नवीन समाचार, नैनीताल, 13 मार्च 2026 (High Court News 13 March 2026)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के जनपद नैनीताल (Nainital) स्थित उच्च न्यायालय (High Court of Uttarakhand) में राज्य के दो वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों को केंद्र सरकार (Central Government) में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के आदेश को चुनौती देने का मामला पहुंच गया है।
राज्य में पुलिस महानिरीक्षक स्तर (Inspector General – IG Rank) पर कार्यरत आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग (Neeru Garg) और अरुण मोहन जोशी (Arun Mohan Joshi) ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs – MHA) के अधीन उन्हें उप महानिरीक्षक (Deputy Inspector General – DIG) पद पर भेजे जाने के आदेश के विरुद्ध याचिका दायर की है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च 2026 की तिथि निर्धारित की है।
प्रतिनियुक्ति आदेश को अधिकारियों ने दी चुनौती
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता (Justice Manoj Kumar Gupta) तथा न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Justice Subhash Upadhyay) की खंडपीठ (Division Bench) में हुई।
याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन भारत तिब्बत सीमा पुलिस (Indo-Tibetan Border Police – ITBP) में उप महानिरीक्षक पद पर भेजा गया है। वहीं वर्ष 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी और राज्य में आईजी स्तर पर तैनात अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force – BSF) में उप महानिरीक्षक पद पर नियुक्त किया गया है।
इस संबंध में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 5 मार्च 2026 को आदेश जारी किए गए थे। इसके बाद उत्तराखंड सरकार (Government of Uttarakhand) ने 6 मार्च 2026 को दोनों अधिकारियों को कार्यमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया था, जिसे इन अधिकारियों ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
अदालत में क्या दलीलें दी गईं
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वे क्रमशः वर्ष 2005 और 2006 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हैं और वर्तमान में राज्य में पुलिस महानिरीक्षक स्तर पर कार्यरत हैं। ऐसे में उन्हें प्रतिनियुक्ति पर केंद्र सरकार में उप महानिरीक्षक पद पर भेजे जाने के आदेश पर प्रश्न उठाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि यह याचिकाएं न्यायालय में पोषणीय नहीं हैं। उनका तर्क था कि चूंकि संबंधित अधिकारी केंद्रीय सेवा (All India Service – IPS Cadre) के सदस्य हैं, इसलिए इस प्रकार के मामलों की सुनवाई केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (Central Administrative Tribunal – CAT) में होनी चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च 2026 की तिथि नियत कर दी।
बनभूलपुरा प्रकरण में आरोपितों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 18 मार्च को
नवीन समाचार, नैनीताल, 13 मार्च 2026 ()। उत्तराखंड के चर्चित हल्द्वानी के बनभूलपुरा प्रकरण (Banbhoolpura Case Haldwani) से जुड़े कई आरोपितों की जमानत याचिकाओं पर भी उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। न्यायालय ने फिलहाल किसी भी आरोपित को राहत नहीं दी और मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 मार्च 2026 की तिथि निर्धारित कर दी है।
इस मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायमूर्ति (Senior Justice) मनोज कुमार तिवारी (Manoj Kumar Tiwari) और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित (Pankaj Purohit) की खंडपीठ में हुई।
आरोपितों की ओर से दी गई दलील
सुनवाई के दौरान आरोपितों की ओर से न्यायालय को बताया गया कि इस प्रकरण में शामिल कई अन्य व्यक्तियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसी आधार पर उन्हें भी जमानत प्रदान की जानी चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि घटना के समय प्रारंभिक सूचना रिपोर्ट (First Information Report – FIR) अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध दर्ज की गई थी और बाद में जांच के आधार पर उनके नाम जोड़े गए। उनका दावा था कि उन्हें केवल संदेह के आधार पर प्रकरण में शामिल किया गया है।
किन आरोपितों ने लगाई जमानत याचिका
इस प्रकरण में अब्दुल रहमान (Abdul Rahman), वसीम (Wasim) और अब्दुल तस्लीम (Abdul Tasleem) सहित अन्य आरोपितों ने जमानत के लिए न्यायालय में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 मार्च 2026 की तिथि निर्धारित कर दी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार प्रशासनिक प्रतिनियुक्ति से जुड़े विवाद और कानून व्यवस्था से संबंधित बड़े प्रकरणों में उच्च न्यायालय के निर्णय न केवल संबंधित अधिकारियों और आरोपितों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए भी अहम माने जाते हैं। आने वाली सुनवाई में न्यायालय के समक्ष इन मामलों के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार होने की संभावना है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
