नवीन समाचार, नैनीताल, 27 अप्रैल 2026 (Nainital-Advocate Found Dead Inside Car)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के जनपद नैनीताल (Nainital) मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट (Collectorate) परिसर की पार्किंग में सोमवार को सुबह लगभग 11:30 बजे उस समय सनसनी फैल गई, जब एक खड़ी कार के भीतर नोटरी 60 वर्षीय अधिवक्ता (Notary Advocate) का रक्त रंजित शव बरामद हुआ। प्रारंभिक सूचना के अनुसार, वह व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्याओं के कारण गहरे मानसिक अवसाद (Depression) में थे। पुलिस के अनुसार अधिवक्ता ने संदिग्ध परिस्थितियों में अपनी ही पिस्तौल (Pistol) से स्वयं को गोली मारकर जीवनलीला समाप्त कर ली।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान पूरन सिंह भाकुनी (Puran Singh Bhakuni) के रूप में हुई है, जो कलेक्ट्रेट में नोटरी अधिवक्ता के रूप में कार्यरत थे। सोमवार को पार्किंग क्षेत्र में खड़ी कार से अधिवक्ता मृत अवस्था में मिले। जब तक समीप खड़े लोग और पार्किंग संचालक मौके पर पहुँचे, तब तक अधिवक्ता लहूलुहान अवस्था में अपनी सीट पर पड़े थे। पुलिस ने घटनास्थल से अधिवक्ता की पिस्तौल और एक ‘सुसाइड नोट’ (Suicide Note) बरामद किया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार सोमेश्वर मूल निवासी व वर्तमान में तल्लीताल स्थित लांग व्यू कंपाउंड में रह रहे अधिवक्ता पूरन सिंह भाकुनी रोज की तरह सोमवार की सुबह घर से निकले और सामान्य अंदाज में कलक्ट्रेट पार्किंग पहुंचे। पार्किंग कर्मियों से हंसकर अभिवादन भी किया और अपनी कार में बैठ गए। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही मिनटों में कार के भीतर एक खौफ नाक घटना घटने वाली है।
करीब 11.30 एक पर्यटक अपनी गाड़ी पार्क करने पहुंचा। इसी दौरान उसकी नजर पास खड़ी कार के अंदर गई। सीट पर बैठे अधिवक्ता के कान से खून बह रहा था। यह देख वह सन्न रह गया और तुरंत पार्किंग कर्मियों को बुलाया। कर्मचारियों ने कई बार आवाज लगाई लेकिन अंदर से कोई हलचल नहीं हुई, जैसे ही कार के खुले सीसे से अंदर झांका तो अंदर का दृश्य देख सभी स्तब्ध रह गए।
नोटरी रिन्यूअल और बीमारी का तनाव
सूत्रों के अनुसार, अधिवक्ता पूरन सिंह भाकुनी पिछले कुछ समय से शारीरिक अस्वस्थता के कारण मानसिक रूप से परेशान थे। बताया जा रहा है कि नोटरी के अनुबंध (Contract) को हर पांच वर्ष में नवीनीकृत (Renew) कराने की सरकारी नीति में आए बदलावों के कारण उनका नवीनीकरण उम्र की बाध्यताओं के कारण नहीं हो पा रहा था, जिससे वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित थे। इसके अतिरिक्त, बरामद पत्र में उन्होंने अपनी किसी गंभीर बीमारी का भी उल्लेख किया है, जिससे तंग आकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।
व्यक्तिगत जीवन और अंतिम मार्मिक अपील
अधिवक्ता भाकुनी के व्यक्तिगत जीवन की पृष्ठभूमि भी अत्यंत मार्मिक रही है। उन्होंने लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व ही विवाह किया था और उनकी कोई संतान नहीं थी। उनकी पत्नी स्वयं एक स्टांप विक्रेता (Stamp Vendor) रही हैं। बताया गया है कि पूर्व में नगर के अमरालय (Amralaya) क्षेत्र में अपना आवास बेचने के उपरांत वे वर्तमान में लांग व्यू (Long View) क्षेत्र में निवास कर रहे थे। अपने अंतिम पत्र में उन्होंने कुमाऊं आयुक्त (Kumaon Commissioner), जिलाधिकारी (District Magistrate) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से अपनी पत्नी का ध्यान रखने की भावनात्मक अपील की है।
पुलिस की कार्यवाही और फॉरेंसिक जाँच
घटना की सूचना मिलते ही नगर के अधिवक्ताओं और स्थानीय निवासियों की भारी भीड़ कलेक्ट्रेट में एकत्र हो गई। पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि पुलिस ने शव को अधिकार में लेकर अंत्यपरीक्षण (Post-mortem) हेतु भेज दिया है। ‘फॉरेंसिक टीम’ (Forensic Team) ने कार के भीतर से उंगलियों के निशान (Fingerprints) और अन्य साक्ष्य संकलित किए हैं। पुलिस सुसाइड नोट की सत्यता और घटना के अन्य पहलुओं की सूक्ष्मता से जाँच कर रही है।
अधिवक्ता की मौत पर अधिवक्ता पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठा रहे प्रश्न
नैनीताल। अधिवक्ता पूरन सिंह भाकुनी की कार में गोली लगने से हुई मौत पर जिला बार के कई अधिवक्ताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर, खासकर बिना चिकित्सालय ले गये मौत और बिना किसी फॉरेंसिक जांच के मौत को आत्महत्या बताने व सुरक्षा आदि के सहित अन्य कारणों से प्रश्न उठाये हैं। दिलचस्प बात यह है कि घटना का पता सुबह 11-11.30 बजे किसी पर्यटक को पता चला। अधिवक्ता पार्किंग में कब आये, इसका किसी को पता नहीं है। इस संबंध में आसपास के सीसीटीवी आदि की जांच भी अब तक नहीं की गयी है। अधिवक्ता को कब गोली लगी, यह भी किसी को नहीं पता है।
आसपास ही पार्किंग कर्मी, जिला न्यायालय, एसएसपी कार्यालय एवं जिला कलक्ट्रेट होने के बावजूद किसी ने गोली चलने की आवाज नहीं सुनी। जबकि अधिवक्ता की कार के शीशे आधे खुले हुए थे और वह कार की पिछली सीट पर बैठे हुए लग रहे थे और उनके हाथ में ठीक से पिस्तौल पकड़ी हुई थी। गोली कनपटी पर चलायी गयी थी और दूसरी ओर से बाहर निकली भी लग रही थी, लेकिन बताया गया है कि काफी देर पहुंची एफएसएल की टीम को गोली या खोखा नहीं मिला।
अधिवक्ताओं का कहना है कि पुलिस लगभग पौने घंटे और एफएसएल की टीम लगभग 2 घंटे बाद पहुंची और अधिवक्ता को चिकित्सालय लगभग ढाई बजे ले जाया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने पुलिस के द्वारा अधिवक्ता की मौत को आत्महत्या घोषित करने पर भी प्रश्न उठाया कि बिना चिकित्सकों के द्वारा मृत घोषित किये और बिना एफएसएल की जांच के मौत को आत्महत्या बताना ठीक नहीं है।
कार के अंदर मिला सुसाइड नोट, पिस्टल समेत भारी मात्रा में कारतूस बरामद
नैनीताल। घटनास्थल से पुलिस को कई अहम चीजें मिली हैं। कार के भीतर एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है जिसमें आत्महत्या के कारणों का उल्लेख होने की बात कही जा रही है इसके अलावा मौके से एक पिस्टल भी मिली है जिसमें चार जिंदा कारतूस और एक खोखा मौजूद था। पुलिस को ९ अतिरिक्त जिंदा कारतूस भी कार से मिले हैं, साथ ही लाइसेंस, रजिस्टर तथा बैग और कोट भी बरामद किए गए हैं। फोरेंसिक टीम ने सभी सामान को कबजे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
अधिवक्ता पूरन सिंह भाकुनी पिछले करीब दो दशकों से न्यायालय में सक्रिय रूप से वकालत कर रहे थे। कानूनी मामलों में उनकी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती थी और वे अपने पेशे में एक अनुभवी चेहरा थे। बीते लगभग 15 वर्षों से वह नोटरी वकील के रूप में भी कार्यरत थे। स्थानीय अधिवक्ताओं और आम लोगों के बीच उनकी एक सुलझे और व्यवहारिक व्यक्ति के रूप में पहचान थी। उनकी अचानक मौत से अधिवक्ता समुदाय में शोक और स्तबधता का माहौल है।
कोर्ट परिसर के पास हुई इस घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर किस हालात ने एक अनुभवी अधिवक्ता को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। मामले में सीओ अंजना नेगी ने बताया कि पुलिस हर एंगल से मामले की जांच क र रही है और जरूरत पडऩे पर संबंधित लोगों से पूछताछ भी की जा रही है।
इस दुःखद घटना ने कलेक्ट्रेट परिसर और अधिवक्ता समुदाय को शोक संतप्त कर दिया है। क्या सरकारी नीतियों में जटिलता और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अभाव ऐसे आत्मघाती कदमों का कारण बन रहा है? प्रशासन वर्तमान में इस मामले की वैधानिक जाँच में जुटा है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
