नवीन समाचार, नैनीताल, 20 अप्रैल 2026 (Kathgodam-Amritpur Bypass Approved)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के प्रवेश द्वार काठगोदाम (Kathgodam) और रानीबाग (Ranibagh) के मध्य गुलाब घाटी (Gulab Ghati) में लगने वाले भीषण जाम (Traffic Jam) से स्थानीय निवासियों और पर्यटकों (Tourists) को शीघ्र ही स्थाई निजात मिलने वाली है। प्रदेश के मुख्यमंत्री (Chief Minister) पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने काठगोदाम से दानीजाला-सिमलखेत होते हुए एचएमटी (HMT) अमृतपुर (Amritpur) तक बनने वाले महत्वपूर्ण बाईपास (Bypass) मोटर मार्ग हेतु 18.22 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति (Financial Approval) प्रदान कर दी है। इस बाईपास के निर्माण से कुमाऊं (Kumaon) के पर्वतीय जनपदों को जाने वाले यात्रियों के समय और ईंधन की भारी बचत होगी।
क्षेत्रीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री (Cabinet Minister) राम सिंह कैड़ा (Ram Singh Kaira) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह परियोजना (Project) तीन चरणों में पूर्ण की जाएगी। इस योजना के अंतर्गत प्रथम चरण में पहाड़ी कटान (Hill Cutting) हेतु 1.75 करोड़ रुपये और द्वितीय चरण में निर्माण कार्यों हेतु 4.69 करोड़ रुपये का शासनादेश (Government Order) पूर्व में ही निर्गत हो चुका है। परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष गौला नदी (Gaula River) पर निर्मित होने वाला 75 मीटर स्पान (Span) का पुल (Bridge) है, जिसकी लागत 11.77 करोड़ रुपये आंकलित की गई है। मुख्यमंत्री ने इस पुल निर्माण को भी अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है।
तीन चरणों में पूर्ण होगी महत्वाकांक्षी बाईपास योजना
काठगोदाम-अमृतपुर बाईपास के निर्माण की पृष्ठभूमि (Background) पर दृष्टि डालें तो 3 नवंबर 2025 को भारत सरकार (Government of India) से इस 3.50 किलोमीटर लंबे बाईपास मार्ग को सैद्धांतिक स्वीकृति (Conceptual Approval) प्राप्त हुई थी। स्वीकृति प्राप्त होने के उपरांत लोक निर्माण विभाग (Public Works Department) ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर शासन (Government) को प्रेषित की थी। वर्तमान में बजट की पूर्ण स्वीकृति प्राप्त होने से इस बहुप्रतीक्षित मार्ग के निर्माण की समस्त बाधाएं दूर हो गई हैं।
दानीखेत-सिमलखेत गांवों को भी मिलेगी ‘विकास केी जीवनरेखा’
सड़कों को विकास की जीवन रेखा कहा जाता है। हल्द्वानी, काठगोदाम, रानीबाग के निकट दानीजाला व सिमलखेत गांव आज भी सड़क न होने से विकास से कोसों दूर हैं। यहां तक कि इन गांवों के लोगों को शवों को भी अस्थायी ट्रॉली से गौला नदी के पार सड़क तक लाना पड़ता है। अब बाइपास बनने के बाद इन गांवों के ग्रामीणों को भी विकास की जीवन रेखा मिलने की उम्मीद बन गयी है।

यह बाईपास मार्ग सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में हल्द्वानी (Haldwani) से भीमताल (Bhimtal), अल्मोड़ा (Almora), बागेश्वर (Bageshwar), पिथौरागढ़ (Pithoragarh) और रानीखेत (Ranikhet) जाने वाले वाहनों को संकरी गुलाब घाटी से होकर गुजरना पड़ता है, जहाँ अल्प वृष्टि या वाहन खराब होने की स्थिति में भी घंटों लंबा जाम लग जाता है। बाईपास मार्ग का निर्माण पूर्ण होने से यात्रियों को रानीबाग-गुलाब घाटी के संकरे मोड़ और काठगोदाम की भीड़भाड़ से नहीं जूझना पड़ेगा, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी (Connectivity) सुदृढ़ होगी।
टेंडर प्रक्रिया में तीव्रता और क्षेत्रीय विकास की अपेक्षा
कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने संबंधित विभागीय अधिकारियों (Officers) को निर्देशित किया है कि निविदा (Tender) प्रक्रिया को तत्काल पूर्ण किया जाए ताकि निर्माण कार्य धरातल पर शीघ्र प्रारंभ हो सके। उन्होंने इस सौगात हेतु मुख्यमंत्री और सांसद (MP) अजय भट्ट (Ajay Bhatt) का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बाईपास केवल एक मार्ग नहीं, अपितु कुमाऊं की आर्थिकी (Economy) और पर्यटन हेतु जीवनरेखा (Lifeline) सिद्ध होगा। विशेषकर ग्रीष्मकाल में जब सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ती है, तब यह मार्ग यातायात प्रबंधन (Traffic Management) में मील का पत्थर बनेगा।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो इस प्रकार की अवस्थापना (Infrastructure) विकास की योजनाएं राज्य की परिवहन नीति (Transport Policy) के अनुकूल हैं। क्या इस बाईपास के निर्माण के पश्चात गुलाब घाटी के पर्यावरण (Environment) पर दबाव कम होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने से पुराने मार्ग पर वाहनों का घनत्व (Density) कम होगा, जिससे भूस्खलन (Landslide) जैसी घटनाओं के समय भी यातायात सुचारू रखा जा सकेगा। अब क्षेत्रीय जनता और पर्यटक इस मार्ग के वास्तविक धरातल पर उतरने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
