नवीन समाचार, देहरादून, 2 मई 2026 (Uttarakhand-69 Teachers Dismissed)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के शिक्षा विभाग (Education Department) से एक बड़ी और कठोर कार्रवाई का समाचार प्राप्त हुआ है। राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत 69 शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त (Dismissed) कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि यह निर्णय उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court) के अंतिम आदेश के अनुपालन में लिया गया है। इस कार्रवाई से शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है, क्योंकि बर्खास्त किए गए शिक्षक प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पिछले कुछ वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अपर शिक्षा निदेशक (Additional Director of Education) केएस रावत (KS Rawat) ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि यह प्रकरण वर्ष 2018-19 की शिक्षक भर्ती से संबंधित है। न्यायालय के आदेश के बाद विभाग ने इन शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं। बर्खास्त होने वाले शिक्षकों में रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ जैसे जनपदों के शिक्षक शामिल हैं।
नियमावली और 50 प्रतिशत अंकों का पेच
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार वर्ष 2018-19 में सहायक अध्यापक (Assistant Teacher) के पदों पर भर्ती के लिए जो नियमावली (Rules) निर्धारित थी, उसके अनुसार अभ्यर्थी के पास स्नातक (Graduation) में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक होने अनिवार्य थे। साथ ही अभ्यर्थी का बीएड (B.Ed.) उत्तीर्ण होना आवश्यक था। भर्ती प्रक्रिया के दौरान विभाग ने उन अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त (Cancel) कर दिए थे, जिनके स्नातक में 50 प्रतिशत से कम अंक थे।
विभाग की इस कार्रवाई के विरुद्ध कुछ अभ्यर्थी उच्च न्यायालय की शरण में चले गए थे। उस समय न्यायालय ने अंतरिम आदेश (Interim Order) देते हुए विभाग को निर्देश दिया था कि इन अभ्यर्थियों के आवेदन स्वीकार किए जाएं और इनकी नियुक्ति को न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन (Subject to final decision) रखा जाए। अब उच्च न्यायालय ने इस मामले में अपना अंतिम निर्णय सुना दिया है, जिसमें अर्हता पूरी न करने वाले इन शिक्षकों को सेवा में बने रहने के योग्य नहीं माना गया है।
विभिन्न जनपदों पर कार्रवाई का प्रभाव
रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) के जिला शिक्षा अधिकारी-बेसिक (District Education Officer-Basic) अजय चौधरी (Ajay Chaudhary) के अनुसार, जनपद में इस श्रेणी के कुल 15 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 5 अभ्यर्थियों ने पदभार ग्रहण नहीं किया था, जबकि शेष 10 शिक्षक सेवा में आ गए थे। न्यायालय के आदेश के क्रम में इन सभी 10 शिक्षकों की सेवाएं अब समाप्त कर दी गई हैं।
इसी प्रकार पौड़ी (Pauri), टिहरी (Tehri), पिथौरागढ़ (Pithoragarh) और ऊधमसिंह नगर (Udham Singh Nagar) जनपदों में भी कार्यरत ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कर उनकी बर्खास्तगी की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अर्हता संबंधी नियमों में किसी भी प्रकार की शिथिलता भविष्य में भी स्वीकार्य नहीं होगी।
जनगणना डयूटी से भी मुक्त किए गए शिक्षक
एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में विभाग ने सेवा समाप्ति के साथ ही इन शिक्षकों को अन्य सरकारी दायित्वों से भी तत्काल मुक्त कर दिया है। बताया गया है कि इनमें से कई शिक्षकों की वर्तमान में जनगणना (Census) ड्यूटी लगी हुई थी। सेवा समाप्त होने की सूचना मिलते ही संबंधित जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने इन्हें जनगणना कार्य से भी हटा दिया है।
यह मामला प्रदेश में शिक्षक भर्ती की सुचिता और मानकों के कड़ाई से पालन पर एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। जानकारों का मानना है कि इस निर्णय से उन अभ्यर्थियों को बल मिलेगा जो निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं और लंबे समय से नियुक्तियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हालांकि, अचानक हुई इस सामूहिक बर्खास्तगी से प्रभावित शिक्षकों के परिवारों पर आर्थिक संकट गहराने की संभावना है।
क्या आपको लगता है कि भर्ती के समय ही अर्हता की कड़ाई से जाँच न होना प्रशासनिक विफलता है, जिसका खामियाजा अब शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है? पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
