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उत्तराखंड के ‘टफमैन’ विनय फ्रांस में होने वाली अंतरष्ट्रीय चैंपियनशिप में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व, नैनीताल से हल्द्वानी-रुद्रपुर दौडकर की है तैयारी

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नवीन समाचार, नैनीताल, 10 अक्तूबर 2019। पिछले दिनों 24 घंटे में 222.02 किमी दौड़कर ‘टफमैन’ का खिताब जीतने वाले उत्तराखंड के द्वाराहाट निवासी लंबी दूरी के धावक विनय साह फ्रांस के एलवी शहर में इसी माह 26-27 अक्तूबर के बीच होने वाली अंतरष्ट्रीय चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। विनय ने इस दौड़ के लिए नैनीताल से हल्द्वानी और रुद्रपुर तक तथा अपने गांव की ओर कुकूछीना से द्वाराहाट और सुरईखेत तक की 78 किमी की दूरी केवल 7 घंटे में दौड़कर कड़ी तैयारी की है। ‘द एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ ने इस प्रतियोगिता के लिए उनका चयन किया है। इस प्रतियोगिता में उनकी नजर पदक पर है और देश के साथ पूरे प्रदेश की नजर भी उन पर रहने वाली है।

उल्लेखनीय है कि विनय उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट के रहने वाले तारा प्रसाद शाह के सपुत्र हैं। वे पिछले कई सालों से दिल्ली व देश के अन्य भागों के साथ-साथ विदेशों में आयोजित की जाने वाली विभिन्न मैराथन प्रतियोगिताओं का हिस्सा लेते रहे हैं, और पिछले कुछ सालों से ‘टफमैन’ परिवार से भी जुड़े हैं। उन्होंने पिछले साल 2018 में एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया के भारतीय दल के सदस्य के रूप में क्रोएशिया में हिस्सा लिया था और वहां 100 किलोमीटर की दूरी मात्र 9.44 मिनट में पूरी की थी। इससे पहले जुलाई 2018 में उन्होंने दुनिया की मशहूर मैराथन में से एक ’साउथ अफ्रीका की कॉमरेड मैराथन’ में सेंट पीटरबर्ग से डरबन तक 90 किलोमीटर की दूरी मात्र 8 घंटे 33 मिनट में पूरी की थी। इसी साल विनय ने बेंगलुरु, हिमाचल और लेह लदाख में 6 से 12 घंटों की अलग-अलग टफमैन प्रतियोगिता के अंतर्गत 50 से 110 किलोमीटर की दौड़ों में अच्छा प्रदर्शन किया है।

यह भी पढ़ें : ट्रेक के नये उत्तराखंडी ‘टफमैन’ विनय शाह ने 24 घंटे में बनाया दौड़ का अद्भुत कीर्तिमान

सन्तोष ध्यानी @ नवीन समाचार, 17 मार्च 2019। बीते शनिवार और रविवार 9 व 10 मार्च को चंडीगढ़ के स्टेडियम में एएफआई यानी ‘एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के तत्वावधान में ‘टफ मैन इंडिया’ द्वारा आयोजित’ 24 घंटे स्टेडियम रन’ में उत्तराखंड के विनय शाह ने इंडियन सॉइल यानी भारतीय मिट्टी में लगातार 24 घंटे दौड़कर 222.05 किलोमीटर का फासला तय करने का अद्भुत कीर्तिमान स्थापित करते हुए ‘टफमैन’ का खिताब जीत लिया। ऐसा करने वाले विनय शाह न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि देश के पहले धावक हैं!
इस चुनौतीपूर्ण दौड़ को पूरी कर खिताब जीतने वाले विनय शाह ने बताया कि यह प्रतियोगिता एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त थी जिसमें नियम अनुसार 9 मार्च की शाम 6 बजे से 10 मार्च की शाम 6 बजे तक 400 से 407 मीटर के रनिंग ट्रैक पर 24 घंटे में न्यूनतम 120 किलोमीटर पूरे करने थे इसी क्रम में उत्तराखंड के मूल निवासी व वर्तमान में नजफगढ़ दिल्ली निवासी विनय शाह ने स्टेडियम के इस सिंथेटिक ट्रैक पर लगातार 24 घंटे दौड़ते हुए 407 मीटर प्रति चक्कर के हिसाब से कुल 546 चक्कर लगाकर लगभग 222.05 किलोमीटर का इंडियन सॉइल यानी कि भारतीय मिट्टी का अद्भुत कीर्तिमान स्थापित किया। इससे पहले यह कीर्तिमान 205 किलोमीटर का था।

यह भी पढ़ें : आज से जी टीवी के धारावाहिक ‘कुमकुम भाग्य’ में दिखेंगी नैनीताल की बेटी

धारावाहिक कुमकुम भाग्य में नूरी परवीन।

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अक्तूबर 2019। जी टीवी के पसंदीदा धारावाहिक ‘कुमकुम भाग्य’ में आज 1 अक्तूबर से नैनीताल की नूरी परवीन भी नजर आने वाली हैं। नूरी ने मुंबई से ‘नवीन समाचार’ को बताया कि वे ‘मधु’ नाम के चरित्र के रूप में बालाजी प्रोडक्शन के इस धारावाहिक में आने जा रही हैं। मधु कुमकुम भाग्य की प्रमुख पात्र प्रज्ञा के साथ रहने वाली एक बेहद चुलबुली व नटखट लड़की है। इस किरदार में दर्शकों को हर तरह के शेड्स देखने को मिलेंगे। यह धारावाहिक पूरे सप्ताह सोमवार से शुक्रवार रात्रि नौ बजे दिखाई देगा।
उल्लेखनीय है कि नूरी अब तक सोनी टीवी के सांई बाबा पर आधारित धारावाहिक ‘मेरे सांई’ में काफी समय से नजर आ रही थीं। इधर इस धारावाहिक की कहानी 10 वर्ष आगे बढ़ रही है, जिस कारण वे इस धारावाहिक से अलग हो गई हैं। इसके अलावा उनकी हिंदी लघु फिल्म ‘अगेन एंड अगेन’ भी रिलीज होने जा रही है, जबकि सावधान क्राइम में भी वे लगातार नजर आ रही हैं। उल्लेखनीय है कि नूरी नगर के सामाजिक कार्यकर्ता नजर अली की पुत्री हैं। उनके अभिनय का सफर नगर से ही थियेटर से ही प्रारंभ हुआ है।

यह भी पढ़ें : ऐशा, कल्पना व अंजलि को मिला बडिंग बॉटनिस्ट का पुरस्कार..

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 अगस्त 2019। कुमाऊं विवि के सर्वप्रमुख डीएसबी परिसर में शनिवार को वनस्पति विज्ञान विभाग में बडिंग बॉटनिस्ट कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस मौके पर वर्ष 2018 में एमएससी चौथे सेमेस्टर में सर्वाधिक अंक हासिल करने पर ऐशा सिंह, कल्पना रौतेला व अंजलि पांडे को परिसर निदेशक प्रो. एलएम जोशी, संकायाध्यक्ष प्रो. एसपीएस मेहता, विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेश चंद्र सती के हाथों बडिंग बॉटनिस्ट के रूप में 2-2 हजार रुपए के नगद पुरस्कार से नवाजा गया। बताया गया कि बडिंग बॉटनिस्ट पुरस्कार विभाग की पूर्व छात्रा डा. अंजु वर्मा के द्वारा दी गयी धनराशि से प्रदान किया जाता है। कार्यक्रम में प्रो. ललित तिवारी, प्रो. वाईएस रावत, प्रो. एसएस बर्गली, डा. किरन बर्गली सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : नैनीताल निवासी पुलिस अधिकारी को गृह मंत्रालय करेगा सम्मानित, उत्तराखंड से इकलौते

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अगस्त 2019। मूल रूप से अल्मोड़ा जनपद के चौखुटिया के ढोन गांव के एवं नैनीताल में ही पले-बढ़े व पढ़े पुलिस क्षेत्राधिकारी विपिन पंत को भारत सरकार का गृह मंत्रालय मैडल देकर सम्मानित करेगा। पूव्र में नैनीताल के कोतवाल रहे तथा वर्तमान में चंपावत जिले के टनकपुर के सीओ के रूप में कार्यरत श्री पंत को यह सम्मान विभिन्न आपराधिक मामलों की उत्कृष्ट जांच करने के लिए दिया जा रहा है। बताया गया है कि पंत यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले उत्तराखंड राज्य के इकलौते पुलिस अधिकारी हैं। श्री पंत को राज्य के बहुचर्चित लालकुआं के संजना हत्याकांड सहित 10 से अधिक पूरी तरह से ब्लाइंड मामले खोलने का श्रेय दिया जाता है। इनमें से 2 मामलों में आरोपितों को दोष सिद्ध होने के बाद फांसी की सजा भी मिली है। बताया जाता है कि 2004 में वे भेष बदलकर नेपाल गये और वहां से नेपाली माओवादियों के कब्जे से हरियाणा के दो पर्यटकों को छुड़ाकर भी आये। पंत पुलिस विभाग में बेहतर सेवा के लिए 2 बार राज्यपाल पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं।

यह भी पढ़ें : ‘नैनी की नैना’ का राष्ट्रीय टीम में हुआ चयन, टीम में UK से एकमात्र महिला खिलाड़ी होंगी..

-राष्ट्रीय कयाकिंग टीम में नैना अधिकारी को अमेरिका की कंपनी ने दी फेलोशिप
-नैना का देश की 16 नदियों में कयाकिंग करने वाली पहली भारतीय महिला होने का भी दावा

अपने माता-पिता व परिजनों के साथ राष्ट्रीय कयाकिंग टीम में चयनित नैना अधिकारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 4 अगस्त 2019। नगर के तल्लीताल क्षेत्र निवासी नैना अधिकारी का इंडिया कयाकिंग एसोसिएशन की दस सदस्यीय राष्ट्रीय कयाकिंग टीम में उत्तराखंड से एकमात्र महिला खिलाड़ी के रूप में चयन हो गया है। वह 24 अगस्त से शुरू होने वाले लद्दाख रिवर फेस्टिवल में भी हिस्सा लेंगी। साथ ही उन्हें अमेरिका की एक बड़ी कंपनी नॉर्थ रिवर सप्लायर (एनआरएस) ने फेलोशिप भी दी है। वह इंडिया की गोप्रो कयाकर एथलीट में भी शुमार हैं।
रविवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए नगर के विजय अधिकारी और जया अधिकारी की पुत्री नैना अधिकारी ने देश की 16 नदियों में कयाकिंग करने वाली पहली भारतीय महिला होने का दावा भी किया। उन्होंने देश-प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को उनकी क्षमताओं व दक्षताओं के साथ सरकारों की ओर से खासकर कयाकिंग के क्षेत्र में अपेक्षित आर्थिक सहयोग न होने की बात भी की। उन्होंने पंजाब और मध्य प्रदेश सरकारों की तर्ज पर उत्तराखंड सरकार से भी कयाकिंग के क्षेत्र में खिलाड़ियों को आर्थिक सहयोग देने की मांग की। नैना ने बताया कि 2018 में नगर के सेंट मैरी कॉन्वेंट से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने अपने चाचा भूपेंद्र सिंह अधिकारी, जो कि एक कुशल कयाकर हैं, उनकी प्रेरणा से 6 वर्ष पूर्व कयाकिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ीं। बताया कि वह 2014 में देवप्रयाग के गंगा कयाक फेस्टिबल में यंगस्ट फीमेल वाटर कयाकर, 2018 में दिल्ली ओलंपिक गेम्स में कयाकिंग में स्वर्ण और राफ्टिंग चैम्पियनशिप में रजत पदक तथा इधर इस वर्ष 26 जुलाई को आयोजित एशिया के सबसे बड़े मालाबार रिवर फेस्टिबल में एक रजत और एक कांस्य अपने नाम किया। इसके बाद ही उन्हें इंडिया की कयाकिंग टीम में शामिल किया गया।

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संगीता बुधलाकोटी

नवीन समाचार, नैनीताल, 2 जुलाई 2019। मूलतः नैनीताल की रहने वाली संगीता बुधलाकोटी ने शिया लोड इंटरटेनमेंट द्वारा चंडीगढ़ में आयोजित ‘सब कांटिनेंट आइकन 2019 एशिया फर्स्ट एवर कल्चरल टीवी रियलिटी शो’ में करीब 100 प्रतिभागियों के बीच ‘मिस दिवा सब कांटिनेंट’‘मिस मोस्ट टेलेंटेड’ के खिताब हासिल किये हैं। बताया कि प्रतियोगिता के फाइनल में केवल 10 लड़के व 5 लड़कियां ही चुनी गयीं। इनमें संगीता भी शामिल रहीं। बताया गया है कि जल्द ही इस शो का ई24 टीवी चैनल पर प्रसारण भी किया जाएगा। संगीता के पिता किरन चंद्र बुधलाकोटी व मां प्रेमा बुधलाकोटी नगर के माल्डन कॉटेज नंबर 6 में रहते हैं, जबकि उनकी ससुराल हल्द्वानी में है। वे पूर्व में एलीट मिसेज इंडिया सहित कई खिताब भी जीत चुकी हैं, तथा फैशन कोरियोग्राफर, सिंगर व डांसर के साथ ही एक उदीयमान अभिनेत्री भी हैं।

यह भी पढ़ें : जल्द सात देशों के प्रतिभागियों के बीच छोटे परदे पर दिखेगी नैनीताल की संगीता

नवीन समाचार, नैनीताल, 28 मार्च 2019। नगर के मॉडन कॉटेज की निवासी संगीता बुधलाकोटी जल्द छोटे परदे पर सात देशों के प्रतिभागियों के बीच दिखाई देने वाली हैं। संगीता ने बताया कि उनका चयन एशिया कल्चरल टीवी रियलिटी शो-सब कॉन्टिनेंट आइकन 2019 के लिए हुआ है, जिसकी शूटिंग जुलाई माह में होगी और इसका प्रसारण जूम चैनल पर होगा। इस रियलिटी शो में विभिन्न टास्क, एक्टिंग, मॉडलिंग व फैशन शो की प्रतिभा के आधार पर विजेता का चयन किया जाएगा। प्रतियोगिता में संगीता देश एवं उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस प्रतियोगिता में रणविजय सिंह, प्रियांक शर्मा व पवनलता जोशी निर्णायक की भूमिका में होंगी।
उल्लेखनीय है कि संगीता की ससुराल हल्द्वानी में है तथा वह इन दिनों देहरादून में रहती है। वह कुमाऊं विवि के पत्रकारिता विभाग से डिग्री पाठ्यक्रम की छात्रा भी हैं, तथा 2017 की एलीट मिसेज इंडिया प्रतियोगिता की उपविजेता, टॉप मॉडल व बेस्ट कैट वॉक एवं 2016 में मिसेज उत्तराखंड भी रह चुकी हैं।

यह भी पढ़ें : पूर्व मिसेज इंडिया उप विजेता संगीता को मिला सर्वश्रेष्ठ फैशन कोरियोग्राफर का पुरस्कार

मिसेज स्टाइल एशिया प्रतियोगिता में बॉलीवुड कलाकार कृति वर्मा से सर्वश्रेष्ठ फैशन कोरियोग्राफर का पुरस्कार प्राप्त करतीं संगीता बुधलाकोटी।

नवीन समाचार, देहरादून, 8 जनवरी 2019। 2017 में इलाइट मिसेज इंडिया प्रतियोगिता में मॉडल एवं कैटवॉक की विजेता रही नैनीताल की संगीता बुधलाकोटी को प्रतिष्ठित स्टाइल एशिया-2019 प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ फैशन कोरियोग्राफर का पुरस्कार प्राप्त हुआ है। आगरा के रेडीसन ब्लू प्रतियोगिता में खुशी ईवेंट्स के द्वारा रौनक सोलंकी के निर्देशन में 6 जनवरी को आयोजित हुई प्रतियोगिता से यह पुरस्कार लेकर लौटी संगीता ने ‘नवीन समाचार’ को बताया कि स्टाइल एशिया-2019 के तहत किड्स, जूनियर तथा सीनियर वर्ग में पुरुष एवं महिलाओं की एवं मिसेज स्टाइल एशिया यानी कुल 7 प्रतियोगिताएं आयोजित हुईं। प्रतियोगिता के लिए 4 व 5 जनवरी को फाइनल के प्रतिभागियों को तैयार किया गया। उन्हें किड्स वर्ग के फाइनलिस्ट बालक व बालिकाओं तथा मिसेज स्टाइल एशिया प्रतियोगिता के फाइनलिस्टों को तैयार करना था।

पूर्व में कुमाऊँ विवि के पत्रकारिता विभाग के मिस फ्रेशर-2018 के पुरस्कार के साथ संगीता बुधलाकोटी

इसी तरह अन्य कोरियोग्राफरों को भी अलग-अलग वर्ग के प्रतिभागियों की जिम्मेदारी दी गयी थी, इस प्रकार तैयार किये गये प्रतिभागियों के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें (संगीता को) यह पुरस्कार कृति वर्मा, जुबेर खान व आकाश अग्रवाल सरीखे सुप्रसिद्ध छोटे व बड़े कलाकारों की मौजूदगी में प्राप्त हुआ। उल्लेखनीय है कि संगीता इससे पूर्व 2016 में ‘मिस कुमाऊं सिन्टिलेटिंग स्माइल, 2017 में परंपरा रास शो की टॉपर तथा इलाइट मिसेज इंडिया की द्वितीय उप विजेता तथा 2018 में कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर के पत्रकारिता विभाग की मिस फ्रेशर सहित कई पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं तथा कई प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका भी निभा चुकी हैं।

यह भी पढ़ें : नैनीताल की बेटी तनुजा ‘एशिया कल्चरल रियलिटी शो’ में रही तीसरे स्थान पर, साथ ही मिला ‘मिस बेस्ट पर्सनेलिटी’ का ख़िताब..

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 जुलाई 2019। नैनीताल की बेटी तनुजा आर्या ‘एशिया कल्चरल रियलिटी शो’ में नैनीताल उत्तराखंड की ओर से हिस्सा लेते हुए सब कॉन्टिनेंटल 2019 में तीसरे स्थान पर रही है। साथ ही उन्होंने ‘मिस बेस्ट पर्सनेलिटी’ का खिताब भी हासिल किया है। तनुजा ने बताया कि फाइनल में पहुंचने के लिए मॉडलिंग, एक्टिंग, सिंगिंग और अन्य फिजिकल टास्क दिए गए थे। इस शो में निर्णायक की भूमिका में रणविजय सिंह, पवन लता जोशी व प्रियांक शर्मा रहे।

उल्लेखनीय है कि तनूजा ने नगर के एशडेल स्कूल से इंटर तक एवं इसके बाद डीएसबी परिसर से स्नातक किया है तथा यहीं नैनीताल आर्ट्स व बीएम शाह ओपन थियेटर से अदाकारी सीखने के बाद करीब एक साल से दिल्ली में रहकर मॉडलिंग कर रही हैं। साथ ही उनकी एक भोजपुरी फिल्म भी शीघ्र रिलीज होने वाली है। वहपिछले दो साल से दिल्ली में मॉडलिंग की बारीकियां सीख रही है।

पूर्व समाचार : एशिया कल्चरल टीवी रियलिटी शो में उत्तराखंड व देश का प्रतिनिधित्व करेगी नैनीताल की तनूजा

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 अप्रैल 2019। नगर की गरीब परिवार की बेटी तनूजा आर्या जल्द जूम टीवी पर प्रसारित होने जा रहे एशिया कल्चरल रियलिटी शो में दिखने वाली है। तनूजा ने बताया कि इस शो में भारत सहित सात देशों के प्रतिभागी शामिल होंगे। इसकी शूटिंग आगामी जून-जुलाई माह में शुरू होगी। इस शो में मॉडलिंग, डांसिंग व अन्य टास्क के आधार पर विजेता की घोषणा की जाती है। उन्होंने कहा कि वह इस शो में उत्तराखंड व देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। 

यह भी पढ़ें : पंजाबी शो में कुमाउनी नृत्य कर सेमीफाइनल में पहुंची नैनीताल की 4 साल की अवर्णिका

-जी पंजाबी व दूरदर्शन पंजाबी चैनलों की ओर से हल्द्वानी में आयोजित हुआ प्रतियोगिता का तीसरा राउंड

नन्ही अवर्णिका के साथ कुमाउनी गीत पर थिरकते पंजाबी कार्यक्रम के निर्णायक।

प्रतियोगिता के निर्णायकों के साथ नन्ही अवर्णिका।

नवीन समाचार, नैनीताल, 28 जून 2019। नगर की एक चार वर्षीय बच्ची ने पंजाबी गीतों पर कुमाउनी गीत पर नृत्य कर मंच पर ऐसा जादू बिखेरा कि निर्णायक स्वयं को मंच पर आकर उसके नन्हे कदमों के साथ कुमाउनी गीत पर नृत्य करने से स्वयं को नहीं रोक पाये। उसे गोद में भी उठा लिया और प्रतियोगिता के तीसरे राउंड में पहुंची करीब 250 प्रतिभागियों में से उसे सेमीफाइनल में भी प्रवेश दिला दिया।
हम बात कर रहे हैं नगर के सेंट मेरीज कॉन्वेंट कॉलेज में प्रेप कक्षा में पढ़ने वाली अवर्णिका जोशी की। अवर्णिका ने जी पंजाबी एवं दूरदर्शन के पंजाबी चैनल के लिए बताये जा रही पंजाबी गीतों के शो के पांचवे सीजन के लिए बृहस्पतिवार को हल्द्वानी में हुए ‘टेलेंट का महासंग्राम’ कार्यक्रम के पांचवे सीजन के तीसरे राउंड में पंजाबी से इतर कुमाउनी गीत-थल की बजारा पर नृत्य कर यह उपलब्धि हासिल की। नृत्य प्रतिभा की धनी नन्ही अवर्णिका की यह खाशियत है कि वह नैनीताल शहर में रहने के बावजूद कुमाउनी लोकगीतों पर कुमाऊं के परंपरागत रंग्वाली पिछौड़ा व घाघरा तथा नथ, पहुंची व गले की टीप आदि आभूषण पहनकर गजब का नृत्य करती है, और लुप्त हो रही कुमाउनी संस्कृति को भी आगे बढ़ाती है। नगर एवं आसपास के कई कार्यक्रमों में वह अपनी ऐसी कई प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। उसके पिता जय जोशी सामाजिक कार्यकर्ता हैं, तथा नगर के युवाओं के ‘एक पहल-एक सोच’ अभियान के तहत अक्सर नगर के सफाई अभियानों में शामिल रहते हैं। उनकी वह इकलौती संतान है।

यह भी पढ़ें : खुशखबरी : नैनीताल की बेटी अंजू बनी मिसेज इंडिया इंटरकॉन्टिनेंटल

-हल्द्वानी के समाजसेवी व सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया की भतीजी हैं अंजू, नैनीताल से बी फार्मा करने के बाद ग्रेटर नोएडा में फार्मास्युटिकल साइंसेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं अंजू, आगे अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जाने एवं मौका मिलने पर फिल्मी दुनिया में जाने का भी है इरादा
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जून 2019। हल्द्वानी में पैदा हुई और बढ़ी तथा नैनीताल में पढ़ी एक बेटी अंजू गौनिया ने ‘मिसेज इंडिया-आईएम पावरफुल इंटरकॉन्टिनेंटल’ का खिताब जीत लिया है। अंजू हल्द्वानी के समाजसेवी व सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया की भतीजी हैं। नैनीताल से बी फार्मा करने के बाद ग्रेटर नोएडा के एनआईटी यानी नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग कॉलेज में फार्मास्युटिकल साइंसेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। आगे उनका इरादा अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जाने एवं मौका मिलने पर फिल्मी दुनिया में जाने का भी है। आपके प्रिय एवं भरोसेमंद समाचार पोर्टल ‘नवीन समाचार’ से बात करते हुए अंजू ने बताया कि ‘एस्टर फाइन आर्टी एजुकेशन’ कंपनी के द्वारा रविवार 16 जून की देर रात्रि थाणे मुंबई में आयोजित इस प्रतियोतिगता में देश भर की 21 प्रतिभागियों के बीच उन्होंने यह खिताब जीता है। प्रतियोगिता में हिमाचल प्रदेश की मोनिका शर्मा ने ‘मिसेज इंडिया-आईएम पावरफुल टूरिज्म’, झारखंड की राम्यता प्रफुल्ल ने ‘मिसेज इंडिया-आईएम पावरफुल एशिया पैसिफिक’, कर्नाटक की गीतांजलि ने ‘मिसेज इंडिया-आईएम पावरफुल वर्ल्डवाइड’, बंगलौर की गायत्री ने ‘मिसेज इंडिया-आईएम पावरफुल ग्लोबल यूनिवर्स’ के पुरस्कार भी जीते हैं। अंजू इससे दो माह पूर्व मिसेज इंडिया-दिल्ली एनसीआर का खिताब भी जीत चुकी हैं। एक सात वषीया बेटी मेहल की मां अंजू अपनी नौकरी के साथ ही फार्मास्युटिकल कंपनी में कार्यरत अपने पति कपिल देव पांडे व परिवार की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाती हैं। उनके पिता लक्ष्मण सिंह गौनिया कृषि विभाग में एडीओ के पद से अभी हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं।

यह भी पढ़ें : पहाड़ पर पैदल चलकर मिली ऊर्जा से नैनीताल की अजिता ने सिंगापुर में जीते सौंदर्य के दो खिताब…

-‘मिसेज सिंगापुर-2019’ प्रतियोगिता में कुल सात में से दो टाइटल- मिसेज इलोक्वेंस और मिसेज पॉपुलर क्वीन जीते
-पहाड़ पर पैदल चलने को देती हैं जीत का श्रेय, कहा पहाड़ की पैदल यात्राओं ने पैदा किया उनके भीतर कड़ी मेहनत करने व चुस्त-दुरुस्त रहने का जोश और जज्बा

मिसेज सिंगापुर प्रतियोगिता में पुरस्कार प्राप्त करती अजिता बिष्ट।

नवीन समाचार, नैनीताल, 26 मई 2019। जनपद के बेतालघाट विकास खंड की मूल निवासी अजिता बिष्ट ने गजब का जज्बा दिखाते हुए करीब एक दशक बाद मंच पर उतरकर ‘मिसेज सिंगापुर-2019’ प्रतियोगिता में से कुल सात में से दो टाइटल- मिसेज इलोक्वेंस और मिसेज पॉपुलर क्वीन हासिल किये हैं। अजिता की सफलता की कहानी इसलिये भी अत्यधिक प्रेरणादायी है, क्योंकि उन्होंने जीवन में कभी मॉडलिंग नहीं की, और इस तरह की सौंदर्य प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने भागेदारी नहीं की थी। पिछले 9 सालों से सिंगापुर में आईटी प्रोफेशनल के तौर पर काम कर रहीं अजिता केवल अपने कॉलेज के दिनों में ‘मिस फ्रेशर’ चुनी गयी थी, लेकिन इधर एक सैलून में मैगजीन के माध्यम से इस सौन्दर्य प्रतियोगिता की जानकारी मिली, तो उन्होंने इस मौके को आजमाने का निश्चय किया और इस प्रतियोगिता का हिस्सा बनीं। खास बात यह भी है कि ढाई महीने तक कई चरणों में संपन्न हुई ‘मिसेज सिंगापुर-2019’ प्रतियोगिता के 24 फाइनलिस्ट में अजिता के अलावा सभी प्रतिभागी सिंगापुर से थीं, और वे एकमात्र भारतीय थीं।
बताया गया है कि नैनीताल जिले में बेतालघाट का सुन्स्यारी अजिता का पुश्तैनी गाँव है। उनके पिता स्व. इंदर सिंह बिष्ट राजस्थान विश्वविद्यालय में कार्यरत थे. इस वजह से उनकी स्कूली शिक्षा जयपुर के विभिन्न स्कूलों में हुई। स्कूली पढाई करने के बाद उन्होंने ‘स्टैनी मेमोरियल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, राजस्थान विश्वविद्यालय’ से सूचना प्रौद्योगिकी विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की। अपनी सफलता के पीछे की कहानी बयां करते हुए अजिता का कहना है कि वह हर साल गर्मियों की लम्बी छुट्टियां उत्तराखण्ड में अपनी नानी के घर में ही बिताती थीं। गाँव में बितायी गयी छुट्टियों के दौरान काफल, किल्मोड़ा, हिसालू, अपनी मौसियों के साथ जंगल में घास काटने और गाँव के मंदिर की सुनहरी यादें उनके जहन में आज भी ताजा हैं। इसी दौरान पहाड़ में छुट्टियों के दौरान की पैदल यात्राएँ उन्हें बहुत रोमांचकारी लगा करती थीं। वे मानती हैं कि इन्हीं पैदल यात्राओं ने उनके भीतर कड़ी मेहनत करने व चुस्त-दुरुस्त रहने का जोश और जज्बा पैदा किया। अजिता एक 5 साल की बेटी की मां भी हैं। वे वर्ष 2009 में मूलतः अल्मोड़ा के निवासी अपने पति हेमेन्द्र सिंह मनराल के साथ विवाह बंधन में बंधी थीं।

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बृजमोहन जोशी

नवीन समाचार, नैनीताल, 12 मई 2019। इंडिया इंटरनेशनल फोटोग्राफी काउंसिल यानी आईआईपीसी नई दिल्ली द्वारा देश के छह राज्यों के-दिल्ली, बंगलुरू, इंदौर, विजयवाड़ा, जोधपुर व गुवाहाटी में आयोजित ‘नेशनल डिजिटल फोटोग्राफी प्रतियोगिता-2019’ में नैनीताल के छायाकार बृजमोहन जोशी को 10 पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। आईआईपीसी के सचिव असीम शर्मा ने बताया कि इस प्रतियोगिता में भारत के साथ कनाडा, जर्मनी, हांगकांग, इटली, सिंगापुर, इंग्लेंड, फ्रांस व ताइवान के छायाकारों ने सहभागिता की। इस प्रतियोगिता के पिक्टोरियल वर्ग में जोशी के मिस्ट्री शीर्षक वाले चित्र को दिल्ली में, जर्नलिज्म वर्ग के अंतर्गत आस्था व पिक्टोरियल वर्ग के अंतर्गत सीजन चित्रों को इंदौर, जर्नलिल्म वर्ग के आस्था, पिक्टोरियल वर्ग के सीजन व यात्रा वृतांत वर्ग के नंदा देवी महोत्सव चित्रों को विजयवाड़ा में, मोनाक्रॉम वर्ग में मिस्ट्री, यात्रा वृतांत में नंदा देवी महोत्सव को जोधपुर में, जर्नलिज्म में आस्था चित्र को बंगलुरू तथा जर्नलिज्म वर्ग में आस्था व मौत का कुंआ को गुवाहाटी में पुरस्कार प्राप्त हुए।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 से आईआईपीसी से जुड़े जोशी 2011 में मात्र 7 वर्षों में डायमंड ग्रेडिंग प्राप्त कर चुके थे तथा उनहें देश के 10 सर्वश्रेष्ठ छायाकारों में भी शुमार किया जा चुका है।। 50 से अधिक एकल फोटो प्रदर्शनियां आयोजित कर चुके जोशी पिछले 25 वर्षों से परंपरा संस्था के तहत परंपरा के संरक्षण में भी संलग्न हैं, तथा कनाडा, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया व अमेरिका की महिलाओं सहित 10 हजार से अधिक युवाओं को कुमाऊं की परंपरागत ऐपण रंगोली लोक कला का प्रशिक्षण दे चुके हैं।

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राष्ट्रीय सहारा, 14 जून 2018

 

अंतर्राष्ट्रीय छायाकार बृजमोहन जोशी को आईआईपीसी यानी इंडिया इंटरनेशनल फोटोग्राफी काउंसिल नई दिल्ली द्वारा बेंगलुरू, इंदौर, नई दिल्ली, विजयवाड़ा, जोधपुर व गुवाहाटी में आयोजित राष्ट्रीय डिजिटल सर्किट फोटोग्राफी में छह राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार हासिल हुए हैं। आईआईपीसी के सचिव असीम शर्मा ने बताया कि इस प्रतियोगिता में भारत के साथ ही ताइवान, फ्रांस, इंग्लैंड, सिंगापुर, पोलैंड, इटली, हांगकांग, जर्मनी व कनाडा आदि देशों के छायाकारों के चित्र भी शामिल थे।

प्रतियोगिता में जोशी के प्रकृति विषयक चित्र ब्लू एंड व्हाइट व अगेंस्ट लाइट, यात्रा वृत्तांत विषयक फोक डांस, रंग विषयक बोट एंड स्नो, पैकिंग व पत्रकारिता विषयक रिसकिंग लाइफ शीर्षक के चित्रों को पुरस्कार मिले, साथ ही प्रतियोगिता के श्रेष्ठ चित्रों की लगाई गयी प्रदर्शनी में उनके 52 चित्र भी प्रदर्शित किये गये। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 से आईआईपीसी से जुड़े जोशी को उनकी उपलब्धियों पर वर्ष 2006 में कांस्य, 2007 में रजत, 2008 में स्वर्ण, 2009 में प्लेटिनम व वर्ष 2011 में डायमंड ग्रेडिंग अवार्ड से भी सम्मानित तथा देश के शीर्ष 10 छायाकारों में शामिल किया जा चुका है। 

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-अनु नागर 2019 इंटरनेशनल एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित
नवीन समाचार, मेरठ, 7 मई 2019। मेरठ के होटल हारमनी इन में दो दिवसीय सेकंड इंटरनेशनल लीडरशिप समिट का आयोजन किया गया, जिसमें यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, बंगलादेश, सिंगापुर, ज़िम्बाब्वे, ज़ाम्बिया, साउथ अफ्रीका, दुबई व इंडिया समेत 9 देशों ने प्रतिभाग किया। जिसमें हल्द्वानी (नैनीताल) की श्रीमती अनु नागर को “इंटरनेशनल एक्सीलेंस अवॉर्ड 2019” से सम्मानित किया गया।

श्रीमती अनु नागर को यह अवॉर्ड फ़ैशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप के लिए दिया गया। यह अवॉर्ड फंग्सन “एस्थेटिक इंटरनेशनल” द्वारा आयोजित किया गया था। एस्थेटिक की डारेक्टर डॉ. कामाक्षी जिंदल ने कहा कि श्रीमती अनु नागर एक ऐसी महिला हैं जिन्होंने मैरिड महिलाओं को एक नई दिशा दिखाई है। वह मैरिड महिलाओं की प्रेरणास्रोत हैं।श्रीमती अनु नागर ने प्रुफ कर दिया है वह महिलाओं के लिए एक फ़ैशन आइकॉन हैं। उनसे अन्य महिलाओं को एक पॉजीटिव ऊर्जा मिलती है। अनु नागर को यह अवॉर्ड लंदन की बेहद फैमस फैशन डिजाइनर “लूसिया फ़र्नान्डिस” एवं भारत एक फैमस कार्टूनिस्ट मोटू-पतलू एवं फ़िल्म डारेक्टर व बाइस हज़ार बुकों के राईटर “हरविंदर मनकार” एस्थेटिक की डाइरेक्टर डॉ. कामाक्षी जिंदल, डॉ. आशा जिंदल द्वारा दिया गया। कार्यक्रम में क्रियेटिव डारेक्टर बालाजी टेलीफिल्म की निवेदिता बासु, तन्मय शर्मा, आशा आनंद, मीता शाह, प्रीति शर्मा, रत्ना तिवारी,अंजलि धर, डॉ. वेद तिवारी, मोरशेड चिस्ती, डॉ. कैरोलिन मकाका, वनिता सर्वांमुथू नेशनल डाइरेक्टर सिंगापुर आदि लोग उपस्थित थे। अनु के इंटरनेशनल अवॉर्ड मिलने पर नेशनल फ़िल्म बोर्ड के फ़िल्म डारेक्टर मुकेश चंद्रा, सिने स्टार हेमंत पांडे, एनएसडीएन व राइटर डॉ. एहशान बख्श, फ़ैशन डिज़ाइनर अर्जुन सिंह, राष्ट्रीय मानव अधिकार परिषद डाइरेक्टर जनरल ज़फर पिरज़ादा मुम्बई, फोटो जंक्शन दिल्ली के मशहूर फोटोग्राफर सचिन नागरे, आज़ाद अली, शशि, जतिन पांडे, आकाश नेगी, राजीव पांडे, चारु तिवारी व शम्भूदत्त आदि ने बधाई दी है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 9 अप्रैल 2019। युवा चाहें तो दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों की ओर रोजगार की तलाश में जाने से बेहतर अपने घर पर भी मेहनत कर रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकते हैं। नगर के युवा रवि साह ने भी ऐसी ही मिसाल पेश की है। बी-टेक के बाद मुंबई और फिर दिल्ली में छह वर्ष सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर अच्छी नौकरी करने के बाद रवि को लगा कि दूसरी जगह से बेहतर है अपने घर पर जाकर मेहनत और अपने राज्य की सेवा की जाये। इसी सोच के तहत करीब चार वर्ष, कई बार सोशल मीडिया से भी दूर रहकर कठिन मेहनत करने के बाद उन्होंने अधीनस्थ सेवा परीक्षा में 11वीं रैंक हासिल कर नाम रोशन किया है। उन्होंने बताया कि इतने लंबे समय दिल्ली-मुंबई में नौकरी करते हुए स्थापित होने के बाद पहाड़ के प्रेम के वशीभूत और वहीं कुछ करने की प्रबल इच्छा के साथ वे घर लौटे।

इधर चार वर्ष कई परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने के बावजूद अपेक्षित सफलता न मिलने के बीच उनके माता, सेवानिवृत्त शिक्षिका रेखा साह एवं पिता नैनीताल बैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी मोहन लाल साह का सहयोग व प्रोत्साहन भी मिला, जिसके बल पर ही वे यह उपलब्धि हासिल कर पाये। आगे उनकी कोशिश राज्य के लिए कुछ बेहतर करने की रहेगी। उल्लेखनीय है कि रवि ने 10वीं की पढ़ाई नगर के अम्तुल्स पब्लिक स्कूल से, 12वीं की नगर के सरकारी विद्यालय राजकीय इंटर कॉलेज से एवं इसके बाद ग्राफिक ईरा विवि देहरादून से कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में बी-टेक की डिग्री प्राप्त की है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 5 अप्रैल 2019। उत्तराखंड के युवाओं ने यूपीएससी की प्रतिष्ठित परीक्षा में कमाल का प्रदर्शन किया है प्रदेश के यमकेश्वर निवासी वर्णित नेगी ने इस परीक्षा में पूरे देश में 13 वीं रैंक हासिल करके प्रदेश का नाम रोशन किया है। पिछले वर्ष उन्होंने 504वीं रैंक हासिल की थी। उनके अलावा अल्मोड़ा की सौम्या गुरुरानी ने 30वीं, देहरादून की मीनल कांडपाल ने 35वीं, पिथौरागढ़ के रजत पंत ने 90वीं, हल्द्वानी के दीपक तिवारी ने 47वीं, देहरादून के अभिनव शाह ने 222वीं और हरिद्वार के उत्कर्ष तोमर ने 306वीं रैंक हासिल की है। उल्लेखनीय है कि सौम्या को पिछले वर्ष 148वीं रैंक हासिल हुई थी।

वहीं शिक्षा नगरी के रूप में भी देश-दुनिया में प्रसिद्ध रहे सरोवरनगरी नैनीताल के नौजवानों ने सिविल सेवा परीक्षा में ऊंचा मुकाम हासिल किया है। नगर के सेंट जोसफ कॉलेज के छात्र रहे हल्द्वानी निवासी एवं वर्तमान में दिल्ली में रह रहे नमित पाठक ने इस परीक्षा में 218वीं रैंक हासिल की है, जबकि नगर के सेंट मेरीज कॉन्वेंट की छात्रा शैलजा पांडे ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में 265वां स्थान प्राप्त किया है।

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नवीन समाचार, नैनीताल,  30 जनवरी 2019। अपने यूके यानी उत्तराखंड की एक बेटी है ने उस यूके में अपना कमाल कर दिया है जहां के लोग कभी इस यूके वालों को सौंदर्य के मामले में कहीं पीछे मानते थे। यह भी खास बात है कि इस यूके की बेटी कभी ‘छोटी बिलायत’ कहे जाने वाले नैनीताल में जन्मी है और अब उस ‘बिलायत’ में नाम कमा रही है। नैनीताल में जन्मी और अल्मोड़ा में पली बढ़ी सौम्या पंत ने ब्रिटेन में आयोजित मिसेज इंडिया यूके प्रतियोगिता के एक हजार से अधिक प्रतिभागियों के बीच ‘शीर्ष 30’ में जगह बनाई है। इस प्रतियोगिता का फाइनल तीन महीने के कड़े प्रशिक्षण के बाद आगे अप्रैल महीने में होना है।
सौम्या पंत का जन्म नैनीताल व प्रारंभिक शिक्षा अल्मोड़ा में हुई है। अल्मोड़ा के रानीधारा निवासी सौम्या को वर्ष 2019 कलर्स टीवी के यूके प्रेजेंट्स मिसेज इंडिया यूके के तीस फाइनलिस्ट में चुना गया है। सौम्या पिछले दस सालों से लंदन में रहती हैं और वहां एक कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट में ग्लोबल हेड के रूप में कार्यरत हैं। मॉडलिंग और फैशन की दुनिया में शुरू से सौम्या की रुचि रही है। मिसेज इंडिया यूके के पहले दौर में उन्होंने एक हजार प्रतिभागियों में टॉप थर्टी में अपनी जगह बनाई है। अगले तीन माह के कड़े प्रशिक्षण के बाद अब इस प्रतियोगिता का फाइनल होगा। जिसमें विजयी प्रतिभागियों को मिसेज इंडिया इंटरनेशनल में भाग करने का मौका मिलेगा। सौम्या अपने पति और तीन साल की बच्ची के साथ लंदन में ही रहती हैं।

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-देश-विदेश के 1534 खिलाड़ियों में प्राप्त किया 21वां स्थान, उत्तराखंड से पहले शतरंज के राष्ट्रीय कोच भी हैं नीरज

नई दिल्ली में 17वीं दिल्ली इंटरनेशनल ओपन ग्रांडमास्टर्स चेस टूर्नामेंट शतरंज प्रतियोगिता में 1534 खिलाड़ियों में 21वीं रैंक प्राप्त करने पर पुरस्कार प्राप्त करते नगर के नीरज साह।

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जनवरी 2019। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में 13 से 16 जनवरी के बीच खेली गयी देश की सबसे बड़ी बताई जाने वाली 17वीं दिल्ली इंटरनेशनल ओपन ग्रांडमास्टर्स चेस टूर्नामेंट शतरंज प्रतियोगिता में नैनीताल के खिलाड़ी नीरज साह का जलवा देखने को मिला। दिल्ली शतरंज संघ के तथ्वावधान में खेली गयी इस प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 10 चक्रों में 6 जीत एवं 4 ड्रॉ के साथ देश-विदेश के 1534 खिलाड़ियों में 21वां स्थान प्राप्त किया। इस उपलब्धि पर उन्हें 25 हजार रुपये की नगद धनराशि के पुरस्कार भी जीते और नैनीताल व पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया। उल्लेखनीय है कि नीरज वर्ल्ड चेस फेडरेशन-फिडे की ओर उत्तराखंड से पहले शतरंज के राष्ट्रीय कोच भी चुने गये हैं।
उनकी इस बड़ी उपलब्धि पर उत्तराखंड शतरंज संघ के अध्यक्ष धीरज रघुवंशी, सचिव संजीव चौधरी, नैनीताल जिला शतरंज संघ के उपाध्यक्ष समित ‘टिक्कू’, सचिव ईश्वर दत्त तिवाड़ी, शेर सिंह बिष्ट, मो. जुबेर सिद्दीकी, अनुपम कबडवाल, डीके जोशी तथा वरिष्ठ शतरंज खिलाड़ी सुरेश लाल साह आदि ने बधाई दी है।

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  • वर्ल्ड चेस फेडरेशन-फिडे की ओर से जारी किया गया है प्रमाण पत्र
राष्ट्रीय सहारा, देहरादून संस्करण, 16 मार्च 2018

नैनीताल। सरोवरनगरी के गुदड़ी के एक लाल ने राज्य से पहले शतरंज के राष्ट्रीय कोच बनने का गौरव हासिल किया है। मुख्यालय के नगर पालिका परिषद से संचालित नर्सरी विद्यालय से प्राथमिक तथा भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय व चेत राम साह इंटर कॉलेज यानी सीआरएसटी से इंटर तक की डीएसबी परिसर से स्नातकोत्तर करने वाले नीरज साह को राज्य बनने के बाद पहली बार ऊधमसिंह नगर जनपद के अमित गंगवार के साथ यह उपलब्धि हासिल हुई है। अंतरराष्ट्रीय संस्था वर्ल्ड चेस फेडरेशन यानी फिडे के ट्रेनर्स कमीशन की ओर से गत दिवस मोहाली में इंटरनेशनल मास्टर विशाल सरीन व ग्रांड मास्टर आरबी रमेश की उपस्थिति में गत चार से आठ मार्च तक आयोजित फिडे ट्रेनर्स सेमीनार में प्रशिक्षण के बाद उन्हें यह उपाधि प्रदान की गयी है।

नीरज ने बताया कि उन्होंने प्राथमिक कक्षा से ही शतरंज खेलना प्रारंभ कर दिया था, जबकि 17 वर्ष की उम्र में सीआरएसटी में पढ़ने के दौरान वरिष्ठ खिलाड़ियों के बीच शतरंज प्रतियोगिता का खिताब जीतने से प्रोत्साहन प्राप्त किया। आगे 1995 में डीएसबी में प्रवेश लेने के बाद लगातार 7 वर्ष परिसर और तीन बार विश्वविद्यालय के चैंपियन रहे और इस बीच 2010 में कुमाऊं विश्वविद्यालय की टीम के लिए अखिल भारतीय विश्वविद्यालयी शतरंज प्रतियोगिता जीती व इधर गत दिसंबर माह (2017) में लेक सिटी क्लब उदयपुर राजस्थान में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर रहकर भी उन्होंने प्रदेश का नाम रोशन किया, जबकि इस वर्ष वे कुमाऊं विवि की शतरंज टीम की चयन समिति में भी रहे। अपनी इस बड़ी उपलब्धि पर वह अपने इन विद्यालयों के साथ ही शुरुआती प्रशिक्षक भीम सिंह थापा को श्रेय देना नहीं भूलते। उनकी इस उपलब्धि पर रुचिर साह, मो. जुबेर, अध्यापक शेर सिंह बिष्ट, अधिवक्ता डीके जोशी, भगवत जंतवाल, अनुपम कबडवाल, अरविंद पडियार व दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल हल्द्वानी के प्रबंधक समित टिक्कू, उत्तरांचल राज्य शतरंज संघ के अध्यक्ष धीरज रघुवंशी व सचिव संजीव चौधरी ने उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई दी है।

 

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देहरादून, 11  नवंबर 2018।उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के आईआरडीटी ऑडिटोरियम में रविवार को 9वां यूथ आईकॉन अवार्ड कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रकाश पंत और विशिष्ट अतिथि कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के हाथों 9 राज्यों की प्रतिभाओं को ‘यूथ आईकॉन नेशलन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में उत्तराखंड में नशाखोरी के खिलाफ लगभग एक हजार से अधिक विद्यालयों में लगभग पांच लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के साथ युवा संवाद के माध्यम से जागरुकता लाने वाले अधिवक्ता ललित जोशी, विभिन्न राज्यों से चयनित 9 बेटियों तथा कवयित्री गौरी मिश्रा एवं मशहूर एंकर रोहित सरदाना व अमीश देवगन आदि भी शामिल रहे।
यूथ आईकॉन अवार्ड का शुभारंभ वित्त मंत्री प्रकाश पंत और कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने किया। अवार्ड समारोह की शुरूआत गणेश वंदना के साथ हुई। हिल फाउंडेशन स्कूल के बच्चों ने शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए देश की प्रसिद्ध कवियत्री गौरी मिश्रा को सम्मानित किया गया। फिल्म जगत में कसम टीवी सीरियल के नायक ऋषि को सम्मानित किया गया। पत्रकारिता के क्षेत्र में अमीष देवगन, रोहित सरदाना, राष्ट्रीय सहारा के रजपाल बिष्ट, विनोद मुसान व अविकल थपलियाल को, लोक बोली-भाषा में लेखन और रचनात्मक पत्रकारिता के लिए प्रदीप रावत रवांल्टा को, चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. मंजरी शाह व डॉ. हरीश घिल्ड़ियाल, पर्यावरण के क्षेत्र में गुलमोहर गर्ल तनुजा जोशी, तिहाड़ जेल में बंद कैदियों के बनाए कपड़ों को पहनकर और खादी इंडिया को प्रमोट करने के लिए तनीषा, गायिकी की क्षेत्र में हरियाणा की बेटी विधि देशवा के साथ ही गुजरात की लेडी बिल्डर से लेकर कश्मीर ही नहीं पूरी दुनिया में यंगेस्ट किक बॉक्सिंग चौंपियन को भी यूथ आईकॉन अवार्ड से सम्मानित किया गया। साथ ही उद्यमिता के क्षेत्र में बेहतर काम करने एवं नशे के आदि हो चुके युवाओं को उनकी भटकी राह से उबारने के लिए उत्तराखंड के ललित जोशी को सम्मानित किया गया।
यूथ आईकॉन अवार्ड के संस्थापक निदेशक शशिभूषण मैठाणी ने कहा कि यूथ आईकॉन अवार्ड उन चुनिंदा लोगों को दिया जाता है, जो विभिन्न क्षेत्रों में उदाहरण पेश करते हैं। संरक्षक पद्मश्री डॉ. आरके जैन ने कहा कि यूथ आईकॉन का मतलब यह नहीं कि यह पुरस्कार केवल युवाओं को दिया जाएगा। यह पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है, जो युवाओं के लिए आदर्श स्थापित करते हैं। संस्था अध्यक्ष डॉ. कुड़ियाल ने कहा कि यूथ आईकॉन नेशन अवार्ड पूरे देश में अलग पहचान रखता है। हमारा प्रयास है कि जो भी युवाओं के लिए प्रेरणा का काम कर रहे हैं, उनको इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। आने वाले सालों में पुरस्कार राजनीति के क्षेत्र में भी दिए जाने पर विचार किया जाएगा।
इस अवसर पर कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि समाज में मुकाम हासिल करने वाले ही पुरस्कार के हकदार होते हैं। वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि समाज में काम सभी करते हैं, लेकिन जो सबसे हटकर काम करता है, वहीं श्रेष्ठ होता है और पुरस्कार हासिल करता है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि यूथ आईकॉन अवार्ड राजनीति के क्षेत्र में भी दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम में मशहूर नृत्यांगना आरुषी पोखरियाल समेत कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं।

इन बेटियों को भी मिला सम्मान:

1- ताजमूल इस्लाम – जम्मू एवं कश्मीर

2- विधि देशवाल – हरियाणा (गायिका प्रसिद्धि मिली, बता मेरे यार सुदामा रे…)

3- कुहू गर्ग – उत्तराखंड की अन्तराष्ट्रीय बैडमिन्टन खिलाड़ी।

4- डॉ. मंजरी शाह – दिल्ली, चिकित्सा सेवा में कैंसर विशेषज्ञ।

5- सोनिका (आईएएस) – डीएम टिहरी, टेलीमेडिसिन सेवा पहाड़ में शुरू करने पर।

6- साक्षी विद्यार्थी – कानपुर, देशभर से समाज में शोषित, पीड़ित वंचित महिलाओं की आवाज।

7- तनुजा जोशी – हल्द्वानी, शहर को गुलमोहर से खूबसूरत बनाने की पहल पर्यावरण संरक्षण के लिए।

8- सारा बेन मकवाना – गुजरात, सौराष्ट्र ,लेडी बिल्डर (भवन निर्माण में बड़ा नाम अध्यक्ष चैम्बर ऑफ कॉमर्श।

9- गौरी मिश्रा -कारगिल में सबसे कम उम्र में सैनिकों के बीच काव्य पाठ करने का गौरव, प्रतिष्ठित कवि।

10- तनिषा मानसेरा – डिजायनर, तिहाड़ जेल में कैदियों के द्वारा बनाए कपड़ों को प्रोत्साहन।

11- शिल्पा भट्ट बहुगुणा – विदेश में पढ़ाई छोड़ स्वदेश में काम करना पसंद किया, पिज्जा बाईट स्टोर की मालिक।

इन्हें भी मिले पुरस्कार:

12- शरद मल्होत्रा – टेलीविजन की दुनिया में जाना माना नाम, कम उम्र में बड़ी उपलब्धियां आपके नाम हैं। शरद बोलीवुड में चमकता सितारा हैं।

13- गोविन्द सिंह महर – बदरीनाथ धाम में स्थानीय उत्पादों से परसाद सेवा को बढ़ावा, बंजर खेती को उपजाऊ बनाना।
14- ललित जोशी-उत्तराखण्ड के सैकड़ों स्कूलों में लाखों युवाओं को नशाखोरी के खिलाफ जागरूक कर चुके है।

पूर्व समाचार : बागेश्वर के ललित जोशी को मिलेगा इस वर्ष का यूथ आइकॉन अवार्ड, जानें संघर्ष की दास्तान…

  • अपने विशेष सामाजिक जन-आंदोलन की वजह से युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गये हैं ललित
  • आगामी 11 नवम्बर 2018 को देहरादून में होंगे सम्मानित होंगे

नैनीताल, 15  अक्तूबर 2018। बागेश्वर जनपद के छोटे से गांव हरखोला में जन्मे 32 वर्षीय ललित मोहन जोशी पुत्र रमेश चंद्र जोशी को इस वर्ष का यूथ आइकॉन अवार्ड देने की घोषणा हुई है। अपने विशेष सामाजिक जन-आंदोलन की वजह से युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गये ललित को आगामी 11 नवम्बर 2018 को देहरादून में सम्मानित किया जाएगा। उनके संघर्ष की कहानी साबित कर रही है कि उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार क्यों दिया जा रहा है।
बागेश्वर के एक दूरस्थ गांव में साधारण परिवार में जन्मे ललित ने कक्षा 8 तक स्थानीय शिशु मंदिर और विद्यामंदिर से करने के बाद मोती राम बाबू राम इंटर कॉलेज हल्द्वानी से 10वीं एवं 12वीं विज्ञान वर्ग से उत्तीर्ण की, और आगे हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविालय के गुरुरामराय कॉलेज देहरादून से स्नातक तथा बाद में एमबीए आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी देहरादून से तथा उत्तराखण्ड टेक्निकल यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई की है।
ललित के संघर्ष की कहानी हाईस्कूल की पढ़ाई से ही शुरू हो जाती है। इस दौरान ही घर की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण उन्होंने छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया। हाईस्कूल की परीक्षा देने के बाद वे टनकपुर में अपने चाचा कांतिबल्लब जोशी के पास आ गये, और अपने घर वालों को बताये बिना यहां पूर्णागिरि मंदिर में प्रसाद बेचना शुरू किया। प्रसाद बेचकर ही उन्होंने पहली बार अपने मेहनत से साइकिल खरीदी। इसके बाद देहरादून आने पर भी वे घर से कोई धनराशि लेने के बजाय स्वयं ट्यूशन पढ़ा कर अपने खर्चे जुटाने लगे। इस दौरान उन्होंने टाइपिंग शॉर्टहैंड भी सीखी और पत्रकारिता से भी जुड़ गये। उनका अपना ‘सजग इंडिया’ नाम का यूट्यूब चैनल भी है, जिसके माध्यम से वह अपने सामाजिक अभियानों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करते हैं।
ललित बताते हैं कि उन्होंने कुछ सालों तक 7 देशों में प्राईवेट नौकरी भी की और बाद में उसे भी छोड़कर अपने प्रदेश के लिए कुछ करने की मंशा के साथ अपने मूल उत्तराखंड लौट आये। मन में था कि अपने प्रदेश के युवाओं का शारारिक व मानसिक स्तर ऊंचा करने के लिए कुछ कर सकें। उनके मन में सबसे बड़ी चिंता यह थी कि उत्तराखंड के अधिसंख्य युवा स्कूल के समय से ही नशे की लत में पड़ रहे हैं जिससे उसकी मानसिक और शारारिक क्षमताएं शून्य की ओर जा रही हैं। लेकिन युवाओं को अपना भविष्य का अंधेरा दिखाई नहीं दे रहा है। यही सोचकर उन्होंने व्यापक स्तर पर युवाओं को नशे के प्रति जागरूक करने के लिए युवाओं के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए प्रेरणास्पद संवाद प्रारम्भ किया।
बताया गया है कि ललित युवाओं में बढ़ती नशाखोरी को लेकर अब तक 800 स्कूलों में जाकर हजारों युवाओं को समाज मे फैल रहे सामाजिक कुरूतियों के खिलाफ बिगुल फूकने के लिए प्रेरित कर चुके हैं। वह युवाओं को जहां एक ओर व्यशनमुक्त रहने के लिए आह्वान करते हैं, वहीं अभाव में रहकर कठोर परिश्रम, लगन, मेहनत और सकारात्मक ऊर्जा के साथ अनुशासन मे रहकर अपनी मंजिल को पाने के उपाय भी सुझाते हैं। देहरादून में अपना शिक्षण संस्थान खोलकर वे अब तक 700 से अधिक युवाओं को हॉस्पिटैलिटी ओर टूरिज्म के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में रोजगार देने व स्वउद्यमी बनाने का प्रयास भी कर रहे हैं। साथ ही हर साल 30 से अधिक अनाथ बच्चों को निशुल्क पढ़ाकर अभी तक 250 अनाथ बच्चों का सहारा भी बन चुके हैं। अपने सरल व्यक्तित्व और सकारात्मक सोच की वजह से आज राज्य, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर में अनेक सम्मान प्राप्त कर चुके ललित जोशी 32 वर्ष की आयु में पूरे युवाओं के लिए मिसाल भी बन चुके है। वे पहाड़ की संस्कृति और सभ्यता को बचाने के लिए कूर्मांचल परिषद, गढ़वाल परिषद सहित कई संगठनों से भी जुड़े हुए है और पर्वतीय रामलीला कमेटी देहरादून के बैनर तले 2010 से 2014 तक राम का अभिनय कर उन्होंने देहरादून में अपनी अलग पहचान भी बनाई है। वे हर साल 3 महीने पहाड़ों में स्वयं के खर्चे में स्कूलों में युवाओं को सेना, सरकारी नौकरी, मेडिकल, नेवी, पुलिस व पैरामेडिकल क्षेत्र में जाने के लिए प्रेरित भी करते रहते हैं।

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पौड़ी, 3 सितंबर 2018। उत्तराखंड का एक 6 वर्ष का बच्चा अपनी जान जोखिम में डालकर खूंखार गुलदार से भिड़ गया। अब राज्य ने राज्य से केवल उसका नाम दूसरों की जान बचाने में मदद करने के लिए उत्तराखंड राज्य बाल कल्याण परिषद ने राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार-2018 के लिए दिल्ली भेजा है। खास बात यह भी है कि यह बच्चा दो भाइयों और एक बहन में मंझला है। उसके घर का गुजारा पिता की दिहाड़ी मजदूरी से होता है।
यह बच्चा है राज्य के पौड़ी जिले के दूरस्थ ग्राम मुणगांव पोस्ट ऑफिस भृगुखाल निवासी रमनदीप पुत्र उदयवीर सिंह। इस वर्ष एक अगस्त को अपने घर के बाहर खेलते समय गुलदार ने रमनदीप पर हमला कर दिया था। सूझबूझ और समझदारी का परिचय देते हुए रमनदीप ने शोर मचाकर खुद को गुलदार के चंगुल से छुड़ाया और भगा दिया। इसके बाद रमन को उपचार के लिए कोटद्वार अस्पताल ले जाया गया। बहादुरी और साहस का यह परिचय देने वाले रमनदीप राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए उत्तराखंड से एकमात्र आवेदक बना है। जिसको राज्य बाल कल्याण परिषद की महासचिव पुष्पा मानस ने राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए संस्तुति दी। उल्लेखनीय है कि एक जुलाई 2017 से 30 जून 2018 के बीच वीरता का कार्य करने वाले छह से 18 साल तक के बच्चे इस पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकते थे। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार पाने वाले बहादुर बच्चों को राष्ट्रीय पुरस्कार में नकद राशि, प्रशस्ति पत्र के साथ-साथ नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस की परेड में भाग लेने और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, तीनों सेनाध्यक्ष, दिल्ली के मुख्यमंत्री मिलने का अवसर मिलता है। अब तक उत्तराखंड के 12 बच्चों को राष्ट्रीय स्तर पर वीरता पुरस्कार मिल चुका है। जबकि इधर पिछले चार सालों में केवल 11 बच्चों ने आवेदन किया था। 2015 और 2017 में चार-चार, 2016 में तीन, जबकि इस साल केवल एक बच्चे ने आवेदन किया। 2015 में टिहरी के अर्जुन सिंह, 2016 में देहरादून के सुमित ममगाईं और 2017 में टिहरी के पंकज सेमवाल को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजा गया है।

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देवप्रयाग, 2 अक्टूबर 2018। राजकीय महाविद्यालय देवप्रयाग एनएसएस का छात्र गणतंत्र दिवस परेड में राजपथ पर कदमताल करते दिखेगा। राष्ट्रीय स्तर पर एनएसएस दल की परेड के लिए उत्तराखंड से चयनित चार स्वयं सेवियों में अजीत सिंह का नाम शामिल किया गया है। राजकीय महाविद्यालय देवप्रयाग में बीए तृतीय सेमिस्टर का छात्र अजीत सिंह देवप्रयाग के निकट रुणासारी (गोर्थीकांड) गांव का निवासी है। सैन्य परिवार से जुड़ा न होने बावजूद अजीत ने कड़ी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है। अपनी पढ़ाई और रोजी-रोटी का खर्चा जुटाने के लिए अजीत देवप्रयाग स्थित एक होटल में काम करता है। उसके पिता गब्बर सिंह भी यहीं होटल में कुक का कार्य करते हैं। राइंका देवप्रयाग में इंटरमीडियट तक एनसीसी के कैडेट रहे अजीत ने महाविद्यालय में एनसीसी न होने के बावजूद अपना अभ्यास जारी रखा। होटल में काम के साथ पढ़ाई व एनएसएस से जुड़ी सभी गतिविधियों में अजीत पूरी भागीदारी करता है। वह सुबह चार बजे उठकर दौड़ व खेल में भाग लेता है। होटल में साफ-सफाई करने के बाद वह पढ़ाई के लिए करीब आठ किमी. पैदल महाविद्यालय आता-जाता है। कॉलेज के बाद करीब रात 11 बजे तक होटल के कार्यों को निपटाता है। गढ़वाल, कुमांऊ, देहरादून व हरिद्वार के तीनों जोनों के बाद एनएसएस के क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ से अजीत का चयन 26 जनवरी की परेड के लिए हुआ है। परेड के लिए चयनित स्वयं सेवकों को रांची में प्रशिक्षण दिया जाएगा। राजकीय महाविद्यालय देवप्रयाग के एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अशोक मैंदोला को रांची में होने वाली गणत्रंत दिवस अभ्यास परेड का उत्तराखंड टीम लीडर चुना गया है। महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. सुधा भारद्वाज, शिक्षकों, कर्मचारियों व छात्र-छात्राओं ने इसे महाविद्यालय के गौरव की बात बतायी है।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष कुमाऊं विश्वविद्यालय से केवल एक, लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय हल्दूचौड़ का छात्र ही एनएसएस पर होने वाली गणतंत्र दिवस परेड के लिये चयनित हुआ है।

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-नगर के युवाओं ने किया कारनामा, करीब आठ मिनट की फिल्म ‘एक दूर घटना” को छोटी फिल्मों की श्रेणी के पुरस्कारों के लिए भेजने की कोशिश भी
नवीन जोशी, नैनीताल। सरोवरनगरी को कला की नगरी भी यूं ही नहीं कहा जाता। एक अभिनेता होते हुए सात समुंदर पार कांस फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतने वाले स्वर्गीय निर्मल पांडे तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक बीएम शाह तथा गीत एवं नाटक प्रभाग के निदेशक मटियानी की धरती के चार युवाओं ने बीती गुड फ्राइडे की एक दिन की छुट्टी का उपयोग करते हुए अपने मोबाइल फोन से पूरी फिल्म बनाने का संभवतया देश-दुनिया में पहला सफल प्रयोग कर डाला है। सात मिनट की इस फिल्म को अब छोटी फिल्मों की श्रेणी में पुरस्कारों के लिए भेजने की तैयारी चल रही है। 

मुंबई फिल्म उद्योग एवं छोटे परदे में भी अपनी अभिनय कला का प्रदर्शन कर चुके तथा वर्तमान में एनआरएचएम के जिला परियोजना प्रबंधक पद पर कार्यरत मदन मेहरा ने अपने अन्यत्र कार्यरत कलाकार साथियों, मुख्यत: अनवर रजा, मुकेश धस्माना व पवन कुमार के साथ ‘एक दूर घटना” नाम से बनाई गई यह फिल्म केवल सात मिनट 41 सेकेंड की है, और इसकी शूटिंग पूरी तरह से एचटीसी डिजायर-820 मॉडल के मोबाइल फोन से नगर की कैमल्स बैक पहाड़ी के रास्ते पर व कुछ हिस्सा हनुमानगढ़ी के पास की गई है। श्री मेहरा ने बताया कि पूरी फिल्म की शूटिंग एक दिन में ही करीब दो-तीन घंटे शूटिंग करके तथा बाद में कंप्यूटर पर एडिट करके बनाई गई है। फिल्म एक मोटरसाइकिल दुर्घटना से शुरू होती है, जिसमें चालक की मौत हो जाती है। बाद में इस घटना के लिए जिम्मेदार तीन दोस्तों की अपराधबोध के साथ लौटने के दौरान रहस्यमय तरीके से मौत हो जाती है। आखिर में फिल्म संदेश देती है कि कोई भी घटना केवल स्वयं तक सीमित नहीं होती वरन, स्वयं में एक अतीत, वर्तमान और भविष्य भी समेटे रहती है। इस प्रकार छोटी सी फिल्म में रहस्य, रोमांच युक्त दृश्यों के साथ एक कसी हुई कहानी, पटकथा, सिनेमेटोग्राफी तथा संगीत आदि का भी बेहतर तालमेल दिखाई देता है। दिनेश बोरा,अनूप बमोला, एसके श्रीवास्तव आदि ने भी फिल्म निर्माण में सहयोग दिया है।

नैनीताल के नौवीं कक्षा के छात्र ने गलत ठहराए न्यूटन के नियम !

नवीन जोशी नैनीताल। दुनिया को गुरुत्वाकर्षण का वैज्ञानिक सिद्धांत देने वाले सर आइजेक न्यूटन ने वास्तव में बल के कौन से तीन नियम दिये थे, इस पर विवाद हो सकता है। पर बच्चों को स्कूली पुस्तकों में जो पढ़ाया जा रहा है, उस पर नगर के नौवीं कक्षा के एक होनहार छात्र अभिषेक अलिग ने सवाल उठाये हैं। अभिषेक का कहना है कि न्यूटन के पहले यानी ‘जड़त्व के सिद्धांत’ के नियम में बल की दिशा का कोई जिक्र नहीं है, जबकि बल एक सदिश यानी वैक्टर राशि है। बल की दिशा का जिक्र किये बिना न्यूटन के सिद्धांत का प्रयोग किसी भी दशा में नहीं किया जा सकता, जबकि प्रयोग के बिना वैज्ञानिक सिद्धांत का कोई अर्थ ही नहीं है। वहीं तीसरा सिद्धांत निर्वात की स्थिति में लागू नहीं हो सकता है। 
अभिषेक नगर के सेंट जोसफ कालेज का छात्र है। रसायन, भौतिकी और गणित विषयों की उसमें विलक्षण तर्क की क्षमता नजर आती है। वह इन विषयों में हमेशा कक्षा में प्रथम भी रहता है और अपने से बड़ी कक्षाओं के छात्रों से भी तर्क करता है। विज्ञान को तकरे की कसौटी पर कसने की जैसे उसे धुन सवार है। इसके लिए वह विज्ञान की विदेशी भाषाओं की पुस्तकों और इंटरनेट पर भी खूब अध्ययन करता है। 
 
अपनी आईसीएसई बोर्ड की नौवीं कक्षा की पुस्तक में प्रकाशित न्यूटन के पहले नियम पर सवाल उठाते हुए उसका कहना है कि यह नियम कहता है कि किसी पिंड पर जब तक कोई बाहरी बल न लगाया जाये तब तक उसकी स्थिति में परिवर्तन नहीं आ सकता। यानी यदि पिंड कहीं पर स्थिर रखा है तो वह कोई बल लगाने तक गतिमान नहीं हो सकता, साथ ही यदि वह गतिमान है तो बल लगाये बिना रुक नहीं सकता। अभिषेक के अनुसार इस नियम में बल की दिशा का कोई उल्लेख नहीं है, साथ ही यह भी नहीं कहा गया है कि यह नियम हर दशा में प्रभावी रहता है या निर्वात में। क्योंकि बल बिना दिशा के लगाया ही नहीं जा सकता, क्योंकि बल एक सदिश राशि है। बिना दिशा के बल का कोई औचित्य नहीं है। न्यूटन विज्ञान के इस सामान्य से सिद्धांत से अनभिज्ञ थे अथवा पुस्तकों में गलत पढ़ाया जा रहा है। इंटरनेट पर न्यूटन के नियम में बल की जगह ‘नेट फोर्स’ यानी शुद्ध बल शब्द का प्रयोग किया गया है। यहां शुद्ध शब्द भी बड़ा अंतर पैदा करता है। शुद्ध बल में पिंड पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण, घर्षण एवं पिंड के स्वयं के भार से उत्पन्न स्थैतिक जैसे सभी बल भी शामिल होते हैं। इन बलों के कारण ही एक दशा तक किसी पिंड को एक कम क्षमता का बल लगाकर भी स्थिर से गतिमान या गतिमान से स्थिर नहीं किया जा सकता। अभिषेक खासकर इस बात पर भी सवाल उठाता है कि किसी स्थिर पिंड पर यदि ऊपर या नीचे की दिशा से बल लगाया जाये तो उसे गतिमान नहीं किया जा सकता है, तो ऐसे में न्यूटन का प्रथम सिद्धांत कैसे माना जा सकता है। वह इस बात से भी इत्तेफाक नहीं रखता कि बल के साथ दिशा का जिक्र ना करना एक सामान्य वैज्ञानिक तथ्य मानकर शामिल न किया जाता हो, क्योंकि न्यूटन के दूसरे सिद्धांत में बल की दिशा का साफ-साफ जिक्र किया जाता रहा है। अभिषेक यह भी मानता है कि न्यूटन ने संभवतया लैटिन भाषा में जो नियम प्रतिपादित किया, उनमें बल के साथ दिशा का भी जिक्र हो, किंतु स्कूली पुस्तकों में यह शब्द हटा दिये गये। यदि ऐसा है तो यह देश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली बात है कि क्यों बच्चों को गलत पढ़ाया जा रहा है। विशेषज्ञ कुछ हद तक सहमत : अभिषेक के तर्क से कुमाऊं विवि के भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. हरीश चंद्र चंदोला भी काफी हद तक सहमत नजर आते हैं। हालांकि उनका कहना है कि वास्तव में न्यूटन के नियम में बल के साथ दिशा का जिक्र रहा है। वह बताते हैं न्यूटन के नियम ऐसी आदर्श स्थिति के लिए हैं, जिसमें अन्य किसी प्रकार के बलों के न होने की कल्पना की गई है। ऐसा वास्तविक स्थितियों में संभव नहीं होता। उन्होंने माना कि बच्चों के पाठय़क्रम में उन परिस्थितियों का जिक्र किया जाना भी जरूरी है, जिनमें वह लागू होते हैं।

12वीं के छात्र ने जूते में बनाया डायनेमो, 500 रुपये में तैयार हो जाएगा उपकरण 

ल्मोड़ा के रवि टम्टा नैनीताल के राजकीय इंटर कालेज में महज 12वीं के छात्र हैं। पिता एक साधारण से मोटर मैकेनिक। पिता की देखा-देखी गाड़ियों के कल-पुजरे को तोड़ते-जोड़ते उन्होंने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया जो बड़े-बड़ों को दांतों तले उंगुली दबाने को मजबूर कर दे। पिछले महीने नैनीताल में बर्फबारी के दौरान बिजली क्या गुल हुई, रवि के दिमाग की बत्ती जल उठी। उन्होंने जूतों में एक ऐसा ‘डायनेमो’ फिट कर दिखाया जिससे चलते-फिरते बिजली पैदा हो सकती है। इस बिजली से मोबाइल को रिचार्ज किया जा सकता है तो 20 वाट का सीएफएल भी रोशन हो सकता है। पांव तले बने इस छोटे से पावर हाउस की बिजली को बैटरी में स्टोर कर जरूरत के अनुसार इस्तेमाल भी किया जा सकता है।  वह कहता है, मैं दुनिया को ऐसा कुछ देना चाहता हूं जिसके बारे में अब तक किसी ने सोचा तक न हो। पेश है रवि टम्टा से बातचीत के अंश :

सुना है आपने कोई नई खोज की है। क्या खोज की है, विस्तार से बताएं ? 

मैने केवल 500 रुपये खर्च कर जूते में ऐसा प्रबंध किया है कि इससे चलते-फिरते बिजली पैदा की जा सकती है। जूते में स्प्रिंग, घूमती हुई गति से बिजली पैदा करने वाले डायनेमो और चुंबकों को इस तरह लगाया है कि स्प्रिंग चलते समय कदमों से बनने वाले दबाव से डायनेमो को करीब 50 चक्कर घुमा देता है। दो चुंबकों के उत्तरी ध्रुवों को साथ रखकर उनके एक -दूसरे से दूर जाने के गुण का लाभ लेते हुए डायनेमो को पांच-छह अतिरिक्त चक्कर की अधिक गति देने का प्रयोग किया है। इस तरह एक किमी चलने से इतनी बिजली बन जाती है कि मोबाइल फोन रिचार्ज हो सके। जूते में पैदा हुई बिजली को स्टोर करने के लिए रिचार्जेबल बैटरी भी है। इससे बिजली का प्रयोग बाद में किया जा सकता है। 
आपकी यह खोज कितनी उपयोगी हो सकती है ?
हमारे जीवन में बिजली की खपत बढ़ी है। बिजली आपूर्ति के लिए गैर परंपरागत ऊर्जा श्रोतों की लगातार तलाश है। देश में हर व्यक्ति बहुत चलता है। गरीब पेट भरने और अमीर मोटापा रोकने के लिए काफी चलते हैं। ऐसे में मेरा प्रयोग बेहद लाभप्रद हो सकता है। आपको इस खोज का विचार कहां से आया। आपने कितने समय में इसे कर दिखाया ? करीब एक माह पहले नैनीताल में बर्फ गिरी थी। इस दौरान तीन दिन बिजली गायब रही। मेरा मोबाइल डिस्चार्ज हो गया। मैंने सोचा कि जब गाड़ियों में चलते-फिरते बिजली पैदा कर रोशनी और मोबाइल रिचार्ज किया जा सकता है तो पैदल चलने से बिजली पैदा हो सकती है। करीब एक माह के प्रयास से मेरा प्रयोग सफल हो गया। गांवों में महीनों बिजली गायब रहती है। पहाड़ों पर लोगों को बहुत पैदल चलना पड़ता है। मेरे बनाए जूतों से लोग जरूरत की बिजली बना सकते हैं। 
अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में कुछ बताएं ? 
मैं मूलत: अल्मोड़ा जनपद के काफलीखान का रहने वाला हूं। वहां मेरे पिता श्री हरीश चंद्र टम्टा का ऑटो गैराज है। बचपन से पिता के साथ गैराज में हाथ बंटाता हूं। मेरे पिता ने ऑटोमोबाइल से आईटीआई किया है। वे अक्सर नये प्रयोग करते रहते हैं। उन्हीं की देखा-देखी मैं भी नई-नर्इ खोजों के बारे में सोचता रहता हूं। मैं तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा हूं। बड़े भाई पॉलीटेक्निक से डिप्लोमा कर रहे हैं। बड़ी बहन का विवाह हो चुका है। नैनीताल में चाचा के साथ रहकर मेजर राजेश अधिकारी राजकीय इंटर कालेज में 12वीं में पढ़ रहा हूं। 
और भी नई खोज करने की योजना है ? 
2008 से मैं वाहनों को हादसों से बचाने के प्रयोग पर कार्य कर रहा हूं। इसे मैं प्रायोगिक तौर पर कागज पर साबित कर भी चुका हूं। किसी वाहन पर इसे प्रदर्शित करने के लिए काफी बड़ी धनराशि चाहिए। मैंने ‘घोंघे’ से प्रेरणा ली है। वह दो नाजुक सींग सरीखे अंगों से रास्ते का अनुमान लगाता है और पतली सींक पर नहीं गिरता। मेरी खोजयुक्त गाड़ी के टायरों में ऐसा प्रबंध होगा कि वे कीचड़ या पथरीली सड़कों पर नहीं फिसलेगी। प्रयोग की सफलता तक मैं अधिक खुलासा नहीं कर सकता। मैं ऐसी प्रविधि विकसित करने की राह पर भी हूं जिससे जीवन में काफी कुछ सीख चुके मृत व्यक्तियों के मस्तिष्क को बच्चों में प्रतिस्थापित किया जा सकेगा। इससे बच्चे उस व्यक्ति के बराबर ज्ञानयुक्त होंगे। आगे उनके जीवन में मस्तिष्क लगातार सीखता रहेगा। इस प्रकार मानव मस्तिष्क समृद्ध होता चला जाएगा। मुझे पता चला है कि रोबोट में कुछ इस तरह का प्रयोग किया जा चुका है पर मेरा प्रयोग मनुष्यों में होगा। 
आपको ऐसी नई खोजों की प्रेरणा कहां से मिलती है, कौन मदद करते हैं ?
मेरे पिता मेरे प्रेरणा श्रोत हैं। स्कूल में भौतिकी प्रवक्ता श्याम दत्त चौधरी से भी मदद मिलती है। मैं रात्रि में केवल तीन-चार घंटे ही सोता हूं। स्कूल के अलावा हर रोज दो घंटे होमवर्क आदि के बाद मेरा पूरा समय अपनी खोजों के बारे में सोचने में ही जाता है। कई बार रात में सोते हुए सपने में भी मैं स्वयं को कुछ नया करते हुए पाता हूं। इस कारण हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में मैं केवल 55 फीसद अंक ही प्राप्त कर पाया। 
भविष्य में क्या बनना चाहते हैं, सरकार से कोई अपेक्षा ? 
मैं भविष्य में कुछ नया करना चाहता हूं। पिता का ऑटो गैराज अच्छा चलता है। मुझ पर पैसे कमाने की जिम्मेदारी नहीं है। मैं नौकरी नहीं करना चाहता। मेरा लक्ष्य दुनिया को कुछ नया देना है। अपनी सोच को वहां पहुंचाना चाहता हूं जहां कोई न पहुंचा हो। कोई जूते बनाने वाली कंपनी मेरी बिजली बनाने वाली खोज को आगे बढ़ाए तो ठीक, वरना मैं अपनी ऐसी जूता फैक्टरी खोलने पर विचार कर सकता हूं। सरकार से भी मेरी इस खोज के बाबत कोई अपेक्षा नहीं है। वाहनों को दुर्घटना से बचाने वाली खोज में लाखों रुपये की जरूरत पड़ेगी। उसमें कोई मदद करे तो जरूर स्वीकार करूंगा।
प्रस्तुति :  नवीन जोशी

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