नवीन समाचार, नैनीताल, 9 मार्च 2026 (High Court on 2 Double Murder Cases)। उत्तराखंड (Uttarakhand) उच्च न्यायालय (High Court of Uttarakhand) ने दो अलग-अलग दोहरे हत्याकांड के मामलों में महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं। एक मामले में हल्द्वानी (Haldwani) के डहरिया (Dahariya) में वर्ष 2017 में हुई दो महिलाओं की हत्या के प्रकरण में दोषसिद्ध दो व्यक्तियों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया है, जबकि दूसरे मामले में ऊधमसिंह नगर (Udham Singh Nagar) जिले के वर्ष 2014 के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में सभी 10 आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया गया।
न्यायमूर्ति रविंद्र मैथानी (Justice Ravindra Maithani) और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह (Justice Siddharth Shah) की खंडपीठ ने दोनों मामलों में सुनवाई के बाद ये आदेश पारित किए हैं। इन दोनों निर्णयों ने एक बार फिर यह प्रश्न सामने रखा है कि आपराधिक मामलों में ठोस साक्ष्य और वैज्ञानिक जांच कितनी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि न्यायालय ने दोनों मामलों में साक्ष्यों की पर्याप्तता और विश्वसनीयता को प्रमुख आधार माना।
हल्द्वानी के डहरिया के दोहरे हत्याकांड में दोषसिद्ध दो व्यक्तियों को जमानत
पहला मामला हल्द्वानी के डहरिया क्षेत्र में 22 फरवरी 2017 को हुई दोहरे हत्याकांड की घटना से जुड़ा है। इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय नैनीताल (District And Sessions Court Nainital) ने 22 जून 2023 को अख्तर अली (Akhtar Ali) और महेंद्र नाथ गोश्वामी (Mahendra Nath Goswami) को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
दोनों दोषसिद्ध व्यक्तियों ने इस निर्णय को वर्ष 2023 में उच्च न्यायालय में चुनौती दी और अपनी जमानत के लिए प्रार्थना पत्र भी दायर किया।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपितों को गलत तरीके से फंसाया गया है और उपलब्ध साक्ष्य अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि घटना खुले स्थान पर हुई थी, जहां किसी भी व्यक्ति का आना-जाना संभव था और वारदात के समय कोई प्रत्यक्षदर्शी मौजूद नहीं था।
जांच के दौरान पुलिस द्वारा एक स्क्रूड्राइवर (Screwdriver), रक्तरंजित कमीज (Blood Stained Shirt) और कुछ अन्य वस्तुएं बरामद की गई थीं, लेकिन बचाव पक्ष का कहना था कि ये वस्तुएं आरोपितों से सीधे बरामद नहीं हुईं बल्कि खुले स्थान से मिली थीं।
फोरेंसिक जांच (Forensic Examination) से भी ऐसा कोई निर्णायक निष्कर्ष सामने नहीं आया जिससे यह स्पष्ट रूप से साबित हो सके कि अपराध उन्हीं व्यक्तियों ने किया। इन परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने अपील लंबित रहने के दौरान दोनों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
2014 के ऊधमसिंह नगर दोहरे हत्याकांड में 10 दोषसिद्ध बरी
दूसरा मामला ऊधमसिंह नगर जिले के कुंडा थाना (Kunda Police Station) क्षेत्र का है, जहां अगस्त 2014 में हरनाम सिंह उर्फ हनी (Harnam Singh alias Honey) और कुलवंत सिंह उर्फ गोले (Kulwant Singh alias Gole) की गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी और उनके शव जंगल में मिले थे।
पुलिस ने इस मामले में कश्मीर सिंह (Kashmir Singh), प्रकाश सिंह (Prakash Singh), चंडी सिंह (Chandi Singh), जसवंत सिंह (Jaswant Singh) सहित कुल 10 लोगों के विरुद्ध हत्या और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत अभियोग दर्ज किया था।
निचली अदालत ने मई 2025 में इन सभी आरोपितों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके विरुद्ध सभी आरोपितों ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी।
परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था मामला
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि यह मामला पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (Circumstantial Evidence) पर आधारित है और साक्ष्यों की श्रृंखला पूर्ण नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था और केवल पुराने विवाद या धमकियों के आधार पर किसी व्यक्ति को हत्या का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
विशेष रूप से प्रकाश सिंह के अधिवक्ता ने यह भी कहा कि उनका नाम प्रारंभिक सूचना रिपोर्ट (First Information Report – FIR) में भी दर्ज नहीं था।
न्यायालय ने यह भी पाया कि पुलिस द्वारा बरामद की गई रस्सियां, जिन्हें हत्या में प्रयुक्त बताया गया था, फोरेंसिक जांच के लिए भेजी ही नहीं गई थीं। ऐसे में यह सिद्ध नहीं हो सका कि उन वस्तुओं का मृतकों या आरोपितों से कोई जैविक संबंध था।
अदालत का निर्णय और आदेश
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष अपराध को “संदेह से परे” (Beyond Reasonable Doubt) सिद्ध करने में विफल रहा है।
इसके बाद न्यायालय ने प्रकाश सिंह, चंडी सिंह, लाल सिंह, बलविंदर सिंह, जसवंत सिंह (जस्सा), लखवीर सिंह, जसवंत सिंह (नंदी), भगत सिंह, प्रकाश सिंह (पासी) और दारा सिंह को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि यदि वे किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तत्काल जेल से रिहा किया जाए।
न्यायिक सिद्धांत: संदेह के आधार पर दोषसिद्धि संभव नहीं
इस निर्णय के साथ न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आपराधिक न्याय प्रणाली में किसी व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अपराध सिद्ध करने के लिए अभियोजन पक्ष को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने होते हैं।
इन दोनों मामलों ने यह भी रेखांकित किया है कि गंभीर आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक जांच, साक्ष्य संग्रह और जांच प्रक्रिया की गुणवत्ता न्यायिक निर्णयों में निर्णायक भूमिका निभाती है।
पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे उत्तराखंड के नवीनतम अपडेट्स-‘नवीन समाचार’ पर पढ़ें। हमारे व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से, एक्स से, थ्रेड्स चैनल से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें यहाँ क्लिक करके सहयोग करें..।
Tags (High Court on 2 Double Murder Cases) :
High Court on 2 Double Murder Cases, Uttarakhand News, Nainital News, Hindi News, Crime News, Legal News, Uttarakhand High Court Double Murder Case Decision, Haldwani Dahariya Murder Case Bail Order, Udham Singh Nagar 2014 Double Murder Acquittal, Circumstantial Evidence Criminal Law India, Beyond Reasonable Doubt Legal Principle India, Nainital High Court Criminal Appeals Analysis, Forensic Evidence Importance In Murder Trials, Kunda Police Station Double Murder Case History, High Court Overturns Life Sentence India, Criminal Justice Investigation Standards India, #JudicialProcess #CriminalJusticeSystem #HighCourtDecision #ForensicEvidence #LegalAccountability #RuleOfLaw
डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।