नवीन समाचार, चम्पावत, 9 मई 2026 (Champawat-Framed Rape with Minor Girl)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के चम्पावत (Champawat) जनपद अंतर्गत सल्ली (Salli) गांव में एक नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) का मामला पूरी तरह से मनगढ़ंत और एक सुनियोजित षड्यंत्र निकला। पुलिस जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि मुख्य आरोपित ने अपने विरोधियों से बदला लेने के लिए एक नाबालिग किशोरी को प्रलोभन देकर इस घृणित साजिश का हिस्सा बनाया था। इस प्रकरण में पुलिस ने पूर्व बीडीसी (BDC) सदस्य और मुख्य षड्यंत्रकर्ता कमल रावत (Kamal Rawat) सहित दो आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि एक अन्य आरोपित की खोज जारी है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रेखा यादव (Rekha Yadav) द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने जब साक्ष्यों का मिलान किया, तो पीड़िता के बयानों और चिकित्सकीय परीक्षण (Medical Examination) की रिपोर्ट में भारी विरोधाभास पाया गया। पीड़िता ने अंततः न्यायालय (Court) के समक्ष स्वीकार किया कि उसके साथ कोई अप्रिय घटना नहीं हुई थी और यह सब एक सोची-समझी साजिश थी।
बीमार पिता के इलाज का लालच देकर बनाया बंधक
पुलिस के अनुसार, सल्ली निवासी कमल रावत ने 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी को उसके अस्वस्थ पिता का उपचार कराने का प्रलोभन दिया था। आरोप है कि षड्यंत्र के तहत कमल ने सल्ली स्थित एक मकान का ताला तोड़कर किशोरी को वहां बंधक बनाया, उसके पैर रस्सी से बांधे और बिना कपड़ों के करके बाहर से ताला लगा दिया ताकि दृश्य को वास्तविक दुष्कर्म जैसा दिखाया जा सके। इस कार्य में उसकी महिला मित्र अर्जिता राय (Arjita Rai) ने भी सहयोग किया।
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो से खुली पोल
इस प्रकरण में पीड़िता का एक वीडियो भी प्रसारित (Viral) हुआ है, जिसमें वह स्वयं स्वीकार कर रही है कि आरोपित बनाए गए तीनों व्यक्तियों—पूरन सिंह, नवीन सिंह और विनोद रावत—ने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया था। वीडियो में किशोरी कह रही है कि कमल रावत और अर्जिता के साथ मिलकर उन्होंने स्वयं ही कमरे में दुष्कर्म जैसी स्थिति निर्मित की थी।
वायरल एक वीडियो में किशोरी कहती दिख रही है कि आरोपित बनाए गए तीनों लोगों ने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया। किशोरी कहती है कि ‘विनोद रावत मेरा दोस्त था। पूरन रावत और नवीन रावत को मैं नहीं जानती हूं। विनोद रावत मेरे दोस्त की शादी में आया था। मैं भी वहीं थी, वो जल्दी चला गया था। हमारी योजना यह थी कि मैं, कमल रावत और अर्चिता राय हम उस कमरे में जाएं और खुद ही दुष्कर्म वाली हालत बनाएं और तीन लोगों पर आरोप लगाएं। उन तीनों ने मेरे साथ कुछ गलत नहीं किया और मैं यह बात किसी के दबाव में आकर नहीं, होशो-हवास में कह रही हूं।’
इसके अतिरिक्त, किशोरी के चचेरे भाई ने भी वीडियो जारी कर स्वीकार किया कि उसने कमल रावत के दबाव में आकर पुलिस को झूठा पत्र भेजा था। चचेरे भाई ने भी एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में वह कह रहा है कि ‘काफी दिनों से बहन और चाचा से बात नहीं हो पा रही थी। गुरुवार को फोन लगाया तो कमल रावत ने उठाया। उसने बताया कि चाचा का पता नहीं। तुम्हारी बहन पुलिस हिरासत में है। मैं घबरा गया तो कमल ने एसपी का नंबर दे दिया।
मैंने एसपी को फोन किया, पर उन्होंने नहीं उठाया। कमल ने कहा, वीडियो क्लिप बनाकर भेज दे। कमल ने व्हाट्सऐप पर लिखकर भेजा, जिसे मैंने पत्र बना कर एसपी को भेज दिया। कमल ने कहा था कि पैसे देकर समझौते का दबाव डाला जा रहा है। शाम को चाचा से बात हुई तो उन्होंने साजिश की बात बताई। मैं एसपी और जनता से माफी मांगना चाहता हूं कि मैंने बिना सोचे-समझे बोल दिया।’
राजनीतिक संलिप्तता और प्रशासनिक कार्यवाही
पुलिस ने इस मामले में कमल रावत और अर्जिता राय को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरे आरोपित आनंद सिंह महरा (Anand Singh Mahra) की तलाश की जा रही है, जो एक राजनीतिक दल का नेता बताया जा रहा है। आरोपितों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के अंतर्गत अभियोग (Case) पंजीकृत किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे ‘घिनौनी राजनीति’ करार दिया है और देवभूमि में ऐसी नकारात्मक मानसिकता की कड़े शब्दों में निंदा की है।
आरोपित का पुराना आपराधिक इतिहास
मुख्य षड्यंत्रकर्ता कमल रावत का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके विरुद्ध पूर्व में मारपीट, यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment), अपहरण (Kidnapping) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के अंतर्गत चार पृथक मामले पंजीकृत हैं।
संवेदनशील मामलों में झूठे आरोप लगाकर निर्दोषों के जीवन और सम्मान से खिलवाड़ करने वाले ऐसे तत्वों के विरुद्ध क्या और अधिक कठोर विधिक प्रावधान होने चाहिए? पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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