व्यापारी नेता नरेश पांडे को अग्रिम जमानत से राहत नहीं, लटकी गिरफ़्तारी की तलवार !!

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नवीन समाचार, नैनीताल, 3 जून 2026 (Naresh Pandey Denied Anticipatory Bail)। भवाली-नैनीताल के व्यापारी नेता एवं व्यापार मंडल अध्यक्ष नरेश पांडे को कथित दुष्कर्म, धोखाधड़ी, धमकी और शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के मामले में अग्रिम जमानत नहीं मिल सकी है। इसके बाद पांडे पर गिरफ़्तारी की तलवार लटक गई है। नैनीताल के जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले की गंभीरता, पीड़िता के आरोपों, लंबित विवेचना और आरोपी के आपराधिक इतिहास को देखते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आरोपी कोई ऐसी असाधारण स्थिति प्रदर्शित नहीं कर पाया है, जिसके आधार पर उसे अग्रिम जमानत जैसी विशेष राहत प्रदान की जा सके।

तीन वर्ष से अधिक संबंध और गर्भपात का आरोप

Naresh Pandey Denied Anticipatory Bail भवाली व्यापार मंडल अध्यक्ष नरेश पांडेय को पुलिस ने लिया हिरासत में , कथित यौन शोषण के हैं आरोप - Naini Live
भवाली व्यापार मंडल अध्यक्ष नरेश पांडेय

न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़िता ने 22 अप्रैल 2026 को मल्लीताल थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वह पिछले लगभग तीन वर्ष सात माह से नरेश पांडेय के संपर्क में थी। पीड़िता का कहना है कि संबंध शुरू होने के समय उसकी आयु 17 वर्ष थी और आरोपित ने स्वयं को अविवाहित बताते हुए विवाह का आश्वासन दिया था। बाद में उसे पता चला कि आरोपित विवाहित है और उसके दो बच्चे हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि संबंधों के दौरान गर्भधारण होने पर आरोपित ने गर्भपात कराने का दबाव बनाया

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पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि आरोपित अन्य युवतियों के साथ भी संबंध रखता था तथा विरोध करने पर उसे धमकाया और अपशब्द कहे। इसके संबंध में उसने ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेज भी जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए।

आरोपित ने खुद को राजनीतिक साजिश का शिकार बताया

अग्रिम जमानत याचिका में नरेश पांडेय ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। उनका पक्ष था कि वह भवाली व्यापार मंडल के अध्यक्ष हैं और पिछले कई वर्षों से सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। उन्होंने दावा किया कि बढ़ती लोकप्रियता के कारण कुछ राजनीतिक और व्यक्तिगत विरोधियों ने उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा है। आरोपित ने यह भी कहा कि प्राथमिकी काफी विलंब से दर्ज कराई गई और उसके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं।

अभियोजन ने बताया गंभीर प्रकृति का मामला

अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने न्यायालय को बताया कि पीड़िता ने अपने बयान में आरोपित के द्वारा शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और गर्भपात कराने की बात दोहराई है। साथ ही पीड़िता ने चिकित्सीय दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी जांच अधिकारी को सौंपे हैं। अभियोजन ने यह भी कहा कि आरोपित के विरुद्ध पूर्व में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज रहे हैं और एक मामले में उसके विरुद्ध गुंडा अधिनियम के तहत भी कार्रवाई हुई थी।

हाईकोर्ट भी दे चुका है अंतरिम राहत से इन्कार

अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि इससे पूर्व आरोपित ने उच्च न्यायालय में भी राहत की मांग की थी। न्यायालय के आदेश में उल्लेख किया गया कि उच्च न्यायालय ने आरोपित के विरुद्ध दर्ज मामलों, पीड़िता को कथित धमकियों और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए अंतरिम संरक्षण देने से इन्कार किया था।

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पीड़िता के बयानों और विवेचना को माना महत्वपूर्ण

सत्र न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि विवेचना के दौरान पीड़िता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 180 के अंतर्गत दिए गए बयान में आरोपित पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि की है। न्यायालय ने यह भी माना कि मामले में अभी जांच जारी है और विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जानी शेष है। ऐसे में अग्रिम जमानत देने से निष्पक्ष विवेचना प्रभावित हो सकती है।

अदालत ने कहा, विशेष परिस्थितियां नहीं दिखीं

न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि अग्रिम जमानत एक असाधारण राहत है और इसे केवल विशेष परिस्थितियों में ही प्रदान किया जाना चाहिए। अदालत ने मामले की गंभीरता, पीड़िता के आरोपों, आरोपित के पूर्व मामलों और जांच की वर्तमान स्थिति को देखते हुए याचिका खारिज कर दी।

न्यायाधीश प्रशांत जोशी की अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस आदेश में की गई टिप्पणियां केवल अग्रिम जमानत याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं और इन्हें मामले के अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाएगा।

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