आस्था के अनूठे रंग : पति को कंधे पर कांवड़ की तरह लेकर 170 किमी की पैदल कांवड़ यात्रा पर निकली है एक पत्नी, दिव्यांग है पति…

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नवीन समाचार, हरिद्वार, 13 जुलाई 2025 (Wife Carrying Husband on her shoulders as Kanwar)उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धा, सेवा व प्रेम से ओतप्रोत एक भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया है। लोग जहां गंगा जल को अपने कंधों पर लेकर कांवड़ यात्रा पर निकले हैं, वहीं एक पत्नी अपने पति को कंधों पर 170 किलोमीटर की पैदल कांवड़ यात्रा पर निकली है।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद के मोदीनगर क्षेत्र से आई 28 वर्षीय आशा अपने दिव्यांग पति सचिन को कंधे पर बैठाकर मंदिरों के दर्शन करा रही हैं। इतना ही नहीं, वह हर की पैड़ी से गंगाजल भरकर पैदल ही 170 किलोमीटर की यात्रा तय कर गाजियाबाद लौटने का संकल्प भी ले चुकी हैं। उनके साथ उनके दो छोटे बच्चे भी यात्रा पर हैं।

हरिद्वार से गंगाजल लेकर करेंगी 170 किमी पैदल यात्रा

गजब की आस्था! दिव्यांग पति को कंधे पर बैठाकर कांवड़ यात्रा पर निकलीप्राप्त जानकारी के अनुसार सचिन पूर्व में प्रतिवर्ष कांवड़ यात्रा में भाग लेते रहे हैं, किंतु बीते वर्ष बीमारी के कारण वह यात्रा नहीं कर सके। इस दौरान उनके शरीर का निचला हिस्सा भी निष्क्रिय हो गया और वह दिव्यांग हो गये। इस बार जब चलना-फिरना भी संभव नहीं रहा तो उनकी पत्नी आशा ने न केवल उन्हें कंधे पर उठाकर हरिद्वार लाने का संकल्प लिया, बल्कि यह भी तय किया कि वह इस बार उन्हें पूरी कांवड़ यात्रा करा कर ही दम लेंगी।

सोमवार को यह दंपति अपने बच्चों के साथ दक्षेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। आशा ने बताया कि उनके पति जब स्वस्थ थे तो पूरे परिवार को लेकर कांवड़ यात्रा पर आते और मंदिरों के दर्शन कराते थे। अब जब वह खुद नहीं चल सकते, तो उन्होंने अपने कर्तव्य और प्रेम के रूप में उन्हें कंधे पर बैठाकर यह यात्रा पूरी कराने की ठान ली है।

“यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा है”

दिव्यांग सचिन ने बताया कि वह पिछले 15 वर्षों से लगातार हर साल हरिद्वार कांवड़ यात्रा पर आते रहे हैं, लेकिन पिछले वर्ष स्वास्थ्य खराब होने के कारण नहीं आ सके। इस बार भी जब चलना संभव नहीं था, तब पत्नी ने उन्हें यह भरोसा दिया कि वह उन्हें कंधे पर बैठाकर हरिद्वार लाकर भगवान भोलेनाथ के दर्शन कराएंगी। सचिन ने कहा कि वह स्वयं को आज सबसे भाग्यशाली मानते हैं, क्योंकि उन्हें जीवनसाथी के रूप में एक सच्ची श्रद्धालु और समर्पित पत्नी मिली है।

पूरे मार्ग के शिवालयों में करेंगी दर्शन

आशा ने बताया कि वह हरिद्वार से गंगाजल लेकर पैदल गाजियाबाद के लिए प्रस्थान करेंगी और पूरे मार्ग में जहां भी शिवालय आएंगे, वहां दर्शन करेंगी। उन्होंने कहा कि जब आस्था सच्ची हो तो भगवान स्वयं राह बना देते हैं।

प्रशासन भी हुआ प्रभावित (Wife Carrying Husband on her shoulders as Kanwar)

हरिद्वार में ड्यूटी पर तैनात मेलाधिकारी मयूर दीक्षित व अन्य पुलिसकर्मियों ने इस साहसी व श्रद्धावान दंपति की सराहना करते हुए उन्हें मार्ग में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। यह घटना न केवल श्रद्धा व सेवा का अनुपम उदाहरण है, बल्कि यह बताती है कि जब प्रेम और आस्था एक साथ हों, तो कोई भी कठिनाई असंभव नहीं रह जाती।

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