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इस पाठ्यक्रम के लिए जापान से भी प्रतिभागी पहुंच गये, पर नहीं पहुँच पाए तो उत्तराखंड से…

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  • एफटीआईआई के 23 दिवसीय स्क्रीन एक्टिंग फाउंडेशन कोर्स में पहुंचे 9 राज्यों के प्रतिभागी

नैनीताल, 6 अगस्त 2018। कुमाऊं मंडल मुख्यालय में सोमवार को एफटीआईआई यानी फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान पुणे के तत्वावधान में स्थानीय हिमासीफ के तत्वावधान में आगामी 28 अगस्त तक चलने वाले 23 दिवसीय स्क्रीन एक्टिंग फाउंडेशन कोर्स प्रारंभ हो गया। इस पाठ्यक्रम में देश भर के 9 राज्यों के 1 छात्रा सहित कुल 11 प्रतिभागी पहुंचे हैं। पाठ्यक्रम में एक मूलतः राजस्थान निवासी प्रतिभागी देवांश मदान वास्तव में जापान से यहां पहुंचे हैं, परन्तु पाठ्यक्रम में उपलब्ध 24 में से 13 सीटें खाली रह जाने के बावजूद मेजबान राज्य उत्तराखंड से एक भी प्रतिभागी इस पाठ्यक्रम में प्रतिभाग नहीं कर रहा है। इस पर आयोजकों में भी नाराजगी स्पष्ट दिखाई दी। हिमासीफ की शालिनी साह ने कहा कि नैनीताल में यह पाठ्यक्रम इसलिये आयोजित कराया गया, ताकि यहां के बच्चों को भी इसका लाभ मिले। वहीं एफटीआईआई से आये प्रशिक्षकों ने भी इस पर अफसोस जताया। लेकिन इसे पाठ्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों के लिए सुखद बताया कि उन्हें सीखने के लिए अधिक समय मिल पायेगा। कम प्रतिभागियों के आने का एक कारण पाठ्यक्रम की फीस काफी अधिक (₹ 25,000) होना भी बताया जा रहा है।

नगर के रॉयल होटल में सोमवार सुबह पाठ्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। नगर की सामाजिक कार्यकत्री गीता साह ने सभी उपस्थित गणमान्य जनों एवं प्रतिभागियों को स्वयं परंपरागत रंग्वाली पिछौड़ा के परिधाम में आकर व परंपरागत तरीके से शंख-घंटे बजाकर व ‘पिठ्यां-अक्षत’ लगाकर स्वागत किया। एफटीआईआई पुणे के टीवी विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाठक व प्रशिक्षक सिद्धार्थ शास्ता ने कहा कि उत्तराखंड मूल के एफटीआईआई के निदेशक भूपेंद्र कैंथोला की संस्थान में सीमित सीटों के बावजूद देश भर के प्रतिभाशाली युवाओं को एफटीआईआई की सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस तरह के पाठ्यक्रम देश भर में कराये जा रहे हैं। युगमंच संस्था के अध्यक्ष जहूर आलम ने कला व थियेटर की नगरी के रूप में सरोवरनगरी की कला यात्रा का विवरण प्रस्तुत किया। शालिनी साह ने प्रतिभागियों को अच्छे अभिनय कॅरियर के लिए पढ़ने के महत्व को रेखांकित किया। संचालन हेमंत बिष्ट ने किया। इस मौके पर राजेश साह, सुदर्शन साह, नवीन जोशी, राजेश आर्य, मुकेश धस्माना सहित दिल्ली से स्पर्श राणा व मालविका महल, राजस्थान से देवांश मदान, पुणे महाराष्ट्र से मेघराज मल्लीनाथ शेट्टी व विशाल राउत, यूपी से यतेंद्र सोलंकी, गुरुग्राम हरियाणा से हर्ष कपूर, कोलकाता से बिक्रम सिखर रॉय, जम्मू-कश्मीर से लव गुप्ता, केरल से एस सेबेस्टियन व मध्यप्रदेश से आशुतोष ऋषि प्रतिभागी के तौर पर मौजूद रहे।

पूर्व समाचार : केरल सहित 10 राज्यों के 85 प्रतिभागियों ने नैनीताल में किया फिल्म एप्रीशिएशन कोर्स 

बेला नेगी

-15 अप्रैल तक हुआ एफटीआईआई पुणे का फिल्म एप्रीशिएशन कोर्स, एफटीआईआई की राज्य की ही ट्रेनर बेला नेगी व सुखमय सेन गुप्ता ने प्रतिभागियों को दिये फिल्म निर्माण से संबंधित शुरुआती टिप्स
नैनीताल। नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय के हरमिटेज परिसर में एफटीआईआई पुणे के तत्वावधान में 5 दिन का फिल्म एप्रीशिएशन कोर्स बुधवार को प्रारंभ हुआ। खास बात यह रही कि इस प्रतिष्ठित पाठ्यक्रम में उत्तराखंड ही नहीं सुदूर केरल के साथ ही राजस्थान गुजरात, मध्य प्रदेश व यूपी सहित 10 राज्यों के 85 प्रतिभागी शामिल हुए। इन प्रतिभागियों में फिल्मों से जुड़े व जुड़ने के इच्छुक युवा व किशोरों से लेकर उम्रदराज 71 पुरुष एवं 14 महिलाएं भी शामिल हैं। आगामी 15 अप्रैल तक चलने वाले इस पाठ्यक्रम में एफटीआईआई की उत्तराखंड मूल की ट्रेनर चर्चित उत्तराखंडी फिल्म ‘दांये या बांये’ की निर्देशक बेला नेगी व सुखमय सेनगुप्ता ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया।
कुविवि के हरमिटेज परिसर में बुधवार को शुरु हुए इस पाठ्यक्रम के तहत पहले दिन सुश्री नेगी व सेनगुप्ता ने प्रतिभागियों को फिल्म निर्माण से संबंधित शुरुआती टिप्स दिये। बताया कि फिल्म निर्माण का मूलभूत तत्व दृश्य हैं। दृश्यों, चित्रों को देखने का सबका अलग-अलग नजरिया होता है। फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों को इन दृश्यों के जरिये अपने विषय को दर्शकों के समक्ष रखना होता है। बताया कि कैसे करीब सवा सौ वर्ष पूर्व चलते-फिरते दृश्यों युक्त फिल्म विधा और उससे करीब 50 वर्ष पूर्व चित्र खींचने वाला कैमरा आने के बाद से लगातार यह विधा समृद्ध हो रही है। शुरुआती दौर में दर्शक परदे पर रेलगाड़ी के सामने की ओर आते देखकर डर जाते थे, जबकि अब कई न दिखाए दृश्यों की कल्पना अपने मन में स्वयं ही कर लेते हैं।

फिल्मी ज्ञान का अश्वमेध पूरे देश में लेकर जा रहा है एफटीआईआई: कैंथोला

फिल्म एप्रीशिएशन पाठ्यक्रम के शुभारंभ मौके पर बोलते एफटीआईआई के निदेशक भूपेंद्र कैंथोला एवं मंचासीन अन्य गणमान्य।

नैनीताल। फिल्म एप्रीशिएशन पाठ्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर एफटीआईआई पुणे के निदेशक, उत्तराखंड मूल के ही भूपेंद्र कैथोला ने कहा कि वे एफटीआईआई का लोकतंत्रीकरण करने यानी एफटीआईआई को विभिन्न राज्यों में ले जाकर वहां लोगों को प्रशिक्षित करने के पक्षधर हैं, और इसी कोशिश में एफटीआईआई का अश्वमेध पूरे देश में लेकर जा रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तराखंड में भी नैनीताल से यह शुरूआत हो रही है। राज्य सरकार से अन्य कुछ पाठ्यक्रमों के लिए भी बात हो रही है। सरकार के सहयोग से स्थान की उपलब्धता आदि होने से प्रतिभागियों को कोर्स सस्ता पड़ता है। बताया कि कश्मीर सरकार इस दिशा में अत्यधिक संकल्पित नजर आती है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण एक गंभीर विषय है। एक फिल्म में ही 3-4 सौ लोगों को रोजगार मिलते हैं, जबकि देश में हर वर्ष 2-3 हजार फिल्में बनती हैं। कहा कि इस पाठ्यक्रम के बाद दर्शकों का भी फिल्म देखने को लेकर दृष्टिकोण बदल जाएगा। उन्होंने इस पाठ्यक्रम को कुविवि में शुरू करने के लिए एफटीआईआई से निकले नगर के सिनेमेटोग्राफर राजेश साह ‘काकू’ व उनकी धर्मपत्नी निर्देशिका शालिनी साह को पूरा योगदान दिया। इस अवसर पर यूजीसी एचआरडीसी के निदेशक प्रो. बीएल साह, नगर के सिने कलाकार इदरीश मलिक व शालिनी साह आदि ने भी विचार रखे।

अंतर्राष्ट्रीय स्टूडेंट फिल्म फेस्टिवल में यूएसए, यूके, जर्मनी, द. अफ्रीका, नेपाल की फिल्में भी छायीं

दूसरे अंतर्राष्ट्रीय स्टूडेंट फिल्म फेस्टिबल के आखिरी दिन देश-विदेश की फ़िल्में देखते दर्शक।

नैनीताल। कुमाऊं विवि द्वारा हरमिटेज परिसर स्थित सभागार में 7 से 9 अप्रैल 2018 के बीच आयोजित हुए दूसरे अंतर्राष्ट्रीय स्टूडेंट फिल्म फेस्टिवल में सोमवार का आखिरी दिन विदेशी फिल्मों का भी प्रदर्शन किया गया। इसमें खासकर अमेरिका की ‘ह्वट मीट्स द आइज’ व ‘आफ्टर सोफी’, जर्मनी की ‘पल्स ऑफ लाइफ’, सिंगापुर की ‘सेकेंड चांइस’, यूनाइटेड किंगडम की ‘ऑफसाइड’, दक्षिण अफ्रीका की ‘स्टोन कार्स’ व नेपाल की ‘नीमा’ उल्लेखनीय रहीं। इनके अलावा भारत के एमसीआरसी नई दिल्ली की इन ‘पर्स्यू ऑफ द स्टार’, एसआरएफटीआई कोलकाता की ‘एक आदमी का न्यौता’, ‘थ्री चेप्टर्स ऑफ अ लाइफ इन चेन्स’ व ‘क्लोज यौर आइज’, एफटीआईआई पुणे कि ‘ठिया’, ‘डेड इंड’ व ‘डेज ऑफ ऑटम’, महाराष्ट्र की ‘दैवार’, इलाहाबाद विवि की ‘फोकलवा’, एसआईएफटी रोहतक की ‘ड्रीम ऑन ह्वील्स’, अंबेडकर विवि नई दिल्ली की ‘ऋषित नियोगी’ व एमआईटी की ‘ए सन्डे आफ्टरनून’ आदि फिल्में भी दिखाई और दर्शकों के द्वारा पसंद की गयीं। अमेरिका की फिल्म ‘ह्वट मीट्स द आइज’ वहां की किशोर वय बालिकाओं की समस्याओं, सेनिटरी नैपकिन आदि के प्रति वहां भी भारत जैसे ही दृष्टिकोण को दिखाती है।

इसके अलावा इस दूसरे अंतर्राष्ट्रीय स्टूडेंट फिल्म फेस्टिबल में ईरानी फिल्म ‘अ लेटर टु द स्काई’, एसआईएफटी रोहतक की ‘आपका अमिताभ’ व फ्रांस के कान फिल्म फेस्टिवल के लिए चयनित एफटीआईआई पुणे की फिल्म ‘आफ्टरनून क्लाउड्स’ भी खास व उल्लेखनीय प्रस्तुतियां रहीं। वहीं एसआईएफटी रोहतक की ‘मैरिज बाजार’ फिल्म ने मजबूरीवश जिस्मफरोसी का धंधा करने वाली मां की अपने बच्चे को चॉकलेट देकर टॉयलेट में बंद कर काम पर जाने व इस दौरान पुलिस के छापे में पकड़े जाने से बच्चे के वहीं बंद रह जाने, अफगानी फिल्म ‘डे-39’ अफगानिस्तान में युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों द्वारा प्रताणित किये जा रहे एक अफगानी व उसकी गर्भवती पत्नी का प्रसव कराने के बाद अमेरिकी सैनिक में पितृत्व का भाव जागने तथा जर्मनी की ‘इन वन ड्रेग’ नाम की एनीमेटेड फिल्म एक सिगरेट पीने वाले को उसके द्वारा पी गयी सिगरेट की ठुड्डियों द्वारा निगल जाने का बेहतरीन तरीके से प्रस्तुतीकरण के लिए यादगार रहीं। महोत्सव के समन्वयक राजेश साह ‘काकू’ व शालिनी साह ने बताया कि आगे 11 से 15 अप्रैल तक एफटीआई पुणे की ओर से विवि के हरमिटेज भवन में फिल्म कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व फिल्म फेस्टिवल में दूसरे दिन सोपानम, डेर्बी, मूंगा, द एक्जाइल, सोमवार, संडाकफू, इन वन ड्रेग, प्रेगनेंट पॉज, द मोस्ट ब्यूटीफुल, सफर, अवरथनम, हीलियम, राचेस, मिस्टर राइटर एंड मिस्टर पेंटर, आफ्टरनून क्लाउड्स, अफसरनी, गुलदार, सिंडीस्वा, ओरुक्कम, फ्लोइग वाटर व टू सॉल्यूसन आदि फिल्में दिखायी गयीं। इसके अलावा रात्रि में कैंप फायर के दौरान कहानियों का सत्र भी आयोजित हुआ। महोत्सव के समन्वयक राजेश साह ‘काकू’ व शालिनी साह ने बताया कि इस तीन दिवसीय फेस्टिवल में यूूके, यूएसए, मलेशिया, बांग्लादेश, नेपाल, इरान 12 देशों तथा एफटीआई पूणे, एसआरएफटीआई, एलवी प्रसाद, चंडीगढ़ विवि, इलाहाबाद विवि, एमआईटी, जामियां विवि, अंबेडकर विश्वविद्यालय समेत देश के 14 फिल्म इंस्टीट्यूटों के प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं।

यह भी देखें : राह : एक भावनात्मक, प्रेरणास्पद व शिक्षाप्रद फिल्म

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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