डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 27 फरवरी 2026 (High Court on 3 Cases-Women Safety)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) से दुष्कर्म से जुड़े तीन महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय सामने आये हैं। एक ओर नैनीताल के बहुचर्चित नाबालिग दुष्कर्म प्रकरण में आरोपित उस्मान खान (Usman Khan) की जमानत याचिका खारिज हुई, वहीं रुद्रपुर (Rudrapur) के सामूहिक दुष्कर्म मामले में दो दोषियों की सजा निलंबित कर उन्हें जमानत दी गयी।
वहीं तीसरी ओर पंतनगर (Pantnagar) क्षेत्र के एक मामले में विशेष न्यायालय ने आरोपित को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनायी। इन फैसलों को न्यायिक प्रक्रिया, साक्ष्य मूल्यांकन और बाल सुरक्षा कानूनों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नाबालिग दुष्कर्म प्रकरण में जमानत याचिका खारिज
न्यायमूर्ति आलोक मेहरा (Justice Alok Mehra) की एकल पीठ ने नैनीताल के राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित प्रकरण में ठेकेदार उस्मान खान की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मामले का ट्रायल तीन माह में निस्तारित किया जाए।
आरोपित की ओर से तर्क दिया गया कि पीड़िता के छह बयान हुए और उनमें विरोधाभास है तथा घटना के समय प्रकाश व्यवस्था सिद्ध नहीं हो पायी। राज्य सरकार ने कहा कि कई गवाहों के बयान हो चुके हैं और ट्रायल जारी है, इसलिए शीघ्र निस्तारण आवश्यक है।
क्या है मूल प्रकरण
अभियोग के अनुसार मल्लीताल (Mallital) क्षेत्र में 12 वर्षीय नाबालिग बालिका ने 12 अप्रैल 2025 की घटना बताते हुए 73 वर्षीय ठेकेदार उस्मान खान पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इस संबंध में 30 अप्रैल 2025 को मल्लीताल कोतवाली (Mallital Police Station) में अभियोग दर्ज हुआ। गिरफ्तारी के बाद से आरोपित कारागार में निरुद्ध है।
प्रकरण के बाद शहर में प्रदर्शन और बाजार बंद भी हुआ था। पीड़िता पक्ष के अधिवक्ता पंकज चौहान (Pankaj Chauhan) ने बताया कि न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज करते हुए ट्रायल तीन माह में पूरा करने को कहा है।
रुद्रपुर सामूहिक दुष्कर्म मामले में सजा निलंबित
उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी (Justice Ravindra Maithani) और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह (Justice Siddharth Shah) की खंडपीठ ने ऊधमसिंह नगर (Udham Singh Nagar) जनपद के रुद्रपुर क्षेत्र के सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण में दोषी धीर सिंह (Dheer Singh) और अजय कुमार (Ajay Kumar) की सजा निलंबित कर उन्हें जमानत पर रिहा करने के आदेश दिये। आरोपितों ने निचली अदालत के 22 जुलाई 2025 के निर्णय को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें दोषी ठहराते हुए कठोर कारावास दिया गया था।
पहचान नहीं होने का तर्क प्रभावी
सुनवाई में बचाव पक्ष ने कहा कि ट्रायल के दौरान पीड़िता और उसके पिता ने आरोपितों का नाम नहीं लिया और न्यायालय में पहचान भी नहीं की। मुख्य गवाहों ने भी पहचान से इनकार किया। न्यायालय ने इन बिंदुओं को विचार योग्य मानते हुए सजा निलंबित करने का आदेश दिया।
पंतनगर प्रकरण में 10 वर्ष का कठोर कारावास
एक अन्य मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अश्वनी गौड़ (Ashwani Gaur) की अदालत ने एक नाबालिग छात्रा से घर में घुसकर दुष्कर्म करने के आरोपित भुलाई उर्फ भोलई यादव (Bhulai alias Bholai Yadav) को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड सुनाया।
अभियोजन के अनुसार 8 मार्च 2023 की रात पंतनगर क्षेत्र की एक किशोरी अपने छोटे भाइयों के साथ घर पर अकेली थी, तभी आरोपित दरवाजा तोड़कर अंदर घुसा और दुष्कर्म किया। बाद में 30 मार्च 2023 को पुनः घटना दोहराई गई। पिता की शिकायत पर थाना पंतनगर (Pantnagar Police Station) में अभियोग दर्ज हुआ और विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने दोष सिद्ध पाया।
क्यों महत्वपूर्ण हैं ये फैसले
इन तीनों निर्णयों से स्पष्ट होता है कि न्यायालय साक्ष्यों की गुणवत्ता, पीड़ित संरक्षण और विधिक प्रक्रिया—तीनों पहलुओं को संतुलित दृष्टि से देख रहा है। जहां गंभीर मामलों में जमानत पर सख्ती बरती जा रही है, वहीं साक्ष्य कमजोर होने पर राहत भी दी जा रही है। यह न्याय प्रणाली की पारदर्शिता और विधि के शासन की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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