नवीन समाचार, देहरादून, 27 अक्टूबर 2026 (UK Polices Motto-Emblem Will Change)। उत्तराखंड (Uttarakhand) पुलिस अब अपनी नई पहचान के साथ सामने आएगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य गठन के बाद से प्रचलित ध्येय वाक्य ‘मित्रता, सेवा, सुरक्षा’ को बदलकर ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ किया जा रहा है। इसके साथ ही लगभग 26 वर्ष बाद पुलिस के प्रतीक चिह्न (Logo-Emblem) को भी नया स्वरूप दिया गया है।
नए प्रतीक चिह्न में शौर्य के प्रतीक लॉरेल रीथ (Laurel Wreath) के मध्य पूर्व की तरह हिमालय और नदी को अधिक स्पष्ट तरीके से स्थान दिया गया है। छह नवंबर को देहरादून में आयोजित होने वाले समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उत्तराखंड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस कलर प्रदान करेंगे। इसी अवसर पर नए ध्येय वाक्य और प्रतीक चिह्न का औपचारिक अनावरण भी प्रस्तावित है।
इस बदलाव के साथ उत्तराखंड पुलिस की पहचान में कर्तव्य, सत्यनिष्ठा और साहस को प्रमुखता देने का संदेश सामने आया है। नए प्रतीक चिह्न के साथ पुलिस की वर्दी, वाहनों, कार्यालयों और आधिकारिक दस्तावेजों पर भी नई पहचान दिखाई देगी। इसके अतिरिक्त पुलिस की बेल्ट, बाजूबंद और अन्य प्रतीकों के नए डिजाइन भी तैयार किए गए हैं।
‘मित्रता, सेवा, सुरक्षा’ की जगह अब ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’
उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद पुलिस ने अपनी अलग पहचान बनाने के लिए ‘मित्रता, सेवा, सुरक्षा’ का ध्येय वाक्य अपनाया था। इसके माध्यम से पुलिस को जनता के प्रति मित्रवत व्यवहार करने, सेवा भाव से कार्य करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले बल के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसी पहचान के चलते उत्तराखंड पुलिस को ‘मित्र पुलिस’ के नाम से भी जाना जाने लगा।
अब नए ध्येय वाक्य ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ के माध्यम से पुलिस के कार्य, सत्यनिष्ठा और शौर्य को प्रमुखता दी जा रही है। इन तीन शब्दों का व्यापक संदेश है कि पुलिस का आकलन उसके कार्यों, सत्य के प्रति प्रतिबद्धता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में साहस से होना चाहिए।
पुराने ध्येय वाक्य ने पुलिस और जनता के बीच मित्रवत संबंधों की पहचान बनाई थी। अब नए ध्येय वाक्य के साथ विभाग की कार्यप्रणाली और कर्तव्यनिष्ठा पर विशेष बल देने का संदेश दिया जा रहा है। हालांकि, किसी भी ध्येय वाक्य की वास्तविक सार्थकता उसके व्यवहार और कार्यों में दिखाई देने से ही स्थापित होती है।
नए प्रतीक चिह्न में हिमालय, नदी और शौर्य की प्रतीक पत्तियों की माला
उत्तराखंड पुलिस के नए प्रतीक चिह्न को राज्य की भौगोलिक पहचान और पुलिस के मूल दायित्वों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें लॉरेल रीथ के बीच हिमालय और नदी को दर्शाया गया है। हिमालय राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि नदी उत्तराखंड की जलधाराओं और प्राकृतिक संपदा की याद दिलाती है।
लॉरेल रीथ यानी करी पत्तों की माला को विजय, सम्मान, गौरव और उपलब्धि का प्रतीक माना जाता है। प्राचीन यूनानी और रोमन परंपराओं में इसका उपयोग विजेताओं, योद्धाओं और विशिष्ट उपलब्धि हासिल करने वालों के सम्मान में किया जाता था। पुलिस के प्रतीक चिह्न में इसका समावेश साहस, गौरव और कर्तव्य के प्रति समर्पण का संदेश देता है।
नए डिजाइन में लाल और नीले रंगों को भी स्थान दिया गया है। पुलिस लाइंस देहरादून के स्टेडियम के बाहर नए प्रतीक चिह्न को पेंट से बनाया जा चुका है। औपचारिक अनावरण के बाद इसे पुलिस की वर्दी, वाहनों, कार्यालयों और आधिकारिक दस्तावेजों पर इस्तेमाल करने की तैयारी है।
क्या होता है लॉरेल रीथ
लॉरेल रीथ (Laurel Wreath) या लॉरेल पुष्पांजलि, तेजपत्ता (Bay Laurel) के पेड़ की टहनियों और पत्तियों को आपस में गूंथकर बनाया गया एक गोलाकार या घोड़े की नाल (Horseshoe) के आकार का मुकुट होता है। प्राचीन काल से ही इसे जीत, सम्मान, उच्च उपलब्धि और गौरव का प्रतीक माना जाता रहा है।
यूनानी पौराणिक कथाएं (Greek Mythology): ग्रीक मान्यताओं के अनुसार, कला और संगीत के देवता अपोलो को लॉरेल रीथ पहने हुए दिखाया जाता है। यह परंपरा अपोलो और अप्सरा डैफ्ने (Daphne) की एक कथा से जुड़ी है, जिसमें डैफ्ने खुद को बचाने के लिए एक लॉरेल (तेजपत्ता) के पेड़ में बदल जाती हैं।
प्राचीन ओलंपिक खेल: प्राचीन ग्रीस में होने वाले ओलंपिक और पाइथियन खेलों के विजेताओं को पदक (Medals) के बजाय सम्मान के तौर पर लॉरेल रीथ का मुकुट पहनाया जाता था।
रोमन साम्राज्य (Ancient Rome): रोमन काल में यह सैन्य जीत का प्रतीक बना। युद्ध जीतकर लौटने वाले सेनापतियों और जूलियस सीज़र जैसे रोमन सम्राटों को उनकी शक्ति, सफलता और दिव्य स्थिति दिखाने के लिए यह ताज पहनाया जाता था।
आधुनिक समय में इसका उपयोग
शैक्षणिक उपलब्धियां: आज भी इटली जैसे कई देशों में यूनिवर्सिटी ग्रेजुएशन (स्नातक समारोह) के समय छात्रों को मास्टर डिग्री पूरी करने की खुशी में लॉरेल रीथ पहनाया जाता है।
पुरस्कारों के नाम: नोबेल पुरस्कार विजेताओं को मिलने वाला नाम “Nobel Laureate” और प्रसिद्ध कवियों को दी जाने वाली उपाधि “Poet Laureate” इसी लॉरेल रीथ (Laurel) शब्द से प्रेरित हैं।
लोगो और डिज़ाइन: आज कई लक्ज़री ब्रांड्स (जैसे Fred Perry), कार कंपनियों, खेलों और सरकारी प्रतीकों के लोगो (Logos) में उत्कृष्टता दिखाने के लिए दोनों तरफ मुड़ी हुई लॉरेल की पत्तियों का डिज़ाइन इस्तेमाल किया जाता है।
इससे जुड़ा एक मशहूर मुहावरा :अंग्रेजी में एक लोकप्रिय मुहावरा है—”Resting on one’s laurels”। इसका मतलब होता है कि कोई इंसान अपनी पुरानी जीतों या सफलताओं पर निर्भर होकर बैठ गया है और आगे और मेहनत करना बंद कर चुका है (यानी अपनी पुरानी उपलब्धियों पर आराम करना)।
26 साल बाद बदलाव की तैयारी, वर्दी और अन्य प्रतीकों में भी परिवर्तन
उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पुलिस को अलग पहचान देने के लिए वर्दी और प्रतीकों में कई बदलाव किए गए थे। उत्तर प्रदेश पुलिस में अराजपत्रित अधिकारियों के कंधों पर लगने वाले सितारों का रंग सुनहरा था, जबकि उत्तराखंड पुलिस में इसे चांदी जैसा रंग दिया गया। बेल्ट के रंग में भी बदलाव किया गया था। वर्दी के कुछ हिस्सों में गहरे नीले रंग के स्थान पर आसमानी रंग अपनाया गया।
अब नए प्रतीक चिह्न के साथ पुलिस की दृश्य पहचान को और अधिक विशिष्ट बनाने की तैयारी है। पुलिस की वर्दी पर लगने वाले आर्म बैज (Arm Badge), बेल्ट और अन्य चिह्नों के डिजाइन भी तैयार किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य उत्तराखंड पुलिस को अन्य राज्यों की पुलिस से अलग पहचान देना और राज्य की भौगोलिक विशेषताओं को उसके प्रतीक चिह्न में प्रमुखता से प्रदर्शित करना है।
आईजी विम्मी सचदेवा के नेतृत्व में गठित समिति ने तैयार किए डिजाइन
उत्तराखंड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस कलर प्रदान किए जाने की घोषणा के बाद नए प्रतीकों को तैयार करने की प्रक्रिया तेज हुई। इसके लिए पुलिस महानिरीक्षक विम्मी सचदेवा के नेतृत्व में एक समिति गठित की गई थी। समिति को राष्ट्रपति पुलिस कलर के डिजाइन के साथ पुलिस के नए प्रतीक चिह्न और अन्य संबंधित प्रतीकों को तैयार करने का दायित्व दिया गया।
समिति ने नए प्रतीक चिह्न, बेल्ट और आर्म बैज सहित विभिन्न डिजाइनों को अंतिम रूप दिया है। नए प्रतीक चिह्न को पुलिस लाइंस देहरादून के स्टेडियम के बाहर प्रदर्शित किया जाना इस बदलाव की तैयारियों का एक प्रमुख संकेत है।
छह नवंबर को राष्ट्रपति पुलिस कलर प्रदान करेंगे अमित शाह
उत्तराखंड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस कलर प्रदान करने के लिए छह नवंबर 2026 को देहरादून में समारोह प्रस्तावित है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। पहले समारोह की तिथि नौ नवंबर तय होने की सूचना थी, लेकिन त्योहारों को देखते हुए कार्यक्रम की तिथि बदलकर छह नवंबर कर दी गई।
राष्ट्रपति पुलिस कलर पुलिस बल के लिए विशिष्ट सम्मान माना जाता है। यह सम्मान पुलिस बल की सेवाओं, कार्यों और उपलब्धियों की पहचान के रूप में प्रदान किया जाता है। उत्तराखंड पुलिस को यह सम्मान मिलने के साथ राज्य पुलिस की संस्थागत पहचान में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है।
नए ध्येय वाक्य और प्रतीक चिह्न का औपचारिक अनावरण भी इसी समारोह में प्रस्तावित है। इसके बाद पुलिस के नए प्रतीकों को विभागीय उपयोग में लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
नई पहचान के साथ जनता की अपेक्षाएं भी महत्वपूर्ण
उत्तराखंड पुलिस का पुराना ध्येय वाक्य जनता के साथ मित्रवत व्यवहार और सेवा की भावना से जुड़ा रहा है। नए ध्येय वाक्य में कार्य, सत्य और शौर्य को प्रमुखता दी गई है। ऐसे में नई पहचान का वास्तविक महत्व तभी स्थापित होगा, जब पुलिसकर्मियों के व्यवहार, शिकायतों के निस्तारण, कानून के निष्पक्ष पालन और नागरिकों की सुरक्षा में भी इन मूल्यों की झलक दिखाई देगी।
नए प्रतीक चिह्न में हिमालय और नदी को स्थान देना उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान को रेखांकित करता है। वहीं, लॉरेल रीथ पुलिस के सम्मान, साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण का प्रतीक है। छह नवंबर का समारोह इन बदलावों को औपचारिक रूप देगा, लेकिन जनता के बीच पुलिस की वास्तविक पहचान उसके कार्यों और व्यवहार से ही मजबूत होगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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