नवीन समाचार, देहरादून, 26 अगस्त 2026 (Uttarakhand Election 2027-Nainital)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में अगले वर्ष प्रस्तावित विधानसभा चुनाव (Assembly Election) में अब लगभग छह माह का समय शेष रहते राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। ‘नवीन समाचार’ पर प्रकाशित ‘वोट वाइव’ (Vote Vibe) के ताजा सर्वेक्षण (Survey) में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party-BJP) को कांग्रेस (Congress) से लगभग चार प्रतिशत मतदाताओं की पसंद के अंतर से आगे बताया गया है, लेकिन वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों की तुलना में यह अंतर घटता दिखाई देता है। देखें ‘वोट वाइव’ का सर्वे :
सर्वेक्षण में सामने आया विधायकों के कामकाज से जुड़ा आंकड़ा इससे भी अधिक महत्वपूर्ण है, जिसमें केवल 15.3 प्रतिशत मतदाता अपने विधायक से पूर्णतः संतुष्ट और 11.8 प्रतिशत संतुष्ट हैं, जबकि 36.6 प्रतिशत असंतुष्ट तथा 11.4 प्रतिशत पूर्णतः असंतुष्ट हैं। आप यह पूर्व संबंधित समाचार भी जरूर पढ़ना चाहेंगे : नवीन समाचार इक्स्क्लूसिव : उत्तराखंड में भाजपा को बढ़त, लेकिन कांग्रेस मुकाबले में; धामी सबसे पसंदीदा मुख्यमंत्री, 52.5% मतदाताओं ने अभी से तय कर लिया है वोट
प्राप्त जानकारी के अनुसार ‘वोट वाइव’ (Vote Vibe) के सर्वेक्षण में वर्तमान राजनीतिक स्थिति और विधायकों के प्रति मतदाताओं की धारणा से जुड़े आंकड़े सामने आये हैं। सर्वेक्षण के अनुसार 19.3 प्रतिशत मतदाता अपने विधायक के कार्य-प्रदर्शन को ठीक-ठाक मानते हैं, जबकि 5.6 प्रतिशत मतदाता इस प्रश्न पर कुछ कह नहीं सके। इन आंकड़ों ने राजनीतिक दलों के भीतर संभावित प्रत्याशियों को लेकर गतिविधियां बढ़ाने और मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन पर नए सिरे से चर्चा का अवसर दिया है।
भाजपा आगे, लेकिन घटता मतांतर कांग्रेस के लिए उम्मीद का आधार
सर्वेक्षण में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कांग्रेस (Congress) से लगभग चार प्रतिशत अधिक मतदाताओं की पसंद बताया गया है। यह स्थिति वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों के आंकड़ों से अलग दिखाई देती है। उपलब्ध चुनावी संदर्भ के अनुसार वर्ष 2017 में भाजपा को कांग्रेस से लगभग 13.14 प्रतिशत अधिक मत मिले थे, जबकि वर्ष 2022 के चुनाव में यह अंतर 6.48 प्रतिशत रह गया था। विदित हो कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में
- भाजपा (BJP) का वोट शेयर: 46.98%
- कांग्रेस (INC) का वोट शेयर: 33.84%
- भाजपा (BJP) का वोट शेयर: 44.74%
- कांग्रेस (INC) का vote share: 38.26% रहा था।
इस लिहाज से ताजा सर्वेक्षण में लगभग चार प्रतिशत का अंतर भाजपा के लिए अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती और कांग्रेस के लिए वापसी की संभावना दोनों को सामने रखता है। हालांकि सर्वेक्षण के आंकड़े चुनाव परिणाम नहीं हैं और वास्तविक परिणाम मतदान, प्रत्याशियों, स्थानीय समीकरणों तथा चुनाव के समय बनने वाले राजनीतिक माहौल पर निर्भर करेंगे।
70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा (Uttarakhand Legislative Assembly) में वर्तमान में भाजपा के 47 विधायक, कांग्रेस के 19 विधायक तथा बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party-BSP) और निर्दलीय के दो-दो विधायक हैं। इसलिए विधायकों के प्रति असंतोष का स्तर सत्तारूढ़ भाजपा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसके पास सबसे अधिक विधानसभा क्षेत्र हैं और संभावित सत्ता-विरोधी रुझान (Anti-Incumbency) का सीधा असर उसके मौजूदा विधायकों पर पड़ सकता है।
विधायकों के लिए सर्वे का सबसे बड़ा संकेत क्या है
वोट वाइव सर्वेक्षण के अनुसार केवल 15.3 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने विधायक के काम से पूर्णतः संतुष्ट होने की बात कही। 11.8 प्रतिशत ने स्वयं को संतुष्ट बताया। दोनों वर्गों को जोड़ने पर भी यह आंकड़ा 27.1 प्रतिशत ही होता है।
इसके विपरीत 36.6 प्रतिशत मतदाता विधायक से असंतुष्ट और 11.4 प्रतिशत पूर्णतः असंतुष्ट हैं। दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर 48 प्रतिशत मतदाता असंतोष की श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा 19.3 प्रतिशत मतदाता विधायक के कामकाज को ठीक-ठाक मानते हैं और 5.6 प्रतिशत मतदाता अपनी राय स्पष्ट नहीं कर सके।
यह आंकड़ा मौजूदा विधायकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा चुनाव में पार्टी की प्रदेश स्तरीय लोकप्रियता के साथ स्थानीय विधायक की छवि भी मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि सर्वेक्षण के बाद संभावित प्रत्याशियों की गतिविधियां और सार्वजनिक संपर्क बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
नैनीताल में सरिता आर्य के सामने पुराने समीकरण और नये दावेदार
नैनीताल विधानसभा (Nainital Assembly Constituency) में वर्तमान विधायक सरिता आर्य (Sarita Arya) भाजपा की ओर से प्रमुख दावेदार हैं। सरिता आर्य इससे पहले कांग्रेस की ओर से नैनीताल नगर पालिका की अध्यक्ष और विधायक रह चुकी हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था और भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर वर्ष 2017 की हार का हिसाब बराबर किया था।
वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में संजीव आर्य (Sanjeev Arya) ने 30,036 मत प्राप्त कर कांग्रेस प्रत्याशी सरिता आर्य को 22,789 मतों के मुकाबले 7,247 मतों से हराया था। जबकि वर्ष 2022 में सरिता आर्य ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में 31,770 मत प्राप्त किये और कांग्रेस प्रत्याशी संजीव आर्य को 23,889 मत मिले। इस तरह सरिता आर्य ने 7,881 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।
हालांकि गत वर्ष हुए जिला पंचायत चुनाव (District Panchayat Election) में सरिता आर्य अपने पुत्र को चुनाव नहीं जिता पायीं। इस परिणाम के बाद नैनीताल विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक पकड़ और आगामी चुनाव की संभावनाओं को लेकर प्रश्न उठने लगे हैं। यह स्थानीय चुनाव परिणाम विधानसभा चुनाव के लिए सीधा संकेत नहीं है, लेकिन राजनीतिक चर्चाओं में इसका उल्लेख हो रहा है।
कांग्रेस में संजीव आर्य के इनकार से बढ़ी प्रत्याशी की तलाश
वोट वाइव सर्वेक्षण के बाद ‘नवीन समाचार’ से संपर्क करने वाले भाजपा और कांग्रेस से जुड़े कई नेताओं ने स्वयं को संभावित प्रत्याशी के रूप में सामने रखा। वहीं आम जनता और राजनीतिक जानकारों के बीच भी संभावित प्रत्याशियों के नामों को लेकर चर्चा तेज हुई है।
नैनीताल में कांग्रेस के सामने इस बार प्रत्याशी चयन की चुनौती अधिक दिखाई दे रही है। पूर्व प्रत्याशी संजीव आर्य नैनीताल से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने से इनकार कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी के सामने मजबूत प्रत्याशी तलाशने का प्रश्न खड़ा है। पार्टी से जुड़े दो युवा नेताओं के त्योहारों की बधाई वाले पोस्टर भी नगर में दिखाई दे रहे हैं, हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच इनके नामों को लेकर अभी स्पष्ट सहमति व गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है।
नैनीताल के पूर्व पालिकाध्यक्ष संजय कुमार ‘संजू’ (Sanjay Kumar Sanju) भी कांग्रेस से टिकट के दावेदार बताए जा रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से जुड़ी चर्चाओं में यह संभावना भी व्यक्त की जा रही है कि टिकट नहीं मिलने से नाराज कोई भाजपा नेता कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में सामने आ सकता है। नैनीताल विधानसभा में पिछले दो चुनावों के दौरान दल बदलकर प्रत्याशी बनने की स्थिति पहले भी देखने को मिली है।
भाजपा में भी कई नाम, मोहन पाल की चर्चा ने बढ़ाई प्रतिस्पर्धा
भाजपा में वर्तमान विधायक सरिता आर्य के साथ दायित्वधारी दिनेश आर्य (Dinesh Arya) का नाम भी संभावित प्रत्याशी के रूप में चर्चा में है। इसके अलावा भीमताल के पूर्व ब्लॉक प्रमुख और भाजपा नेता अंबा दत्त आर्य (Amba Dutt Arya), पूर्व में टिकट के दावेदार रहे हेम आर्य (Hem Arya) तथा प्रकाश आर्य (Prakash Arya) के नाम भी टिकट की दौड़ में बताए जा रहे हैं।
इन नामों के बीच भाजपा अनुसूचित मोर्चा (Scheduled Morcha) के पूर्व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और वर्तमान प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मोहन पाल (Mohan Pal) का नाम भी नैनीताल विधानसभा सीट की राजनीतिक चर्चाओं में उभर रहा है। इनके समर्थकों के अनुसार प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं तक पहुंच तथा चुनावी माहौल बनाने की क्षमता उन्हें अन्य दावेदारों से अलग स्थिति दे सकती है। इसी कारण आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा का संभावित ‘एक्स फैक्टर’ (X-Factor) भी बताया जा रहा है।
हालांकि भाजपा या कांग्रेस ने नैनीताल विधानसभा क्षेत्र के लिए अभी किसी प्रत्याशी की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए वर्तमान में सामने आ रहे सभी नाम संभावित दावेदारों और राजनीतिक चर्चाओं के स्तर पर ही हैं।
छह माह पहले ही क्यों बढ़ी टिकट की हलचल
विधानसभा चुनाव में अभी लगभग छह माह का समय शेष है, लेकिन सर्वेक्षण में सामने आये आंकड़ों ने राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों के लिए चुनावी तैयारी को गति दे दी है। भाजपा के लिए चुनौती केवल राज्य स्तर पर अपनी बढ़त बनाए रखना नहीं बल्कि मौजूदा विधायकों के प्रति मतदाताओं की संतुष्टि बढ़ाना भी होगी। कांग्रेस के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच घटते मतांतर को अपने पक्ष में बदलने के लिए मजबूत स्थानीय प्रत्याशियों का चयन महत्वपूर्ण हो सकता है।
नैनीताल जैसी सीटों पर यह मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो सकता है, जहां पिछले दो विधानसभा चुनावों में प्रमुख प्रत्याशियों के दल बदलने से राजनीतिक समीकरण बदले हैं। अब प्रश्न यह है कि क्या मौजूदा विधायक अपने क्षेत्र में मतदाताओं की संतुष्टि बढ़ाकर सर्वेक्षण में सामने आये असंतोष को कम कर पायेंगे और क्या कांग्रेस मजबूत प्रत्याशी उतारकर घटते मतांतर को वास्तविक चुनावी बढ़त में बदल पायेगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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