नवीन समाचार, नैनीताल, 24 अगस्त 2026 (Nainital High Court News 24 August)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल स्थित उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) में सोमवार को हरिद्वार (Haridwar) में गंगा नदी (Ganga River) के किनारे कथित अवैध खनन, छह चिकित्सा महाविद्यालयों (Medical Colleges) में एमबीबीएस (MBBS) चिकित्सकों के छह माह के सोनोग्राफी प्रशिक्षण, अल्मोड़ा (Almora) के भिकियासैंण (Bhikiyasen) में ब्लॉक प्रमुख के उपचुनाव, नंदा गौरा योजना (Nanda Gaura Scheme) का लाभ और पिंडारी हिमनद (Pindari Glacier) से लापता ट्रैकर (Missing Trekker) से जुड़े मामलों में सुनवाई हुई। इन मामलों में न्यायालय ने एक ओर संबंधित सरकार और विभागों से जवाब मांगा, वहीं दूसरी ओर डीएनए जांच (DNA Test) की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश भी दिए।
हरिद्वार में गंगा किनारे अवैध खनन पर अगली सुनवाई 10 सितंबर को
हरिद्वार में गंगा नदी के किनारे हो रहे कथित अवैध खनन के विरुद्ध दायर जनहित याचिका (Public Interest Litigation) पर मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता (Manoj Kumar Gupta) और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह (Siddharth Shah) की खंडपीठ (Division Bench) ने सुनवाई की। मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 10 सितंबर 2026 की तिथि निर्धारित की है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार (State Government) की ओर से कहा गया कि न्यायालय के आदेश के बाद हरिद्वार में अवैध खनन पर रोक लगी हुई है। सरकार की ओर से बताया गया कि दर्जनों स्टोन क्रशर (Stone Crushers) बंद हैं और प्रशासन ने न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए उन्हें सील कर दिया है।
इसके विपरीत मातृ सदन (Matr Sadan) की ओर से कहा गया कि न्यायालय के आदेश के बावजूद अभी भी अवैध खनन किया जा रहा है। उसकी ओर से यह भी कहा गया कि राज्य सरकार की विशेष अपील (Special Appeal) को सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) खारिज कर चुका है। गंगा को बचाने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal-NGT) ने भी कड़े आदेश जारी किए हैं।
मातृ सदन की ओर से यह भी कहा गया कि उच्च न्यायालय ने अपने पूर्व आदेश में बदलाव करते हुए जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा था, लेकिन अभी तक आदेशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। मामले में काफी देर तक सुनवाई के बाद न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 10 सितंबर की तिथि निर्धारित की।
छह मेडिकल कॉलेजों में छह माह के सोनोग्राफी प्रशिक्षण पर मांगा जवाब
राज्य के छह चिकित्सा महाविद्यालयों में एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए छह माह का सोनोग्राफी प्रशिक्षण शुरू किए जाने के मामले में दायर याचिका पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता (Manoj Kumar Gupta) और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Subhash Upadhyay) की खंडपीठ ने सुनवाई की। न्यायालय ने मामले में उत्तरदाताओं (Respondents) को तीन सप्ताह के भीतर प्रति-शपथपत्र (Counter Affidavit) दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता इंडियन रेडियोलॉजिकल एंड इमेजिंग एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (Indian Radiological and Imaging Association of Uttarakhand) की ओर से अदालत को बताया गया कि चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग (Medical Health and Medical Education Department) के सचिव की अध्यक्षता में 6 और 7 मई 2026 को हुई बैठक में राज्य के छह चिकित्सा महाविद्यालयों में छह माह का सोनोग्राफी प्रशिक्षण शुरू करने की मंजूरी दी गई है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि नए प्रशिक्षण के लिए अलग आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराए बिना इसे शुरू करना मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (Medical Council of India-MCI) के दिशा-निर्देशों और नियमों के विपरीत है। याचिका में कहा गया कि प्रशिक्षण के लिए अलग संकाय (Faculty) होना चाहिए, क्योंकि वर्तमान पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में ही संकाय उपलब्ध है और उसका उपयोग नए पाठ्यक्रम के लिए नहीं किया जा सकता।
याचिका में यह भी कहा गया है कि पर्याप्त सुविधाओं और आधारभूत ढांचे के बिना छह माह का प्रशिक्षण कराया जाना उचित नहीं है। उच्च न्यायालय ने मामले को आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।
भिकियासैंण ब्लॉक प्रमुख के उपचुनाव पर आज भी जारी रहेगी सुनवाई
अल्मोड़ा जनपद के विकासखंड भिकियासैंण में ब्लॉक प्रमुख की आकस्मिक मृत्यु के करीब सात माह बाद भी उपचुनाव नहीं कराए जाने के मामले में उच्च न्यायालय ने सुनवाई की। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी (Manoj Kumar Tiwari) की एकलपीठ (Single Bench) ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को सचिव पंचायती राज (Secretary, Panchayati Raj) को भी मामले में पक्षकार बनाने के निर्देश दिए। मामले की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी।
याचिकाकर्ता दीपक करगेती (Deepak Kargeti) की ओर से कहा गया कि ब्लॉक प्रमुख की आकस्मिक मृत्यु फरवरी 2026 में हो गई थी। इसके बाद अब तक राज्य सरकार ने उपचुनाव नहीं कराया है, जबकि नियमावली के अनुसार छह माह के भीतर चुनाव कराया जाना चाहिए था।
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि उन्होंने जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों को उपचुनाव कराने के लिए प्रत्यावेदन दिया था। जिलाधिकारी की ओर से भी राज्य सरकार को चुनाव कराने के लिए पत्र भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद अभी तक उपचुनाव नहीं कराया गया।
याचिका में ब्लॉक प्रमुख का चुनाव शीघ्र कराने की मांग की गई है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि वर्तमान उप प्रमुख अपने कार्यों का सही तरीके से अनुपालन नहीं कर रहे हैं। मामले में न्यायालय मंगलवार को आगे सुनवाई करेगा।
नंदा गौरा योजना का लाभ नहीं मिलने पर सरकार से पूछा सवाल
राज्य की 12वीं कक्षा उत्तीर्ण बालिकाओं को नंदा गौरा योजना का प्रतिलाभ नहीं दिए जाने के विरुद्ध दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा कि बालिकाओं को इस योजना का लाभ अब तक क्यों नहीं दिया गया। न्यायालय ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि यदि सरकार के पास योजना के लिए बजट नहीं है तो योजना को बंद कर देना चाहिए। साथ ही महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) और संबंधित विभागों से पूछा गया कि बालिकाओं को योजना का लाभ अभी तक क्यों नहीं मिला।
याचिका में बताया गया कि फिलहाल मामला एक जिले से संबंधित है और वर्ष 2022-23 का है। राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि मामला वित्त विभाग (Finance Department) के पास विचाराधीन है और सरकार शीघ्र बजट जारी करने वाली है।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि यदि निर्धारित समय में बजट जारी नहीं किया जाता है तो बालिकाओं की उच्च शिक्षा प्रभावित होगी। उन्होंने योजना का समान लाभ सभी पात्र बालिकाओं को दिए जाने की मांग की। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।
पिंडारी हिमनद से लापता ट्रैकर के मामले में डीएनए जांच के लिए रक्त नमूना लेने का आदेश
बागेश्वर के पिंडारी हिमनद से लापता ट्रैकर अभिषेक चौहान (Abhishek Chauhan) के मामले में न्यायमूर्ति आलोक महरा (Alok Mahra) की पीठ ने सोमवार को सुनवाई की। लापता ट्रैकर के पिता देशराज (Deshraj) की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत को उसकी तलाश और एक बरामद शव से जुड़े जांच संबंधी तथ्यों की जानकारी दी गई।
मूल रूप से शामली, उत्तर प्रदेश (Shamli, Uttar Pradesh) निवासी सॉफ्टवेयर अभियंता (Software Engineer) अभिषेक चौहान 29 मई को पिंडारी हिमनद की सैर के दौरान वापस लौटते समय लापता हो गए थे। पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (State Disaster Response Force-SDRF) और वन विभाग (Forest Department) की ओर से लगातार तलाश की गई, लेकिन अब तक उनका पता नहीं चल पाया है। इसके बाद उनके पिता ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
जांच अधिकारी विवेक चंद (Vivek Chand) सोमवार को अदालत में पेश हुए। उन्होंने बताया कि 27 जून को कीर्तिनगर (Kirtinagar) से पिंडर नदी (Pinder River) में एक शव बरामद हुआ था। शव का डीएनए नमूना सुरक्षित रखा गया है। लापता ट्रैकर से उसका मिलान करने के लिए याचिकाकर्ता के रक्त का नमूना आवश्यक बताया गया।
हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि बरामद शव उनके पुत्र से मेल नहीं खाता है और शव की उम्र लगभग 50 वर्ष है। इसके बाद भी वैज्ञानिक जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने के लिए न्यायालय ने नैनीताल के बीडी पांडे जिला चिकित्सालय (B.D. Pandey District Hospital) के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (PMS) को निर्देश दिया कि उसी दिन याचिकाकर्ता के रक्त का नमूना लिया जाना सुनिश्चित करें।
डीएनए जांच के माध्यम से बरामद शव और लापता ट्रैकर के बीच संबंध की पुष्टि या खंडन किया जा सकेगा। मामले में आगे की स्थिति जांच रिपोर्ट और न्यायालय में प्रस्तुत होने वाले तथ्यों के आधार पर स्पष्ट होगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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