नवीन समाचार, नैनीताल, 16 मई 2026 (Govt Told High Court about Lokayukta)। उत्तराखंड (Uttarakhand) उच्च न्यायालय (High Court) ने राज्य में वर्षों से लंबित लोकायुक्त (Lokayukta) नियुक्ति मामले में राज्य सरकार के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता (Manoj Kumar Gupta) और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Subhash Upadhyay) की खंडपीठ ने सरकार से पूछा कि लोकायुक्त नियुक्ति प्रक्रिया में अब तक वास्तविक प्रगति क्यों नहीं हुई और नियुक्ति समिति की अगली बैठक कब आयोजित होगी। सरकार की ओर से बताया गया कि सर्च कमेटी की पहली बैठक जून के पहले सप्ताह में प्रस्तावित है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 16 जून को निर्धारित की है।
एक वर्ष बाद भी नहीं हुई नियुक्ति, कोर्ट ने जताई नाराजगी
गौलापार (Gaulapar) निवासी रवि शंकर जोशी (Ravi Shankar Joshi) द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि लोकायुक्त नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन कार्यवाही धीमी गति से आगे बढ़ रही है। इस पर न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए सरकार से कहा कि आधे घंटे के भीतर स्पष्ट किया जाए कि न्यायालय के पूर्व आदेशों का पालन अब तक क्यों नहीं हो पाया।
बाद की सुनवाई में सरकार ने बताया कि लोकायुक्त नियुक्ति के लिए गठित सर्च कमेटी की पहली बैठक जून 2026 के पहले सप्ताह में आयोजित की जाएगी। न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक सर्च कमेटी द्वारा लिये गये निर्णयों की जानकारी शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत की जाए।
2013 से रिक्त पड़ा है लोकायुक्त का पद
याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड में लोकायुक्त का पद वर्ष 2013 से रिक्त पड़ा है, जबकि इस संस्था पर प्रतिवर्ष लगभग दो से तीन करोड़ रुपये व्यय हो रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच एजेंसी का अभाव है और वर्तमान जांच एजेंसियां शासन के अधीन कार्य कर रही हैं।
जनहित याचिका में यह भी कहा गया कि कर्नाटक (Karnataka) और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) जैसे राज्यों में लोकायुक्त संस्थान भ्रष्टाचार के मामलों में प्रभावी कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि उत्तराखंड में छोटे-छोटे मामलों तक के लिए लोगों को उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ रही है। याचिका में यह मांग की गयी है कि शीघ्र लोकायुक्त की नियुक्ति कर स्वतंत्र जांच व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
पूर्व बैठकों में भी नहीं बन पाया कोरम
न्यायालय को बताया गया कि 3 अप्रैल को प्रस्तावित सर्च कमेटी की बैठक कोरम पूरा न होने के कारण आयोजित नहीं हो सकी थी। इससे पहले भी सरकार ने लोकायुक्त नियुक्ति के लिए न्यायालय से छह माह का समय मांगा था, लेकिन न्यायालय ने केवल तीन माह का समय दिया था। इसके बावजूद एक वर्ष बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
हाईकोर्ट में मनाया गया ‘नो व्हीकल डे’
इधर ईंधन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट में “नो व्हीकल डे” मनाया गया। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता सहित सभी न्यायाधीश, अधिकारी, कर्मचारी और बार एसोसिएशन के सदस्य पैदल चलकर न्यायालय पहुंचे।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ईंधन संरक्षण समय की आवश्यकता है और छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने बताया कि भवाली (Bhowali), हल्द्वानी (Haldwani) और अन्य दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले अधिवक्ताओं और वादकारियों की सुविधा के लिए वर्चुअल सुनवाई व्यवस्था भी जारी रखी जा रही है, जिससे अनावश्यक यात्रा और ईंधन खपत कम होगी।
न्यायाधीशों ने दिया ईंधन बचत का संदेश
वरिष्ठ न्यायाधीश राकेश थपलियाल (Rakesh Thapliyal) ने कहा कि केवल एक दिन नहीं, बल्कि नियमित रूप से पैदल चलने और साइकिल उपयोग की आदत विकसित की जानी चाहिए। वरिष्ठ न्यायाधीशों और अधिकारियों ने भी लोगों से ईंधन का कम से कम उपयोग करने और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की अपील की।
लोकायुक्त नियुक्ति पर हाईकोर्ट की सख्ती और दूसरी ओर न्यायपालिका द्वारा स्वयं ईंधन संरक्षण अभियान में भागीदारी, दोनों घटनाएं उत्तराखंड में जवाबदेही और संसाधन संरक्षण को लेकर बढ़ती सक्रियता को दर्शाती हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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