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मुख्यमंत्री धामी को नेपाली मूल का बताने वाली सोशल मीडिया पोस्ट पर UKD के पूर्व उपाध्यक्ष के खिलाफ FIR
नवीन समाचार, देहरादून, 24 अगस्त 2026 (Questions on CM Dhamis Citizenship-FIR)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) को एक बार फिर कथित तौर पर नेपाली मूल का बताया गया है। ऐसा दावा करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट (Social Media Post) को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के पूर्व केंद्रीय उपाध्यक्ष और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता आशुतोष नेगी (Ashutosh Negi) के खिलाफ पौड़ी कोतवाली में FIR (First Information Report) दर्ज हुई है।
उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य राजेश सिंह राजा कोली (Rajesh Singh Raja Koli) की तहरीर पर दर्ज मुकदमे में पोस्ट को कथित रूप से भ्रामक और आपत्तिजनक बताते हुए जाति व धर्म से जुड़े संदर्भों के माध्यम से सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। अब पुलिस पोस्ट के मूल स्रोत, उसके डिजिटल प्रसार और उसमें किए गए दावों के आधार की जांच कर रही है।
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Toggleपोस्ट के मूल स्रोत और दावे की जांच होगी

शिकायत के अनुसार आशुतोष नेगी ने सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट साझा की, जिसमें मुख्यमंत्री धामी को नेपाली मूल का बताया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि पोस्ट में किए गए इस दावे के समर्थन में कोई प्रमाण या तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया और इसमें जाति तथा धर्म से जुड़े कथित आपत्तिजनक संदर्भ भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि नेगी को पिछले माह ही उत्तराखंड क्रांति दल से निष्कासित किया गया है।
पुलिस जांच में अब यह पता लगाया जाएगा कि विवादित पोस्ट सबसे पहले किस अकाउंट से प्रकाशित हुई, उसका मूल स्रोत क्या था, पोस्ट तैयार करने वाला कौन था और उसे आगे किन लोगों या अकाउंट से साझा किया गया। इसके साथ पोस्ट के समय, शेयर और कमेंट जैसी डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा सकती है।
शिकायत में सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री की जातीय और राष्ट्रीय पहचान को लेकर इस तरह के दावे तेजी से प्रसारित होने पर लोगों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है तथा सामाजिक वैमनस्य की स्थिति बन सकती है। पुलिस इसी आधार पर पोस्ट की भाषा, संदर्भ और उसके संभावित प्रभाव की जांच कर रही है।
हालांकि, FIR दर्ज होना आरोपों की पुष्टि या दोष सिद्ध होना नहीं है। पोस्ट में किए गए दावों की सत्यता, उसके पीछे का उद्देश्य और कानूनी रूप से आपत्तिजनक सामग्री मौजूद होने के संबंध में अंतिम स्थिति पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा दावा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मूल पहचान को लेकर इससे पहले भी सोशल मीडिया पर नेपाली मूल का होने का दावा किया जा चुका है। पिछले वर्ष 2025 में एक विवादित वीडियो के माध्यम से ऐसा दावा सामने आया था, जिसे भ्रामक और निराधार बताया गया था। उस मामले में वीडियो से जुड़े व्यक्ति स्वामी दिनेशानंद भारती को जमीन धोखाधड़ी के एक अन्य मामले (9 लाख रुपये हड़पने के आरोप) में गिरफ्तार कर लिया गया था।
मुख्यमंत्री धामी की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जीवन-वृत्त संबंधी जानकारी में उनका जन्म उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में बताया गया है। हालांकि वर्तमान FIR का केंद्र पुराने दावे की सत्यता नहीं, बल्कि 2026 में साझा की गई कथित विवादित सोशल मीडिया पोस्ट और उसमें किए गए दावों का कानूनी परीक्षण है।
आशुतोष नेगी पहले भी रहे हैं चर्चा में
आशुतोष नेगी उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय उपाध्यक्ष रह चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब एक महीने पहले उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया था। वह इससे पहले भी कानूनी कार्रवाई के कारण चर्चा में रहे हैं। मार्च 2024 में उन्हें एक अन्य मामले में SC/ST Act (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम) के तहत गिरफ्तार किया गया था। उस समय पुलिस ने स्पष्ट किया था कि उनकी गिरफ्तारी अंकिता भंडारी हत्याकांड में नहीं, बल्कि अलग मामले में हुई थी। अब मुख्यमंत्री से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में उनके खिलाफ नया मुकदमा दर्ज किया गया है।
शिकायतकर्ता राजेश सिंह राजा कोली कौन हैं
राजेश सिंह राजा कोली उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्हें अप्रैल 2026 में आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था। वर्तमान मामले में उन्हीं की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर पौड़ी कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है।
जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
पुलिस अब विवादित पोस्ट की डिजिटल पुष्टि, उसके मूल स्रोत और प्रसार की कड़ियों की जांच करेगी। यदि जांच में जानबूझकर भ्रामक सूचना फैलाने, सामाजिक या धार्मिक वैमनस्य पैदा करने अथवा अन्य किसी कानूनी प्रावधान के उल्लंघन के पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो उसी आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहेगा कि पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट करे कि पोस्ट का मूल स्रोत क्या था, उसमें किए गए दावे किस आधार पर थे और उसे प्रसारित करने के पीछे क्या उद्देश्य था। फिलहाल मामला जांच के चरण में है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
























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