18 सितंबर पर विशेष: आज का दिन याद कर कांपती है रूह, पर याद नहीं किये सबक-कमजोर भूगर्भीय संरचना के शहर के सुरक्षित बचे रहने में है बड़ी भूमिकाडॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 18 सितंबर 2025 (18 September 1880)। 18 की तिथि सरोवरनगरी के लिये बेहद महत्वपूर्ण है। 18 नवंबर 1841 को ही इस … Read more
नैनीताल-कुमाऊं में पर्यटन सुविधाएं Hotels in Nainital-Kumaon : CLick the Links and Directly reach to the concerned Establishments: Kumaon Mandal Vikas Nigam Limited for Best Accommodation in all over Kumaon Region. HiMADRi Tour Trek & Adventure Gears The Manu Maharani Shervani Hilltop-Nainital Balrampur House-A Heritage Resort Alka-The Lake Side Hotel Chevron-Fair Havens, Nainital, Ranikhet, Kausani, Mukteshwar, … Read more
नैनीताल। अमेरिका में हिंदी के जरिये रोजगार के अवसर विषयक कार्यक्रम के दौरान विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक, अमेरिकी सरकार समर्थित स्टारटॉक हिंदी कार्यक्रम के निदेशक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा, उत्तराखंड मुक्त विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के निदेशक डा. गोविंद सिंह, कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी, कला संकायाध्यक्ष प्रो. … Read more
कहते हैं आदि-अनादि काल में सृष्टि की रचना के समय आदि शक्ति ने त्रिदेवों-ब्रह्मा, विष्णु व महेश के साथ उनकी शक्तियों-सृष्टि का पालन व ज्ञान प्रदान करने वाली ब्रह्माणी यानी माता सरस्वती, पालन करने वाली वैष्णवी यानी माता लक्ष्मी और बुरी शक्तियों का संहार करने वाली शिवा यानी माता महाकाली का भी सृजन किया। सामान्यतया अलग-अलग स्थानों पर प्रतिष्ठित रहने वाली यह तीनों देवियां कम ही स्थानों पर एक स्थान पर तीनों के एकत्व स्वरूप् में विराजती हैं। ऐसा एक स्थान है माता का सर्वोच्च स्थान बताया जाने वाला वैष्णो देवी धाम।
माता भद्रकाली के मंदिर का गर्भगृह
लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं अंचल में भी एक ऐसा ही दिव्य एवं अलौकिक विरला धाम मौजूद है, जहां माता सरस्वती, लक्ष्मी और महाकाली एक साथ एक स्थान पर वैष्णो देवी की तरह ही स्वयंभू लिंग या पिंडी स्वरूप में आदि-अनादि काल से एक साथ माता भद्रकाली के रूप में विराजती हैं, और सच्चे मन से आने वाले अपने भक्तों को साक्षात दर्शन देकर उनके कष्टों का हरती तथा जीवन पथ पर संबल प्रदान करती हैं। इस स्थान को माता के 51 शक्तिपीठों में से भी एक माना जाता है। शिव पुराण में आये माता भद्रकाली के उल्लेख के आधार पर श्रद्धालुओं का मानना है कि महादेव शिव द्वारा आकाश मार्ग से कैलाश की ओर ले जाये जाने के दौरान यहां दक्षकुमारी माता सती की मृत देह का दांया गुल्फ यानी घुटने से नीचे का हिस्सा गिरा था।
‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार’ एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
“सरोवरनगरी की पहचान से जुड़ा नगर का प्राचीन नयना देवी मंदिर नेपाली, तिब्बती, पैगोडा व कुछ हद तक अंग्रेजी गौथिक व ग्वालियर शैली में भी बना हुआ है। इसकी स्थापना नगर के संस्थापकों में शामिल मूलतः नेपाल के निवासी मोती राम शाह के पुत्र अमर नाथ शाह ने अंग्रेजों से एक समझौते के तहत यहां लगभग सवा एकड़ भूमि पर 1883 में माता के जन्म दिन माने जाने वाली ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की नवमी की तिथि को की थी।
‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार’ एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं।
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शनिवार 1 सितम्बर 2018 को पानी से लबालब 11 फिट के स्तर तक भरी नैनी झील।शनिवार 1 सितम्बर 2018 को एक कोने में पानी के अलावा शेष हिस्से में सूखी पड़ी सूखाताल झील।
नवीन जोशी, नैनीताल (1 सितम्बर 2018)। सरोवरनगरी की लाइफलाइन नैनी झील लबालब भरकर शनिवार को सितंबर माह के मानकों के अनुसार इसके गेट खोले जाने के स्तर 11 फिट तक पहुंच गयी है। वहीं नैनी झील की सर्वाधिक जल प्रदाता सूखाताल झील अब भी सूखी हुई है। इससे नगर वासियों में चिंता की स्थिति है। एक अध्ययन के अनुसार सूखाताल झील नैनी झील के 40 फीसद से अधिक प्राकृतिक जल श्रोतों का जलागम है, लिहाजा लोगों को आशंका है कि भले नैनी झील अभी भर गयी है, लेकिन सूखाताल झील के न भरने के कारण यह आगे बरसात के बाद तेजी से खाली होती जाएगी, क्योंकि सूखाताल झील इसे अपेक्षित मात्रा में पानी दे नहीं पायेगी।
उल्लेखनीय है कि हालिया वर्षों में 2014 में भी सूखाताल झील बरसात के मौसम में पानी से लबालब भर गयी थी, और इसी वर्ष सर्दियों में बर्फ से भी पटी थी। किंतु बीते वर्षों में जहां प्रशासन की ओर से भी इसमें मलबा भरा गया है, वहीं इधर इस झील को जल निगम, एडीबी आदि शासकीय विभागों व नगर पालिका द्वारा निष्प्रयोज्य सामग्री, पाइप, कूड़ेदान आदि रखने का अघोषित ‘सरकारी डंपयार्ड’ बना दिया है, वहीं इसके कुछ नालों को अन्यत्र मोड़े जाने के भी प्रशासन पर आरोप लगते हैं। इसके अलावा इस झील के डूब क्षेत्र में हालिया वर्षों में भी अवैध भवन निर्माण हुए हैं।
नैनीताल। सूखाताल झील विश्व प्रसिद्ध नैनी सरोवर की सर्वाधिक जल प्रदाता झील है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बेशक सूखाताल झील का नाम सूखी रहने वाली ताल है, लेकिन यह नैनी झील को वर्ष भर और सर्वाधिक पानी देती है। इसके जरिए ही नैनी झील को सर्वाधिक 50 फीसद पानी जमीन के अंदर से रिसकर और 20 फीसद सतह से बहकर पहुंचता है, जबकि झील में अन्य सभी नालों से कुल मिलाकर केवल 10 फीसद और झील के ऊपर बारिश से भी सीधे इतना ही यानी 10 फीसद पानी ही आता है। यह भी उल्लेखनीय है कि जहां सूखाताल की ओर से नैनी झील में 50 फीसद भूजल आता है, जबकि इससे अधिक यानी 55 फीसद भूजल तल्लीताल की ओर से रिसकर बाहर निकल जाता है।
इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट फॉर डेवलपमेंटल रिसर्च मुंबई द्वारा वर्ष 1994 से 1995 के बीच नैनी झील में आये कुल 4,636 हजार घन मीटर पानी में से सर्वाधिक 42.6 प्रतिशत यानी 1,986,500 घन मीटर पानी सूखाताल झील से, 25 प्रतिशत यानी 1,159 हजार घन मीटर पानी अन्य सतह से बहकर, 16.7 प्रतिशत यानी 772 हजार घन मीटर पानी नालों से बहकर तथा शेष 15.5 प्रतिशत यानी 718,500 घन मीटर पानी बारिश के दौरान तेजी से बहकर पहुंचता है। वहीं झील से जाने वाले कुल 4,687 हजार घन मीटर पानी में से सर्वाधिक 1,787,500 घन मीटर यानी 38.4 प्रतिशत यानी डांठ के गेट खोले जाने से निकलता है। 1,537 हजार घन मीटर यानी 32.8 प्रतिशत पानी पंपों के माध्यम से बाहर निकाला जाता है, 783 हजार घन मीटर यानी 16.7 प्रतिशत पानी झील से रिसकर निकल जाता है, वहीं 569,500 घन मीटर यानी 12.2 प्रतिशत पानी वाष्पीकृत हो जाता है।
वहीं एक अध्ययन के अनुसार सूखाताल झील नैनी झील के 40 फीसद से अधिक प्राकृतिक जल श्रोतों का जलागम है, लिहाजा इसकी वजह से नैनी झील के जल्द ही पूरी तरह सूख जाने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसी झील से नैनी झील में 70 फीसद पानी पहुंचता है। साथ ही आईआईटी रुड़की की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार नैनी झील में सर्वाधिक 53 फीसद पानी जमीन के भीतर और २४ फीसद सतह से भरकर यानी कुल 77 फीसद पानी आता है। इसमें से सर्वाधिक हिस्सा सूखाताल झील की ओर से ही आता है। वहीं इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट फॉर डेवलपमेंटल रिसर्च मुंबई की 2002 की रिपोर्ट के अनुसार नगर की सूखाताल झील नैनी झील को प्रति वर्ष 19.86 लाख यानी करीब 42.8 फीसद पानी उपलब्ध कराती है।
आठ मीटर की ऊंचाई तथा 20 मीटर चौड़ाई व 30 मीटर की लंबाई में पट गई है सूखाताल झील
नैनीताल। इधर हाल में सीडार व कैंब्रिज विवि के शोधकर्ताओं द्वारा शोध अध्ययन करते हुए बताया गया है कि सूखाताल झील की तलहटी लगातार मलवा डाले जाने से करीब आठ मीटर की ऊंचाई तथा 20 मीटर चौड़ाई व 30 मीटर की लंबाई में पट गई है। इस भारी मात्रा के मलवे की वजह से झील की तलहटी में मिट्टी सीमेंट की तरह कठोर हो गई है, और झील स्विमिंग पूल जैसी बन गई है। कैंब्रिज विवि की इंजीनियर फ्रेंचेस्का ओ हेलॉन व सीडार के डा. विशाल सिंह का कहना है कि यदि झील में भरे मलवे और इसमें भरी प्लास्टिक की गंदगी को ही हटा दिया जाए तो इस झील का पुनरुद्धार किया जा सकता है।
शनिवार को एक कोने में पानी के अलावा शेष हिस्से में सूखी पड़ी सूखाताल झील।
चित्र परिचयः 01एनटीएल-5ः नैनीताल। शनिवार को पानी से लबालब 11 फिट के स्तर तक भरी नैनी झील।
यह भी पढ़ें: कुदरत सूखाताल को भरने और प्रशासन सुखाने पर आमादा
-प्रशासन पंप लगाकर खाली करा रहा झील को नवीन जोशी, नैनीताल (16 अगस्त 2014)। वर्षभर पानी से विहीन सूखाताल झील को पुनर्जीवित करने के प्रति उत्तराखंड उच्च न्यायालय की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन झील में पंप लगाकर पानी बाहर निकलवा रहा है। इन दिनों हुई भारी बरसात के कारण झील के किनारे बने घरों के साथ झील के बीच में बना जल संस्थान का पंप हाउस व एडीबी का स्टोर भी पानी में डूब गया है। खतरे को भांपते हुए जिला प्रशासन ने पंप चलाकर झील से पानी बाहर निकालना प्रारंभ कर दिया। उल्लेखनीय है कि सूखाताल झील, विश्व प्रसिद्ध नैनी झील की सबसे बड़ी प्राकृतिक जल प्रदाता है। आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट के अनुसार नैनी झील में सर्वाधिक 53 फीसद पानी जमीन के भीतर और 24 फीसद सतह से भरकर यानी कुल 77 फीसद पानी आता है। लिहाजा सूखाताल झील का भरे रहना विशेष महत्व रखता है। पूर्व में भी सूखाताल झील भरती थी और सितंबर तक पानी से भरी रहती थी और अगले वर्ष मार्च-अप्रैल तक इसका पानी रिस-रिस कर नैनी झील में पहुंचता था, जिससे नैनी झील में पानी की मात्रा बनी रहती थी।
इस कारण झील के किनारे बने दर्जन भर घरों के साथ जल संस्थान द्वारा झील के बीच में बनाए गए पंप हाउस व एडीबी का स्टोर भी पानी में डूब गया है, जिसके बाद जिला प्रशासन ने पंप चलाकर झील से पानी बाहर निकालना प्रारंभ कर दिया है। उल्लेखनीय है कि इन दिनों नैनीताल नगर से अतिक्रमण हटाने का माध्यम बनी प्रो. अजय रावत की याचिका मूलतः सूखाताल झील की परिधि में हुए अनाधिकृत निर्माणों को हटाने और झील को पुर्नर्जीवित करने को लेकर ही है, और इस याचिका पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बेहद कड़ा एवं नगर के पर्यावरण प्रेमियों के लिहाजा से अपेक्षित रुख अपनाया है, लेकिन झील के हालात यथावत बने हुए हैं।
फिर बारिश का सर्वोच्च रिकार्ड टूटने के आसार -15 अगस्त को हुई 213 मिमी बारिश, झील उच्चतम स्तर तक भरने के बाद पूरे 15 इंच खोलने पड़े झील के गेट
वर्ष 2010, 11 और 2013 में बना बारिश का रिकार्ड लगता है कि इस बार अगस्त में ही टूट जाएगा। बारिश का सर्वोच्च रिकार्ड वर्ष 2010 में 4,289.55 मिमी का था। 2011 में 16 अगस्त तक 3,644.64 मिमी, 2013 में 3685.54 मिमी बारिश हुई थी, जबकि इस वर्ष इसी तिथि तक 3300.74 मिमी हो चुकी है। ऐसे में आशंका व्यक्त की जा रही है कि इंद्रदेव कहीं रिकार्ड तोड़ने के लिए शेष करीब 900 मिमी बारिश भी इसी माह में न कर दें। शनिवार को नैनी झील का पानी नियंतण्र कक्ष के पैमाने पर अंकित सर्वाधिक 12 फीट यानी खतरे का स्तर पार करता हुआ पानी माल रोड के पास तक चढ़ आया। इसके परिणामस्वरूप हालिया दौर में झील के पांचों गेटों को सर्वाधिक 15 इंच तक खोलना पड़ गया। गौरतलब है कि वर्ष 2010 के सितंबर महा में आई ‘जलप्रलय’ के बाद मुख्यालय में सर्वाधिक वर्षा का रिकार्ड बना था। झील नियंत्रण कक्ष के अनुसार तब आज की तिथि यानी 16 अगस्त तक 2,153.15 मिमी बारिश हुई थी, लेकिन इस वर्ष 16 अगस्त की सुबह तक 3,300.7 मिमी बारिश हो चुकी है। उल्लेखनीय है कि नगर में बीते 24 घंटों में 213.36 मिमी एवं इससे पूर्व 14 अगस्त को 109.22 मिमी बारिश हुई। नगर में गत जुलाई माह तक 1788.16 मिमी बारिश हुई थी, जबकि इस माह एक पखवा़े में रिकार्ड 1512.58 मिमी बारिश हो चुकी है।
‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार’ एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
सरोवरनगरी के निकट एडवेंचर व शांति पसंद सैलानियों के लिए विकसित हो रहा नया पर्यटक स्थल
प्रकृति का स्वर्ग कही जाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल तो अपनी खूबसूरती के लिए विश्व प्रसिद्ध पर्यटक है ही, लेकिन यदि आप इस स्थान के आसपास की प्रकृति को उसके वास्तविक अनछुवे स्वरूप में देखना चाहते हैं, तथा एडवेंचर यानी साहसिक पर्यटन और शांति की तलाश में पहाड़ों पर आए हैं, तो किलवरी-पंगूठ क्षेत्र आपकी अभीष्ट मंजिल हो सकता है।
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