है।

पूर्व समाचार : उत्तराखंड उच्च न्यायालय की एकलपीठ द्वारा निकायों के सीमा विस्तार की अधिसूचना रद्द किये जाने के बाद प्रदेश में निकाय यानी ‘छोटी सरकार’ के चुनाव को लेकर एक बार फिर न केवल असमंजस की स्थिति वरन चुनाव ‘लम्बा टलने’ की स्थिति पैदा हो गई है। उच्च न्यायालय के की एकलपीठ के फैसले के खिलाफ सरकार विशेष अपील दायर करने की बात कर रही है। सरकार अपना इकबाल बुलंद रखने के लिए ऐसा करेगी भी, ऐसे में चुनाव कम से कम जुलाई माह तक के लिया टल गए लगते हैं।
सरकार के प्रवक्ता व काबीना मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ प्रदेश सरकार ‘हायर बेंच’ में जल्द ही विशेष अपील दायर करेगी। उनका कहना था कि न्यायालय ने जिस पहलू को असंवैधानिक बताया है । उस प्रक्रिया को पूर्व में कभी नहीं अपनाया गया है। गौरतलब है कि विगत तीन मई को उत्तराखंड में निकायों का कार्यकाल पूर्ण हो चुका है। प्रदेश में उक्त तिथि से पूर्व निकाय चुनाव करा लिए जाने चाहिए थे, लेकिन सरकार द्वारा कराए गए सीमा विस्तार के खिलाफ नैनीताल हाईकोर्ट में इसके खिलाफ कई याचिकाएं दायर कर दी गईं। इस बीच चुनाव आयोग ने भी सरकार पर निकाय चुनाव कराने में हीलाहवाली बरतने का आरोप लगाया था। यहां तक कि चुनाव आयुक्त ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका भी दायर कर दी थी। इसके बाद हरकत में आई सरकार ने आनन-फानन में सीमा विस्तार पर अनन्तिम अधिसूचना जारी करते हुए आरक्षण को लेकर भी हाल ही में अधिसूचना जारी कर दी थी। हाईकोर्ट के सीमा विस्तार पर फैसले के बाद अब तक सरकार की ओर से की गई कवायद धरी की धरी रह गई। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग की याचिका पर सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने अगली तिथि 21 मई नियत की है। ऐसे में फिलहाल निकाय चुनाव लम्बा टलने के आसार बन गए हैं।

निकाय चुनावों को लेकर सरकार को लगा बड़ा झटका, परिसीमन की अधिसूचना खारिज 

-हाईकोर्ट ने कहा कि परिसीमन कराने के लिये अधिसूचना जारी करने का अधिकार राज्यपाल को है न कि सरकार को, सुनवाई कीअगली तिथि 22 मई को निश्चित
नैनीताल, 14 मई 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश में निकाय चुनावों के मामले में सरकार को बड़ा झटका दिया है। उच्च न्यायालय ने आज अपने महत्वपूर्ण आदेश में निकायों के परिसीमन से संबंधित अधिसूचना को ही ख़ारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि परिसीमन कराने के लिये अधिसूचना जारी करने का अधिकार राज्यपाल को है न कि सरकार को। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि परिसीमन की कार्यवाही लोगों पर थोपी नहीं जा सकती है। मामले की सुनवाई न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ में हुई। हाईकोर्ट के इस फैसले से समस्त निकायों के विस्तारीकरण की प्रक्रिया को धक्का लगा है।
उल्लेखनीय है कि देहरादून, हरिद्वार, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, नैनीताल व उधमसिंह नगर जनपदों के कई दर्जन लोगों ने सरकार के कदम को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से 5 अप्रैल 2018 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गयी थी, जिसमें सरकार ने प्रदेश के 41 नगर निगमों, नगर पालिकाओं व नगर पंचायतों के परिसीमन को हरी झंडी दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 243 क्यू (2) के तहत परिसीमन संबंधी अधिसूचना जारी करने का अधिकार प्रदेश के राज्यपाल को है। सरकार ने बिना राज्यपाल की संस्तुति के ही परिसीमन संबधी अधिसूचना जारी कर दी। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि परिसीमन की कार्यवाही स्थानीय गांवों की सामाजिक स्थिति, जनसंख्या, साख्यिकीय व भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखकर किया जा सकता है जिसको सरकार की ओर से नजरअंदाज किया गया है। ये याचिकायें कोटद्वार के मवाकोट ग्राम सभा के अलावा 35 अन्य ग्राम प्रधानों के साथ साथ कई अन्य जनप्रतिनिधियों व ग्राम प्रधानों की ओर से दायर की गयी थीं।
एकलपीठ ने अपने निर्देश में सरकार के परिसीमन संबंधी अधिसूचना को खारिज कर दिया और कहा कि परिसीमन संबंधी अधिसूचना जारी करने का अधिकार राज्यपाल को बल्कि सरकार को नहीं। पीठ ने यह भी कहा कि परिसीमन की कार्यवाही लोगों पर थोपी नहीं जा सकती है। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग की चुनाव कराने संबंधी याचिका पर भी आज न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ में सुनवाई हुई। पीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 22 मई को निश्चित कर दी है।

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नैनीताल, 4 मई 2018। उत्तराखंड में निकाय चुनावों को लेकर कुहासा नए निकाय बोर्ड गठित होने की समय सीमा निकल जाने, पुरानी निर्वाचित बोर्डों का कार्यकाल कल पूरा होने के बाद आज निकायों के प्रशासकों के हवाले हो जाने के बावजूद अभी भी नहीं छटा है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ से आज बड़ा फैसला आने की संभावना के इतर फैसला नहीं आ पाया। साथ ही बताया गया है कि चुनाव अधिसूचना जारी करने पर लगी रोक भी किसी तरह से नहीं हटी है। साथ ही मामला कम से कम अगले मंगलवार तक के लिए और लटक गया है।
एकलपीठ ने परिसीमन व तय सीमा के भीतर चुनाव कराने सम्बंधित याचिकाओं में सुनवाई करते अगली सुनवाई के लिए 8 अप्रैल की अगली तिथि नियत कर दी। तब तक सरकार को आदेश दिए हैं कि वह अपना जवाब पेश करें, और यह भी कहा है कि चुनाव कार्यक्रम तय कराने के लिए सरकार व चुनाव आयोग आपस में तय करें। दरअसल आज सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि याचिकर्ताओं के द्वारा परिसीमन से सम्बंधित 2012 के नगर पालिका व नगर निगमों के परिसीमन के लिए नियम व शर्तों वाले शासनादेश को चुनौती नहीं दी गयी है। इसके जवाब में याचिकर्ताओं के अधिवक्ताओं का कहना था कि यह शासनादेश उन पर लागू ही नहीं होता है। संविधान के अनुच्छेद 243 क्यू में परिसीमन करने के लिए क्या-क्या नियम व शर्तें होंगी, इसका उल्लेख नहीं है। न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद सरकार से इस सम्बन्ध में जवाब पेश करने को कहा।

उत्तराखंड के नगर निकायों में आरक्षण की अनंतिम स्थिति :

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-याचिकाकर्ता ने कहा राज्यपाल को करनी थी आपत्तियां निस्तारित, सरकार ने नहीं
नैनीताल, 18 अप्रैल 2018। उत्तराखंड के नगर निकायों के परिसीमन का मामला एक बार फिर उत्तराखंड उच्च न्यायालय पहुंच गया है। कोटद्वार के मवाकोट की 35 ग्राम सभाओं की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर कहा है कि उच्च न्यायालय के निर्देश पर डीएम और सरकार ने उनकी आपत्तियां निस्तारित करते हुए 5 अप्रैल 2018 को अधिसूचना जारी कर दी है, जो कि गलत है। याचिका में कहा गया है कि संविधान में स्पष्ट प्रावधान दिया गया है कि इस प्रकार की सभी आपत्तियां राज्यपाल द्वारा निस्तारित की जानी चाहिए थी न कि सरकार के द्वारा। मामले को सुनने के बाद न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ ने राज्य सरकार से आगामी 20 अप्रैल तक इस बारे में स्थिति स्पस्ट करने को कहा है, और इसी तिथि को अगली सुनवाई की तिथि 20 नियत कर दी है।

राज्य सरकार की योजना पर हाईकोर्ट की मुहर

-23 तक परिसीमन का कार्य पूरा कर चुनाव आयोग को रिपोर्ट पेश करे सरकार
नैनीताल, 17 अप्रैल 2018। उत्तराखंड में निकाय चुनाव मामले पर दायर याचिका पर एक तरह से राज्य सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। याचिका में सरकार ने निकायों का परिसीमन 24 अप्रैल तक तथा सीटो पर आरक्षण का कार्य 11 मई तक कर 12 मई को चुनाव आयोग को चुनाव कार्यक्रम सौपने की बात कही थी। इधर मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से एक दिन पूर्व 23 अप्रैल तक परिसीमन का कार्य पूर्ण कर उसकी रिपोर्ट राज्य चुनाव आयोग को देने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद अगली सुनवाई की तिथि 24 अप्रैल को नियत कर दी है।
ज्ञातव्य हो कि राज्य में निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी ना करने पर चुनाव आयोग ने नैनीताल उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर कहा है कि 3 मई से पहले राज्य में निकाय चुनाव कराना संवैधानिक बाध्यता है। लिहाजा इस हेतु राज्य सरकार को निर्देश दिये जाएं।

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साफ़ हो गया है कि उत्तराखंड में 5 मई को नई पालिकाओं का गठन करने की तय सीमा के अंदर निकाय चुनाव नहीं हो पाएंगे। जिस तरह मामला उच्च न्यायलय में ही अटका हुआ है, ऐसे में चुनाव में करीब एक माह का विलम्ब होना साफ़ नजर आ रहा है, और चुनाव जून माह से पहले हो पाएंगे, इसकी उम्मीद कम है। राज्य सरकार की ओर से चुनाव आयोग के अधिवक्ता सजंय भट्ट को जवाब देते हुए कहा है कि सरकार निकायों का परिसीमन 24 अप्रैल तक व सीटों पर आरक्षण का कार्य 11 मई तक करके 12 मई को चुनाव आयोग को चुनाव कार्यक्रम सौप देंगे।

वहीं राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार तय चुनाव कार्यक्रम के अनुसार राज्य सरकार ने 9 मार्च को चुनाव कार्यक्रम तय कर 19 मार्च को मतदाता सूची जारी कर 2-3 अप्रैल को चुनाव आयोग व सभी जिला अधिकारियो को चुनाव की अधिसूचना जारी करनी थी। राज्य में यह पहली बार है जब निकाय चुनाव कराने के लिए राज्य निर्वाचान आयोग ने न्यायालय की शरण ली है।

उत्तराखंड सरकार का नगर निकायों के परिसीमन का शासनादेश निरस्त, नए सिरे से 2 दिन के भीतर फिर से शुरू होगी प्रक्रिया

  • दो दिन के भीतर नया शासनादेश जारी कर समाचार पत्रों में छपवाने के भी दिए आदेश 
  • एक सप्ताह के भीतर संबंधित ग्राम सभाओं से आपत्तियां लेने व अगले एक सप्ताह में आपत्तियों का निस्तारण करने के दिये आदेश
  • इस प्रकार करीब पखवाड़े भर लटकी प्रदेश में निकाय चुनाव की प्रक्रिया
नैनीताल, 09 मार्च 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश के विभिन्न नगर निकायों के नए परिसीमन करने के लिए किये गये सभी शासनादेशों को निरस्त कर दिया है। अलबत्ता, शासनादेश की प्रक्रिया नये सिरे से अगले दो दिन के भीतर ही शुरू हो जाएगी। न्यायालय ने सरकार को 48 घंटे के भीतर नया शासनादेश जारी कर समाचार पत्रों में प्रकाशित करने उसमें सभी ग्राम सभाओं से एक सप्ताह के भीतर आपत्ति मांगने और उन आपत्तियों पर एक सप्ताह के भीतर सुनवाई करने के निर्देश दिये हैं। इसके साथ ही न्यायालय ने इस संबंध में दायर सभी याचिकाओं को निस्तारित कर दिया है। इस प्रकार राज्य में 4 मई से पहले निकाय चुनावों की प्रक्रिया पूरी करने की बाध्यता के बीच करीब एक पखवाड़े की अतिरिक्त प्रक्रिया अपनाने का कार्य बढ़ गया है।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने शुक्रवार को नगर पालिका और नगर निगमों के विस्तार को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओ पर एक साथ सुनवाई करते हुए सरकार द्वारा जारी समस्त शासनादेशों को निरस्त करते हुए सरकार से 48 घंटे के अंदर नए शासनादेश जारी कर उसे समाचार पत्रो में प्रकाशित करने को कहा। साथ ही यह भी कहा कि इस पर ग्राम सभाओ से एक सप्ताह के भीतर आपत्ति मांगंे और इन आपतियों पर एक सप्ताह में सुनवाई करे। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व बृहस्पतिवार को न्यायालय ने महाधिवक्ता से पूछा था कि सरकार ने निकायों का परिसीमन करते वक्त याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का मौका क्यों नही दिया। इस पर महाधिवक्ता ने शुक्रवार को स्थिति स्पष्ट करते हुए अवगत कराया कि सरकार सुनवाई का मौका देना चाहती है। न्यायालय सरकार द्वारा आपत्तियां मांगने व उनका निस्तारण करने से संबंधित प्रक्रिया से संतुष्ठ नहीं हुआ। गौरतलब है कि मामले में भवाली के संजय जोशी, हल्द्वानी के भोला दत्त भट्ट, ग्राम पंचायत बाबूगढ़, संघर्ष समिति कोटद्वार, पिथौरागढ़ के दौला बस्ते नेडा, धनोरा, टिहरी व चम्बा सहित लगभग 39 गांवों के 12 दर्जन से अधिक ग्रामीण याचिकर्ताआंे का मुख्य आरोप था कि सरकार ने परिसीमन करते वक्त उनको सुनवाई का मौका नही दिया, और विभिन्न अधिसूचनाएं जारी कर राज्य के कई गांवों का परिसीमन करके उनको नगर पालिका और नगर निगमों में शामिल किया जा रहा है, तथा ग्राम प्रधानों पर बस्ते जमा करने का दबाब भी डाला जा रहा है। पूर्व में कोर्ट ने इस सम्बंध में सरकार को यथास्थिति बनाये रखने के आदेश दिए थे।

यह भी पढ़ें : पिछली सरकार का सेलाकुई को नगर पंचायत में शामिल करने का नोटिफिकेशन निरस्त

नैनीताल, 23 फ़रवरी 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पिछली सरकार के देहरादून के सेलाकुई को नगर पंचायत में शामिल करने से सबंधित 24 नवम्बर 2015 के नोटिफिकेशन को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को छः सप्ताह के भीतर आम जनता को सुनवाई का मौका देने के निर्देश दिये हैं। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई की।

मामले के अनुसार सेंट्रल होम टाउन सेलाकुई की ग्राम प्रधान व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि सरकार द्वारा 24 नवम्बर 2015 को सरकार ने नोटिफिकेशन में सेलाकुई कस्बे से लगी ग्राम पंचायतों को शामिल कर नगर पंचायत बना दिया गया था। सेंट्रल होम टाउन सेलाकुई की ग्राम प्रधान व अन्य ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि सेंटल होम टाउन ग्राम सभा के लोगों को नियमानुसार बिना सुनवाई का मौका दिये नगर पंचायत में शामिल करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद सरकार के नोटिफिकेशन को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को छः सप्ताह में याचिकर्ताओ को सुनवाई का अवसर देने को कहा है।

नैनीताल नगर पालिका में अध्यक्ष पद के लिए सामान्य महिला के लिए हो सकता है आरक्षण 

नैनीताल नगर पालिका के चुनाव के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते खटीमा विधायक पुष्कर धामी

-भाजपा में महिला उम्मीदवारों की भरमार होने से लगाये जा रहे हैं कयास 
नैनीताल। देश की ऐतिहासिक तौर पर दूसरी जिला व मंडल मुख्यालय की प्रतिष्ठित नगर पालिका में संभव है कि आरक्षण महिला उम्मीदवार के पक्ष में आये। ऐसे संकेत बृहस्पतिवार को भाजपा के तीन सदस्यीय पर्यवेक्षक मंडल के समक्ष महिला उम्मीदवारों की ओर से सर्वाधिक दावेदारी होने से यह निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। अध्यक्ष पद के लिए सर्वाधिक 8 उम्मीदवारों ने दावेदारी पेश की है, वहीं महिला एससी व ओबीसी के लिए सीट आरक्षित होने की स्थिति में एक-एक उम्मीदवार ने ही अपनी दावेदारी पेश की है।
बृहस्पतिवार को भाजपा के नगर निकाय चुनावों के लिए पर्यवेक्षक खटीमा विधायक पुष्कर धामी, राजकुमारी गिरि व सुरेश परिहार में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक ली, और उन्हें निकाय चुनावों में पार्टी प्रत्याशी की जीत के लिए उपयोगी टिप्स दिये, साथ ही आगे क्लब के एक कक्ष में संभावित उम्मीदवारों से दावेदारी करने को कहा तथा उनके बारे में उनसे स्वयं तथा अन्य कार्यकर्ताओं से दावेदारी की परख की। बताया गया कि सीट महिला के लिए आरक्षित होने की स्थिति के लिए कुमाऊं विवि के छात्र नेता रहे विमल चौधरी की धर्मपत्नी वंदना चौधरी, पूर्व दायित्वधारी शांति मेहरा, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष जीवंती भट्ट के साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी में रही रीना मेहरा, तुलसी कठायत, ज्योति ढोंढियाल व सभासद सपना बिष्ट के अलावा महिला एससी आरक्षण होने की स्थिति में आशा आर्या ने दावेदारी की है। वहीं अनारक्षित रहने की स्थिति के लिए प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य गोपाल रावत, कुमाऊं विवि कार्यपरिषद सदस्य अरविंद पडियार, पूर्व जिला महामंत्री दयाकिशन पोखरिया तथा दोनों नगर महामंत्री भानु पंत व कुंदन बिष्ट ने, अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने की स्थिति के लिए पूर्व सभासद प्रेम सागर व अतुल पाल तथा ओबीसी के लिए आरक्षण की स्थिति के लिए रईश खान ने दावेदारी पेश की है। इस मौके पर विधायक संजीव आर्य भी मौजूद रहे।

सभासद पद के लिए टिकट नहीं देगी भाजपा !

नैनीताल। भाजपा के पर्यवेक्षक मंडल ने सभासद पद के लिए दावेदारों की थाह नहीं ली। इस आधार पर माना जा रहा है कि भाजपा पिछले बुरे अनुभवों को देखते हुए इस बार सभासद पद के लिए टिकट नहीं देगी। इस बारे में पर्यवेक्षक मंडल की अगुवाई कर रहे विधायक धामी ने कहा कि अध्यक्ष पद के लिए 20 से अधिक लोगों के द्वारा दावेदारी की गयी है। अलबत्ता सभासद पद के लिए दावेदारी नहीं ली गयी है। इस बारे में कोई निर्णय पार्टी हाईकमान करेगा।

यह भी पढ़ें : 11 तक टला उत्तराखंड में निकाय चुनाव पर फैसला, एक-दो दिन में ही आरक्षण की स्थिति साफ़ कर सकती है

उत्तराखंड में निकाय चुनाव को लेकर फैसला 11 अप्रैल तक टल गया है।  उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग की इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से 11 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने के आदेश पारित किए हैं, और इसी दिन सुनवाई नियत कर दी है।

उल्लेखनीय है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने एक दिन पूर्व याचिका दायर करराज्य में जल्द चुनाव कराने की मांग की गई है। याचिका में कहा था कि राज्य के 2013 में गठित निकाय बोर्डों की बैठक चार मई को हुई थी। संविधान के अनुच्छेद 243-य के तहत राज्य में तीन मई तक निकायों का बोर्ड गठन होना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार भी यदि सरकार नियत समय में चुनाव नहीं कराती तो आयोग कोर्ट जा सकता है। साथ ही बताया कि चुनाव को लेकर आयोग द्वारा मुख्य सचिव, शहरी विकास सचिव को आधिकारिक पत्र भेजे गए, मगर अब तक सरकार द्वारा चुनाव कार्यक्रम उपलब्ध नहीं कराया गया।

अलबत्ता इधर बताया जा रहा है कि सरकार एक-दो दिन में ही निकायों में आरक्षण की स्थिति घोषित कर सकती है।

यह भी पढ़ें : 30 को हो सकते हैं उत्तराखंड में नगर निकाय चुनाव

उत्तराखंड में निकाय चुनाव इसी माह 30 अप्रैल को हो सकते हैं। राज्य सरकार ने इस बारे में खाका लगभग तय कर लिया है। हालांकि राज्य निर्वाचन विभाग 27 को मतदान व 30 को मतगणना कराने का पक्षधर बताया गया है। सूत्रों के अनुसार अगले 2-3 दिन में निकायों के सीमा विस्तार का अंतिम नोटिफिकेशन जारी हो सकता है। इसके एक सप्ताह के अंदर आपत्तियों का निस्तारण कर चुनाव की प्रक्रिया अप्रैल के पहले पखवाड़े ही शुरू हो सकती है। उच्च न्यायालय से यदि इस अवधि तक किसी निकाय पर कार्रवाई पूरी नहीं हो पाती है तो केवल वहीं चुनाव टाले भी जा सकते हैं। प्रदेश के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने भी कह दिया है कि चुनाव तय समय से पहले करा लिये जाएंगे और सरकार चुनाव के लिये तैयार है।

चुनावों के लिए यह है भाजपा-कांग्रेस की रणनीति

आसन्न निकाय चुनावों के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों रणनीति बनाने में जुट गए हैं। नैनीताल में बृहस्पतिवार को भाजपा-कांग्रेस दोनों पार्टियों की अलग-अलग हुई बैठकों में दोनों की रणनीतियों का कुछ यूं खुलासा हुआ….

वार्डों में टिकट नहीं देगी पर प्रत्याशी लड़ाएगी कांग्रेस !

नैनीताल क्लब में कांग्रेस पार्टी की बैठक में उपस्थित सरिता आर्य व अन्य कांग्रेसी।

-वार्डवार प्रत्याशियों से दावेदारी पेश करने को कहा
नैनीताल। राज्य की विपक्षी कांग्रेस पार्टी आसन्न निकाय चुनावों के लिए अध्यक्ष पद पर तो चुनाव पार्टी सिंबल पर हड़ेगी ही, अलबत्ता वार्डों में सभासद पदों पर टिकट देना तय नहीं है, लेकिन वार्डों में भी अपनी प्रत्याशी लड़ाए जाएंगे। यह बात बृहस्पतिवार को नैनीताल क्लब में हुई बैठक के बाद महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व विधायक व पालिकाध्यक्ष सरिता आर्य ने कही। इस दौरान अध्यक्ष पद के लिए नगर कांग्रेस अध्यक्ष मारुति नंदन साह, महिला कांग्रेस व अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की गजाला कमाल तथा पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सचिन नेगी व अनुपम कबडवाल की ओर से दावेदारी पेश की गयी। बैठक में अध्यक्ष तथा सभी वार्डों के लिए वार्डवार दावेदारी पेश करने को कहा गया। दावेदारों को वार्डों की चुनाव से संबंधित कुछ जिम्मेदारियां देने की भी बात हुई, पर अधिकांश सदस्य जिम्मेदारी से बचते व दूसरों पर टालते भी नजर आए। बैठक में नगर अध्यक्ष मारुति साह, डा. हरीश बिष्ट, योगेश बिष्ट, राजेंद्र मनराल, जेके शर्मा, गोपाल बिष्ट, कृष्णा साह, रेखा, आशा, अनीता वर्मा, देवकी प्रसाद, सचिन नेगी, कैलाश मिश्रा, त्रिभुवन फर्त्याल, डीडी रुवाली, शंकर जोशी, गजाला कमाल व सभासद केलाश अधिकारी सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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