जमीन विवाद के आरोपों पर गदरपुर विधायक अरविंद पांडे ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग, डीजीपी से तीनों पक्षों का पॉलीग्राफ परीक्षण का आग्रह

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नवीन समाचार, देहरादून, 30 जनवरी 2026 (Arvind Pandey-Polygraph Test)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून (Dehradun) से प्रदेश की राजनीति और कानून-व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। उत्तराखंड (Uttarakhand) के उधम सिंह नगर (Udham Singh Nagar) जनपद के गदरपुर (Gadarpur) से भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के विधायक अरविंद पांडे (Arvind Pandey) ने अपने परिजनों पर लगे जमीन कब्जाने के आरोपों को लेकर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ (Deepam Seth, DGP Uttarakhand) से मुलाकात की।

(Arvind Pandey-Polygraph Test)इस दौरान उन्होंने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए , घटना के संबंध में तीनों पक्षों-जिन पर मुकदमा लगा है, जिन्होंने मुकदमा लिखवाया है और जो गवाह हैं का पॉलीग्राफ परीक्षण (Polygraph Test) कराए जाने हेतु कानूनी कार्यवाही की मांग की। जिससे स्पष्ट हो कि कौन गलत है और कौन सही। कहा-जो भी गलत सिद्ध हो, उसे सजा मिले और जो सही है, वह दोष मुक्त हो। पढ़ें पूर्व संबंधित समाचार :  गदरपुर से उठती ‘गदर’ की लहर, अरविंद पांडे के तेवरों से भाजपा में भीतरघात की चर्चाएं तेज, उनके विरुद्ध कार्रवाई पर भी लगी हैं नज़रें…

भूमि विवाद प्रकरण का मुख्य संदर्भ

गदरपुर विधायक अरविंद पांडे का नाम हाल के दिनों में एक भूमि विवाद को लेकर चर्चा में है। 20 जनवरी 2026 को बाजपुर (Bazpur) कोतवाली क्षेत्र में एक शिकायत के आधार पर विधायक के भाई देवानंद पांडे (Devanand Pandey) सहित चार व्यक्तियों के विरुद्ध जमीन हड़पने के आरोप में अभियोग दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता संजय बंसल (Sanjay Bansal), निवासी बहादुरगंज (Bahadurganj), ने आरोप लगाया कि उनकी मुंडिया पिस्तौर (Mundia Pistore) स्थित भूमि को फर्जी दस्तावेज और कथित किरायानामे के माध्यम से कब्जाने का प्रयास किया गया।

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शिकायत के अनुसार वर्ष 2025 में प्राधिकरण द्वारा संबंधित भूमि पर अवैध निर्माण को लेकर कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। संजय बंसल का कहना है कि मौके पर पहुंचे लोगों द्वारा उन्हें धमकी दी गई और उनके दस्तावेज फेंक दिए गए। इस पूरे प्रकरण ने न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पढ़ें पूर्व संबंधित समाचार :  प्राधिकरण के नोटिस के बाद नई समस्या : पूर्व मंत्री अरविंद पांडेय के भाइयों और भतीजों पर भूमि विवाद को लेकर अभियोग दर्ज, फर्जी किरायानामा बनाकर कब्जे की साजिश का आरोप 

डीजीपी से मुलाकात में विधायक की दलील

पुलिस मुख्यालय देहरादून में हुई मुलाकात के बाद विधायक अरविंद पांडे ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में किसी भी प्रकार की जांच से बचना नहीं चाहते। उनका कहना है कि मुकदमा सही है या गलत, इसका निर्णय निष्पक्ष जांच से ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उनके परिवार का कोई सदस्य दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

अरविंद पांडे ने यह भी कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक मुकदमे के अनुसार उन्हें और उनके परिजनों को भूमाफिया की संज्ञा दी जा रही है, जिसे वह एक सोची-समझी साजिश मानते हैं। उन्होंने जोर दिया कि नार्को और पॉलीग्राफ परीक्षण से सच्चाई सबके सामने आ सकेगी।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तराखंड में भूमि, खनन और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दे पहले से ही सार्वजनिक विमर्श में हैं। एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि द्वारा स्वयं परीक्षण की मांग करना राजनीतिक दृष्टि से असामान्य माना जा रहा है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में इस तरह की जांचें राजनीतिक विवादों में नया मानक बन सकती हैं।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रकरण भारतीय जनता पार्टी के आंतरिक समीकरणों और राज्य की राजनीति में चल रही हलचलों से भी जुड़ा हो सकता है। हाल के महीनों में अरविंद पांडे द्वारा सरकार और प्रशासन पर खुले तौर पर सवाल उठाए जाने के चलते यह विवाद और अधिक संवेदनशील हो गया है।

आगे क्या हो सकता है

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस महानिदेशक और राज्य पुलिस इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं और जांच की दिशा किस प्रकार आगे बढ़ती है। निष्पक्ष और समयबद्ध जांच न केवल मामले की सच्चाई सामने लाएगी, बल्कि जनता के बीच कानून और व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

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