नवीन समाचार, अल्मोड़ा, 27 अप्रैल 2026 (Wedding Destination at Funeral Site)। लगता है मानव की भूख का कोई अंत नहीं है। पहाड़ की मिट्टी और पत्थरों को खाने और नदियों को पीने के बाद अब मानव पहाड़ की सभ्यता और संस्कृति से भी अपनी भूख मिटाना चाहता है। वीडियो देखिये जो कि अल्मोड़ा जनपद के मर्चूला क्षेत्र में रामगंगा व बदनगढ़ नदी के संगम पर स्थित अंत्येष्टि स्थल का बताया जा रहा है, जहां पर एक विवाह समारोह के अंतर्गत जयमाला रस्म आयोजित की जा रही है।
वीडिओ में दिख रहा है की कैसे दुल्हन अनजाने में या जानबूझकर श्मशान घाट के पास, अब पहाड़ की शादियों का भी हिस्सा बन चुकी एक नयी परंपरा के तहत दूल्हे को जयमाल पहनाने के लिये आगे बढ़ रही है। दूल्हा-दुल्हन का सात जन्मों के लिये सप्तपदी के साथ आगे बढ़ने का सफर एक ऐसे स्थान से शुरू हो रहा है जहां मनुष्य अपनी अंतिम यात्रा पर निकलता है।
उल्लेखनीय है कि मर्चूला एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है। बताया जा रहा है कि यहां श्मशान घाट के पास बने एक रिजॉर्ट के द्वारा यह विवाह समारोह आयोजित किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड को ‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ (Destination Wedding) बनाने का आह्वान किया था, लेकिन मानव पहाड़ के घाटों को भी ‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ बना देगा शायद उन्होंने भी न सोचा होगा।
उत्तराखंड (Uttarakhand) के जनपद अल्मोड़ा (Almora) के सल्ट (Salt) विकासखंड अंतर्गत प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मर्चूला (Marchula) में ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ के नाम पर परंपराओं और मान्यताओं को दरकिनार करने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। यहाँ रामगंगा (Ramganga) एवं बदनगढ़ (Badangarh) नदी के संगम पर स्थित वर्षों पुराने अंत्येष्टि स्थल (Cremation Ground) पर एक विवाह समारोह की ‘जयमाला’ रस्म आयोजित की गई। इस घटना का वीडिओ (Video) सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित (Viral) होने के बाद स्थानीय निवासियों और प्रबुद्ध वर्ग में भारी रोष व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मर्चूला क्षेत्र के एक निजी रिजॉर्ट (Resort) में ठहरे पर्यटकों ने विवाह की रस्मों हेतु उस स्थान को चुना जहाँ ग्रामीण अपनी अंतिम यात्रा पूर्ण कर दाह संस्कार करते हैं। पवित्र संगम पर स्थित इस श्मशान घाट को विवाह मंडप के रूप में प्रयुक्त होते देख लोग हैरान हैं। इंटरनेट मीडिया (Internet Media) पर इस कृत्य की कड़ी आलोचना हो रही है और प्रश्न उठाए जा रहे हैं कि क्या पर्यटन और कारोबार के नाम पर पहाड़ की सांस्कृतिक संवेदनाओं की बलि चढ़ाई जाएगी।
प्रशासन की अनुमति के बिना सार्वजनिक स्थल पर आयोजन
तहसीलदार (Tehsildar) आबिद अली ने इस प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए आश्चर्य व्यक्त किया है कि अंत्येष्टि स्थल जैसे संवेदनशील स्थान पर जयमाला की अनुमति कैसे दी जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिजॉर्ट परिसर से बाहर किसी भी सार्वजनिक स्थान पर किसी भी प्रकार के आयोजन के लिए प्रशासन से पूर्व अनुमति (Permission) लेना अनिवार्य है। इस मामले में न तो कोई अनुमति मांगी गई और न ही प्रशासन को सूचित किया गया। तहसीलदार ने कहा कि रिजॉर्ट संचालक से पूछताछ कर विधिक कार्यवाही (Legal Action) की जाएगी और चालान (Challan) भी काटा जा सकता है।
रिजॉर्ट संचालक और पर्यटकों की हठधर्मी
प्रकरण में रिजॉर्ट के प्रबंधक राकेश शर्मा का तर्क है कि उन्होंने वर-वधू पक्ष को स्थान की महत्ता और उसके अंत्येष्टि स्थल होने के विषय में अवगत कराया था, किंतु पर्यटकों को वही ‘लोकेशन’ अधिक आकर्षक लगी और उन्होंने वहीं रस्म अदायगी का निर्णय लिया। इस तर्क पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सामाजिक कार्यकर्ता परम कांडपाल और अंकित रावत ने इसे पर्वतीय परंपराओं का अपमान बताते हुए होटल संचालकों को सचेत किया है कि लाभ के फेर में मर्यादाओं का उल्लंघन असहनीय है।
‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ नीति और परंपराओं का संघर्ष
राज्य सरकार उत्तराखंड को एक बड़े ‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने की नीति पर कार्य कर रही है, किंतु मर्चूला जैसी घटनाएं इस अभियान के समक्ष चुनौती खड़ी कर रही हैं। यह घटना रेखांकित करती है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय रीति-रिवाजों और पवित्र स्थलों की गरिमा सुनिश्चित करना भी अनिवार्य है। क्या भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए कोई सख्त नियमावली (Guidelines) बनाई जाएगी ताकि आस्था के केंद्रों का ऐसा अनादर न हो? फिलहाल प्रशासन इस पूरे मामले की सूक्ष्मता से जाँच कर रहा है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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