प्रसिद्ध वैष्णो देवी शक्तिपीठ सदृश रामायण-महाभारतकालीन द्रोणगिरि वैष्णवी शक्तिपीठ दूनागिरि

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 9 अक्टूबर 2021। हिमालय की गोद में बसे आध्यात्मिक महिमा से मंडित और नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दूनागिरि शक्तिपीठ का अपार महात्म्य है। आइए आज हम आपको इस शक्तिपीठ के दर्शनों को लिए चलते हैं। दूनागिरि पहुंचने के लिए अल्मोड़ा से 65 किमी, रानीखेत से 38 किमी … Read more

सच्चा न्याय दिलाने वाली माता कोटगाड़ी : जहां कालिया नाग को भी मिला था अभयदान

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Kotgadi

विश्व व भारत में रेडियो-टेलीविज़न का इतिहास तथा कार्यप्रणाली

Vishesh Aalekh Special Article Navin Samachar

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल। जब से मानव पृथ्वी पर आया है, तभी से वह स्वयं को भावनात्मक रूप से अकेला महसूस करता रहा है। प्रारम्भ में वह संकेतों या ध्वनि के माध्यम से अपनी बात दूसरों तक पहुँचाता रहा, समय बीतते उसने भाषा की खोज की और आसानी से अपनी बात कहने … Read more

देवभूमि के कण-कण में ‘देवत्व’: विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा के हाथों हुआ विमोचन

नैनीताल। अमेरिका में हिंदी के जरिये रोजगार के अवसर विषयक कार्यक्रम के दौरान विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक, अमेरिकी सरकार समर्थित स्टारटॉक हिंदी कार्यक्रम के निदेशक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा, उत्तराखंड मुक्त विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के निदेशक डा. गोविंद सिंह, कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी, कला संकायाध्यक्ष प्रो. … Read more

पहाड़ से ऊंचा तो आसमान ही हैः क्षमता

क्षमता बाजपेई
क्षमता बाजपेई

महिला दिवस पर एयर  इंडिया द्वारा चलाई गयी ‘ऑल वूमन फ्लाईट’ का नेतृत्व करते हुए 17 घंटों में दिल्ली से सैनफ्रांसिस्को तक 14,500 किमी की लगातार उड़ान कर नया रिकार्ड बनाने वाली प्रदेश की पहली व इकलौती तथा देश की तीसरी कामर्शियल महिला पायलट कैप्टन क्षमता बाजपेई ने कहा-पहाड़ की होने के कारण ऊंचाइयों से डर नहीं लगता, क्योंकि पहाड़ से आगे तो ‘स्काई इज द लिमिट’ (यानी असीमित आसमान की सीमाएं ही हैं)

नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, सही बात ही तो है, पहाड़ों से अधिक ऊंचा तो आसमान ही है। कोई पहाड़ से भी अधिक ऊंचे जाना चाहे तो कहां जाए, आसमान पर ही नां। पर कितने लोग सोचते हैं इस तरह से ?। लेकिन पहाड़ की एक बेटी क्षमता जोशी ने 1986 के दौरान ही जब वह केवल 18 वर्ष की थीं, अपने पहाड़ों की ऊंचाई से भी अधिक ऊंचा उड़ने का जो ख्वाब संजोया और उसे पूरा करने में जिस तरह परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद अपनी पूरी ‘क्षमता’ लगा दी, नतीजे में वह प्रदेश की पहली और इकलौती कामर्शियल महिला पायलट ही नहीं, एयर इंडिया में प्रोन्नति पाकर सात वर्ष से कमांडर हैं, और न केवल स्वयं बल्कि हजारों लोगों को रोज पहाड़ों से कहीं अधिक ऊंचाइयों से पूरी दुनिया की सैर कराती हैं। इधर उन्होंने बीते महिला दिवस पर एयर  इंडिया द्वारा चलाई गयी ‘ऑल वूमन फ्लाईट’ का नेतृत्व करते हुए 17 घंटों में दिल्ली से सैनफ्रांसिस्को तक 14,500 किमी की लगातार उड़ान कर नया रिकार्ड बनाकर देश-प्रदेश वासियों का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।

भारतीय टीम में ओपनर की भूमिका तलाश रहे उन्मुक्त ने नैनीताल में गोल्फ स्टिक से उड़ाये छक्के

नैनीताल के राजभवन गोल्फ कोर्स में गोल्फ स्टिक के लम्बे शॉट्स का अभ्यास करते क्रिकेटर उन्मुक्त चंद
नैनीताल के राजभवन गोल्फ कोर्स में गोल्फ स्टिक के लम्बे शॉट्स का अभ्यास करते क्रिकेटर उन्मुक्त चंद

नवीन जोशी, नैनीताल। अपने कॅरियर की शुरुआत में दिल्ली के लिए ओपनर के रूप में 425 रनों की पारी और अंडर-19 विश्व कप में आस्ट्रेलिया के खिलाफ 111 रनों की नाबाद व कप्तानी पारी खेलकर आस्ट्रेलियाई दिग्गज पूर्व कप्तान इयान चैपल से प्रशंसा प्राप्त कर चुके उत्तराखण्ड मूल के युवा क्रिकेटर उन्मुक्त चंद भारतीय क्रिकेट टीम में ओपनर के रूप में अपनी भूमिका तलाश रहे हैं। बीती 5 फ़रवरी 2016 की शाम नैनीताल पहुंचे थे, और 6 की सुबह नैनीताल राजभवन स्थित गोल्फ कोर्स में उन्होंने गोल्फ खेलकर अपना दैनिक अभ्यास करते हुए पसीना बहाया। इस दौरान उन्होंने यहाँ नैनीताल राजभवन गोल्फ कोर्स में गोल्फ स्टिक (क्लब) पर पहली बार हाथ आजमाते हुए कई ‘उन्मुक्त छक्कों’ सरीखे लम्बे शॉट भी खेले। साथ ही अपने दोस्तों के साथ नगर की प्राकृतिक सुंदरता में खोकर कई सेल्फी लीं। इस दौरान उन्होंने अपने कॅरियर, भारतीय क्रिकेट टीम में चुने जाने की संभावनाओं, इसके लिए की जा रही मेहनत आदि पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि तीन-चार दिन के अवकाश पर अपने घर-कुमाऊं आये हैं।

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भद्रकालीः जहां वैष्णो देवी की तरह त्रि-पिंडी स्वरूप में साथ विराजती हैं माता सरस्वती, लक्ष्मी और महाकाली

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।।

कहते हैं आदि-अनादि काल में सृष्टि की रचना के समय आदि शक्ति ने त्रिदेवों-ब्रह्मा, विष्णु व महेश के साथ उनकी शक्तियों-सृष्टि का पालन व ज्ञान प्रदान करने वाली ब्रह्माणी यानी माता सरस्वती, पालन करने वाली वैष्णवी यानी माता लक्ष्मी और बुरी शक्तियों का संहार करने वाली शिवा यानी माता महाकाली का भी सृजन किया। सामान्यतया अलग-अलग स्थानों पर प्रतिष्ठित रहने वाली यह तीनों देवियां कम ही स्थानों पर एक स्थान पर तीनों के एकत्व स्वरूप् में विराजती हैं। ऐसा एक स्थान है माता का सर्वोच्च स्थान बताया जाने वाला वैष्णो देवी धाम।

माता भद्रकाली के मंदिर का गर्भगृह
माता भद्रकाली के मंदिर का गर्भगृह

लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं अंचल में भी एक ऐसा ही दिव्य एवं अलौकिक विरला धाम मौजूद है, जहां माता सरस्वती, लक्ष्मी और महाकाली एक साथ एक स्थान पर वैष्णो देवी की तरह ही स्वयंभू लिंग या पिंडी स्वरूप में आदि-अनादि काल से एक साथ माता भद्रकाली के रूप में विराजती हैं, और सच्चे मन से आने वाले अपने भक्तों को साक्षात दर्शन देकर उनके कष्टों का हरती तथा जीवन पथ पर संबल प्रदान करती हैं। इस स्थान को माता के 51 शक्तिपीठों में से भी एक माना जाता है। शिव पुराण में आये माता भद्रकाली के उल्लेख के आधार पर श्रद्धालुओं का मानना है कि महादेव शिव द्वारा आकाश मार्ग से कैलाश की ओर ले जाये जाने के दौरान यहां दक्षकुमारी माता सती की मृत देह का दांया गुल्फ यानी घुटने से नीचे का हिस्सा गिरा था।

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नेपाली, तिब्बती, पैगोडा, गौथिक व ग्वालियर शैली में बना है नयना देवी मंदिर

Vishesh Aalekh Special Article Navin Samachar

“सरोवरनगरी की पहचान से जुड़ा नगर का प्राचीन नयना देवी मंदिर नेपाली, तिब्बती, पैगोडा व कुछ हद तक अंग्रेजी गौथिक व ग्वालियर शैली में भी बना हुआ है। इसकी स्थापना नगर के संस्थापकों में शामिल मूलतः नेपाल के निवासी मोती राम शाह के पुत्र अमर नाथ शाह ने अंग्रेजों से एक समझौते के तहत यहां लगभग सवा एकड़ भूमि पर 1883 में माता के जन्म दिन माने जाने वाली ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की नवमी की तिथि को की थी।

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