कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के दोषी संतोष राय समेत दो कैदियों की समयपूर्व रिहाई के आदेश
नवीन समाचार, नैनीताल, 30 अक्टूबर 2026 (UK HIgh Court News 30 August 2026)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों की समयपूर्व रिहाई (Premature Release) के मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायालय ने कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के दोषी संतोष राय सहित दो कैदियों के संबंधित दस्तावेज जेल प्रशासन तक पहुंचने पर उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिये हैं। यह मामला राज्य सरकार की समयपूर्व रिहाई नीति के अंतर्गत 14 वर्ष या उससे अधिक की सजा काट चुके कैदियों की पात्रता और उनके मामलों के निस्तारण से जुड़ा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका और कैदियों की अन्य याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। न्यायालय में उन कैदियों की रिहाई का विषय उठाया गया, जिन्होंने 14 वर्ष या उससे अधिक समय जेल में बिताया है। इनमें कई कैदी 20 से 25 वर्ष तक की सजा काट चुके हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि राज्य सरकार की नीति के अंतर्गत पात्र कैदियों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार समयपूर्व रिहाई का लाभ मिलना चाहिए। आजीवन कारावास का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक कैदी को हर परिस्थिति में जीवनभर जेल में ही रखा जाए।
सरकार ने पेश की पात्र कैदियों की नयी सूची
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से समयपूर्व रिहाई के लिए पात्र कैदियों की नयी सूची न्यायालय में प्रस्तुत की गयी। सरकार ने बताया कि समयपूर्व रिहाई के लिए गठित समिति की जुलाई और सितंबर में भी बैठकें हो चुकी हैं। समिति की संस्तुति के आधार पर पात्र कैदियों को चरणबद्ध तरीके से रिहा किया जा रहा है।
न्यायालय ने संबंधित कैदियों के दस्तावेज जेल प्रशासन तक पहुंचने के बाद रिहाई की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिये। हालांकि सरकार की ओर से अब तक समयपूर्व रिहा किये गये कुल कैदियों की सटीक संख्या उपलब्ध नहीं करायी गयी है।
कूड़ा बीनने वाले परिवारों की स्थिति पर हाईकोर्ट सख्त, शहरी विकास सचिव से तीन सप्ताह में मांगा व्यक्तिगत शपथपत्र
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश में कूड़ा बीनकर आजीविका चलाने वाले लोगों और उनके बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने के मामले को गंभीरता से लिया है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (Uttarakhand State Legal Services Authority) की रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने शहरी विकास विभाग के सचिव से पूछा है कि प्रदेश में कूड़ा बीनने वाले लोग किस समुदाय से हैं और उन्हें जीवनयापन की आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाये हैं। न्यायालय ने सचिव को तीन सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई। न्यायालय ने पूछा कि कूड़ा बीनकर जीवनयापन करने वाले लोगों और उनके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सरकार ने क्या प्रयास किये हैं।
बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी मांगा जवाब
न्यायालय ने विशेष रूप से कूड़ा बीनने वाले परिवारों के बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर प्रश्न उठाये। खंडपीठ ने शहरी विकास सचिव से पूछा कि इन बच्चों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने अब तक क्या कदम उठाये हैं तथा उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए कौन-सी योजनाएं लागू की गयी हैं।
न्यायालय ने सचिव को इन सभी प्रश्नों का उत्तर अपने व्यक्तिगत शपथपत्र में तीन सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं। मामले की अगली सुनवाई भी तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गयी है।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है कि कूड़ा बीनने वाले परिवारों के बच्चे भी कई बार आजीविका के लिए इसी काम में लग जाते हैं और शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। न्यायालय की ओर से मांगी गयी जानकारी के बाद सरकार को इन परिवारों के लिए संचालित योजनाओं और उनके वास्तविक क्रियान्वयन का विवरण प्रस्तुत करना होगा।
न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और सिद्धार्थ साह ने टेबल टेनिस तथा बैडमिंटन प्रतियोगिताओं का शुभारंभ किया
उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (Uttarakhand High Court Bar Association) की ओर से आयोजित दो सप्ताह के इनडोर खेल पखवाड़े में शुक्रवार को न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह ने टेबल टेनिस और बैडमिंटन प्रतियोगिताओं का शुभारंभ किया। इस आयोजन में न्यायाधीशों, महिला एवं पुरुष अधिवक्ताओं और स्कूली बच्चों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिल रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार खेल पखवाड़े का औपचारिक शुभारंभ इससे पहले कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय ने किया था। इसी क्रम में शुक्रवार को न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह ने टेबल टेनिस तथा बैडमिंटन प्रतियोगिताओं की शुरुआत करायी। न्यायाधीशों ने भी खेलों में हाथ आजमाया और उपस्थित प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया।
शतरंज, कैरम और गोल्फ सहित कई प्रतियोगिताएं
दो सप्ताह तक चलने वाले इस खेल आयोजन में शतरंज, कैरम, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और गोल्फ सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। आयोजन का मुख्य उद्देश्य व्यस्त और तनावपूर्ण न्यायिक जीवन के बीच न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं में आपसी सद्भाव, सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देना तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डीसीएस रावत ने कहा कि अदालतों में न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं के बीच कानूनी तर्कों एवं मुकदमों को लेकर बहस होती है, जबकि खेल का मैदान उन्हें वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर आपसी सौहार्द और सहयोग के साथ जुड़ने का अवसर देता है। इस दौरान बार एसोसिएशन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में अधिवक्तागण उपस्थित रहे।
पूर्व अपर सचिव रामविलास यादव की याचिका हाईकोर्ट से खारिज, समान आरोपों पर दो समानांतर जांच पर की टिप्पणी
आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों से जुड़े मामले में उत्तराखंड सरकार के पूर्व अपर सचिव समाज कल्याण रामविलास यादव (Ram Vilas Yadav) को उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने उनकी ओर से दायर याचिका खारिज कर दी है। हालांकि न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एक ही आरोपों के संबंध में दो समानांतर जांच एक साथ नहीं चल सकतीं। याचिकाकर्ता को अन्य आदेशों को अलग-अलग रिट याचिकाओं के माध्यम से चुनौती देने की छूट भी दी गयी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रामविलास यादव उत्तराखंड सरकार के समाज कल्याण विभाग में अपर सचिव रह चुके हैं। उनके विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच चल रही है। इससे पहले सतर्कता विभाग की टीम ने लखनऊ, देहरादून और गाजीपुर स्थित उनके ठिकानों पर जांच एवं छापेमारी कर संपत्ति से संबंधित दस्तावेज जुटाये थे।
यादव ने संबंधित कार्रवाई और जांच को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने जांच की प्रक्रिया और समान आरोपों पर समानांतर जांच चलने के कानूनी पहलुओं पर विचार किया।
न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि एक ही आरोपों के संबंध में दो समानांतर जांच नहीं चल सकतीं। साथ ही याचिकाकर्ता को अन्य संबंधित आदेशों को अलग-अलग रिट याचिकाओं के माध्यम से चुनौती देने की स्वतंत्रता प्रदान की। इस आदेश से आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से संबंधित प्रकरण में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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