नवीन समाचार, देहरादून, 14 मई 2026 (New Government Guidelines in Uk)। उत्तराखंड (Uttarakhand) सरकार ने बढ़ती ईंधन कीमतों, वैश्विक ऊर्जा संकट और संसाधनों के संतुलित उपयोग को देखते हुए व्यापक गाइडलाइन जारी की है। इसमें वर्क फ्रॉम होम (Work From Home), वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित कार्य प्रणाली, सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहनों, प्राकृतिक खेती, ऊर्जा संरक्षण और सरकारी मितव्ययता जैसे कई विषयों को शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य केवल ईंधन बचत नहीं, बल्कि राज्य की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक संतुलन और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना भी है।
पश्चिम एशिया संकट और बढ़ती तेल कीमतों के बीच जारी हुई गाइडलाइन
शासन स्तर से जारी निर्देशों के अनुसार पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का प्रभाव भारत सहित कई देशों पर पड़ रहा है। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि से परिवहन, उद्योग और आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार की सलाह के बाद उत्तराखंड शासन ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये हैं। यह आदेश प्रभारी मुख्य सचिव आरके सुधांशु (RK Sudhanshu) के माध्यम से लागू किया गया है।
वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल कार्यसंस्कृति पर विशेष जोर
गाइडलाइन में सरकारी विभागों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित बैठकों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिये गये हैं। केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही अधिकारियों और कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति सुनिश्चित करने की बात कही गयी है। निजी क्षेत्र को भी वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, ताकि वाहनों की आवाजाही कम हो और ईंधन की खपत घटायी जा सके।
सार्वजनिक परिवहन और कार पूलिंग को बढ़ावा
सरकार ने स्कूल बसों और सार्वजनिक परिवहन के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया है। साथ ही कार पूलिंग और साइकिलिंग संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिये गये हैं। शासन स्तर पर सप्ताह में एक दिन “नो व्हीकल डे” मनाने की संभावना पर भी काम किया जा रहा है। सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को साइकिल अथवा पैदल कार्यालय आने के लिए प्रेरित करने की योजना भी बनायी गयी है।
वीआईपी काफिलों में कटौती और एसी उपयोग पर नियंत्रण
नई गाइडलाइन में सरकारी मितव्ययता के तहत वीआईपी और माननीयों के काफिलों में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत तक सीमित करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही सरकारी और निजी भवनों में एयर कंडीशनर (AC) का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने के निर्देश जारी किये गये हैं। अनावश्यक एसी उपयोग और सजावटी रोशनी को कम करने पर भी जोर दिया गया है। होटल, मॉल, धर्मशालाओं और सार्वजनिक स्थलों पर बिजली की बचत सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इलेक्ट्रिक वाहन और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर फोकस
गाइडलाइन में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles-EV) के लिए चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क के तेजी से विस्तार के निर्देश भी शामिल हैं। लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए प्रेरित करने और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने की बात कही गयी है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना (PM Surya Ghar Yojana) के तहत रूफटॉप सोलर परियोजनाओं को तेज गति से आगे बढ़ाने और गोवर्धन योजना के अंतर्गत कंप्रेस्ड बायोगैस परियोजनाओं को गति देने पर भी बल दिया गया है।
प्राकृतिक खेती और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा
सरकार ने प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पादों और बायो इनपुट आधारित कृषि को बढ़ावा देने के निर्देश दिये हैं। किसानों को नेचुरल फार्मिंग और जीरो बजट फार्मिंग का प्रशिक्षण देने की योजना भी बनायी गयी है। साथ ही मेक इन इंडिया (Make in India) अभियान के तहत सरकारी खरीद में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने और त्योहारों व विवाह समारोहों में भारतीय हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही गयी है।
खाद्य तेल और सोने की खरीद को लेकर भी सलाह
गाइडलाइन में खाद्य तेल की खपत कम करने और कम तेल वाले भोजन के स्वास्थ्य लाभों के प्रति जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिये गये हैं। स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी कैंटीनों में तेल उपयोग की समीक्षा करने की बात भी कही गयी है। इसके अतिरिक्त नागरिकों से एक वर्ष तक अनावश्यक सोने की खरीद सीमित रखने की अपील की गयी है। पुराने आभूषणों के पुनः उपयोग और री-डिजाइन को भी प्रोत्साहित करने की योजना है।
पीएनजी, एलपीजी और डिजिटल शासन व्यवस्था पर बल
होटल, रेस्टोरेंट और सरकारी आवासों में पीएनजी (PNG) को प्राथमिकता देने और गैस संसाधनों के बेहतर उपयोग के निर्देश भी जारी किये गये हैं। इसके साथ ही सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम, निवेश परियोजनाओं की फास्ट ट्रैक स्वीकृति और ऊर्जा परियोजनाओं की निगरानी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि यह गाइडलाइन ऊर्जा संरक्षण के साथ आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक आर्थिक संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
यह गाइडलाइन संकेत देती है कि आने वाले समय में उत्तराखंड में सरकारी कार्यशैली, परिवहन व्यवस्था, ऊर्जा उपयोग और आमजन की जीवनशैली में भी बदलाव दिखाई दे सकता है। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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