दो आईपीएस अधिकारियों की निचले पदों पर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर हाईकोर्ट में सुनवाई, हमले के आरोपित नाबालिग किशोर की याचिका खारिज व बिंदुखत्ता के घोड़ानाला में छह माह में ट्यूबवेल और जलाशय बनाने के निर्देश

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नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी की प्रतिनियुक्ति पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी, बुधवार को फिर होगी सुनवाई

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 अक्टूबर 2026 (UK High Court News 27 October 2026)। उत्तराखंड में भारतीय पुलिस सेवा (Indian Police Service—IPS) के दो वरिष्ठ अधिकारियों नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन उप महानिरीक्षक (Deputy Inspector General—DIG) पदों पर प्रतिनियुक्ति पर भेजने के मामले में कानूनी विवाद जारी है। मंगलवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में इस मामले पर देर तक सुनवाई हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय की खंडपीठ ने सुनवाई बुधवार को भी जारी रखने का निर्णय लिया है।

(UK High Court News 27 October 2026) आईजी से डीआईजी बनाकर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के खिलाफ दो IPS  अधिकारी हाईकोर्ट पहुंचे - Doon Khabarप्राप्त जानकारी के अनुसार न्यायालय ने दोनों पक्षों से केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (Central Administrative Tribunal—CAT) की पीठ द्वारा दिये गये निर्णय सहित संबंधित प्रतिनियुक्ति और स्थानांतरण नियमावली का अध्ययन करने को कहा है। मामले में मुख्य विवाद दोनों अधिकारियों को उत्तराखंड में पुलिस महानिरीक्षक (IG) स्तर पर तैनाती के बावजूद केंद्र में उप महानिरीक्षक पदों पर भेजने के आदेशों को लेकर है।

मार्च में जारी हुए थे प्रतिनियुक्ति के आदेश

वर्ष 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (Indo-Tibetan Border Police—ITBP) में उप महानिरीक्षक नियुक्त किया गया था। वर्ष 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force—BSF) में इसी पद पर नियुक्त करने के आदेश जारी हुए थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पांच मार्च 2026 को नियुक्ति संबंधी आदेश जारी किये थे। इसके अगले दिन छह मार्च को उत्तराखंड सरकार ने दोनों अधिकारियों को कार्यमुक्त करने के आदेश दिये।

दोनों अधिकारियों ने प्रतिनियुक्ति और कार्यमुक्ति के आदेशों को चुनौती दी। उनका पक्ष रहा कि उन्हें उनकी सहमति के बिना केंद्र में भेजा जा रहा है और वर्तमान पद की तुलना में निचले पद पर नियुक्ति से उनकी सेवा स्थिति प्रभावित हो सकती है।

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केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश के बाद बढ़ा विवाद

मामला पहले उत्तराखंड उच्च न्यायालय पहुंचा, जहां अधिकारियों को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में अपना पक्ष रखने की अनुमति दी गयी। अधिकरण ने सात अप्रैल 2026 को अंतरिम आदेश पारित कर केंद्र में नियुक्ति और राज्य सरकार के कार्यमुक्ति संबंधी आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी।

इसके बाद राज्य और केंद्र सरकार की ओर से अधिकरण के अंतरिम आदेश को लेकर कानूनी कार्रवाई की गयी। इसी विवाद के विभिन्न पहलुओं पर उच्च न्यायालय में भी सुनवाई हुई है। वर्तमान सुनवाई में न्यायालय ने दोनों पक्षों को अधिकरण के निर्णय और संबंधित सेवा नियमों का अध्ययन करने को कहा है।

मंगलवार की सुनवाई के बाद मामले को बुधवार के लिए जारी रखा गया है। अब आगे की सुनवाई में प्रतिनियुक्ति संबंधी नियमों और अधिकरण के आदेशों पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।

झबरेड़ा में हमले के मामले में आरोपित नाबालिग किशोर की याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने किशोर न्याय प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिये

हरिद्वार जनपद के झबरेड़ा (Jhabreda) थाना क्षेत्र में दो लोगों पर हुए हमले के मामले में दर्ज प्राथमिकी निरस्त कराने के लिए एक किशोर की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी है। न्यायालय ने कहा कि प्राथमिकी के प्रथम दृष्टया अवलोकन से किशोर के विरुद्ध मामला बनता है, इसलिए इस स्तर पर प्राथमिकी निरस्त नहीं की जा सकती। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किशोर के विरुद्ध कार्रवाई करते समय किशोर न्याय से संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन करना होगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला 10 अक्टूबर 2026 को झबरेड़ा क्षेत्र में दो लोगों पर हुए हमले से संबंधित है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने न्यायालय में दलील दी कि उसकी आयु लगभग 14 वर्ष है, इसलिए उसे गिरफ्तारी से संरक्षण दिया जाना चाहिए और उसके विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी निरस्त की जानी चाहिए।

किशोर को सामान्य आरोपित की तरह जेल या हवालात में नहीं रखा जाएगा

मामले की गंभीरता और अभिलेखों पर उपलब्ध तथ्यों को देखने के बाद न्यायालय ने प्राथमिकी निरस्त करने से इनकार कर दिया। हालांकि, सरकार की ओर से प्रस्तुत तथ्यों को अभिलेख में लेते हुए न्यायालय ने कहा कि किशोर होने के कारण याचिकाकर्ता के साथ सामान्य आरोपित की तरह व्यवहार नहीं किया जा सकता।

न्यायालय के निर्देशानुसार यदि पुलिस किशोर को अभिरक्षा में लेती है, तो उसे सामान्य पुलिस हवालात या जेल में नहीं रखा जाएगा। उसे तत्काल निकटवर्ती बाल कल्याण पुलिस इकाई के सुपुर्द किया जाएगा। इसके बाद उसे 24 घंटे के भीतर किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

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न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि किशोर को किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) मॉडल नियम, 2016 के नियम 9 के अनुसार प्रेक्षण गृह (Observation Home) में रखा जाए। किशोर की आयु और उसके कानूनी संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू होगी।

न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने इन निर्देशों के साथ याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय का यह आदेश प्राथमिकी निरस्त करने की मांग पर है; इससे मामले में आरोपों की अंतिम सत्यता निर्धारित नहीं होती।

बिंदुखत्ता के घोड़ानाला में ट्यूबवेल और जलाशय बनाने के निर्देश, छह माह में पूरा करना होगा निर्माण

नैनीताल जनपद के बिंदुखत्ता (Bindukhatta) क्षेत्र के घोड़ानाला में स्थानीय नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पर्याप्त क्षमता वाले नलकूप (Tube Well) और ऊंची जल टंकी (Overhead Tank) का निर्माण छह माह के भीतर पूरा करने के निर्देश दिये हैं। याचिकाकर्ता हर्ष सिंह बिष्ट की याचिका पर सभी पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने मामले को निस्तारित कर दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल की समस्या को लेकर याचिका दायर की गयी थी। मामले में पहले सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल (Century Pulp and Paper Mill) ने नौ सितंबर 2021 को न्यायालय में शपथपत्र देकर सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility—CSR) के अंतर्गत ट्यूबवेल और ऊंची जल टंकी के निर्माण का खर्च उठाने की बात कही थी। हालांकि, निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ने के कारण स्थानीय लोग दूषित पानी पीने को मजबूर थे।

ग्रामीण जमीन देंगे, आईटीसी निर्माण के लिए धनराशि जारी करेगी

सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की सहमति से तय हुआ कि याचिकाकर्ता अथवा क्षेत्र के ग्रामीण निर्माण के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराएंगे। इसके बाद आईटीसी लिमिटेड (ITC Limited) निर्माण कार्य के लिए आवश्यक धनराशि जारी करेगी। आईटीसी ने एक अगस्त 2026 को सेंचुरी पल्प एंड पेपर का अधिग्रहण किया था।

न्यायालय ने निर्देश दिया है कि भूमि उपलब्ध होने और निर्माण के लिए धनराशि जारी होने के बाद उत्तराखंड पेयजल निगम (Uttarakhand Peyjal Nigam) छह माह के भीतर पर्याप्त क्षमता वाले ट्यूबवेल और ऊंची जल टंकी का निर्माण पूरा करे।

याचिका निस्तारित होने के बाद घोड़ानाला क्षेत्र के निवासियों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिलने की उम्मीद बढ़ी है। निर्माण पूरा होने के बाद क्षेत्र में पेयजल उपलब्धता से संबंधित समस्या का समाधान होने की अपेक्षा है।

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