नवीन समाचार, नैनीताल, 4 मार्च 2026 (38 Crore Rs plan for Naini Lake Walls)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) स्थित विश्वप्रसिद्ध नैनी झील (Naini Lake) के संरक्षण और सुरक्षा के लिए सिंचाई विभाग ने लगभग 38 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर शासन को भेज दी है। बजट स्वीकृत होने के बाद झील की सुरक्षा से जुड़े कार्य शुरू किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि लोअर माल रोड (Lower Mall Road) के एक हिस्से के धंसने के बाद झील की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिसके चलते इस योजना को प्राथमिकता दी जा रही है। माना जा रहा है कि धनराशि स्वीकृत होने पर राज्य बनने के बाद पहली बार इस बड़े स्तर पर नैनी झील की दीवारों की मरम्मत की जाएगी।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता डीके सिंह ने बताया कि तकनीकी जांच में पाया गया है कि झील के किनारे बनी रिटेनिंग वॉल लगातार जल दबाव के कारण कमजोर हो गई है और कई स्थानों पर उसकी पकड़ ढीली पड़ रही है।
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों द्वारा भी लंबे समय से झील किनारे की दीवारों को मजबूत करने और स्थायी समाधान की मांग की जा रही थी। यह भी कहा जा रहा है कि नगर में अत्यधिक संख्या में मौजूद चूहों की भी नगर के साथ झील की दीवारों को खोखला करने में बड़ी भूमिका रही है।
प्रस्तावित योजना के तहत झील की लगभग 3.2 किलोमीटर की कुल परिधि में से करीब 2400 मीटर यानी अधिकांश क्षेत्र में दीवारों की मरम्मत और पुनर्निर्माण किया जाएगा।
परियोजना के तहत निम्न कार्य किए जाएंगे—
रिटेनिंग वॉल का पुनर्निर्माण
पत्थर की चिनाई और संरचनात्मक मजबूती
दीवारों में आई दरारों की मरम्मत
कमजोर हिस्सों का पुनर्सुदृढ़ीकरण
अधिकारियों के अनुसार हर स्थान की मिट्टी, ढलान और जल दबाव की स्थिति अलग-अलग है, इसलिए कार्य वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर अलग-अलग तकनीकों से किया जाएगा।
ड्रेनेज-नाला सिस्टम भी होगा मजबूत
परियोजना में झील के आसपास के नालों पर आधारित ड्रेनेज यानी निकास सिस्टम (Drainage-nala System) को भी सुदृढ़ करने का प्रावधान रखा गया है। इससे वर्षा के दौरान जल निकासी बेहतर होगी और झील किनारे की संरचनाओं पर दबाव कम होगा, जिससे भविष्य में संभावित खतरे को कम किया जा सकेगा।
तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी ने 2002 में 100 करोड़ रुपये की झील संरक्षण योजना की घोषणा की थी
नैनीताल की झीलों के संरक्षण को लेकर पहले भी बड़े प्रयास किए जा चुके हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) ने 28 मार्च 2002 को नैनीताल राजभवन (Raj Bhavan Nainital) के दौरे के दौरान केंद्रीय झील संरक्षण योजना के तहत नैनीताल, भीमताल (Bhimtal), सातताल (Sattal) और खुर्पाताल (Khurpatal) के संरक्षण के लिए 100 करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की थी।
इस योजना के तहत केंद्र सरकार की 70 प्रतिशत और राज्य सरकार की 30 प्रतिशत भागीदारी तय की गई थी। इसके बाद नैनीताल झील विकास प्राधिकरण के अंतर्गत झील संरक्षण इकाई का गठन किया गया और लगभग 98 करोड़ रुपये की डीपीआर केंद्र को भेजी गई। अलबत्ता इस परियोजना के अंतर्गत केंद्र से लगभग 64.82 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई और राज्य सरकार ने भी अपना हिस्सा दिया। इसमें से लगभग 47.96 करोड़ रुपये नैनी झील के लिए तथा शेष लगभग 33.85 करोड़ रुपये अन्य झीलों के संरक्षण कार्यों में खर्च किए गए।
हालांकि उस परियोजना में नैनी झील की झरती दीवारों के संरक्षण के लिए अलग से प्रावधान नहीं किया गया था। बाद में इस विषय पर इस लेख के लेखक डॉ. नवीन जोशी द्वारा वर्ष 2005-06 में लेख के माध्यम से ध्यान आकर्षित होने के बाद अत्यधिक जर्जर दीवारों की मात्र 5 लाख रुपयों से सीमित मरम्मत कराई गई थी। इधर हाल में बैंड स्टैन्ड, ठंडी सड़क पर पाषाण देवी मंदिर के पास और लोअर माल रोड पर भी झील की क्षतिग्रस्त दीवारों की मरम्मत की गई।
झील सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित 38 करोड़ रुपये की योजना को शीघ्र स्वीकृति मिलती है तो इससे नैनी झील की संरचनात्मक सुरक्षा मजबूत होगी और भविष्य में संभावित भू-धंसाव या दीवारों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं को रोका जा सकेगा।
नैनीताल की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और पर्यावरणीय संतुलन के लिए नैनी झील अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए झील संरक्षण की इस परियोजना को नगर के दीर्घकालिक पर्यावरणीय संरक्षण से भी जोड़ा जा रहा है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।