नवीन समाचार, देहरादून/नैनीताल, 25 अगस्त 2026 (Teachers Hopeful Regarding TET Mandate)। उत्तराखंड (UTTARAKHAND) में शिक्षकों की पदोन्नति (Promotion) और सेवा संबंधी मामलों में टीईटी (TET) की अनिवार्यता को लेकर चल रहे विरोध के बीच सरकार की पहल से शिक्षकों को राहत की उम्मीद जगी है।
कार्मिक सचिव (Personnel Secretary) शैलेश बगौली (Shailesh Bagauli) की अध्यक्षता में सचिवालय (Secretariat) में शिक्षक और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ हुई पहली उच्चस्तरीय बैठक में वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी (TET) से छूट देने और पदोन्नति (Promotion) में इसकी बाध्यता समाप्त करने सहित विभिन्न मांगें रखी गईं। सरकार ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले का विधिक परीक्षण (Legal Examination) कर शिक्षकों के हित में व्यावहारिक रास्ता निकालने का आश्वासन दिया है।

बैठक में राजकीय शिक्षक संघ (Government Teachers Association), जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ (Junior High School Teachers Association), पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ (Upper Primary Teachers Association), अतिथि शिक्षक संघ (Guest Teachers Association) और अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ (Non-Government Secondary Teachers Association) सहित उच्च शिक्षा (Higher Education), कृषि (Agriculture), आयुष (AYUSH), चिकित्सा शिक्षा (Medical Education), तकनीकी शिक्षा (Technical Education) और संस्कृत शिक्षा (Sanskrit Education) से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगें रखीं। लंबे समय से टीईटी (TET) की बाध्यता को लेकर चल रहे असमंजस और विरोध के बीच सरकार की ओर से विधिक राय (Legal Opinion) लेकर समाधान तलाशने के भरोसे को शिक्षक संगठनों के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
पदोन्नति में टीईटी (TET) और पुराने शिक्षकों की छूट बनी प्रमुख मांग
शिक्षक संगठनों ने सरकार के सामने मुख्य रूप से वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी (TET) की अनिवार्यता से मुक्त रखने और पदोन्नति (Promotion) में टीईटी (TET) की बाध्यता पूरी तरह समाप्त करने की मांग रखी। इसके अलावा अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण (Transfer) में काउंसलिंग (Counselling) को अनिवार्य करने की मांग भी उठाई गई।
राजकीय शिक्षक संघ (Government Teachers Association) की ओर से एलटी (LT) संवर्ग के शिक्षकों पर टीईटी (TET) की बाध्यता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। शिक्षकों का तर्क है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए अब नई परीक्षा की बाध्यता लागू करना व्यावहारिक नहीं है और इससे उनकी पदोन्नति (Promotion) तथा भविष्य की सेवा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
एलटी (LT) शिक्षकों ने भी जताया विरोध
इधर इसी मुद्दे को लेकर रामनगर (Ramnagar) के राजकीय इंटर कॉलेज (Government Inter College) ढेला में राजकीय शिक्षक संघ (Government Teachers Association) की बैठक हुई। बैठक में 2014 से पहले नियुक्त एलटी (LT) शिक्षकों को टीईटी (TET) की बाध्यता से मुक्त रखने की मांग की गई।
संघ के पूर्व मंडलीय मंत्री नवेंदु मठपाल (Navendu Mathpal) ने टीईटी (TET) अनिवार्यता को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अब परीक्षा की तैयारी के लिए बाध्य करना उचित नहीं है। उनका तर्क था कि एलटी (LT) माध्यमिक संवर्ग (Secondary Cadre) से संबंधित है, जबकि टीईटी-2 (TET-2) प्रारंभिक स्तर (Elementary Level) की आवश्यकताओं से जुड़ा है।
पूर्व ब्लॉक उपाध्यक्ष बालकृष्ण चंद (Balakrishna Chand) ने कहा कि वर्षों की निष्ठापूर्ण सेवा को एक परीक्षा के परिणाम से जोड़ना शिक्षकों की आजीविका और सम्मान के लिए संकट पैदा कर सकता है। कर्मचारी शिक्षक संगठन के जिला उपाध्यक्ष सुभाष गोला (Subhash Gola) ने भी 2014 से पहले नियुक्त एलटी (LT) शिक्षकों को इस बाध्यता से मुक्त रखने की मांग की।
शिक्षकों के अनुसार एलटी (LT) संवर्ग पर टीईटी (TET) की बाध्यता मुख्य रूप से 2014 के नियमावली संशोधन (Rule Amendment) और उसके बाद की व्याख्या का परिणाम है। उनका कहना है कि यदि एलटी (LT) शिक्षकों को कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है तो उसके लिए अलग योग्यता निर्धारित की जानी चाहिए, न कि पूरे एलटी (LT) संवर्ग पर एक समान टीईटी (TET) बाध्यता लागू की जाए।
बैठक में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की माध्यमिक शिक्षण व्यवस्था (Secondary Education System) का उदाहरण भी दिया गया। शिक्षकों ने मांग की कि उत्तराखंड में एलटी (LT) शिक्षकों की वास्तविक जिम्मेदारियों और विषय-विशेषज्ञता को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान निकाला जाए।
अतिथि शिक्षकों और विश्वविद्यालय कर्मचारियों ने भी रखीं मांगें
बैठक में अतिथि शिक्षकों (Guest Teachers) ने मानदेय बढ़ाने, अवकाश अवधि में मानदेय का भुगतान करने, उनके नियुक्ति वाले पदों को सुरक्षित रखने तथा उपनल (UPNL) कर्मचारियों की तर्ज पर समान वेतन और नियमितीकरण (Regularisation) का लाभ देने की मांग उठाई।
उत्तराखंड विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ (Uttarakhand University Employees Federation) के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण रौतेला (Dr. Lakshman Rautela) और महामंत्री प्रशांत मेहता (Prashant Mehta) ने राजकीय विश्वविद्यालयों (State Universities) में रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया (Recruitment Process) शुरू करने की मांग रखी।
बैठक में मनोज जोशी (Manoj Joshi), महेंद्र आर्य (Mahendra Arya), शैलेंद्र भट्ट (Shailendra Bhatt), दिनेश निखुरपा (Dinesh Nikhurpa), जया बाफिला (Jaya Bafila), उषा पवार (Usha Pawar), नरेश कुमार (Naresh Kumar), संजीव कुमार (Sanjeev Kumar), प्रदीप शर्मा (Pradeep Sharma) और वसुधा यादव (Vasudha Yadav) सहित कई शिक्षक मौजूद रहे।
अब सरकार की ओर से विधिक राय (Legal Opinion) लिए जाने के बाद यह स्पष्ट होगा कि टीईटी (TET) की अनिवार्यता में किन शिक्षकों को छूट दी जा सकती है और पदोन्नति (Promotion) के मामले में क्या व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जा सकती है। फिलहाल सरकार का आश्वासन शिक्षक संगठनों के लिए उम्मीद की किरण बना है, लेकिन अंतिम राहत विधिक परीक्षण (Legal Examination) और उसके आधार पर होने वाले शासन स्तर के निर्णय पर निर्भर करेगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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