अटल जी का पुण्य स्मरण : नैनीताल में आधुनिक ‘राम’ ने तलाशा था ‘रहीम’ को, नैनीताल से रहा ‘दुःख-सुख’ का संबंध, नैनी झील को दिए थे नवप्राण…

Shok Smriti Shesh

–नैनीताल प्रवास पर किए गए मंथन के बाद बदला था राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार, पीसी एलेक्जेंडर की जगह एपीजे अब्दुल कलाम को बनाया था राष्ट्रपति, तब राम-अल्लाह ‘राम-रहीम’ कही जाती थी बाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) व कलाम की जोड़ी-यहीं से मिली थी एनडीए को टीडीपी की संजीवनी और यहां से लौटकर ही दिया था गोधरा … Read more

पार्टी में शामिल हुए पूर्व कांग्रेसियों को ऐसे ‘वाशिंग मशीन’ में धोकर पक्का भाजपाई बनाएगी भाजपा…

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नवीन समाचार, देहरादून, 9 अप्रैल 2024 (UK BJP will use Washing Machine for Congressmen)। अब तक दो पूर्व मंत्रियों व एक विधायक, आठ पूर्व विधायकों तथा पिछले लोकसभा व विधान सभा चुनावों में प्रत्याशी रहे और क्षेत्र विशेष में पकड़ रखने वाले दर्जनों नेताओं सहित मुख्यतया कांग्रेस सहित अन्य दलों के 15 हजार से ज्यादा … Read more

उत्तराखंड में न हो पाये नगर निकाय चुनाव (Nikay Chunav) पर 1 बड़ा समाचार

Nikay Chunav

प्रभारी मंत्री बंशीधर से अस्पताल संचालक ने लड़ाई जुबान, कहा, वह अपराधी नहीं जो खड़े कर किया जा रहा है जवाब तलब….

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 मई 2021। राज्य के पीपीडी मोड में चल रहे रामनगर के संयुक्त चिकित्सालय में दल-बल के साथ छापा मारने पहुंचे जनपद के कोविड प्रभारी मंत्री बंशीधर भगत को मंगलवार को चिकित्सालय के संचालक डॉ. दीपक गोयल जुबान लड़ाते हुए अड़ गए। इससे माहौल गरमा गया। संचालक ने यहां तक कह दिया, … Read more

बिग ब्रेकिंग: गैरसेंण उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनी, अधिसूचना जारी, पर देहरादून की राजधानी क्या ? अस्थायी या शीतकालीन ?

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नवीन समाचार, देहरादून, 08 जून 2020। उत्तराखंड आंदोलन के दौर से ही राजधानी के रूप में प्रचारित गैरसेंण आखिर राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी बन गई है। उत्तराखण्ड की त्रिवेन्द्र सरकार द्वारा चमोली जिले के चमोली भराड़ीसैंण (गैरसैंण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा को आज आखिरकार मुहर लगा दी। राज्यपाल बेबी रानी मौर्या ने त्रिवेन्द्र सरकार के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इसके बाद प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है। इस के साथ अब उत्तराखण्ड की दो राजधानी हो गई हैं। जिनमें ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण होगी, जबकि देहरादून में पहले से अस्थायी राजधानी के रूप में कार्य हो रहे हैं। आगे देखने वाली बात होगी कि क्या अब तक अस्थायी होने के बावजूद राजधानी के रूप में प्रयुक्त देहरादून के लिये क्या शब्द प्रयोग होगा। इसे शीतकालीन राजधानी के रूप में अधिसूचित किया जाता है अथवा स्थायी राजधानी के रूप में।

यह भी पढ़ें : ‘नवीन समाचार’ की खबर पर लगी मुहर : भाजपा सरकार ने गैरसेंण पर की बड़ी घोषणा

नवीन समाचार, गैरसेंण, 4 मार्च 2020। उत्तराखंड बजट सत्र के दौरान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक बड़ी घोषणा करते हुए गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया है। बताया गया है कि गैरसेंण व देहरादून 6-6 माह के लिए उत्तराखंड की राजधानी होंगे। इसके साथ ही भाजपा सरकार ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का अपना चुनावी संकल्प भी पूरा कर दिया है। इसे भाजपा सरकार का एतिहासिक फैसला माना जा रहा है। हालांकि गैरसेंण को उत्तराखंड की पूर्ण-स्थायी राजधानी की मांग करने वाले लोगों को सरकार का यह फैसला इस मुद्दे को हल्का करने वाला भी लग सकता है। उल्लेखनीय है कि आपके प्रिय एवं भरोसेमंद समाचार पोर्टल ‘नवीन समाचार’ ने गत 23 फरवरी को ही सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने की संभावना जता दी थी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधानसभा में बुधवार को बजट पेश करने के बाद गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का ऐलान किया। उस वक्त सदन में कुछ क्षणों के लिए सभी सदस्य हतप्रभ रह गए और सन्नाटा छा गया लेकिन सत्तापक्ष और विपक्षी दल खुशी से झूम उठे और अपनी मेज थप-थपाकर इस ऐलान का स्वागत किया। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चन्द अग्रवाल ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर ख़ुशी का इजहार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक तरह से उत्तराखंड के आंदोलन और गैरसैंण को राजधानी बनाए जाने को लेकर आंदोलन करने वाले सभी तमाम शहीदों को तोहफा है। गैरसैंण राजधानी शहीदों को समर्पित है। गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा आंदोलनकारियों का सम्मान है। उन्होंने कहा कि इस घोषणा से राज्य निर्माण की अवधारणा पूरी हो गई है।
बाद में त्रिवेंद्र रावत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इसके लिए क्या जरूरी इंस्फाट्रक्चर चाहिए, उसका सरकार अध्ययन कराएगी और उसी के अधीन काम होगा। साथ ही प्रशासनिक और शासन स्तर पर सभी तथ्यों पर सरकार विचार करेगी। उन्होंने कहा की यहां पर भराणी सैंण बहुत अधिक ऊंचाई पर है। इस वजह से यहां पानी की समस्या रहती है। इसके लिए एक झील बनाई जाएगी जिससे बारिश के पानी का संग्रह किया जा सके। ताकि पानी की दिक्कत का समाना न करना पड़े। इस बावत लोकनिर्माण विभाग के अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं। राजधानी बनाए जाने के बाद क्या गैरसैंण को अब जिला घोषित किया जाएगा? यह पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हम पहले सभी पक्षों का अध्ययन करेंगे और जो भी बेहतर होगा, सरकार उस पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि जब हमने इसे राजधानी घोषित कर दिया है तो जिला बनाये जाने का मुद्दा अपने आप ख़त्म हो गया है। 
उल्लेखनीय है कि कर्णप्रयाग के विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने हाल ही में मुख्यमंत्री से मिलनकर भराड़ीसैंण में होने वाले सत्र के दौरान गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने की मांग की थी। उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड राजधानी के तौर पर गैरसैंण का नाम सबसे पहले 60 के दशक में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने आगे किया था। उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के समय भी गैरसैंण को ही राज्य की प्रस्तावित राजधनी माना गया। वर्ष 1989 में उक्रांद के संस्थापक डीडी पंत और विपिन त्रिपाठी ने गैरसैंण को उत्तराखंड की प्रस्तावित राजधानी के रूप में माना था और उक्रांद ने 1992 में गैरसैंण को उत्तराखण्ड की औपचारिक राजधानी घोषित भी कर दिया था। राज्य आंदोलन के दौरान गैरसेंण उत्तराखंड की राजधानी के रूप में ही आंदोलन विषय के केंद्र में रहा।

यह भी पढ़ें : गैरसैंण पर इतिहास रच सकते हैं त्रिवेंद्र, राज्य आंदोलनकारियों पर भी हो सकता है बड़ा ऐलान…

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 फरवरी 2020। जी हां, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत पर्वतीय जनभावनाओं की राजधानी गैरसैंण पर इतिहास रच सकते हैं। वे गैरसैंण में आगामी 3 मार्च से आयोजित होने जा रहे विधानसभा सत्र में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर सकते हैं। चमोली जिले, जहां गैरसैण स्थित है, के सत्ताधारी विधायक महेंद्र भट्ट के दावे ने इन चर्चाओं को ताकत मिली है। कहा जा रहा है उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के हवाले से यह बात कही है। ऐसी स्थिति में त्रिवेंद्र इतिहास रचने के करीब खडे़ हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री रावत राज्य आंदोलनकारियों को समान पेंशन व पेंशन को बढ़ाकर 5 हजार रुपये करने तथा उन्हें आरक्षण बहाल करने की भी घोषणा कर सकते हैं। राज्य आंदोलनकारियों से ऐसा वादा कर चुके हैं।gairsain
इस मसले को मौजूदा स्थितियोें में सै़द्धांतिक और व्यवहारिक नजरियेे से देखें तो दो बातें निकलकर आती हैं। सैद्धांतिक बात गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने के पक्ष में है, लेकिन देहरादून में जिस तरह से पिछले 20 साल से अस्थायी तौर पर ही सही राजधानी का संचालन हुआ है, उसमें अब गैरसैंण के स्थायी राजधानी बनने की कितनी संभावनाएं हैं, यह व्यवहारिक यक्ष प्रश्न है। राज्य आंदोलनकारियों के बीच में से ही एक वर्ग मानता है कि मौजूदा स्थिति में गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी बन जाए, तो यह उस क्षेत्र के विकास के लिहाज से बड़ी बात होगी। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने 2017 केे विधानसभा चुनाव में अपने घोषणापत्र में ग्रीष्मकालीन राजधानी का वादा किया था। कांग्रेस का कहना है कि अगर ग्रीष्मकालीन राजधानी का एलान होगा तो सरकार से पूछा जाएगा कि स्थायी राजधानी क्यों नहीं। हालांकि उन्हें यह पूछने का हक नहीं, क्योंकि यही सवाल उनसे भी पूछा जाएगा। वहीं भाजपा के पास कहने के लिए एक बड़ा जवाब है। वह कह सकती है कि उसके चुनाव घोषणापत्र पर भरोसा करके ही उसे प्रचंड बहुमत मिला है। वह कह सकती है कि यदि ग्रीष्मकालीन राजधानी के वादे पर जनता असहमत होती तो कर्णप्रयाग विधानसभा सीट, जिसके अंतर्गत गैरसैंण क्षेत्र आता है, वहां पर भाजपा के सुरेंद्र सिंह नेगी कभी जीतकर नहीं आते।Gairsain
अब बात त्रिवेंद्र सिंह रावत की। यदि उनकी सरकार ग्रीष्मकालीन राजधानी का एलान कर देती है, तो यह इतिहास रचने जैसा होगा। गैरसैंण में भव्य विधानभवन तैयार हो चुका है। वहां सत्र आयोजित होने लगे हैं। इससे पहले 2016 में हरीश रावत सरकार के पास यह मौका था। मगर वह गैरसैंण राजधानी के मसले पर चूक गई। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को अब इसका मलाल भी है। अब पूरे उत्तराखंड की निगाहें 3 मार्च से गैरसैंण में शुरू हो रहे विधानसभा सत्र पर टिकी हैं। क्या इसी दौरान एलान होगा या फिर अपनी सरकार के बचे हुए दो साल के कार्यकाल के दरमियान किसी और तारीख को मुख्यमंत्री इसके लिए चुनेंगे। इस पर शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक का सिर्फ इतना कहना है कि सरकार जनभावनाओं से वाकिफ है और गैरसैंण के विकास के लिए जो बेहतर होगा, वह निर्णय लिया जाएगा।

यह भी पढ़ें : अजय भट्ट ने गैरसेंण व उत्तराखंड की राजधानी को लेकर भाजपा सरकार की मंशा पर किया ‘बड़ा’ खुलासा

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 जून 2018। केंद्र एवं राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने गैरसेंण-चंद्रनगर के बारे में उत्तराखंड की राजधानी के बाबत भाजपा सरकार की मंशा पर बड़ा खुलासा किया है। नैनीताल क्लब के राज्य अतिथि गृह में पत्रकारों से बात करते हुए भट्ट ने कहा कि भाजपा सरकार साफ तौर पर पहले गैरसेंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने जा रही है। इसके लिए भी अभी वहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। वहां विधानभवन तैयार हो गया है, परंतु यहां आयोजित होने वाले विधानसभा सत्र के लिए ही तैनात होने वाले कर्मचारियों के लिए आवास नहीं हैं। कर्मचारियों को ग्रामीणों के घरों में शरण लेनी पड़ती है। साथ ही पानी की भारी समस्या है। बीते सत्र में तैनात 1000 पुलिस के जवान पानी के लिए परेशान रहे, जबकि कई को गाड़ियों में सोना पड़ा। पानी व आवास जैसी इन मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने के बाद सरकार ‘जनभावनाओं के अनुरूप’, जिस स्वरूप में जनता चाहेगी, वैसे गैरसेंण को राजधानी बनाने पर निर्णय लेगी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस इस बारे में जो कुछ भी कहती है, सदन के बाहर कहती है। सदन के भीतर कांग्रेस ने अब तक गैरसेंण पर अपना रुख साफ नहीं किया है।

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पंचायत के वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश बिष्ट, पत्नी गीता व समर्थकों संग भाजपा में शामिल…, नैनीताल में भी कई की चर्चाएं तेज…

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कांग्रेस नेता हरीश बिष्ट, पत्नी, समर्थकों संग भाजपा में शामिलनवीन समाचार, नैनीताल, 18 सितंबर 2019। कांग्रेस नेता और निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य डा. हरीश बिष्ट बुधवार को पत्नी-भीमताल की निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख गीता बिष्ट और समर्थकों संग भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट और कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने विधायक संजीव आर्य, जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट की मौजूदगी में भाजपा कुमाऊं संभाग कार्यालय में उन्हें फूल मालाएं पहनाकर पार्टी की सदस्यता दिलाई। भाजपा की सदस्यता लेने वालों में कोटाबाग ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष हेम नैनवाल, कृष्णानन्द कांडपाल, दुर्गा दत्त पलड़िया, देवेन्द्र बोरा आदि रहे। इस अवसर पर अजय भट्ट ने कहा कि भाजपा में शामिल हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि वह पार्टी की रीति और नीति को समझें। वह संगठन की मजबूती के लिए प्राथमिकता से काम करें। मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि भाजपा का कुनबा बढ़ रहा है। ऐसे में जुड़ने वाले हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि वह संगठन की मजबूती के साथ जनसेवा को तत्पर रहें। इधर, नैनीताल मुख्यालय में भी एक प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी व कम से कम दो निर्वाचित पदेन जनप्रतिनिधि सहित कुछ अन्य कांग्रेसियों के भी भाजपा की सदस्यता लेने की चर्चाएं काफी दिनों से चल रही हैं, जबकि हरीश बिष्ट के भाजपा में जाने के बाद इन चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है ।

पूर्व समाचार : आज एक बजे कांग्रेस का एक बड़ा विकेट गिराएगी भाजपा, पंचायत चुनाव में पहली जीत के लिये बनी रणनीति..

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 सितंबर 2019। अब तक भाजपा के लिए कहा जाता है कि वह ‘मोदी मैजिक’ के भरोसे केवल केंद्र एवं राज्य के बड़े चुनावों में ही जीत प्राप्त कर पाती है।त्रिस्तरीय पंचायतों में भाजपा कमजोर है। इस धारणा को बदलने के उद्देश्य से भाजपा बुधवार को एक बड़ा दांव चलने जा रही है। आज दोपहर 1:00 बजे पिछले दो दशकों से जिला पंचायत नैनीताल मैं दबदबा रखने वाले कांग्रेस के कद्दावर नेता डॉ हरीश बिष्ट भाजपा का दामन थामने वाले हैं।

हरीश बिष्ट के भाजपा का दामन थामने के निहितार्थ इस रूप में निकाले जा रहे हैं कि कि कांग्रेस निचले स्तर तक कमजोर होती चली जा रही है, व अपने सिमट चुके कुनबे को भी नहीं सवाल पा रही है। बताया जा रहा है कि हरीश प्रदेश कार्यकारिणी में स्थान न मिल पाने, खासकर उनकी जगह उनके किसी प्रतिद्वंदी को स्थान दे दिए जाने से नाराज हैं। इसके बाद वे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के माध्यम से भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर रहे हैं। उनके साथ जनपद के दूरस्थ क्षेत्रों के 2 दर्जन से अधिक ग्राम प्रधान एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य का भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। उल्लेखनीय है कि हरीश बिष्ट निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य व उनकी पत्नी गीता बिष्ट भीमताल से निवर्तमान ब्लाक प्रमुख हैं। दोनों पति-पत्नी पिछले 20 साल से पंचायत की राजनीति में सक्रिय हैं। अलबत्ता, अभी गीता बिष्ट का औपचारिक तौर पर भाजपा में जाना तय नहीं है। उल्लेखनीय है कि 2014 में भाजपा जिला पंचायत नैनीताल में अधिक सदस्य होने के बावजूद अपना जिला पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष नहीं बना पाई थी।

यह भी पढ़ें : गजबः नैनीताल जिला पंचायत में जीत कांग्रेस की पर जीते भाजपाई

Yashpal Arya Hugged Dr. Indira Hridyesh and Sumitra Prasad, just after winning Nainital Jila Panchayat President Election
हरीश बिष्ट बाईं ओर सबसे आगे (Yashpal Arya Hugged Dr. Indira Hridyesh and Sumitra Prasad, just after winning Nainital Jila Panchayat President Election)

 

तब  हेम को हराने के बाद यशपाल आर्य ने संभाला था इंदिरा और सुमित्रा को

-विजयी अध्यक्ष सुमित्रा प्रसाद व उपाध्यक्ष पुष्कर नयाल दोनों ने भाजपा के चुनाव चिह्न पर जीता था जिला पंचायत का चुनाव

नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, यकीनन नैनीताल जिला पंचायत में कांग्रेस की ओर से घोषित अध्यक्ष पद प्रत्याशी सुमित्रा प्रसाद और उपाध्यक्ष पद पर पुष्कर नयाल ने चुनाव जीता है, लेकिन दोनों विजयी सदस्य न केवल मूलतः भाजपाई रहे हैं, वरन उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए जिला पंचायत सदस्य बनने की अर्हता धुर विरोधी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव चिह्न कमल के फूल पर चुनाव लड़ कर अर्जित की है। वरन, उपाध्यक्ष बने पुष्कर नयाल ने तो स्वयं को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का सक्रिय कार्यकर्ता भी बताया है। कांग्रेस प्रत्याशियों की विजय में योगदान देने वाले कम से कम दो सदस्य प्रताप गोरखा और कृष्णानंद कांडपाल भी मूलतः भाजपाई रहे हैं।

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#MeToo के आरोपों में फंसे भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री को मिल सकती है बड़ी राहत

मीटू प्रकरण में फंसे भाजपा के पूर्व प्रदेश संगठन मंत्री संजय कुमार को बड़ी राहत मिल सकती है। पुलिस का दावा है कि विवेचना के दौरान ऐसे साक्ष्य नहीं मिले हैं, जिससे दुष्कर्म के आरोप की पुष्टि हो सके। घटना को लेकर जो तारीख बताई है, उस दिन संजय कुमार की लोकेशन देहरादून के आसपास … Read more