नवीन समाचार, देहरादून, 28 दिसंबर 2025 (Rishikesh-Violent Protests)। उत्तराखंड के देहरादून जनपद अंतर्गत ऋषिकेश क्षेत्र में वन भूमि चिन्हीकरण की कार्रवाई के विरोध में रविवार को हालात तनावपूर्ण हो गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वन विभाग द्वारा खाली पड़ी भूमि की पहचान, साइनबोर्ड लगाने और जियो टैगिंग की प्रक्रिया शुरू होते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम से आगे बढ़ते हुए भीड़ रेलवे ट्रैक पर बैठ गई, जिससे श्रीगंगानगर एक्सप्रेस सहित कई रेल सेवाएं प्रभावित हुईं। पुलिस द्वारा ट्रैक खाली कराने के प्रयास में पथराव हुआ, जिसके बाद लाठी फटकार कर भीड़ को हटाया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन, कानून व्यवस्था और आम नागरिकों के बीच संवाद की कमी को एक बार फिर उजागर किया है।
वन भूमि चिन्हीकरण के विरोध में बढ़ा जन आक्रोश
ऋषिकेश क्षेत्र के शिवाजीनगर, बापूग्राम, सुमन विहार, नंदूफार्म, अमितग्राम और रूषा फार्म में वन विभाग की टीमें खाली प्लॉटों की सूची तैयार कर साइनबोर्ड लगाने और जियो टैगिंग में जुटी हैं। वन विभाग को इस संबंध में पांच जनवरी 2026 तक अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करनी है। इसी प्रक्रिया को लेकर स्थानीय लोग आशंकित हैं और उन्हें अपने आवासीय भविष्य पर संकट दिखाई दे रहा है। लोगों का कहना है कि वर्षों से बसे क्षेत्रों को अचानक वन भूमि बताकर चिन्हित किया जा रहा है, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हो सकते हैं।
सड़क से रेल मार्ग तक फैला विरोध
रविवार सुबह करीब दस बजे अमितग्राम में छह नंबर गली के बाहर बाईपास मार्ग पर प्रदर्शन शुरू हुआ। कुछ ही देर में बाईपास मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इसके बाद भीड़ मनसा देवी फाटक की ओर बढ़ी और वहां जाम लगा दिया। हालात तब और गंभीर हो गए जब सैकड़ों लोग, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं, रेलवे ट्रैक पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भूमि बचाने के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। इस दौरान हरिद्वार से योगनगरी ऋषिकेश आ रही अहमदाबाद मेल को पुलिस ने किसी तरह आगे रवाना कराया, लेकिन श्रीगंगानगर एक्सप्रेस को मनसा देवी फाटक के पास करीब पौने तीन घंटे तक रोके रखना पड़ा।
पुलिस कार्रवाई, पथराव और रेल यातायात पर असर
दोपहर करीब साढ़े तीन बजे तक ट्रैक खाली नहीं हो सका। पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल ने लोगों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर समझाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ हटने को तैयार नहीं हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को लाठी फटकारनी पड़ी। इसी दौरान भीड़ की ओर से पुलिस पर पथराव हुआ, जिससे अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद भीड़ तितर-बितर हुई और रेल यातायात बहाल किया जा सका। योगनगरी ऋषिकेश स्टेशन से आने-जाने वाली अन्य ट्रेनें भी प्रभावित रहीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पूरे विवाद की पृष्ठभूमि और आगे क्या
यह मामला ऋषिकेश क्षेत्र की लगभग 2866 एकड़ भूमि से जुड़ा है, जो वर्ष 1950 में 99 वर्ष की लीज पर पशुलोक सेवा मंडल संस्थान को दी गई थी। लीज की शर्तों के अनुसार भूमि का उपयोग पशुपालन, उद्यान और चारा उत्पादन के लिए होना था, लेकिन समय के साथ इसके व्यावसायिक उपयोग और उपलीज के आरोप सामने आए। इन्हीं तथ्यों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने वन भूमि पर अवैध कब्जों की जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए। शासन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो दस्तावेजों की जांच, स्थलीय निरीक्षण और आधुनिक तकनीक के माध्यम से भूमि की स्थिति का आकलन कर रही है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पांच जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई तक लोगों को धैर्य रखने की आवश्यकता है और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने के लिए समिति बनाई जाएगी। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और वन मंत्री से सीधे जन संवाद की मांग करते हुए विशेष कानून के माध्यम से वर्षों से बसे क्षेत्रों को अधिकार देने की अपील की है। अब देखना यह है कि प्रशासन और शासन इस संवेदनशील मुद्दे पर संतुलित समाधान कैसे निकालते हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
