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पति की मृत्यु के बाद मृतक आश्रित नौकरी पर दो पत्नियों का दावा, डेढ़ साल से न्यायालय में अटका मामला

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नवीन समाचार, रामनगर, 19 अगस्त 2026 (2 Wives for Dependent of Deceased Job)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) जनपद में उत्तराखंड वन निगम (Uttarakhand Forest Corporation) के रामनगर (Ramnagar) प्रभाग में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी प्रेम राम (Prem Ram) की मृत्यु के बाद मृतक आश्रित कोटे (Compassionate Appointment) की नौकरी का मामला लगभग डेढ़ वर्ष से अटका हुआ है। कर्मचारी की दो पत्नियों ने स्वयं को दावेदार बताते हुए नियुक्ति पर अधिकार जताया है, जिसके कारण वन निगम ने नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी है। नौकरी के साथ कर्मचारी के भविष्य निधि, अर्जित अवकाश और अन्य देयकों का भुगतान भी विवाद के न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण लंबित है।

2 Wives for Dependent of Deceased Jobप्राप्त जानकारी के अनुसार प्रेम राम कालाढूंगी (Kaladhungi) क्षेत्र में अपनी दूसरी पत्नी के साथ रहते थे जबकि पहली पत्नी हल्द्वानी (Haldwani) में अलग रहती थीं। दिसंबर 2024 में प्रेम राम की मृत्यु के बाद कालाढूंगी में रह रही पत्नी ने मृतक आश्रित के रूप में नियुक्ति के लिए वन निगम में आवेदन किया। नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ती इससे पहले पहली पत्नी ने भी स्वयं को वैध पत्नी बताते हुए नौकरी पर अपना दावा प्रस्तुत कर दिया। इसके बाद मामला पहले परिवार न्यायालय (Family Court) और अब जिला न्यायालय (District Court) में विचाराधीन है।

नौकरी के साथ कर्मचारी के अन्य देयक भी विवाद में अटके

दोनों पक्ष अपने-अपने दावे और संबंधित दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर चुके हैं। वन निगम ने मामले में विधिक राय लेने के साथ न्यायालय के निर्णय तक नियुक्ति प्रक्रिया स्थगित कर दी है। निगम के सामने मुख्य प्रश्न यह है कि मृतक आश्रित कोटे की नियुक्ति किस दावेदार को दी जाए। इसी विवाद के कारण प्रेम राम से संबंधित भविष्य निधि (Provident Fund-EPF), अर्जित अवकाश (Earned Leave-EL) और अन्य लंबित देयकों के भुगतान का रास्ता भी अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।

परिवार में पांच बच्चे, दोनों परिवारों पर आर्थिक प्रभाव

प्रेम राम के परिवार में कुल पांच बच्चे हैं। कालाढूंगी में रह रही दूसरी पत्नी से तीन बेटियां और एक बेटा है जबकि पहली पत्नी से एक बेटी है। कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार के सामने आर्थिक सहारे का प्रश्न बना हुआ है। विशेष रूप से कालाढूंगी में रह रही पत्नी आर्थिक संकट का सामना कर रही है और मृतक आश्रित नियुक्ति मिलने की प्रतीक्षा कर रही है।

बताया गया कि महिला परिवार के भरण-पोषण के लिए जंगल से लकड़ियां एकत्र कर प्रतिदिन लगभग 200 से 300 रुपये की आय कर रही है। इसी आय से उसे परिवार का खर्च चलाने और बच्चों की जरूरतें पूरी करने का प्रयास करना पड़ रहा है। उसने रामनगर वन निगम के प्रभागीय बिक्री प्रबंधक (Divisional Sales Manager-DSM) मुदित आर्या (Mudit Arya) से मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति देने का अनुरोध भी किया है।

पहली पत्नी को न्यायालय के आदेश पर मिलता था भरण-पोषण

रामनगर प्रभाग के प्रभागीय बिक्री प्रबंधक मुदित आर्या के अनुसार प्रेम राम और पहली पत्नी के बीच विवाद के बाद दोनों अलग रहते थे। पहली पत्नी ने न्यायालय में भरण-पोषण का मामला प्रस्तुत किया था। न्यायालय के आदेश के अनुसार प्रेम राम के वेतन से निर्धारित राशि नियमित रूप से काटकर पहली पत्नी को दी जाती रही थी।

प्रेम राम की मृत्यु के बाद दोनों महिलाओं ने स्वयं को उनकी पत्नी बताते हुए मृतक आश्रित नियुक्ति पर दावा प्रस्तुत किया। इसके बाद नियुक्ति का मामला न्यायालय पहुंच गया। वन निगम अब दोनों पक्षों के दस्तावेज और न्यायालय में चल रही कार्यवाही को देखते हुए निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा है।

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डेढ़ वर्ष से नियुक्ति का इंतजार

मृतक आश्रित नियुक्ति का उद्देश्य कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके आश्रित परिवार को आर्थिक संकट से उबरने में सहायता देना है। लेकिन इस मामले में दो दावेदारों के बीच विवाद के कारण नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। एक ओर परिवार को तत्काल आय के साधन की आवश्यकता है तो दूसरी ओर वन निगम के लिए बिना न्यायालय के स्पष्ट निर्णय के किसी एक दावेदार को नियुक्ति देना विवाद को और बढ़ा सकता है।

इस मामले में न्यायालय का निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि नियुक्ति के साथ कर्मचारी के लंबित वित्तीय देयकों के भुगतान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होनी है। वन निगम को यह तय करना होगा कि न्यायालय के आदेश और विधिक राय के आधार पर नियुक्ति तथा अन्य देयकों की प्रक्रिया किस प्रकार आगे बढ़ायी जाए।

न्यायालय के निर्णय के बाद साफ होगा रास्ता

प्रभागीय बिक्री प्रबंधक मुदित आर्या के अनुसार वन निगम मामले में विधिक राय लेगा और न्यायालय के आदेश के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा। फिलहाल नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी गयी है। दोनों दावेदारों के अधिकारों और दस्तावेजों से जुड़े प्रश्न का समाधान न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही संभव होगा।

प्रेम राम की दिसंबर 2024 में मृत्यु के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब लगभग डेढ़ वर्ष से लंबित है। इस बीच मृतक आश्रित नियुक्ति के साथ कर्मचारी के भविष्य निधि, अर्जित अवकाश और अन्य देयकों का भुगतान भी रुका हुआ है। अब न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगा कि मृतक आश्रित कोटे की नियुक्ति किसे मिलती है और दोनों परिवारों से जुड़े लंबित वित्तीय मामलों का समाधान किस प्रकार होता है।

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