रामनगर के पूछड़ी में 14 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमणमुक्त, 86 पक्के मकान ध्वस्त; कार्रवाई के दौरान रोते दिखे परिवार

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नवीन समाचार, नैनीताल, 31 अक्टूबर 2026 (Ramnagar-14 Hectares Forest Land Cleared)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल जनपद (Nainital) के रामनगर (Ramnagar) में कोसी नदी (Kosi River) किनारे स्थित पूछड़ी बस्ती में शनिवार सुबह वन विभाग और जिला प्रशासन ने अतिक्रमण के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की। तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अपर कोसी क्षेत्र में करीब 14 हेक्टेयर सरकारी वन भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए 86 पक्के मकानों को बुलडोजर और जेसीबी से ध्वस्त कर दिया गया।

Ramnagar-14 Hectares Forest Land Cleared रामनगर में वन विभाग का बुलडोजर एक्शन, इस जगह से हटाया अवैध अतिक्रमण |  Forest department takes bulldozer action in Ramnagar. - NDTV Indiaसुबह करीब 6:30 बजे शुरू हुए इस अभियान के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। वर्षों से यहां रह रहे परिवारों को मकान टूटते देख रोते-बिलखते देखा गया। कुछ लोगों के बेहोश होने और एक महिला को दिल का दौरा पड़ने की सूचना भी सामने आई है। प्रभावित लोगों को उपचार के लिए सरकारी चिकित्सालय ले जाने की जानकारी मिली है।

भू-माफिया ताहिर मुल्ला पर जमीन बेचकर बस्ती बसाने का आरोप

प्रशासन के अनुसार, कोसी नदी किनारे अपर कोसी क्षेत्र की सरकारी वन भूमि पर लंबे समय से अतिक्रमण था। आरोप है कि ताहिर मुल्ला ने वन विभाग की जमीन पर कब्जा कर उत्तर प्रदेश सहित अन्य स्थानों से आए लोगों को भूखंड बेचकर यहां बस्ती बसाई थी। वन विभाग ने उसके विरुद्ध पुलिस और विभागीय स्तर पर मामले दर्ज कराए हैं। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

इस मामले में राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में कांग्रेस के शासनकाल में अतिक्रमण को संरक्षण मिलने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आरोपों की जांच और संबंधित पक्षों का उत्तर सामने आना आवश्यक है।

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रात में ही मकान खाली करने लगे परिवार

रामनगर पूछड़ी में 52 अवैध निर्माण किए ध्वस्त, रोते बिलखते दिखे लोग, बोले-  अब बच्चों को लेकर कहां जाएं?अतिक्रमण हटाने से पहले जिला प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने और मुनादी कराने की जानकारी दी थी। शुक्रवार शाम पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों को अभियान के संबंध में ब्रीफिंग दी गई। इसके बाद देर रात से ही कई परिवारों ने अपने मकान स्वयं तोड़ने शुरू कर दिए। लोग ईंटें, दरवाजे और अन्य निर्माण सामग्री निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाते दिखाई दिए।

शनिवार सुबह वन विभाग और जिला प्रशासन की टीमें जेसीबी तथा बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचीं और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। कार्रवाई के दौरान कुछ महिलाएं रोती नजर आईं। प्रभावित परिवारों की चिंता यह थी कि ठंड के मौसम में बच्चों और अन्य परिजनों को लेकर वे कहां जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि कब्जामुक्त कराई गई भूमि वन विभाग को सौंप दी जाएगी।

सुरक्षा के लिए 2 सुपर जोन, 7 जोन और 14 सेक्टर बनाए

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर अभियान को व्यवस्थित ढंग से पूरा कराने के लिए पूरे क्षेत्र को दो सुपर जोन, सात जोन, 14 सेक्टर और छह बैरियर में बांटा गया था। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पांच सेक्टर मजिस्ट्रेट, पांच अपर पुलिस अधीक्षक (ASP), छह क्षेत्राधिकारी (CO), 25 निरीक्षक और 82 उपनिरीक्षक तैनात किए गए। इसके अतिरिक्त प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) की तीन कंपनियां और अग्निशमन विभाग की टीम भी मौके पर मौजूद रही।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने भी अभियान के दौरान पर्याप्त पुलिस बल तैनात किए जाने की जानकारी दी। प्रशासन के अनुसार, कार्रवाई के बाद मुक्त कराई गई भूमि वन विभाग को सौंपने की प्रक्रिया की जाएगी।

पहले चरण में 23 हेक्टेयर भूमि कराई गई थी मुक्त

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रामनगर के इसी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का पहला चरण वर्ष 2025 में चलाया गया था। उस दौरान करीब 51 परिवारों को हटाया गया और लगभग 23 हेक्टेयर सरकारी वन भूमि कब्जामुक्त कराई गई थी।

अब दूसरे चरण में करीब 14 हेक्टेयर भूमि पर बने अतिक्रमण हटाए गए हैं। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, दूसरे चरण में 90 से अधिक परिवारों को हटाने की तैयारी थी। इनमें करीब नौ से दस परिवारों के मामले उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण उन्हें फिलहाल कार्रवाई से अलग रखा गया। क्योंकि संबंधित न्यायिक मामलों की स्थिति और स्थगन आदेशों के विवरण की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

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सरकारी जमीन पर कब्जा रोकने में जिम्मेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में

पूछड़ी बस्ती में वर्षों तक सरकारी वन भूमि पर कब्जा बने रहना और वहां पक्के मकानों का निर्माण होना वन विभाग तथा स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर भूखंड बेचे गए, तो यह जांच का विषय है कि जमीन की खरीद-फरोख्त कैसे हुई, लोगों को वहां निर्माण करने का अवसर कैसे मिला और संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।

सरकारी वन भूमि से अतिक्रमण हटाना कानून के अनुरूप कार्रवाई का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसके साथ उन लोगों की जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है जिन्होंने कथित तौर पर जमीन पर कब्जा कर उसे बेचा। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा मिलीभगत सामने आती है, तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

रामनगर में पहले चरण में करीब 23 हेक्टेयर और अब दूसरे चरण में लगभग 14 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने की कार्रवाई के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुक्त कराई गई जमीन की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है, ताकि दोबारा अतिक्रमण न हो। साथ ही, कथित अवैध खरीद-फरोख्त और लंबे समय तक कब्जा बने रहने के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच भी महत्वपूर्ण है।

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