उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों के संपत्ति संबंधी नियम बदले, जमीन के लेन-देन से पहले कुछ मामलों में लेनी होगी अनुमति

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नवीन समाचार, देहरादून, 24 अक्टूबर 2026 (Rules for Govt Employees-Assets Change)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में सरकारी कर्मचारियों के संपत्ति संबंधी लेन-देन और व्यावसायिक हितों को लेकर राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने वर्ष 2002 की राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन कर नई व्यवस्थाएं लागू की हैं। कार्मिक विभाग की ओर से 23 अक्टूबर 2026 को अधिसूचना जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

संशोधित नियमों के तहत सरकार के साथ लेन-देन करने वाले व्यक्ति, फर्म, कंपनी या संस्थान से अचल संपत्ति खरीदने, बेचने अथवा अदला-बदली करने से पहले निर्धारित अनुमति लेना आवश्यक होगा। इसके अतिरिक्त संपत्ति का विवरण देने, चल संपत्ति के बड़े लेन-देन की सूचना देने और आश्रितों के बीमा एजेंट के रूप में काम करने से संबंधित प्रावधान भी बदले गए हैं। 

24 वर्ष बाद आचरण नियमावली में संशोधन

Rules for Govt Employees-Assets Change उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों के बदले नियम, संपत्ति के लेन-देन पर नया  नियमउत्तराखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 में लागू कर्मचारी आचरण नियमावली में अब संशोधन किया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के संपत्ति संबंधी लेन-देन और व्यावसायिक हितों के लिए नियमों को अधिक स्पष्ट करना है।

संशोधित प्रावधानों में सरकार के साथ लेन-देन करने वाले व्यक्ति की परिभाषा को भी स्पष्ट किया गया है। इसमें ऐसे व्यक्ति, फर्म, कंपनी, सहकारी संस्था अथवा निकाय शामिल हो सकते हैं, जो सरकार के साथ संविदा, निविदा, आपूर्ति, सेवा, लाइसेंस या कर संबंधी मामलों में प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से जुड़े हों। 

सरकार से जुड़े व्यक्ति से जमीन खरीदने-बेचने पर लेनी होगी पूर्व अनुमति

नए प्रावधानों के अनुसार, कोई सरकारी कर्मचारी ऐसे व्यक्ति, फर्म, कंपनी या संस्थान से अचल संपत्ति खरीदने, बेचने अथवा उसका आदान-प्रदान करने के लिए स्वतंत्र रूप से लेन-देन नहीं कर सकेगा, जिसका सरकार के साथ व्यावसायिक या अन्य निर्धारित प्रकार का लेन-देन हो। ऐसे मामलों में सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होगा।

कर्मचारी के अपने नाम या परिवार के किसी सदस्य के नाम पर जमीन अथवा दूसरी अचल संपत्ति खरीदने, बेचने, पट्टे पर लेने, रेहन रखने या उपहार में प्राप्त करने जैसे मामलों में भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। इसलिए संपत्ति के प्रत्येक लेन-देन की प्रकृति और संबंधित पक्ष की स्थिति को ध्यान में रखकर नियमों का पालन करना जरूरी होगा।

समूह क, ख और ग के कर्मचारियों को हर वर्ष देना होगा संपत्ति का विवरण

संशोधित नियमावली में संपत्ति का विवरण देने की समय-सीमा भी निर्धारित की गई है। इसके अनुसार:

  • समूह क, ख और ग: नियुक्ति के समय तथा इसके बाद प्रत्येक वर्ष संपत्ति का विवरण नियुक्ति प्राधिकारी को देना होगा।

  • समूह घ: कर्मचारियों को प्रत्येक पांच वर्ष में संपत्ति का विवरण देना होगा।

इस व्यवस्था के माध्यम से कर्मचारियों की संपत्ति का नियमित अभिलेख रखने और संपत्ति संबंधी लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया गया है। 

दो माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति पर सूचना देना जरूरी

चल संपत्ति के लेन-देन के संबंध में भी सीमा बदली गई है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी अपने दो माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति खरीदता या बेचता है, तो उसे एक माह के भीतर नियुक्ति प्राधिकारी को इसकी सूचना देनी होगी।

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चल संपत्ति में मोबाइल फोन, दूरदर्शन, आभूषण, वाहन और अन्य ऐसी वस्तुएं शामिल हो सकती हैं, जो नियमों की परिभाषा के अंतर्गत आती हों। हालांकि, यदि संबंधित लेन-देन सरकार के साथ व्यवहार करने वाले व्यक्ति या संस्था से है और नियमों के अनुसार पूर्व अनुमति आवश्यक है, तो केवल बाद में सूचना देना पर्याप्त नहीं होगा। ऐसे मामलों में पहले अनुमति लेने की शर्त का पालन करना होगा। 

कर्मचारी की तैनाती वाले जिले में आश्रित नहीं कर सकेंगे बीमा एजेंसी का काम

नियमावली में बीमा व्यवसाय से संबंधित प्रावधान भी शामिल है। इसके अनुसार, सरकारी कर्मचारी अपनी पत्नी या ऐसे आश्रित रिश्तेदार को उस जिले में बीमा एजेंट के रूप में काम करने की अनुमति नहीं देगा, जहां स्वयं उसकी तैनाती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी पद से जुड़े संभावित हितों के टकराव को रोकना और कर्मचारियों के व्यावसायिक हितों को निर्धारित आचरण नियमों के दायरे में रखना है। <Cite refs={[“turn870738view0″,”turn870738view1”]}/>

कर्मचारियों को लेन-देन से पहले नियम समझना होगा

संशोधित नियमावली के बाद सरकारी कर्मचारियों को जमीन, मकान और अन्य संपत्ति से संबंधित निर्णय लेते समय लेन-देन की प्रकृति, संबंधित व्यक्ति या संस्था का सरकार से संबंध तथा सूचना और अनुमति की आवश्यकताओं पर ध्यान देना होगा।

विशेष रूप से सरकार से जुड़े ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और अन्य संबंधित पक्षों के साथ संपत्ति का लेन-देन करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से लागू प्रावधानों की पुष्टि करना महत्वपूर्ण होगा। कर्मचारियों को अपनी संपत्ति का निर्धारित अवधि में विवरण देने और चल संपत्ति के बड़े लेन-देन की समय पर सूचना देने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

सरकार के इस संशोधन से संपत्ति संबंधी व्यवहारों के अभिलेखीकरण और सरकारी सेवा में आचरण के नियमों को स्पष्ट करने की व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। कर्मचारियों के लिए व्यावहारिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी बड़े लेन-देन से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि संबंधित मामले में केवल सूचना देनी है या पूर्व अनुमति लेना भी अनिवार्य है।

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