नवीन समाचार, नैनीताल, 19 अप्रैल 2026 (Nainital Advocates Boycott Judges)।
उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल जनपद स्थित जिला न्यायालय में अधिवक्ताओं और न्यायालय के बीच विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है। बार एसोसिएशन ने प्रथम अपर जिला जज (विशेष न्यायाधीश/एनडीपीएस) के कथित अभद्र व्यवहार के विरोध में सोमवार से उनकी अदालत के पूर्ण बहिष्कार का निर्णय लिया है। यह मामला अब अधिवक्ताओं के सम्मान और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।
विवाद की पृष्ठभूमि और बढ़ता टकराव
बताया जा रहा है कि लंबे समय से न्यायालय में अधिवक्ताओं के लिए असहज माहौल बना हुआ था। बार एसोसिएशन के अनुसार कई बार बातचीत और आपसी सहमति से समाधान निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया है कि न्यायालय में गवाहों पर दबाव बनाकर बयान दर्ज कराए जा रहे हैं और मनमाने तरीके से बयान लिखे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति में तथ्यों में बदलाव किए जाने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
शिकायत पर भी कथित अभद्रता, बढ़ा आक्रोश
अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि कोई शिकायत लेकर न्यायालय पहुंचता है तो उसे नजरअंदाज किया जाता है और कई मामलों में अपमानित कर बाहर भेज दिया जाता है। शुक्रवार को आयोजित बार एसोसिएशन की आम सभा में इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। इसके बाद पदाधिकारियों ने न्यायाधीश से मुलाकात कर व्यवहार में सुधार का आश्वासन लिया, लेकिन यह आश्वासन अगले ही दिन बेअसर साबित हुआ।
शनिवार को उसी अधिवक्ता के साथ पुनः कथित अभद्रता की घटना सामने आई, जिसने पहले शिकायत की थी। पीड़ित अधिवक्ता के अनुसार, शिकायत उठाने पर न्यायाधीश द्वारा अपमानजनक टिप्पणियां की गईं, जिससे अधिवक्ताओं में भारी रोष फैल गया।
बार एसोसिएशन का सख्त रुख और आगे की कार्रवाई
स्थिति को गंभीर मानते हुए बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण बिष्ट ने स्पष्ट कहा कि अधिवक्ताओं के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और अभद्रता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं है। वहीं, सचिव संजय सुयाल ने घोषणा की कि सोमवार से प्रथम अपर जिला जज की अदालत का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।
साथ ही पूरे प्रकरण की विस्तृत शिकायत उच्च न्यायालय के प्रशासनिक अधिकारियों से करने की तैयारी है। बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि जब तक संबंधित न्यायिक अधिकारी के व्यवहार में ठोस सुधार नहीं होता, तब तक यह बहिष्कार जारी रहेगा।
इस घटनाक्रम ने न्यायालय की कार्यप्रणाली, अधिवक्ताओं के अधिकारों और न्यायिक गरिमा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में इस विवाद का समाधान किस दिशा में जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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