नवीन समाचार, नैनीताल, 9 अक्टूबर 2026 (Nainital Highcourt News 9 October 2026)। नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय में छात्रसंघ चुनाव में कथित अनियमितताओं, उपनल कर्मचारी के वेतन एवं पद में कटौती, क्षेत्र पंचायत सदस्य के उप चुनाव में नामांकन निरस्तीकरण और चरस तस्करी के अभियोग से जुड़े चार मामलों में महत्वपूर्ण आदेश सामने आये हैं। छात्रसंघ चुनाव के मामले में शिकायत निवारण प्रकोष्ठ गठित करने और बैलेट पेपर सुरक्षित रखने के निर्देश दिये गये हैं। वहीं उपनल कर्मचारी के विरुद्ध जारी आदेश पर अंतरिम रोक लगी है, पंचायत उप चुनाव से जुड़ी याचिका खारिज हुई और चरस तस्करी के आरोपित को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
छात्रसंघ चुनाव में कथित गड़बड़ी पर हाईकोर्ट सख्त, बैलेट पेपर सुरक्षित रखने के निर्देश
काशीपुर के राधे हरि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (Radhey Hari Government Post Graduate College) के छात्रसंघ चुनाव में कथित अनियमितताओं को लेकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शिकायत निवारण प्रकोष्ठ (Grievance Redressal Cell) तत्काल गठित करने और याचिकाकर्ता की शिकायत पर विचार करने के निर्देश दिये हैं। न्यायालय ने अध्यक्ष पद के चुनाव में इस्तेमाल बैलेट पेपर सुरक्षित रखने के संबंध में भी आदेश पारित करने को कहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अध्यक्ष पद के प्रत्याशी कुलदीप सिंह ने याचिका दायर कर चुनाव परिणाम में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। उनका आरोप है कि मतगणना के परिणाम में काट-छांट और बदलाव कर प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी गुरजिंदर सिंह के पक्ष में मत बढ़ाये गये। याचिका में नोटा (NOTA) के मत कम दिखाकर दूसरे प्रत्याशी के पक्ष में अधिक मत जोड़ने का आरोप भी लगाया गया।
याचिकाकर्ता ने जांच पूरी होने तक सीसीटीवी फुटेज और इस्तेमाल किये गये बैलेट पेपर सुरक्षित रखने की मांग की थी। इस पर न्यायालय ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप शिकायत निवारण प्रकोष्ठ गठित करने तथा शिकायत पर विचार करने के निर्देश दिये। साथ ही महाविद्यालय के प्राचार्य को अध्यक्ष पद के चुनाव में इस्तेमाल बैलेट पेपर सुरक्षित रखने के संबंध में आदेश पारित करने को कहा।
उल्लेखनीय है कि चुनाव परिणाम को लेकर दोबारा मतगणना करायी गयी थी। पुनर्मतगणना में गुरजिंदर सिंह को 996 और कुलदीप सिंह को 985 मत मिले थे। इस प्रकार गुरजिंदर सिंह को 11 मतों से विजेता घोषित किया गया। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में हुई।
उपनल कर्मचारी का वेतन घटाने और पद अवनत करने के आदेश पर रोक, चार सप्ताह में जवाब मांगा
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उपनल (Uttarakhand Purv Sainik Kalyan Nigam Limited—UPNL) कर्मचारी अमर सिंह के वेतन में कटौती और पद घटाने से संबंधित शासन के 2 सितंबर 2026 के आदेश पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सुनवाई का उचित अवसर दिये बिना किसी कर्मचारी के वेतन में कटौती या पद अवनत करने जैसा प्रतिकूल आदेश जारी नहीं किया जा सकता।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अमर सिंह वर्ष 2011 से संविदा के आधार पर दिल्ली स्थित उत्तराखंड निवास में सहायक प्रोटोकॉल के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें प्रतिमाह 42,618 रुपये वेतन मिल रहा था। शासन ने 2 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर उनका वेतन घटाकर 34,720 रुपये कर दिया था। साथ ही उनका पद घटाकर रिसेप्शनिस्ट (स्वागती) कर दिया गया था।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ललित सामंत ने तर्क दिया कि विवादित आदेश जारी करने से पहले कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए विवादित आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।
मामले में उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को उनके वास्तविक पद के अनुरूप वेतनमान देने के बजाय निम्नतर वेतन स्तर निर्धारित कर अनुबंध कराने की व्यवस्था का मुद्दा भी उठा। इस व्यवस्था पर भी न्यायालय ने रोक लगायी है। न्यायालय ने उत्तरदाताओं को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी।
बीडीसी सदस्य के उप चुनाव में नामांकन निरस्तीकरण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भिकियासैंण क्षेत्र में क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC) पद के उप चुनाव में प्रत्याशी महिपाल सिंह का नामांकन निरस्त करने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार करते हुए नामांकन निरस्तीकरण में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं माना।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 25 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना में नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि 1 अक्टूबर निर्धारित की गयी थी। महिपाल सिंह ने निर्धारित समयसीमा के बाद 3 अक्टूबर को अनापत्ति प्रमाणपत्र (No Dues Certificate) जमा किया। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी ने उनका नामांकन पत्र निरस्त कर दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गयी थी कि पहली बार चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र अनिवार्य नहीं होना चाहिए। हालांकि न्यायालय ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने माना कि निर्धारित समयसीमा के बाद प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के आधार पर नामांकन निरस्त करने का निर्णय सही था और इसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में हुई।
चरस तस्करी के अभियोग में देवेन्द्र कुमार दोषमुक्त, पुलिस कार्रवाई की खामियों पर उठे प्रश्न
नैनीताल के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायालय (एनडीपीएस अधिनियम) के न्यायाधीश संजीव कुमार की अदालत ने चरस तस्करी के अभियोग में आरोपित देवेन्द्र कुमार को साक्ष्यों के अभाव और पुलिस कार्रवाई में गंभीर खामियों के आधार पर दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने पुलिस की कार्रवाई और तलाशी की प्रक्रिया पर सवाल उठाये।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला काठगोदाम थाने से संबंधित है। पुलिस ने 1 नवंबर 2020 को गौलापुल के पास जांच के दौरान ओखलकांडा निवासी देवेन्द्र कुमार से 510 ग्राम चरस बरामद करने का दावा किया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपित पुलिस को देखकर घबरा गया और उसने स्वयं अपनी जैकेट से चरस निकालकर पुलिस को सौंप दी थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पुलिस दल की थाने से रवानगी का कोई सामान्य डायरी (General Diary—GD) अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया। इससे घटनास्थल पर पुलिस की मौजूदगी को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ। अदालत ने यह भी पाया कि स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act—NDPS Act) की धारा 50 के अंतर्गत राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट के समक्ष तलाशी कराने की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि आरोपित द्वारा स्वयं चरस निकालकर पुलिस को सौंपने की कहानी संदिग्ध प्रतीत होती है और यह धारा 50 की अनिवार्य प्रक्रिया से बचने के लिए गढ़ी गयी हो सकती है। गवाहों के बयानों में विरोधाभास और किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं करने सहित अन्य खामियों को देखते हुए अदालत ने आरोपित को संदेह का लाभ दिया और दोषमुक्त कर दिया। आरोपित की ओर से अधिवक्ता गौरव भट्ट ने पैरवी की।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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