जागेश्वर धाम के गर्भगृह में डीएम के शस्त्र सहित प्रवेश पर विवाद: एएसआई ने जांच के दिए आदेश

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नवीन समाचार, अल्मोड़ा, 21 अप्रैल 2026 (DMs Armed Entry into Jageshwar Dham)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के सुप्रसिद्ध देश के पांचवें ज्योतिर्लिंग (Jyotirlinga)-जागेश्वर धाम (Jageshwar Dham) की धार्मिक मर्यादा और पवित्रता को लेकर एक गंभीर विवाद उत्पन्न हो गया है। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बरेली (Bareilly) जनपद के जिलाधिकारी (District Magistrate) अविनाश सिंह (Avinash Singh) पर मंदिर के गर्भगृह (Sanctum Sanctorum) में शस्त्र सहित प्रवेश करने का आरोप लगा है।

(DMs Armed Entry into Jageshwar Dham) Jageshwar Dham Priests Protest DM Weapon Entry | Strict Ban Demandआरोपों के अनुसार पूजा-अर्चना के दौरान उनके साथ एक सुरक्षाकर्मी आधुनिक मारक क्षमता वाली कार्बाइन (Carbine) के साथ उपस्थित था, जिसका स्थानीय पुजारियों और श्रद्धालुओं ने कड़ा विरोध किया है। इस घटना (Incident) के पश्चात भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने मामले की जांच के निर्देश देते हुए परिसर में शस्त्रों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध के सूचना पत्र चस्पा कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बरेली के जिलाधिकारी जब दर्शन हेतु मंदिर पहुँचे, तब उनके सुरक्षाकर्मी भी आयुध (Arms) सहित गर्भगृह में प्रविष्ट हो गए। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि उन्होंने सुरक्षा का हवाला देने पर इस कृत्य का विरोध किया, किंतु अधिकारियों ने कथित तौर पर प्रोटोकॉल (Protocol) का तर्क देकर मर्यादा का उल्लंघन किया। जागेश्वर धाम के मुख्य पुजारी एवं महामंडलेश्वर (Mahamandaleshwar) हेमंत भट्ट (Hemant Bhatt) ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे धार्मिक मूल्यों के विरुद्ध बताया है।

पुजारियों का आक्रोश और धार्मिक मर्यादा पर प्रश्न

जागेश्वर धाम के विद्वान पुजारियों—पंडित नवीन चंद्र भट्ट, पंडित मनोज भट्ट, पूरन भट्ट और व्यापार मंडल अध्यक्ष मुकेश भट्ट सहित अनेक स्थानीय लोगों ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है। पुजारियों का कहना है कि:

  • परंपरा का उल्लंघन: पूर्व में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई बड़े राजनेता और उच्चाधिकारी जागेश्वर धाम में दर्शन हेतु आए हैं, किंतु कभी भी गर्भगृह में शस्त्र नहीं ले जाए गए।

  • भय का वातावरण: मंदिर परिसर के भीतर किसी प्रकार का खतरा नहीं होता, अतः शस्त्रों का प्रदर्शन आध्यात्मिक शांति को भंग करता है और श्रद्धालुओं में असुरक्षा का भाव पैदा करता है।

  • समान नियम: महामंडलेश्वर हेमंत भट्ट ने जिलाधिकारी अल्मोड़ा (Almora) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को पत्र प्रेषित कर मंदिरों में वीआईपी (VIP) संस्कृति को समाप्त करने और सभी हेतु समान नियम लागू करने की मांग की है।

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एएसआई की कार्यवाही और सुरक्षा नियमों में परिवर्तन

घटना के प्रकाश में आते ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) देहरादून मंडल के अधीक्षक मोहन चंद्र जोशी (Mohan Chandra Joshi) ने स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में हथियार ले जाना पुरातत्व नियमों के विरुद्ध है। एएसआई (ASI) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मंदिर परिसर में ‘नो आर्म्स’ (No Arms) के पर्चे चस्पा कर दिए हैं और भविष्य हेतु स्थायी सूचना बोर्ड लगाने की तैयारी की जा रही है। एएसआई के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि इस पूरे प्रकरण की गहन जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही (Legal Action) अमल में लाई जाएगी।

जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के पूर्व उपाध्यक्ष नवीन भट्ट ने सुझाव दिया है कि एएसआई को प्रवेश द्वार पर ही स्पष्ट नियमावली प्रदर्शित करनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी श्रद्धालु को नियमों की अनभिज्ञता न रहे। उन्होंने कहा कि आस्था के केंद्र में व्यवस्थाएं भी श्रद्धा के अनुरूप ही होनी चाहिए। प्रशासन (Administration) द्वारा अब मंदिर के बाहर ही शस्त्र जमा कराने की व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

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