नवीन समाचार, हरिद्वार, 15 मई 2026 (1st Halala Case Registered in Country)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू होने के बाद हलाला से जुड़ा पहला बड़ा मामला अब कानूनी रूप से अदालत तक पहुंच गया है। हरिद्वार (Haridwar) जिले के बुग्गावाला (Buggawala) थाना क्षेत्र में दर्ज तीन तलाक, दहेज उत्पीड़न और मारपीट के मामले में पुलिस ने जांच के बाद पहली बार हलाला से जुड़े आरोपों को भी यूसीसी के प्रावधानों के तहत अपराध मानते हुए आरोपपत्र में शामिल किया है। इसे न केवल राज्य बल्कि देश स्तर पर भी महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है।
पुनर्विवाह के लिए हलाला का दबाव बनाने का आरोप
पुलिस के अनुसार बुग्गावाला थाना क्षेत्र की एक विवाहिता ने 4 अप्रैल 2026 को अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी थी। महिला ने आरोप लगाया था कि विवाह के बाद से उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया, मारपीट की गयी और बाद में पति ने उसे तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि दोबारा साथ रखने के लिए उस पर हलाला करने का दबाव बनाया गया।
पीड़िता के अनुसार पति ने कहा था कि पुनर्विवाह से पहले उसे “जहां कहा जाए वहां हलाला करना पड़ेगा।” इसके बाद पुलिस ने पति, ससुर, जेठ, देवर, सास, ननद और अन्य पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान देहरादून (Dehradun) निवासी एक अन्य व्यक्ति का नाम भी सामने आया, जिसके बाद आरोपितों की संख्या नौ हो गयी।
जांच में सामने आये हलाला से जुड़े तथ्य
शुरुआत में प्राथमिकी में हलाला से संबंधित धाराएं शामिल नहीं थीं। बाद में पीड़िता और उसके परिवार की आपत्तियों के बाद पुलिस ने विस्तृत जांच की। विवेचक द्वारा पीड़िता और अन्य लोगों के बयान दर्ज किये गये, जिनमें महिला पर हलाला के लिए दबाव बनाये जाने की पुष्टि होने की बात सामने आयी। इसके बाद पुलिस ने यूसीसी की हलाला से संबंधित धाराएं जोड़ते हुए आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया।
हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर (Navneet Singh Bhullar) ने बताया कि मूल प्राथमिकी में यूसीसी की धाराएं शामिल नहीं थीं, लेकिन विवेचना के दौरान तथ्यों की पुष्टि होने पर तीन तलाक और हलाला से जुड़े प्रावधान आरोपपत्र में जोड़े गये हैं।
यूसीसी में पुनर्विवाह पर शर्त को माना गया दंडनीय
यूसीसी एक्ट की धारा 30 की उपधारा-2 में कहा गया है कि विवाह-विच्छेदित पति-पत्नी का पुनर्विवाह बिना किसी शर्त के अनुमन्य होगा। पुनर्विवाह के लिए किसी अन्य से विवाह जैसी शर्त नहीं लगायी जा सकती। अधिनियम की धारा 32 के अंतर्गत ऐसी शर्तों को दंडनीय माना गया है, जिसमें तीन से पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान बताया गया है। शासकीय अधिवक्ता जीपी रतूड़ी (GP Raturi) के अनुसार यूसीसी लागू होने के बाद हलाला से जुड़ा यह देश का पहला मामला माना जा रहा है।
महिला अधिकार और सामाजिक बहस के केंद्र में मामला
उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम (Farzana Begum) ने कहा कि पीड़िता को हरसंभव सहायता उपलब्ध करायी जाएगी। उनका कहना है कि यूसीसी लागू होने के बाद महिलाओं में कानूनी अधिकारों को लेकर विश्वास बढ़ा है और अब महिलाएं ऐसे मामलों में खुलकर सामने आ रही हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता और यूसीसी ड्राफ्ट समिति सदस्य मनु गौड़ (Manu Gaur) ने इसे ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं को भी तीन तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
इस मामले ने महिलाओं की सुरक्षा, वैवाहिक अधिकारों, धार्मिक प्रथाओं और कानूनी सुधारों को लेकर व्यापक सामाजिक चर्चा को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए कानूनों के प्रभाव का वास्तविक परीक्षण अब उनके क्रियान्वयन और न्यायिक प्रक्रिया में दिखाई देगा। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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