कैंची धाम और आसपास 12 प्रतिष्ठानों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का नोटिस, बिना एसटीपी मिले होटल-फ्लैट्स; जवाब न मिला तो होगी कड़ी कार्रवाई

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नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अक्टूबर 2026 (PCB Issue Notice to 12 Establishments)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) जिले में प्रसिद्ध कैंची धाम (Kainchi Dham) और आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Regional Pollution Control Board) ने 12 प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किए हैं।

(PCB Issue Notice to 12 Establishments) कैंची धाम में 15 होटल समेत 36 औद्योगिक इकाइयों को पॉल्यूशन बोर्ड ने जारी  किया नोटिस, मांगा जवाबसंयुक्त सर्वे (Joint Survey) में भवाली के श्यामखेत (Shyamkhet) में निर्माणाधीन छह फ्लैट्स, कैंची धाम-भवाली क्षेत्र के तीन होटल और रामनगर (Ramnagar) के तीन होटलों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की व्यवस्था नहीं मिलने अथवा उपलब्ध व्यवस्था के सुचारू रूप से संचालित नहीं होने की बात सामने आई है।

इसके अलावा कुछ प्रतिष्ठानों के पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आवश्यक अनुमति/लाइसेंस (Consent/License) भी नहीं पाया गया। बोर्ड ने संबंधित संचालकों से स्पष्टीकरण मांगा है और निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। संयुक्त जांच रिपोर्ट में कैंची धाम क्षेत्र में सीवेज निस्तारण के लिए पर्याप्त क्षमता वाले एसटीपी की आवश्यकता और बढ़ते श्रद्धालु दबाव के कारण ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की जरूरत भी दर्ज की गई है। 

संयुक्त सर्वे में सामने आईं कई अनियमितताएं

क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने संबंधित विभागों के साथ किए गए संयुक्त सर्वे के दौरान इन प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। जांच में श्यामखेत में निर्माणाधीन छह फ्लैट्स सहित कैंची धाम और भवाली क्षेत्र के तीन तथा रामनगर क्षेत्र के तीन होटलों में एसटीपी की स्थिति की जांच की गई।

बताया गया कि कुछ स्थानों पर एसटीपी उपलब्ध होने के बावजूद वे सुचारू रूप से संचालित नहीं पाए गए। इसके अलावा कई होटल संचालकों के पास बोर्ड की आवश्यक अनुमति अथवा लाइसेंस भी उपलब्ध नहीं पाया गया।

क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक अनुराग नेगी के अनुसार सभी संबंधित इकाइयों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है तथा तत्काल प्रभाव से पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो जुर्माने से सीलिंग तक कार्रवाई

बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने अथवा कमियों को दूर नहीं किए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इसमें भारी जुर्माना लगाने, न्यायालय में अभियोग की कार्रवाई करने और गंभीर स्थिति में प्रतिष्ठान को सील (Seal) करने की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।

कैंची धाम में पहले भी सामने आ चुकी है सीवेज की समस्या

कैंची धाम क्षेत्र में सीवेज और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समस्या पहले भी प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सामने आती रही है। पूर्व में फरवरी 2025 में भी क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कैंची धाम के आसपास 15 होटलों को ठोस अपशिष्ट निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने और आवश्यक अनुमति उपलब्ध नहीं होने को लेकर नोटिस जारी किए थे। आप यह पूर्व संबंधित समाचार भी जरूर पढ़ना चाहेंगे : प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैंची धाम के आसपास स्थित 15 होटल फैला रहे प्रदूषण, इनके साथ कुमाऊँ की 36 औद्योगिक इकाइयों को भी प्रदूषण फैलाने को लेकर नोटिस…

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वहीं, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal-NGT) से जुड़े एक संयुक्त निरीक्षण में कैंची धाम क्षेत्र के समीप स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, रेस्टोरेंट, होटल और आवासीय भवनों से निकलने वाले सीवर के सीधे रौली/नाले में जाने की स्थिति नहीं पाए जाने की बात दर्ज की गई थी। हालांकि रिपोर्ट में बढ़ते सीवेज दबाव को देखते हुए उचित क्षमता के एसटीपी को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करने की आवश्यकता बताई गई थी।

संयुक्त रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि कैंची धाम में बड़ी संख्या में पर्यटकों और श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण ठोस अपशिष्ट की मात्रा बढ़ रही है। इसके लिए पर्याप्त कूड़ेदान, ठोस अपशिष्ट के संग्रहण और पृथक्करण की व्यवस्था तथा उचित संख्या में सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध कराने की जरूरत बताई गई थी। 

शिप्रा नदी को लेकर भी पहले उठ चुके हैं सवाल

कैंची धाम से होकर बहने वाली शिप्रा नदी (Shipra River) को लेकर भी समय-समय पर सीवेज प्रदूषण की शिकायतें सामने आती रही हैं। मार्च 2025 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अनुराग नेगी ने शिप्रा में सीवेज छोड़ने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कार्रवाई की बात कही थी। तत्कालीन उपजिलाधिकारी वीसी पंत ने भी कैंची क्षेत्र में नदी में सीवर छोड़ने वालों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पुलिस और राजस्व कर्मियों को निर्देश दिए जाने की जानकारी दी थी। 

संयुक्त जांच रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कैंची धाम क्षेत्र में नियमित रूप से जल के नमूने लेकर उनका विश्लेषण करता है। रिपोर्ट में संबंधित जल गुणवत्ता को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के अनुसार ‘बी’ श्रेणी (Class-B) में बताया गया था। 

कैंची धाम में लगातार बढ़ रहे श्रद्धालुओं और पर्यटकों के दबाव के बीच होटल, फ्लैट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सीवेज तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की यह कार्रवाई क्षेत्र में पर्यावरणीय नियमों के पालन पर बढ़ती निगरानी का संकेत है।

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