उपभोक्ता आयोग से उपभोक्ता को राहत, हाईकोर्ट में स्टोन क्रशर मामले, पत्नी की हत्या, नैनीताल की समस्याओं, तिहरे हत्याकांड और न्यायमूर्ति को विदाई आदि समाचार

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नवीन समाचार, नैनीताल, 3 जून 2026 (Uttarakhand High Court News 3 June,)। नैनीताल में बुधवार को उपभोक्ता अधिकारों और न्यायिक मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए। एक ओर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा दावा गलत आधार पर निरस्त करने के मामले में आईसीआईसीआई लोमबार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता को पूरी क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए, वहीं उत्तराखंड हाईकोर्ट में पर्यावरण, हत्या, जनहित याचिका, मृत्युदंड अपील और न्यायिक प्रशासन से जुड़े कई मामलों में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इसके अतिरिक्त उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आशीष नैथानी के सेवानिवृत्त होने पर फुल कोर्ट रेफरेंस आयोजित कर उन्हें भावपूर्ण विदाई दी गई।

बीमा दावा खारिज करने पर आयोग ने लगाई फटकार

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग नैनीताल ने बीमा दावा मनमाने ढंग से अस्वीकार करने के मामले में आईसीआईसीआई लोमबार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में गंभीर कमी का दोषी माना। आयोग के अध्यक्ष रमेश कुमार जायसवाल और सदस्य लक्ष्मण सिंह रावत की पीठ ने कंपनी को मल्लीताल निवासी कुंदन सिंह बिष्ट को वाहन मरम्मत पर खर्च की गई 3.25 लाख रुपये से अधिक की राशि, 50 हजार रुपये मानसिक उत्पीड़न क्षतिपूर्ति तथा 20 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया।

मामला दिसंबर 2024 में नोएडा में हुई वाहन दुर्घटना से जुड़ा था। आयोग ने माना कि कंपनी ने पहले दावा स्वीकार करने का संकेत दिया और बाद में मरम्मत पूर्ण होने के पश्चात दावा खारिज कर दिया। आदेश में कहा गया कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर कंपनी को ब्याज भी देना होगा।

स्टोन क्रशर मामले में छह सप्ताह में जवाब तलब

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विकासनगर के भीमावाला क्षेत्र में संचालित साईं कृपा स्टोन क्रशर के मामले में सुनवाई करते हुए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और औद्योगिक विभाग को छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने अगली सुनवाई 22 जुलाई को निर्धारित की है।

पत्नी की हत्या के दोषी की उम्रकैद बरकरार

हाईकोर्ट ने ऋषिकेश निवासी रोशन लाल की आपराधिक जेल अपील खारिज करते हुए उसकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। आरोपी को अपनी पत्नी रूपा की गला घोंटकर हत्या करने के मामले में दोषी ठहराया गया था। न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला आरोपी की ओर ही संकेत करती है।

अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पड़ोसियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह माना कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का मामला था।

नैनीताल की समस्याओं पर चार सप्ताह में अमल के निर्देश

पर्यावरणविद् प्रो. अजय रावत की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को सुझाव समिति की सिफारिशों पर चार सप्ताह के भीतर अमल करने को कहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि किसी सुझाव के क्रियान्वयन में व्यावहारिक कठिनाई हो तो उस पर विचार किया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।

तिहरे हत्याकांड की फांसी अपील पर 28 जून को सुनवाई

अपनी मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की तलवार से हत्या करने के आरोपी की फांसी की सजा के विरुद्ध दायर अपील पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 28 जून को निर्धारित की है। आरोपी की ओर से दलील दी गई कि घटना के समय वह मानसिक रोग से पीड़ित था तथा प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। अदालत ने मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए अगली तिथि तय की।

शव को कब्र से निकालकर दोबारा पोस्टमार्टम कराने के निर्देश, रिपोर्ट न्यायालय में पेश होगी

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने काशीपुर के कटोराताल क्षेत्र में एक युवक की संदिग्ध मृत्यु के मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए शव को कब्र से निकालकर दोबारा पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने कहा है कि पुनः पोस्टमार्टम की रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए। इसके लिए डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों का एक पैनल गठित किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी।

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याचिकाकर्ता इमरान ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि उनके पुत्र का शव 16 मई को घर की छत पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। शव के आसपास खून के निशान भी थे। प्रारंभिक पोस्टमार्टम के बाद शव को दफना दिया गया, लेकिन परिजनों को हत्या की आशंका है। याचिका में कहा गया कि मृतक के कान के नीचे चोट के निशान थे, इसलिए मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाना आवश्यक है। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुनः पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया।

कृष्णापुर-नैनीताल सड़क निर्माण मामले में मुख्य सचिव से मांगा जवाब

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कृष्णापुर से नैनीताल तक प्रस्तावित सड़क निर्माण के मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि वह सड़क निर्माण कराना चाहती है या नहीं।

याचिकाकर्ता डीएन भट्ट की ओर से कहा गया कि सड़क निर्माण को लेकर शासन स्तर पर सहमति और वित्तीय स्वीकृति मिलने के बावजूद कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है, जिससे क्षेत्रवासियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि बेलुवाखान-कृष्णापुर मार्ग का कुछ हिस्सा वन भूमि में आता है तथा वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव अभी तैयार नहीं हुआ है। इस पर याचिकाकर्ता ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार ठोस निर्णय लेने के बजाय मामले को लंबित रख रही है। न्यायालय ने मुख्य सचिव को जवाबी शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।

न्यायमूर्ति आशीष नैथानी को दी गई भावपूर्ण विदाई

Uttarakhand High Court News 3 Juneउत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आशीष नैथानी बुधवार को सेवानिवृत्त हो गए। उनके सम्मान में मुख्य न्यायाधीश की अदालत में फुल कोर्ट रेफरेंस आयोजित किया गया। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने उनके कार्यकाल, न्यायिक योगदान और बार एवं बेंच के साथ उनके सौहार्दपूर्ण व्यवहार की सराहना की।

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विदाई समारोह को वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी, महाधिवक्ता एस.एन. बाबुलकर तथा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र सिंह रावत सहित अनेक वक्ताओं ने संबोधित किया। अपने संबोधन में न्यायमूर्ति नैथानी ने सहयोग के लिए न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और न्यायालय स्टाफ का आभार व्यक्त किया।

न्यायमूर्ति आलोक वर्मा के पूर्व में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने और अब न्यायमूर्ति आशीष नैथानी के सेवानिवृत्त होने के बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या घटकर आठ रह गई है।

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