उत्तराखंड में श्रमिकों के लिए पड़ोसी राज्यों से अधिक-नई न्यूनतम वेतन दरें लागू, ओवरटाइम, बोनस और अन्य वैधानिक सुविधाएं भी…

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नवीन समाचार, देहरादून, 16 मई 2026 (New Minimum Wages for Workers in UK)। उत्तराखंड (Uttarakhand) सरकार ने राज्य के श्रमिकों के लिए नई न्यूनतम वेतन दरें लागू करते हुए दावा किया है कि प्रदेश में अब पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक न्यूनतम मानदेय दिया जा रहा है। श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि श्रमिकों को केवल निर्धारित वेतन ही नहीं, बल्कि ओवरटाइम, बोनस और अन्य वैधानिक सुविधाएं भी नियमानुसार उपलब्ध करायी जाएंगी। साथ ही विभाग ने 781 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम वेतन लागू होने संबंधी चर्चाओं को भ्रामक बताते हुए श्रमिकों से अफवाहों से बचने की अपील की है।

श्रमिकों के लिए तय की गयी नई वेतन दरें

New Minimum Wages for Workers in UK May be an image of map, blueprint and textMay be an image of blueprint, ticket stub and textश्रम विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार राज्य में वर्तमान में अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन 13,018 रुपये से 13,800 रुपये के बीच निर्धारित किया गया है, जबकि अर्द्धकुशल श्रमिकों के लिए 15,100 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,900 रुपये प्रतिमाह वेतन तय किया गया है। इन दरों में महंगाई भत्ता (Dearness Allowance-DA) भी शामिल है और नई व्यवस्था को 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना गया है।

विभाग का कहना है कि अप्रैल 2026 में इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए न्यूनतम वेतन घोषित किया गया था, जबकि गैर-इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए वी.डी.ए. (Variable Dearness Allowance-VDA) भी जारी किया जा चुका है। सभी उद्योगों को वेतन और एरियर का भुगतान नियमानुसार करने के निर्देश दिए गए हैं।

पड़ोसी राज्यों से अधिक वेतन का दावा

सरकार ने दावा किया है कि उत्तराखंड न्यूनतम वेतन के मामले में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) और बिहार (Bihar) जैसे पड़ोसी राज्यों से आगे है।

तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार:

  • उत्तर प्रदेश में अकुशल श्रमिकों का वेतन लगभग 12,300 रुपये
  • हिमाचल प्रदेश में लगभग 11,250 रुपये
  • बिहार में लगभग 11,230 रुपये

जबकि उत्तराखंड में अकुशल श्रमिकों के लिए यह राशि 13 हजार रुपये से अधिक निर्धारित की गयी है। इसी प्रकार अर्द्धकुशल और कुशल श्रमिकों के वेतनमान भी पड़ोसी राज्यों से अधिक बताए गये हैं।

781 रुपये प्रतिदिन वेतन संबंधी दावों को बताया भ्रामक

श्रम विभाग और श्रमायुक्त पीसी दुमका (PC Dumka) ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की ओर से 781 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम वेतन लागू करने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

विभाग के अनुसार यह दर केवल कुछ केंद्रीय उपक्रमों के विशेष वर्गों के लिए लागू हो सकती है और इसे राज्य के सभी उद्योगों पर लागू मानना गलत है। श्रम विभाग ने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से इस विषय में भ्रामक प्रचार किया जा रहा है, जिससे औद्योगिक शांति प्रभावित हो सकती है।

उद्योगों को सख्त निर्देश

सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु (RK Sudhanshu) ने अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों को श्रम कानूनों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रमिकों का शोषण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि सभी उद्योगों में श्रमिकों को निर्धारित वेतन, ओवरटाइम और बोनस सहित अन्य सुविधाएं समय पर मिल रही हैं या नहीं। प्रमुख सचिव ने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति भ्रम या दुष्प्रचार फैलाने का प्रयास करेगा तो उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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श्रमिकों से औद्योगिक शांति बनाए रखने की अपील

श्रम विभाग ने कहा कि पिछले कई दिनों से विभागीय अधिकारियों का काफी समय श्रमिकों को वास्तविक स्थिति समझाने में लग रहा है, जिससे श्रम कानूनों के नियमित निरीक्षण और अनुपालन कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

विभाग ने श्रमिकों से अपील की है कि वे किसी भी भ्रामक सूचना पर भरोसा न करें और किसी शिकायत की स्थिति में संबंधित सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय से संपर्क करें। हल्द्वानी (Haldwani) स्थित श्रम आयुक्त कार्यालय में 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, जिसका दूरभाष नंबर 05946-282805 जारी किया गया है।

नए श्रम कानूनों के बाद फिर हो सकती है समीक्षा

श्रम विभाग के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा नए श्रम कानूनों के तहत राष्ट्रीय फ्लोर लेवल न्यूनतम वेतन घोषित किये जाने के बाद राज्य सरकार आवश्यकतानुसार अपने वेतनमान की पुनः समीक्षा कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और श्रमिक असंतोष के बीच न्यूनतम वेतन का मुद्दा आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में वेतनमान के साथ-साथ वास्तविक भुगतान और श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी नजर बनी रहेगी। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

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