नवीन समाचार, नैनीताल, 21 जुलाई 2026 (UK High Court News 21 July 2026)। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के नैनीताल (Nainital) नगर में स्थित हाईकोर्ट (High Court) में मंगलवार को सजा पूरी कर चुके कैदियों की रिहाई, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (Corbett Tiger Reserve) में कथित भ्रष्टाचार, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (Uttarakhand Parivartan Party) के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी (Prabhat Dhyani) की हिरासत, जमीनी विवाद तथा खटीमा (Khatima) नगर पालिका में ठेकेदारों के पंजीकरण सहित कई महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई हुई।
सजा पूरी कर चुके कैदियों की रिहाई मामले में सुनवाई अब 10 अगस्त को
उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के नैनीताल (Nainital) नगर में हाईकोर्ट ने अपनी सजा पूरी कर चुके कैदियों को सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के आदेश के बावजूद रिहा नहीं किए जाने के मामले में स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका तथा अन्य कैदियों की याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई की।
न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी (Ravindra Maithani) और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह (Siddharth Sah) की खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 10 अगस्त (सोमवार) की तिथि निर्धारित की। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या सभी मामलों में जवाब दाखिल कर दिया गया है। इस पर राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि सभी रिहाई संबंधी याचिकाओं में जवाब प्रस्तुत कर दिया गया है। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ताओं को अगली सुनवाई से पूर्व अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के निर्देश दिए।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रकरण में विजिलेंस के मुकदमे देहरादून स्थित सीबीआई कोर्ट स्थानांतरित
उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के नैनीताल (Nainital) नगर में हाईकोर्ट ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में कथित भ्रष्टाचार एवं अवैध निर्माण मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI) की अर्जी स्वीकार कर ली। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की एकलपीठ ने हल्द्वानी (Haldwani) में लंबित विजिलेंस (Vigilance) के दो आपराधिक मामलों को देहरादून (Dehradun) स्थित विशेष भ्रष्टाचार निवारण (सीबीआई) न्यायालय में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि सीबीआई विस्तृत जांच पूरी कर देहरादून की अधिसूचित सीबीआई अदालत में पहले ही आरोपपत्र (Charge Sheet) दाखिल कर चुकी है। ऐसे में हल्द्वानी में समानांतर सुनवाई से अधिकार क्षेत्र का टकराव एवं प्रक्रियागत विसंगतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
अब मिसलेनियस क्रिमिनल केस संख्या 01/2023 (राज्य बनाम बृज बिहारी शर्मा) तथा 22/2023 (राज्य बनाम किशन चंद) की सुनवाई देहरादून स्थित सीबीआई कोर्ट में होगी। यह मामला वर्ष 2022 में विजिलेंस एस्टैब्लिशमेंट, हल्द्वानी (नैनीताल सेक्टर) द्वारा दर्ज एफआईआर संख्या 06/2022 से संबंधित है।
सीबीआई की चार्जशीट में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के तत्कालीन निदेशक राहुल, कालागढ़ टाइगर रिजर्व डिवीजन (Kalagarh Tiger Reserve Division) के तत्कालीन उप वन संरक्षक एवं प्रभागीय वनाधिकारी किशन चंद तथा तत्कालीन डीएफओ अखिलेश तिवारी सहित आठ सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है। इनके अलावा बृज बिहारी शर्मा, मथुरा सिंह मवाड़ी, सुरेंद्र सिंह, संदीप आर्या तथा तत्कालीन वायरलेस ऑपरेटर राजेश रावत भी आरोपी हैं। सभी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 120-बी, 218, 409, 467 एवं 471 तथा वन संरक्षण अधिनियम, भारतीय वन अधिनियम और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलेगा।
प्रभात ध्यानी मामले में अगली सुनवाई 16 सितंबर को
उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के नैनीताल (Nainital) नगर में हाईकोर्ट ने उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को 19 जुलाई को ऋषिकेश (Rishikesh) रेलवे स्टेशन से कथित रूप से जबरन हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर ले जाने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई की।
न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने राज्य सरकार सहित अन्य पक्षकारों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 16 सितंबर निर्धारित की।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रभात ध्यानी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita-BNS) की धारा 172 के तहत कार्रवाई की गई थी, क्योंकि उनके दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की आशंका थी। सरकार ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस ने सभी राज्यों को ऐसे व्यक्तियों को सीमा क्षेत्र में रोकने संबंधी सूचना भेजी थी। इस पर अदालत ने पूछा कि किस कानूनी प्रावधान के तहत उन्हें ट्रेन से उतारा गया, किस आधार पर यह माना गया कि वे प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे और क्या यह नागरिकों की आवाजाही की स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं है।
जमीनी विवाद में दर्ज क्रॉस एफआईआर को हाईकोर्ट ने रद्द किया
उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के नैनीताल (Nainital) नगर में हाईकोर्ट ने जमीन विवाद में दर्ज कराई गई एक क्रॉस एफआईआर को दुर्भावनापूर्ण एवं प्रतिशोध की भावना से प्रेरित मानते हुए निरस्त कर दिया।
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल (Rakesh Thapliyal) की एकलपीठ ने 17 जुलाई 2026 को दिए निर्णय में कहा कि दीवानी विवादों के समाधान अथवा दबाव बनाने के लिए आपराधिक कानून का उपयोग न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
मामला पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) के यमकेश्वर ब्लॉक (Yamkeshwar Block) स्थित कुंड गांव की लगभग 4,000 वर्ग गज भूमि के 3.39 करोड़ रुपये के सौदे से जुड़ा है। खरीदारों द्वारा भुगतान के बावजूद विक्रेताओं ने बैनामा नहीं किया। इसके बाद खरीदारों ने सिविल कोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त कर जालसाजी का मुकदमा दर्ज कराया, जिसमें पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इसके जवाब में विक्रेता संजय सिंह रावत ने खरीदार पक्ष के विरुद्ध क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई थी।
याचिकाकर्ताओं की अधिवक्ता बानी दीक्षित की दलीलों एवं अभिलेखों के अवलोकन के बाद अदालत ने पाया कि प्राथमिकी केवल प्रतिशोध की भावना से दर्ज कराई गई थी। सुप्रीम कोर्ट के भजन लाल निर्णय का हवाला देते हुए लक्ष्मणझूला थाने में दर्ज एफआईआर रद्द कर दी गई। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का लंबित दीवानी मुकदमों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
खटीमा नगर पालिका में ठेकेदार पंजीकरण मामले में पालिकाध्यक्ष और ईओ को अदालत में तलब
उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के नैनीताल (Nainital) नगर में हाईकोर्ट ने खटीमा (Khatima) नगर पालिका परिषद में ठेकेदारों के पंजीकरण एवं निविदाओं में भागीदारी संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष एवं अधिशासी अधिकारी (EO) को 22 जुलाई (आज) अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता (Manoj Kumar Gupta) एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Subhash Upadhyay) की खंडपीठ ने नगर पालिका से शपथपत्र के माध्यम से कई बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
खटीमा निवासी विक्रम सिंह चौहान की याचिका पर सुनवाई के दौरान ईओ अदालत में उपस्थित हुईं, जबकि पालिकाध्यक्ष शहर से बाहर होने के कारण उपस्थित नहीं हो सके। अदालत ने नगर पालिका से पूछा है कि 16 जुलाई 2023 को सार्वजनिक सूचना के रूप में प्रकाशित ड्राफ्ट उपविधियां अंतिम रूप ले चुकी हैं या नहीं। यदि नहीं, तो ठेकेदारों का पंजीकरण किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।
खंडपीठ ने यह भी पूछा कि वर्ष 2023-24 तक पंजीकृत ठेकेदारों को ही इस वर्ष की निविदाओं में भाग लेने की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है। अदालत ने 6 अप्रैल को जारी आदेश के अनुपालन में नगर पालिका परिषद द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी है।
इसके अतिरिक्त अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि पूर्व की रिट याचिका में नगर पालिका की ओर से यह कहा गया था कि याचिकाकर्ता पहले से पंजीकृत है तथा उसका नाम केवल राजपत्र (Gazette) में अधिसूचित किया जाना शेष है। इस संबंध में नगर पालिका परिषद ने अब तक क्या कार्रवाई की है, इसका भी विवरण अदालत में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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