श्राद्ध पक्ष में नैनीताल-कैंची धाम में उमड़ा सैलानियों-श्रद्धालुओं का रेला, 20 किमी तक जाम; सड़क किनारे सोने को मजबूर हुए पर्यटक

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नवीन समाचार, नैनीताल, 3 अक्टूबर 2026 (Massive Influx in Nainital-Kainchi Dham)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) जनपद में श्राद्ध पक्ष (Pitru Paksha) के बीच महात्मा गांधी जयंती (Gandhi Jayanti) और लाल बहादुर शास्त्री जयंती (Lal Bahadur Shastri Jayanti) के अवसर पर मिले लगातार तीन दिन के अवकाश ने पर्यटन और धार्मिक यात्राओं का ऐसा दबाव पैदा कर दिया कि नैनीताल से कैंची धाम तक सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कैंची धाम जाने वाले मार्गों पर वाहनों की कतारें स्थानीय स्तर पर 15 से 20 किलोमीटर तक पहुंचने की बात सामने आई, जबकि अलग-अलग मार्गों पर कई किलोमीटर लंबा जाम दर्ज हुआ। अनेक श्रद्धालुओं को अपने वाहन छोड़कर पांच किलोमीटर से अधिक दूरी तक पैदल चलना पड़ा। 

वहीं सरोवरनगरी नैनीताल में शुक्रवार रात स्थिति यह रही कि बड़ी संख्या में पर्यटक होटल में कमरा और वाहनों के लिए पार्किंग तलाशते आधी रात के बाद तक भटकते रहे। कमरा और पार्किंग नहीं मिलने पर कुछ पर्यटक माल रोड के किनारे रिक्शा स्टैंड, प्रतिष्ठानों के सामने उपलब्ध स्थानों और अन्य खुले स्थानों में रात बिताते दिखाई दिए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांधी जयंती के लंबे सप्ताहांत में नैनीताल में 4,000 से अधिक पर्यटक वाहन और 12,000 से अधिक पर्यटक पहुंचे। स्थानीय पर्यटन कारोबारियों ने इसे असाधारण भीड़ बताया।

यह स्थिति केवल एक छुट्टी के दौरान लगा सामान्य जाम नहीं है। इसने नैनीताल-कैंची धाम क्षेत्र में बढ़ती धार्मिक एवं पर्यटन आधारित आवाजाही के मुकाबले सड़क, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन, आवास, बाइपास और आपातकालीन यातायात व्यवस्था की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

कैंची धाम में श्रद्धालुओं का सैलाब, पैदल चलकर पहुंचे लोग

शुक्रवार से ही कैंची धाम (Kainchi Dham) की ओर श्रद्धालुओं का दबाव बढ़ गया था। रिपोर्टों के अनुसार 2 अक्टूबर को लगभग 36,000 श्रद्धालुओं के कैंची धाम पहुंचने की जानकारी सामने आई। भारी भीड़ के कारण यात्रियों को तीन घंटे से अधिक समय तक जाम में फंसे रहना पड़ा। कई श्रद्धालु वाहनों से उतरकर पैदल मंदिर की ओर बढ़े।

4a8a08f09d37b73795649038408b5f33 1469638258शनिवार को भी स्थिति सामान्य नहीं हुई। सुबह से कैंची धाम, भवाली और आसपास के मार्ग वाहनों और श्रद्धालुओं से भर गए। भवाली और भीमताल की ओर से शटल टैक्सियों (Shuttle Taxis) की व्यवस्था की गई, लेकिन भारी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण शटल व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया।

Massive Influx in Nainital-Kainchi Dhamभवाली में वाहनों को रोके जाने के कारण भवाली से गेठिया तक लगभग 10 किलोमीटर तक वाहनों का दबाव बना रहा। कई श्रद्धालुओं को शटल वाहनों से उतरकर आगे की दूरी पैदल तय करनी पड़ी। मंदिर परिसर और दर्शन की ओर जाने वाले मार्गों पर भी लंबी कतारें लगी रहीं।

दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए दर्शन करना केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि कई घंटे की प्रतीक्षा और पैदल यात्रा का अनुभव बन गया।

पुलिस ने पहले ही जारी किया था विशेष यातायात प्लान

इस भीड़ की संभावना प्रशासन और पुलिस को पहले से थी। नैनीताल पुलिस ने 2 से 4 अक्टूबर तक कैंची धाम, भवाली और भीमताल क्षेत्र के लिए विशेष यातायात एवं मार्ग परिवर्तन योजना लागू की थी। इसका उद्देश्य बाहरी वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर रोककर शटल सेवा के माध्यम से श्रद्धालुओं को कैंची धाम पहुंचाना था।

योजना के अनुसार—

  • भीमताल की ओर से आने वाले निजी वाहनों को भीमताल विकास भवन पार्किंग में खड़ा कराने की व्यवस्था थी।
  • भवाली-नैनीताल की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए भवाली सैनिटोरियम पार्किंग का उपयोग प्रस्तावित था।
  • पार्किंग स्थलों से कैंची धाम तक शटल सेवा और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था की गई।
  • भारी वाहनों को यातायात दबाव के अनुसार वैकल्पिक मार्गों से भेजने की योजना थी।
  • कैंची धाम क्षेत्र में निजी टैक्सियों और दुपहिया टैक्सी वाहनों के अनावश्यक प्रवेश को प्रतिबंधित किया गया था।

इसके बावजूद वास्तविक भीड़ इतनी अधिक रही कि कई मार्गों पर यातायात दबाव नियंत्रण से बाहर होता दिखाई दिया।

इससे एक महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आता है—क्या केवल डायवर्जन और शटल व्यवस्था पर्याप्त है, या अब कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या, वाहनों की संख्या और उनके आगमन के समय को भी व्यवस्थित करने की आवश्यकता है?

नैनीताल में 4 हजार से अधिक वाहन, 12 हजार से ज्यादा पर्यटक

कैंची धाम के साथ नैनीताल भी पर्यटकों से भर गया। स्थानीय पर्यटन कारोबारियों के अनुसार 2 अक्टूबर को नैनीताल में 4,000 से अधिक पर्यटक वाहन पहुंचे और 12,000 से अधिक पर्यटकों के आने का अनुमान है।

नैनीताल के होटल और आसपास के पर्यटन स्थलों में भी कमरों की उपलब्धता तेजी से कम हो गई। पंगोट, खुर्पाताल, मंगोली, गेठिया, भीमताल, भवाली, श्यामखेत, कैंची धाम और नौकुचियाताल सहित आसपास के पर्यटन क्षेत्रों के होटल भी बड़ी संख्या में भर गए।

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जिन लोगों ने पहले से कमरे आरक्षित नहीं कराए थे, उनके लिए रात में ठहरने की समस्या खड़ी हो गई।

आधी रात तक कमरा और पार्किंग तलाशते रहे पर्यटक

शुक्रवार रात नैनीताल में भीड़ का सबसे परेशान करने वाला दृश्य सामने आया। दिनभर पर्यटन स्थलों पर घूमने के बाद जब पर्यटक रात में ठहरने के लिए होटल और गेस्ट हाउस तलाशने लगे तो बड़ी संख्या में लोगों को कमरे नहीं मिले।

कई पर्यटक एक होटल से दूसरे होटल तक कमरे की तलाश में घूमते रहे। कुछ लोग आसपास के पर्यटन क्षेत्रों की ओर लौट गए, जबकि जिनके पास कोई विकल्प नहीं था, उन्हें खुले स्थानों में रात बितानी पड़ी।

0cc175b9c0f1b6a831c399e269772661 1925948716मल्लीताल के रिक्शा स्टैंड, माल रोड पर प्रतिष्ठानों के आगे उपलब्ध स्थान और बेंचों पर थके हुए पर्यटक बैठे, ऊंघते और सोते दिखाई दिए। कुछ परिवार अपने वाहनों में ही रात बिताने को मजबूर हुए।

8277e0910d750195b448797616e091ad 2075641138पार्किंग की स्थिति भी कम गंभीर नहीं रही। शहर की प्रमुख पार्किंग भर जाने के बाद वाहन चालक देर रात तक जगह तलाशते रहे। इससे शहर की सड़कों पर यातायात का दबाव और बढ़ गया।

यह तस्वीर नैनीताल जैसे पर्यटन नगर के सामने एक बुनियादी सवाल खड़ा करती है—क्या नगर में पर्यटकों को आमंत्रित करने की क्षमता जितनी तेजी से बढ़ी है, उतनी ही तेजी से पार्किंग और आवासीय क्षमता बढ़ी है?

काठगोदाम से भुजियाघाट और एरीज मोड़ से नैनीताल तक जाम

शुक्रवार रात नैनीताल-हल्द्वानी मार्ग पर काठगोदाम से भुजियाघाट और डोलमार तक लगभग आठ किलोमीटर तक वाहनों की कतार लगने की स्थिति सामने आई। एरीज मोड़ से नैनीताल की ओर भी लगभग पांच किलोमीटर तक वाहन फंसे रहे।

कालाढुंगी मार्ग पर नैनीताल से खुर्पाताल के बीच भी यातायात का दबाव बना रहा।

e1671797c52e15f763380b45e841ec32 1259692682स्थानीय विवरण के अनुसार, हल्द्वानी से नैनीताल की लगभग 39 किलोमीटर दूरी तय करने में यात्रियों को तीन से छह घंटे तक का समय लगा। सामान्य परिस्थितियों में इसी दूरी को तय करने में लगने वाले समय की तुलना में यह कई गुना अधिक था।

शनिवार को भी नैनीताल-भवाली मार्ग पर यातायात का दबाव बना रहा। एक ओर कैंची धाम जाने वाले वाहन थे और दूसरी ओर नैनीताल तथा आसपास के पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले वाहन। दोनों दिशाओं से बढ़े यातायात ने मार्ग की क्षमता पर दबाव बढ़ाया।

सड़क के गड्ढों ने भी धीमी की रफ्तार

नैनीताल-हल्द्वानी और नैनीताल-भवाली मार्गों पर कई स्थानों पर सड़क की स्थिति भी यातायात की गति को प्रभावित करती रही।

पहाड़ी मार्गों पर पहले से ही सड़क की चौड़ाई सीमित होती है। ऐसे में यदि सड़क पर गड्ढे या क्षतिग्रस्त हिस्से हों तो वाहन सामान्य गति से नहीं चल पाते। किसी एक स्थान पर वाहनों की गति कम होने का प्रभाव पीछे कई किलोमीटर तक दिखाई दे सकता है।

इस बार अत्यधिक वाहन दबाव के बीच सड़क की यह स्थिति जाम की समस्या को और बढ़ाने वाली परिस्थितियों में शामिल रही।

स्थानीय लोगों की यात्रा भी हुई प्रभावित

जाम का प्रभाव केवल पर्यटकों और कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रहा।

पर्वतीय क्षेत्रों से हल्द्वानी आने वाले स्थानीय लोगों के लिए यही मार्ग दैनिक जीवन की आवश्यकताओं का प्रमुख साधन है। नौकरी, चिकित्सा, शिक्षा, व्यापार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए आने-जाने वाले लोगों को भी घंटों यातायात में फंसे रहना पड़ा।

कई लोगों की सामान्य यात्रा का समय दोगुना या उससे अधिक हो गया।

सबसे गंभीर चिंता आपातकालीन सेवाओं को लेकर रही। जब सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लगी हो तो एंबुलेंस (Ambulance), अग्निशमन वाहन (Fire Tender) या पुलिस के आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

यातायात योजना में आपातकालीन वाहनों के लिए मार्ग खुला रखने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन वास्तविक भीड़ के दौरान इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करना अपने आप में बड़ी चुनौती है।

जून में बैली ब्रिज बना, लेकिन बाइपास का लाभ क्यों नहीं मिला?

कैंची धाम के जाम की चर्चा में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा कैंची धाम बाइपास का भी है।

बाइपास का उद्देश्य ही यह था कि भवाली से कैंची धाम होकर जाने वाले मुख्य मार्ग पर बढ़ते यातायात के दबाव को कम किया जा सके। फरवरी 2026 में लोक निर्माण विभाग की समीक्षा के दौरान 18.2 किलोमीटर लंबे बाइपास को 15 जून तक पूरा करने और शिप्रा नदी पर स्थायी पुल बनने में समय लगने के कारण अस्थायी बैली ब्रिज के जरिए बाइपास का संचालन शुरू करने की बात कही गई थी।

इसके बाद 10 जून को भवाली-दूनीखाल-रातीघाट बाइपास पर बैली ब्रिज तैयार होने और उसके परीक्षण की जानकारी सामने आई। शिप्रा नदी पर बैली ब्रिज का निर्माण पूरा होने और इसे कैंची धाम तथा अल्मोड़ा-हल्द्वानी मार्ग पर जाम से राहत दिलाने वाला उपाय बताया गया।

यानी 15 जून को अस्थायी बैली ब्रिज बनाने का मूल उद्देश्य यही था कि स्थायी पुल के तैयार होने से पहले बाइपास का उपयोग किया जा सके और मुख्य मार्ग पर वाहनों का दबाव कम किया जा सके। लेकिन जमीनी स्थिति अलग रही।

बैली ब्रिज बना, लेकिन बाइपास का मार्ग कच्चा और निर्माणाधीन रहा

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध स्थिति के अनुसार, बैली ब्रिज के तैयार हो जाने के बावजूद बाइपास का पूरा मार्ग उस समय यातायात के लिए तैयार नहीं था। मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा कच्चा और निर्माणाधीन था।

इस कारण केवल नदी के ऊपर पुल तैयार हो जाने से पूरा बाइपास नियमित यातायात के लिए उपयोगी नहीं बन सका। 

इसके बाद मानसून ने समस्या और बढ़ा दी। कच्चे और निर्माणाधीन मार्ग पर बारिश के कारण ऐसी स्थिति बनी कि उसका सामान्य वाहनों के लिए उपयोग करना संभव नहीं रहा। परिणाम यह हुआ कि जून में जिस बैली ब्रिज को तत्काल यातायात राहत के लिए बनाया गया था, उसका अपेक्षित लाभ नियमित रूप से नहीं मिल पाया। बाइपास का उद्देश्य केवल सड़क और पुल का निर्माण करना नहीं था, बल्कि उस पर यातायात चलाना और मुख्य मार्ग से वाहनों का दबाव हटाना था।

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यदि बैली ब्रिज तैयार होने के बाद भी पूरा मार्ग कच्चा और निर्माणाधीन रहा तथा बरसात में उसकी स्थिति चलने योग्य नहीं रही, तो बाइपास का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य ही पूरा नहीं हो पाया। 

अक्टूबर में फिर पुराने मार्ग पर क्यों आया पूरा दबाव?

2 अक्टूबर से तीन दिन का अवकाश शुरू हुआ। पुलिस को पहले से भीड़ बढ़ने का अनुमान था और उसने 2 से 4 अक्टूबर तक विशेष यातायात योजना भी लागू की। इसके बावजूद कैंची धाम और नैनीताल की ओर आने वाले वाहनों का बड़ा दबाव पुराने मुख्य मार्गों पर ही बना रहा।

यदि बाइपास पूरी तरह यातायात योग्य होता और उसका नियमित उपयोग हो रहा होता तो मुख्य मार्ग से कितना यातायात हटता, यह अलग प्रश्न है। लेकिन वर्तमान स्थिति ने यह जरूर दिखा दिया कि बाइपास की उपयोगिता तभी सामने आएगी जब पूरा मार्ग वास्तव में वाहनों के चलने योग्य और निर्बाध हो। 

इसलिए अब सवाल केवल यह नहीं है कि बाइपास का निर्माण कब पूरा होगा। सवाल यह है कि—

बाइपास का पूरा मार्ग कब तक पक्का और यातायात योग्य होगा?

क्या स्थायी पुल बनने तक बैली ब्रिज से जुड़े पूरे मार्ग का उपयोग संभव बनाया जाएगा?

और स्थायी पुल तथा बाइपास पूरा होने के बाद वास्तव में कितने वाहनों को मुख्य कैंची धाम मार्ग से हटाया जा सकेगा?

इन सवालों का उत्तर ही यह तय करेगा कि बाइपास वास्तव में कैंची धाम की जाम समस्या का समाधान बनता है या केवल एक निर्माण परियोजना बनकर रह जाता है।

तीन दिन पहले ही पुलिस ने बना दी थी व्यवस्था, फिर भी भीड़ क्यों संभली नहीं?

यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस बार प्रशासन पूरी तरह अनजान नहीं था। पुलिस ने पहले से ही पार्किंग, शटल, डायवर्जन और भारी वाहनों के मार्ग परिवर्तन की योजना बनाई थी। इसका अर्थ है कि समस्या का एक हिस्सा पूर्वानुमानित था।

लेकिन अनुमान और वास्तविक संख्या में अंतर कितना था, यह इस सप्ताहांत के अनुभव से स्पष्ट हुआ। जब कैंची धाम में हजारों श्रद्धालु और नैनीताल में हजारों वाहन एक साथ पहुंचते हैं, तो केवल पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाकर यातायात नियंत्रित करना कठिन है। इसके लिए पहले से तय करना होगा कि—

  • एक दिन में कितने निजी वाहनों को ऊपर जाने दिया जाएगा।
  • किस स्थान पर वाहनों को रोककर शटल सेवा दी जाएगी।
  • कैंची धाम में एक समय में कितने श्रद्धालुओं को संभालने की क्षमता है।
  • पार्किंग स्थल कितने वाहनों को वास्तव में समायोजित कर सकते हैं।
  • नैनीताल में होटल क्षमता और वाहन क्षमता का अनुपात क्या है।
  • आपातकालीन वाहनों के लिए हर परिस्थिति में कौन सा मार्ग खुला रखा जाएगा।
  • और विशेष भीड़ वाले दिनों में बाइपास का पूरा उपयोग कैसे कराया जाएगा।

टैक्सी और होटल किराये में भारी वृद्धि के दावे

भीड़ का असर होटल और टैक्सी कारोबार पर भी पड़ा।

कुछ पर्यटकों ने दावा किया कि टैक्सी किराया सामान्य दरों की तुलना में तीन गुना तक बढ़ गया। कुछ सैलानियों ने होटल के कमरों की दरें चार गुना तक बढ़ाए जाने की बात कही।

कुछ पर्यटकों के अनुसार, सामान्य दिनों में लगभग ₹2,000 में मिलने वाला कमरा ₹6,000 से ₹8,000 तक में दिया गया।

हालांकि, इन दरों को पूरे नैनीताल की आधिकारिक दर नहीं माना जा सकता। ये पर्यटकों के दावों पर आधारित हैं। इसलिए इस संबंध में सभी होटलों और टैक्सी संचालकों पर एक समान आरोप लगाना उचित नहीं होगा। फिर भी यदि किसी विशेष अवसर पर मांग बढ़ने के साथ दरों में अत्यधिक वृद्धि होती है तो प्रशासन के लिए पारदर्शी दरों और शिकायत निवारण की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।

पितृपक्ष में भी इतनी बड़ी संख्या में लोग क्यों पहुंचे?

इस पूरे घटनाक्रम का एक सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू भी है।

पितृपक्ष में भारतीय परिवारों में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने, तर्पण और श्राद्ध जैसे धार्मिक कर्म करने की परंपरा है। इस अवधि में अनेक परिवार अपने धार्मिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता देते हैं। 

इसके बावजूद इस बार गांधी जयंती के लंबे सप्ताहांत में नैनीताल और कैंची धाम में बड़ी संख्या में पर्यटकों और श्रद्धालुओं का पहुंचना चर्चा का विषय बना।

इसका एक प्रमुख कारण लगातार तीन दिन का अवकाश रहा। लंबे समय बाद मौसम में सुधार और मानसून की विदाई के बाद लोगों ने पहाड़ों की ओर यात्रा का कार्यक्रम बनाया।

पिछले कुछ सप्ताहों में बारिश, भूस्खलन और पहाड़ी मार्गों पर संभावित बाधाओं के कारण पर्यटन गतिविधियों में जो कमी रही थी, उसके बाद अचानक मिला लंबा सप्ताहांत भीड़ को और बढ़ाने वाला कारक बना।

दूसरी ओर कैंची धाम की धार्मिक लोकप्रियता पिछले वर्षों में लगातार बढ़ी है। विराट कोहली के आने से बढ़ी कैंची धाम की लोकप्रियता को हाल में आयी फिल्म ‘हनुमान अंश’ की सफलता ने और अधिक बढ़ाया है। जिला प्रशासन भी कैंची धाम को नैनीताल जिले के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में गिनाता है।

इसलिए अब कैंची धाम की भीड़ को केवल किसी एक वार्षिक आयोजन तक सीमित समस्या मानना कठिन है। सामान्य सप्ताहांत और विशेष अवकाश में भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

पर्यटन बढ़ रहा है, लेकिन क्या आधारभूत ढांचा उसी गति से बढ़ रहा है?

नैनीताल और कैंची धाम में भीड़ को केवल समस्या के रूप में देखना भी पूरी तस्वीर नहीं होगी।

हजारों पर्यटकों और श्रद्धालुओं का पहुंचना उत्तराखंड के पर्यटन तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। होटल, रेस्तरां, टैक्सी, नौकायन, स्थानीय दुकानों और अन्य व्यवसायों को इससे प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।

लेकिन पर्यटन की सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जा सकती कि कितने लोग पहुंचे।

यदि पर्यटक पहुंचकर घंटों जाम में फंसे रहें, होटल न मिले, पार्किंग के लिए भटकें और अंत में सड़क किनारे रात बिताएं, तो यह पर्यटन की बढ़ती मांग और उपलब्ध आधारभूत ढांचे के बीच असंतुलन का स्पष्ट संकेत है।

इसी तरह यदि श्रद्धालु दर्शन के लिए पांच किलोमीटर से अधिक पैदल चलने को मजबूर हों, तो यह आस्था की शक्ति का दृश्य जरूर हो सकता है, लेकिन यातायात एवं श्रद्धालु प्रबंधन की क्षमता के सामने एक गंभीर प्रश्न भी है।

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अब केवल जाम हटाने की नहीं, पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत

2 और 3 अक्टूबर की स्थिति ने कम से कम छह मुद्दों को एक साथ सामने ला दिया है—

एक—कैंची धाम की बढ़ती धार्मिक आवाजाही।

दो—नैनीताल में बढ़ती पर्यटन आधारित वाहन संख्या।

तीन—सीमित पार्किंग और होटल क्षमता।

चार—कच्चे/निर्माणाधीन बाइपास के कारण वैकल्पिक मार्ग का अपेक्षित उपयोग न हो पाना।

पांच—मुख्य मार्गों पर गड्ढों की स्थिति और सीमित क्षमता।

छह—आपातकालीन एवं स्थानीय यातायात के लिए सुरक्षित मार्ग बनाए रखने की चुनौती।

इन सभी समस्याओं का समाधान अलग-अलग विभागों के छोटे-छोटे उपायों से नहीं होगा। लोक निर्माण विभाग (PWD), पुलिस, जिला प्रशासन, परिवहन विभाग, पर्यटन विभाग, नगर निकाय और स्थानीय व्यापारिक संगठनों को मिलकर दीर्घकालीन यातायात एवं पर्यटन प्रबंधन योजना बनानी होगी।

बाइपास पूरा होना अब क्यों जरूरी है?

कैंची धाम बाइपास को लेकर फरवरी में 15 जून तक इसे शुरू करने का लक्ष्य बताया गया था। 18.2 किलोमीटर लंबे बाइपास के माध्यम से मुख्य कैंची धाम मार्ग पर निर्भरता कम करने की योजना थी और स्थायी पुल बनने तक बैली ब्रिज के माध्यम से अंतरिम व्यवस्था करने की बात कही गई थी। जून में बैली ब्रिज तैयार भी हुआ।

लेकिन यदि बाइपास का शेष मार्ग कच्चा और निर्माणाधीन होने के कारण नियमित यातायात के लिए उपयोगी नहीं हो पाया तथा बरसात में उसकी स्थिति और खराब हो गई, तो अक्टूबर के इस जाम ने उस अंतरिम व्यवस्था की सीमाएं स्पष्ट कर दी हैं।

अब स्थायी समाधान का इंतजार और लंबा नहीं होना चाहिए। कैंची धाम की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए बाइपास का पूरा मार्ग कब यातायात योग्य होगा, स्थायी पुल कब पूरा होगा और मुख्य मार्ग पर वास्तविक यातायात दबाव कितना कम होगा—इन तीन सवालों का उत्तर ही इस परियोजना की सफलता तय करेगा।

आखिर इस भीड़ से क्या सबक?

Kainchi Dham-Weekend Diversion Plan (Load Bearing (Nainital-Special Traffic Plan for Kainchi Dham) Capacity of Kainchi Dham be Measure (Traffic Jam Took the Life of a 40Year Shopkeeper)नैनीताल और कैंची धाम में 2 अक्टूबर से उमड़ी भीड़ ने एक तरफ उत्तराखंड के पर्यटन और धार्मिक स्थलों की बढ़ती लोकप्रियता दिखाई है, तो दूसरी तरफ पहाड़ी नगरों की सीमित क्षमता की वास्तविक तस्वीर भी सामने रख दी है।

एक ओर नैनीताल में हजारों पर्यटक वाहन और पर्यटकों की भीड़ है, दूसरी ओर कैंची धाम में हजारों श्रद्धालु हैं। इनके बीच सीमित सड़कें, सीमित पार्किंग, निर्माणाधीन बाइपास और पहाड़ी भूगोल है।

ऐसे में समाधान केवल यह नहीं हो सकता कि अगले सप्ताह पुलिस और अधिक जवान तैनात कर दे या फिर नया डायवर्जन जारी कर दिया जाए और वाहनों को यहाँ-वहाँ रोक दिया जाए।स्थायी समाधान वह होगा जिसमें बाइपास जल्द से जल्द वास्तव में पूरी तरह यातायात योग्य हो, पार्किंग नगर से पहले उपलब्ध हो, शटल व्यवस्था पर्याप्त हो, सड़कें सुरक्षित एवं दुरुस्त हों और विशेष भीड़ वाले दिनों में पर्यटक एवं श्रद्धालु वाहनों की संख्या का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन हो।

इस सप्ताहांत ने यह भी बता दिया कि नैनीताल और कैंची धाम की लोकप्रियता अब उस स्तर पर पहुंच रही है जहां “जाम लगने के बाद यातायात संभालना” पर्याप्त नहीं होगा; जाम लगने से पहले यातायात की योजना बनानी होगी।

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