आईआईटी रुड़की में डोभाल ने सुनाया 50 साल पुराना किस्सा, बोले- सही दिशा और लक्ष्य जीवन में सबसे जरूरी, आज के युवा पिछले 1000 वर्षों में सबसे अधिक अवसरों वाले

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नवीन समाचार, रुड़की, 19 सितंबर 2026 ()। उत्तराखंड (Uttarakhand) के रुड़की (Roorkee) स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (IIT Roorkee) के दीक्षांत समारोह (Convocation) में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (National Security Adviser-NSA) अजीत कुमार डोभाल (Ajit Kumar Doval) ने अपने करियर का लगभग 50 वर्ष पुराना एक खुफिया मिशन (Intelligence Mission) का प्रसंग विद्यार्थियों के साथ साझा किया।

IIIT Roorkee-Doval Recounted Old Memory IT रुड़की के कॉन्वोकेशन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अपने  करियर की शुरुआत का एक किस्सा बताते हुए कहा कि 'मैं एक युवा IPS ऑफिसर ...उन्होंने बताया कि एक मिशन के दौरान उनके निर्देशों पर सीमा की ओर गई उनकी टीम चीन की सेना की हिरासत में पहुंच गई थी और करीब 15 दिन तक उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली थी। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य, वर्तमान स्थिति और वहां तक पहुंचने के सही रास्ते को स्पष्ट रखने की सीख दी।

शनिवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में डोभाल मुख्य अतिथि (Chief Guest) के रूप में शामिल हुए। समारोह की शुरुआत संस्थान के कुलगीत से हुई। इस अवसर पर देश के सेना प्रमुख (Chief of Defence Staff-CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, आईआईटी रुड़की के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष एवं वरिIIT Roorkee-Doval Recounted Old Memoryष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे तथा संस्थान के निदेशक केके पंत सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।

चीनी सेना की हिरासत में पहुंची थी टीम

डोभाल ने बताया कि जब वह युवा आईपीएस अधिकारी (IPS Officer) थे और खुफिया कार्य में नए थे, तब उन्हें सिक्किम (Sikkim) में इंटेलिजेंस (Intelligence) की जिम्मेदारी मिली थी। सीमा क्षेत्र में चीनी सेना की गतिविधियों पर नजर रखना भी उनके दायित्व का हिस्सा था।

एक मिशन के लिए उन्होंने अपनी टीम को सीमा क्षेत्र में भेजा। टीम के कुछ दिनों में लौटने की उम्मीद थी, लेकिन पांच, फिर 10 और लगभग 15 दिन बीत गए और टीम की कोई सूचना नहीं मिली। बाद में मुख्यालय से जानकारी मिली कि टीम चीन की हिरासत में है। पूछताछ के बाद टीम के सदस्यों को छोड़ दिया गया, लेकिन लौटने वाले लोग मानसिक रूप से काफी परेशान थे।

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डोभाल ने बताया कि घटना के बाद उन्हें जांच का सामना करना पड़ा और उस समय उन्हें लगा कि शायद उनका करियर समाप्त हो जाएगा। जांच में सामने आया कि मिशन के लिए मुख्यालय से उपलब्ध कराए गए स्केच और नक्शों में खामियां थीं। इसी कारण टीम गलत दिशा में पहुंच गई और चीनी सेना की हिरासत में चली गई।

बुजुर्ग तिब्बती शेरपा की सीख बनी जीवन का सूत्र

डोभाल ने बताया कि इस घटना के बाद उनके साथ काम करने वाले एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा ने उनसे परेशानी का कारण पूछा। जब डोभाल ने अपने करियर को लेकर चिंता बताई तो शेरपा ने नक्शा पढ़ने की बात को जीवन से जोड़ते हुए तीन बातें स्पष्ट रखने की सीख दी।

उनके अनुसार व्यक्ति को यह पता होना चाहिए कि वह इस समय कहां है, उसे कहां जाना है और वहां पहुंचने का रास्ता क्या है। डोभाल ने इसी सीख को विद्यार्थियों के सामने रखते हुए जीवन में लक्ष्य और सही दिशा के महत्व को रेखांकित किया।

तकनीक और नवाचार होंगे विकास के महत्वपूर्ण आधार

डोभाल ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक (Technology), इंजीनियरिंग (Engineering), नवाचार (Innovation) और नए प्रयोगों का है। आने वाले समय में देश और समाज की प्रगति में तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने आईआईटी से निकलने वाले युवाओं को इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

उन्होंने कहा कि आज के आईआईटी स्नातक (Graduates) संभवतः यह महसूस नहीं कर रहे होंगे कि वे पिछले एक हजार वर्षों में सबसे अधिक अवसरों वाली पीढ़ी का हिस्सा हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा और आने वाले कई दशकों के समय का बेहतर उपयोग करने का आह्वान किया।

आईआईटी रुड़की की 179 वर्ष की विरासत का उल्लेख

डोभाल ने आईआईटी रुड़की के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान की शुरुआत लगभग 179 वर्ष पहले थॉमसन कॉलेज (Thomson College) के रूप में हुई थी। वर्ष 1949 में यह देश का पहला इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय (Engineering University) बना और वर्ष 2001 में इसे आईआईटी का दर्जा मिला।

उन्होंने कहा कि संस्थान ने देश को अनेक प्रतिभाशाली लोगों की सेवाएं दी हैं। उन्होंने डॉ. एएन खोसला, प्रोफेसर जय कृष्ण सहित प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थी उनकी विरासत के उत्तराधिकारी हैं। उनके अनुसार आईआईटी रुड़की से 10 से अधिक पद्म पुरस्कार (Padma Awards) प्राप्त करने वाले लोग जुड़े रहे हैं।

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डोभाल ने स्नातक विद्यार्थियों के साथ उनके माता-पिता और शिक्षकों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता ने बच्चों को तैयार और प्रेरित किया, जबकि शिक्षकों और प्राध्यापकों ने उन्हें ज्ञान और ऐसा वातावरण दिया, जिससे वे स्वयं के साथ समाज, राष्ट्र और मानवता के लिए योगदान कर सकें।

2,701 विद्यार्थियों को दी जानी हैं डिग्रियां

आईआईटी रुड़की का दीक्षांत समारोह दो दिवसीय है। संस्थान के अनुसार कुल 2,701 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की जानी हैं। पहले चरण में 1,277 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई।

मुख्य अतिथि अजीत डोभाल ने संस्थान स्तर के मेडल (Medals) और पुरस्कार भी प्रदान किए। शैक्षणिक उपलब्धि, उत्कृष्ट प्रदर्शन, सामाजिक सेवा तथा सांस्कृतिक गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

विभागीय स्तर पर साक्षी बंसल (Integrated M.Tech Geological Technology) को डॉ. कुश टंडन कैश अवॉर्ड (Cash Award) और हर्ष श्रीवास्तव (BSMS Chemical Sciences) को प्रो. एसएन टंडन कैश अवॉर्ड प्रदान किया गया।

हरीश साल्वे ने भारत की तकनीकी क्षमता का उल्लेख किया

समारोह को संबोधित करते हुए आईआईटी रुड़की बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) एवं पूर्व सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया (Former Solicitor General of India) हरीश साल्वे ने कहा कि दुनिया भारत से विकसित हो रही नई और प्रभावशाली तकनीक को उत्सुकता से देख रही है।

उन्होंने कहा कि भारत जिस गति से नए विचार और तकनीक विकसित कर रहा है, उसे देखते हुए तकनीकी प्रतिस्पर्धा में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

डोभाल और सीडीएस का लैंसडौन जाने का कार्यक्रम

दीक्षांत समारोह के बाद अजीत डोभाल और सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि के लैंसडौन (Lansdowne) जाने का कार्यक्रम भी था। दोनों अधिकारियों के सैन्य कार्यक्रम को देखते हुए लैंसडौन में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई।

मौसम साफ रहने की स्थिति में दोनों के हेलीकॉप्टर से लैंसडौन पहुंचने की योजना थी। मौसम खराब होने पर हेलीकॉप्टर कोटद्वार (Kotdwar) स्थित गबर सिंह कैंप में उतारने और वहां से सड़क मार्ग से लैंसडौन पहुंचने की वैकल्पिक व्यवस्था बताई गई थी।

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