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उत्तराखंड में घटती प्रजनन दर के बीच बदल रहा मातृत्व का समय, युवतियाँ अपना रहीं अंडाणु सुरक्षित रखवाने के तरीके, साथ ही समझिए दुनिया के जनसांख्यिकीय संकट तक पूरी तस्वीर

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नवीन समाचार, स्वास्थ्य डेस्क, 20 अगस्त 2026 (Egg Freezing Declining Fertility Rate)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में प्रजनन दर चिंताजनक स्तर पर (Fertility Rate) देश के साथ 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर (Replacement Level) से नीचे पहुंच गई है। इसके बीच देश-प्रदेश में विवाह और मातृत्व की योजना को लेकर युवा पीढ़ी की सोच भी बदल रही है। शिक्षा, रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और करियर को प्राथमिकता देने के कारण मातृत्व को आगे टालने का चलन बढ़ा है और इसी पृष्ठभूमि में युवतियों के लिए ‘एग फ्रीजिंग’ (Egg Freezing) यानी अंडाणुओं को भविष्य में मातृत्व की संभावना सुरक्षित रखने के विकल्प के रूप में सामने आ रही है।

Egg Freezing Declining Fertility Rate अंडा जमाने की प्रक्रिया — डब्ल्यूएचएमराष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (National Family Health Survey-5-NFHS-5) के अनुसार उत्तराखंड की कुल प्रजनन दर 1.85 दर्ज हुई थी, जिसे सरकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आंकड़ों में 1.9 के रूप में दर्शाया गया है, जो देश की कुल प्रजनन दर 1.9 से भी कुछ कम है, जबकि प्रजनन दर का 2.1 से कम होना यानी एक महिला (महिला-पुरुष जोड़े) का 2 से कम बच्चे पैदा करना देश की जनसंख्या के भविष्य के लिए नकारात्मक माना जाता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से जुड़े आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में प्रजनन दर में गिरावट का रुझान कई आयु वर्गों में दिखाई देता है। 20 से 24 वर्ष आयु वर्ग में राज्य की प्रजनन दर NFHS-4 के 0.175 से घटकर NFHS-5 में 0.143 हो गयी है। शहरी क्षेत्रों में यह 0.120 और ग्रामीण क्षेत्रों में 0.155 रही। इसी तरह NFHS-5 में राज्य का कुल प्रजनन दर आंकड़ा शहरी क्षेत्रों में 1.84 और ग्रामीण क्षेत्रों में 1.86 दर्ज हुआ था। 

उत्तराखंड से भारत और दुनिया तक घटती प्रजनन दर की तस्वीर

प्रजनन दर का 2.1 से नीचे जाना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सामान्य जनसांख्यिकीय आकलन में 2.1 के आसपास की दर को वह स्तर माना जाता है जिस पर एक पीढ़ी दीर्घकाल में लगभग अपने बराबर अगली पीढ़ी का स्थान लेती है। यह कोई कठोर सीमा नहीं है और वास्तविक प्रतिस्थापन स्तर मृत्यु दर, लैंगिक संरचना और प्रवासन जैसे कारकों से भी प्रभावित होता है। फिर भी लगातार कम प्रजनन दर का अर्थ है कि समय के साथ बच्चों और युवा आबादी का अनुपात घट सकता है तथा वृद्ध आबादी का हिस्सा बढ़ सकता है।

भारत की तस्वीर भी अब तेजी से बदल रही है। भारत के नवीनतम नमूना पंजीकरण प्रणाली (Sample Registration System-SRS) सांख्यिकीय रिपोर्ट 2024 के अनुसार देश की कुल प्रजनन दर 1.9 बच्चे प्रति महिला रही, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 2.1 और शहरी क्षेत्रों में 1.5 रही। इसी रिपोर्ट में देश की जन्म दर 2024 में 18.3 प्रति हजार यानी 1.83 दर्ज की गयी थी। 

राज्यों में भी तेजी से बढ़ा अंतर

SRS 2024 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में प्रजनन दर को लेकर राज्यों के बीच बड़ा अंतर है। बिहार में यह 2.9, उत्तर प्रदेश में 2.6 और मध्य प्रदेश में 2.4 रही। राजस्थान 2.3 पर रहा। दूसरी ओर दिल्ली में यह केवल 1.2 रही, जबकि तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल में 1.3 दर्ज की गयी। हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में यह 1.5 रही। रिपोर्ट के अनुसार बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड को छोड़कर बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रजनन दर 2.1 से नीचे पहुंच चुकी है। (Ministry of Health and Family Welfare)

यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के अलग-अलग राज्यों में आने वाले वर्षों में कामकाजी आबादी, बच्चों की संख्या, वृद्धजन, विद्यालयों की जरूरत, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार की मांग का स्वरूप अलग हो सकता है। यानी देश के लिए एक जैसी जनसंख्या नीति के बजाय क्षेत्र विशेष की परिस्थितियों को ध्यान में रखना अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

दुनिया में भी घट रही प्रजनन दर

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की विश्व जनसंख्या संभावनाएं 2024 (World Population Prospects 2024) के अनुसार दुनिया की कुल प्रजनन दर 2024 में लगभग 2.25 बच्चे प्रति महिला थी, जो 1990 में 3.31 थी। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया के आधे से अधिक देशों और क्षेत्रों में प्रजनन दर 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर से नीचे पहुंच चुकी है। लगभग एक-पांचवां देश और क्षेत्र अत्यंत कम प्रजनन दर की स्थिति में हैं, जहां यह 1.4 से भी कम है। (World Population Dashboard)

संयुक्त राष्ट्र के 2024 के आंकड़ों के अनुसार कुछ देशों में स्थिति और गंभीर है। चीन में प्रजनन दर लगभग 1.0, अमेरिका में 1.6, जापान में 1.2 और दक्षिण कोरिया में लगभग 0.7 रही। इसके विपरीत नाइजर में यह लगभग 6.1, चाड में 6.0 और पाकिस्तान में लगभग 3.6 रही। यानी दुनिया एक साथ दो अलग जनसांख्यिकीय स्थितियों से गुजर रही है—कुछ देशों में आबादी अभी तेजी से बढ़ रही है जबकि कई देशों में अगली पीढ़ी का आकार लगातार छोटा हो रहा है। (World Bank Gender Data Portal)

कम प्रजनन दर का अर्थ केवल कम बच्चे होना नहीं

प्रजनन दर में लगातार गिरावट का असर आने वाले दशकों में शिक्षा से लेकर रोजगार और स्वास्थ्य व्यवस्था तक दिखाई दे सकता है। कम बच्चों का अर्थ शुरुआत में परिवारों पर बच्चों की शिक्षा और पालन-पोषण का अपेक्षाकृत कम बोझ तथा प्रति बच्चे अधिक संसाधन उपलब्ध होना हो सकता है। लेकिन लंबे समय तक दर कम रहने पर कामकाजी उम्र की आबादी घटने और वृद्धजन का अनुपात बढ़ने की स्थिति बन सकती है।

इसका सीधा असर श्रम बाजार, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं, कर आधार और आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र भी कम प्रजनन दर और बढ़ती आयु संरचना के कारण देशों को भविष्य की जनसंख्या, आयु संरचना और क्षेत्रीय वितरण के अनुरूप नीतियां तैयार करने की आवश्यकता पर जोर देता है। (United Nations)

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‘एग फ्रीजिंग’ क्यों चर्चा में है

Egg Freezing Singapore | Elective Egg Freezing in Singaporeइसी बदलते सामाजिक और जनसांख्यिकीय परिदृश्य में ‘एग फ्रीजिंग’ कुछ महिलाओं के लिए भविष्य की प्रजनन योजना का एक विकल्प बन रही है। अमेरिकी राजनेता एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज (Alexandria Ocasio-Cortez) द्वारा एग फ्रीजिंग की जानकारी सार्वजनिक किए जाने के बाद भी यह तकनीक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रही है। उत्तराखंड में भी देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी के कुछ निजी आईवीएफ (IVF) केंद्रों में यह सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी सामने आयी है।

एग फ्रीजिंग को चिकित्सकीय भाषा में ओसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन (Oocyte Cryopreservation) कहा जाता है। इसमें महिला के अंडाणुओं को प्राप्त कर अत्यंत कम तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है। भविष्य में गर्भधारण की योजना बनने पर इन अंडाणुओं को शुक्राणु से निषेचित कर भ्रूण तैयार किया जा सकता है और आईवीएफ के माध्यम से भ्रूण को गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है।

उत्तराखंड में कितने केंद्र और क्यों जरूरी है चिकित्सकीय सलाह

उत्तराखंड में सहायक प्रजनन तकनीक (Assisted Reproductive Technology-ART) से जुड़े 25 केंद्र पंजीकृत होने की जानकारी है। उपलब्ध विवरण के अनुसार देहरादून के तीन, हरिद्वार के एक और हल्द्वानी के एक केंद्र में एग फ्रीजिंग की सुविधा उपलब्ध है। सहायक प्रजनन तकनीक से जुड़े संस्थानों के लिए राष्ट्रीय सहायक प्रजनन तकनीक एवं सरोगेसी पंजी (National ART and Surrogacy Registry) में पंजीकरण और नियमन की व्यवस्था है। (Census India)

एग फ्रीजिंग में महिला की उम्र महत्वपूर्ण होती है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ अंडाणुओं की संख्या और गुणवत्ता स्वाभाविक रूप से कम होती जाती है। हालांकि एग फ्रीजिंग को भविष्य में मातृत्व की गारंटी नहीं माना जा सकता। महिला की उम्र, स्वास्थ्य, अंडाशय में उपलब्ध अंडाणुओं की स्थिति और ओवेरियन रिजर्व (Ovarian Reserve) जैसे कारकों का चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है। इसलिए इस तकनीक का निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के बाद ही लिया जाना चाहिए।

उत्तराखंड के लिए यह आंकड़े क्यों महत्वपूर्ण हैं

उत्तराखंड में प्रजनन दर का प्रतिस्थापन स्तर से नीचे जाना केवल परिवार नियोजन की सफलता का आंकड़ा नहीं है। राज्य की भौगोलिक स्थिति, पर्वतीय क्षेत्रों से युवाओं का पलायन, रोजगार के लिए शहरों पर बढ़ती निर्भरता और ग्रामीण क्षेत्रों में बदलती आयु संरचना के संदर्भ में इसका प्रभाव अधिक व्यापक हो सकता है।

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यदि युवा आबादी का हिस्सा लंबे समय में घटता है तो विद्यालयों की संख्या और स्वरूप, रोजगार की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं की मांग, वृद्धजन देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्था की आवश्यकताएं भी बदलेंगी। दूसरी ओर, कम परिवार आकार के कारण महिलाओं और परिवारों को शिक्षा, रोजगार और आर्थिक निर्णयों में अधिक संसाधन लगाने का अवसर भी मिल सकता है।

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा (Sunita Tamta) के अनुसार 2.1 के आसपास की प्रजनन दर को जनसंख्या स्थिरता के लिए प्रतिस्थापन स्तर माना जाता है। ऐसे में उत्तराखंड, भारत और दुनिया के आंकड़े एक ही दिशा में बदलती जनसांख्यिकीय तस्वीर की ओर संकेत कर रहे हैं—जहां प्रश्न अब केवल बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने का नहीं, बल्कि बदलती आयु संरचना, भविष्य के रोजगार, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और महिलाओं की प्रजनन स्वतंत्रता के अनुरूप नीतियां तैयार करने का भी है।

इसी कड़ी में तमिलनाडु सरकार का ताजा आदेश भी महत्वपूर्ण है, जिसमें सरकारी नौकरी करने वाली महिलाओं को तीसरे बच्चे के जन्म पर भी पहले दो बच्चों की तरह 80 की जगह 365 दिनों का मातृत्व अवकाश दिया जाएगा। इसे राज्य में तीसरे बच्चे के जन्म व जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करने वाला उपाय माना जा रहा है।

बहरहाल, क्या एग फ्रीजिंग जैसी तकनीक बदलते मातृत्व समय के बीच महिलाओं के लिए एक उपयोगी विकल्प बन पाएगी और घटती प्रजनन दर के दौर में उत्तराखंड अपनी युवा आबादी तथा भविष्य की आर्थिक जरूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाएगा, यह आने वाले वर्षों में राज्य के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न होंगे। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

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