कथित महिला पुलिस अधिकारी के फेर में फंसा सोमेश्वर का व्यक्ति, 3.54 लाख रुपये गँवाए, की गई ‘डिजिटल गिरफ्तारी’

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नवीन समाचार, अल्मोड़ा, 6 मार्च 2026 (Someshwar Man Duped by Lady Police)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के अल्मोड़ा (Almora) जनपद के सोमेश्वर (Someshwar) क्षेत्र में साइबर ठगी (Cyber Fraud) का एक गंभीर प्रकरण सामने आया है। यहां ठगों ने स्वयं को महिला पुलिस अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को तीन दिन तक तथाकथित “डिजिटल गिरफ्तारी” (Digital Arrest) में रखा और भय दिखाकर 3 लाख 54 हजार रुपये ठग लिये। पीड़ित ने सोमेश्वर कोतवाली (Someshwar Police Station) में शिकायत देकर आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अभियोग दर्ज कर जांच प्रारम्भ कर दी है।

डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर तीन दिन तक डराते रहे ठग

(Someshwar Man Duped By Lady Police) (4 Arrested-Cyber Fraud-Fake Websites of Hotels) (Nainital-Cyber Crime-Youth Cheated over 17Lakhsप्राप्त जानकारी के अनुसार सोमेश्वर की ग्राम पंचायत बले (Bale Gram Panchayat) निवासी दलीप सिंह (Dalip Singh) ने पुलिस को शिकायत दी है। इनके अनुसार 3 मार्च को एक अज्ञात दूरभाष संख्या से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने कहा कि उनके आधार कार्ड (Aadhaar Card) के आधार पर मुंबई (Mumbai) में एक दूरसंचार कंपनी के केंद्र से 14 जुलाई 2025 को एक सिम कार्ड खरीदा गया था।

ठग ने यह भी कहा कि उस सिम कार्ड का धारक नरेश गोयल (Naresh Goyal) नामक व्यक्ति है, जो कथित रूप से जेट एयरवेज (Jet Airways) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) प्रकरण का लाभार्थी बताया जा रहा है। इसी आधार पर दलीप सिंह को भी इस प्रकरण में आरोपित बताया गया और कहा गया कि उनके विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) से गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है।

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स्वाभाविक है कि इस प्रकार की बात सुनकर कोई भी व्यक्ति भयभीत हो सकता है। क्या वास्तव में किसी के नाम से बिना जानकारी के सिम जारी हो सकता है? यह प्रश्न पीड़ित के मन में भी आया, परंतु ठगों ने भय का ऐसा वातावरण बनाया कि वह उनके झांसे में आ गये।

महिला पुलिस अधिकारी बनकर की गयी वीडियो कॉल

पीड़ित के अनुसार कुछ समय बाद कॉल एक कथित महिला पुलिस अधिकारी को स्थानांतरित की गयी। इसके बाद व्हाट्सएप (WhatsApp) पर वीडियो कॉल की गयी। कॉल में स्वयं को पुलिस अधिकारी बताने वाली महिला ने कहा कि यदि वह जांच में सहयोग करेंगे तो गिरफ्तारी से बच सकते हैं।

महिला ने उनसे कहा कि वे एक कमरे में अकेले बैठें, दरवाजा बंद कर लें और जांच प्रक्रिया के दौरान किसी से संपर्क न करें। इसके बाद उनसे बैंक खातों से जुड़ी जानकारी भी ली गयी।

“मैं सुरक्षित हूँ और राष्ट्रीय हित सुरक्षित है” लिखने को कहा

पीड़ित ने पुलिस को बताया कि तीन दिनों तक उन्हें लगातार निगरानी में रखने जैसा व्यवहार किया गया। कथित महिला अधिकारी बार-बार संदेश भेजकर उनसे “आई एम सेफ एंड नेशनल इंटरेस्ट इज सेफ” (I am safe and national interest is safe) लिखने को कहती रही, ताकि उन्हें विश्वास हो कि पीड़ित उनकी निगरानी में है।

भय और भ्रम की स्थिति में दलीप सिंह ने आरोपितों के बताए गए खाते में कुल 3 लाख 54 हजार रुपये स्थानांतरित कर दिये। बाद में जब उन्हें संदेह हुआ तब उन्होंने स्थानीय पुलिस से संपर्क किया।

पुलिस ने दर्ज किया अभियोग, जांच प्रारम्भ

सोमेश्वर के थानाध्यक्ष मदन मोहन जोशी (Madan Mohan Joshi) ने बताया कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर साइबर ठगी (Cyber Fraud) का अभियोग दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच प्रारम्भ कर दी गयी है और धनराशि के लेनदेन तथा उपयोग किये गये दूरभाष नंबरों का तकनीकी परीक्षण किया जा रहा है।

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पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल पर स्वयं को पुलिस, न्यायालय या किसी सरकारी संस्था का अधिकारी बताने वालों पर तुरंत विश्वास न करें। कोई भी वैधानिक संस्था किसी व्यक्ति को इस प्रकार डिजिटल माध्यम से बंद कमरे में बैठाकर धन स्थानांतरित करने के लिए बाध्य नहीं करती।

क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएँ

साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार “डिजिटल गिरफ्तारी” जैसे नए तरीके तेजी से सामने आ रहे हैं। ठग लोगों को कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाकर मानसिक दबाव बनाते हैं। विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सरकारी प्रक्रियाओं की सीमित जानकारी होने के कारण वे अधिक प्रभावित हो जाते हैं।

इस प्रकार की घटनाएँ यह प्रश्न भी उठाती हैं कि नागरिकों में डिजिटल सुरक्षा और साइबर जागरूकता को किस स्तर तक बढ़ाया जाए। प्रशासन और पुलिस अब ग्रामीण क्षेत्रों तक साइबर जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दे रहे हैं।

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