उत्तराखंड में मतदाता सूची से 4.53 लाख नाम हटे, 9 लाख से अधिक मतदाताओं की मैपिंग अब भी अधूरी, देखें अपना नाम मतदाता सूची में

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नवीन समाचार, देहरादून, 16 मई 2026 (SIR in Uttarakhand-Insturctions for Outer Girls)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) से पहले मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव सामने आया है। राज्य में मतदाताओं की संख्या में 4 लाख 53 हजार 459 की कमी दर्ज की गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer-CEO) कार्यालय के अनुसार जनवरी 2025 तक राज्य में कुल 84 लाख 29 हजार 459 मतदाता थे, जो अब घटकर लगभग 79 लाख 76 हजार रह गए हैं। यहाँ क्लिक करके देखें आपका नाम मतदाता सूची में है या नहीं 

SIR in Uttarakhandनिर्वाचन विभाग का कहना है कि यह कमी मृतकों, विस्थापित मतदाताओं, डुप्लीकेट नामों और लंबे समय से अनुपस्थित लोगों के नाम हटाने के कारण हुई है। दूसरी ओर लगभग 9 लाख 76 हजार मतदाताओं के पुराने रिकॉर्ड की मैपिंग अब भी अधूरी बनी हुई है।

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29 मई से शुरू होगी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया 

निर्वाचन विभाग के अनुसार राज्य में 29 मई 2026 से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू किया जाएगा। इसके तहत मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए बड़े स्तर पर सत्यापन किया जाएगा। अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे (Dr. Vijay Kumar Jogdande) ने बताया कि मतदाताओं की संख्या में आई कमी व्यवस्थित सत्यापन प्रक्रिया का परिणाम है। उनके अनुसार ऐसे मतदाता जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, जो दूसरे स्थानों पर चले गए थे अथवा जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे, उन्हें सूची से हटाया गया है।

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2003 के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर संशोधन

निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2003 के बाद राज्य में इस स्तर का व्यापक विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान नहीं चलाया गया था। इसके कारण वर्षों से बड़ी संख्या में ऐसे नाम मतदाता सूची में बने रहे, जिनकी वास्तविक स्थिति का सत्यापन नहीं हुआ था।

बताया गया कि 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान राज्य में कुल 84 लाख 31 हजार 101 मतदाता दर्ज थे। बाद में एडवांस डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Advanced Duplication Software) और अन्य सत्यापन प्रक्रियाओं की मदद से पूरे वर्ष सूची का परीक्षण किया गया, जिसके बाद बड़ी संख्या में नाम हटाए गए।

लगभग 9.76 लाख मतदाताओं की मैपिंग अधूरी

निर्वाचन विभाग ने बताया कि अब तक लगभग 70 लाख मतदाताओं की सफलतापूर्वक मैपिंग की जा चुकी है, लेकिन करीब 9 लाख 76 हजार मतदाताओं के 2003 के मूल पंजीकरण रिकॉर्ड का सत्यापन अब भी पूरा नहीं हो पाया है।

विशेष फॉर्म भरवाकर मांगी जाएगी जानकारी

डॉ. विजय कुमार जोगदंडे के अनुसार ऐसे मतदाताओं को विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान एक निर्धारित फॉर्म दिया जाएगा, जिसमें उनसे वर्ष 2003 के मूल पंजीकरण से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी।

उन्होंने कहा कि यदि संबंधित मतदाता की ओर से संतोषजनक जानकारी नहीं दी जाती है अथवा कोई उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो मतदाता सूची से नाम हटाने से पहले औपचारिक नोटिस जारी किया जाएगा। विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमसम्मत तरीके से पूरी की जाएगी।

नए मतदाताओं को भी मिलेगा अवसर

निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान नए मतदाताओं के नाम जोड़ने का कार्य भी जारी रहेगा। जिन नागरिकों का नाम अभी तक मतदाता सूची में शामिल नहीं है, वे फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची की शुद्धता चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक विश्वसनीयता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। हालांकि इतने बड़े स्तर पर नाम हटने और लाखों रिकॉर्ड की मैपिंग अधूरी रहने से कई प्रशासनिक और सामाजिक प्रश्न भी उठ रहे हैं।

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साइबर ठगी और भ्रम फैलाने वालों से सतर्क रहने की अपील

निर्वाचन विभाग ने हाल ही में यह भी चेतावनी दी थी कि एसआईआर अभियान के नाम पर साइबर ठग सक्रिय हो सकते हैं। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात लिंक, कॉल या ओटीपी साझा करने से बचें और केवल अधिकृत निर्वाचन कर्मियों को ही दस्तावेज उपलब्ध कराएं।

विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान आने वाले समय में राज्य की चुनावी तैयारियों और मतदाता सूची की विश्वसनीयता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 22 नवंबर 2025 (SIR in Uttarakhand-Insturctions for Outer Girls)। दूसरे राज्यों से विवाह कर उत्तराखंड आई महिलाओं के लिए मतदाता पहचान और नाम बरकरार रखने से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नियम लागू होने जा रहा है। निर्वाचन आयोग दिसंबर अथवा जनवरी से राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण—एसआईआर—की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत ऐसी महिलाओं को अपने मायके की 2003 की मतदाता सूची से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

(SIR in Uttarakhand-Insturctions for Outer Girls) एसआईआर का दूसरा चरण 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा आयोजित,  अगले वर्ष 7 फरवरी को जारी होगी अंतिम मतदाता सूचीइस बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड ने वर्ष 2003 की मतदाता सूची वेबसाइट पर जारी कर दी है, जिससे मतदाता पहचान सत्यापन में सुविधा मिलेगी। उत्तराखंड में मतदाता सूची अभी फ्रीज नहीं हुई है, इसलिए नाम, पता अथवा अन्य विवरण संशोधित करने का अवसर उपलब्ध है।


क्यों जरूरी पड़ेंगे मायके के दस्तावेज?

विवाह के बाद नए राज्य में वोट स्थानांतरण के दौरान पहचान सत्यापन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दूसरे राज्यों—विशेषकर उत्तर प्रदेश—से विवाह कर उत्तराखंड आई महिलाओं को एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान यह सिद्ध करना होगा कि वर्ष 2003 में उनके मायके वाले राज्य में उनकी या उनके माता-पिता की मतदाता स्थिति क्या थी।

2003 की मतदाता सूची आधार बनेगी

चुनाव आयोग ने निर्देशित किया है कि 2003 की मतदाता सूची को आधार वर्ष माना जा रहा है।

  • यदि उस समय महिला का नमं मतदाता सूची में नामांकित था, तो संबंधित जानकारी प्रस्तुत करनी होगी।

  • यदि वह मतदाता के रूप में नामांकित नहीं थी, तो माता-पिता के मतदाता विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए है कि किसी भी मतदाता का नाम दो राज्यों में एक साथ दर्ज न हो।


विशेष गहन पुनरीक्षण—एसआईआर—कब और कैसे?

दिसंबर–जनवरी में शुरू हो जाएगा अभियान

सूत्रों के अनुसार, उत्तराखंड में एसआईआर दिसंबर या जनवरी में प्रारंभ हो जाएगा। इसके तहत निर्वाचन विभाग घर-घर सत्यापन करते हुए रिकॉर्ड का परीक्षण करेगा, ताकि मतदाता सूची को शुद्ध और सही बनाया जा सके।

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वेबसाइट पर उपलब्ध हैं आवश्यक दस्तावेज

  • मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड ने 2003 की मतदाता सूची सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध करा दी है।

  • उत्तर प्रदेश व अन्य पड़ोसी राज्यों ने भी अपनी पुरानी मतदाता सूचियाँ ऑनलाइन जारी कर दी हैं।

महिलाएं अपने मायके के ब्लॉक/वार्ड/तहसील की 2003 की मतदाता सूची डाउनलोड कर एसआईआर के लिए तैयार रह सकती हैं।


किसे-किसे क्या दस्तावेज रखने होंगे?

पहली स्थिति — यदि महिला 2003 में मतदाता थी

  • 2003 की मतदाता सूची में अपना नाम

  • संबंधित पृष्ठ की प्रति

  • विवाह प्रमाण

  • वर्तमान निवास प्रमाण

दूसरी स्थिति — यदि महिला तब मतदाता नहीं थी

  • माता-पिता के नाम वाली 2003 की मतदाता सूची

  • पारिवारिक पहचान प्रमाण

  • विवाह प्रमाण

  • निवास प्रमाण


क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया?

दोहरी मतदाता पहचान रोकना

निर्वाचन आयोग का उद्देश्य है कि—

  • कोई भी मतदाता दो राज्यों में सूचीबद्ध न रहे।

  • नए राज्य में नाम जोड़ते समय पुरानी प्रविष्टियों का निष्कासन सुनिश्चित हो।

चुनाव व्यवस्था में पारदर्शिता

यह कदम मतदाता सूची को शुद्ध करते हुए भविष्य की सभी निर्वाचन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाएगा।


अभी क्या करना चाहिए?

दस्तावेज जुटाएं, सूची फ्रीज न होने का लाभ उठाएं

चूंकि मतदाता सूची अभी फ्रीज नहीं है, इसलिए:

  • नाम, पता, आयु व अन्य सूचना संशोधित कराई जा सकती है।

  • विवाह के बाद नामांतरण हेतु आवश्यक दस्तावेज तैयार रखे जा सकते हैं।

निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर शुरू होने पर बड़ी संख्या में दावे–आपत्तियाँ आएंगी, ऐसे में समय से तैयारी करना अत्यंत उपयोगी रहेगा।


आप इस व्यवस्था को कितना आवश्यक मानते हैं? क्या इससे महिलाओं को प्रक्रिया में अधिक सुविधा मिलेगी या कठिनाई? अपने विचार कमेन्ट बॉक्स में अवश्य लिखें।

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