सियाचिन में तैनात उत्तराखंड के वीर ‘दीपक’ का बलिदान

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नवीन समाचार, पिथौरागढ़, 20 अप्रैल 2026 (Sacrifice of Deepak from UK in Siachen)। उत्तराखंड (Uttarakhand) और राज्य के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ (Pithoragarh) का एक और लाल देश की सेवा करते हुए बलिदान (Sacrifice) हो गया। विश्व के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन (Siachen) में तैनात सात कुमाऊं रेजीमेंट (7 Kumaon Regiment) के आरक्षी दीपक सिंह जेठी (Deepak Singh Jethi) का दिल्ली (Delhi) स्थित सैन्य चिकित्सालय (Military Hospital) में उपचार के दौरान निधन (Death) हो गया।

सियाचिन की दुर्गम परिस्थितियों में कर्तव्य निर्वहन के दौरान उनका स्वास्थ्य (Health) अत्यधिक बिगड़ गया था, जिसके पश्चात उन्हें गहन उपचार हेतु भर्ती कराया गया था। वीर सैनिक के बलिदान का समाचार प्राप्त होते ही उनके पैतृक गांव सहित पूरे जनपद में शोक की लहर व्याप्त है।

Sacrifice of Deepak from UK in Siachenप्राप्त जानकारी के अनुसार अस्कोट (Askot) क्षेत्र के ओझा मल्ला (Ojha Malla) ग्राम पंचायत अंतर्गत गणाई (Ganai) गांव निवासी 37 वर्षीय दीपक सिंह जेठी भारतीय सेना (Indian Army) की सात कुमाऊं रेजीमेंट में सेवारत थे। लगभग सात माह पूर्व उनकी तैनाती सियाचिन में हुई थी। ड्यूटी के दौरान अत्यधिक ठंड और प्रतिकूल वातावरण के कारण वे अस्वस्थ (Unwell) हो गए थे। प्राथमिक उपचार के पश्चात जब उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें तत्काल सैन्य विमान द्वारा दिल्ली स्थित रिसर्च एंड रेफरल (Research and Referral) चिकित्सालय (आरआर अस्पताल) में स्थानांतरित (Transfer) किया गया था। चिकित्सकों (Doctors) के अथक प्रयासों के उपरांत भी उन्हें नहीं बचाया जा सका और रविवार देर सायं उन्होंने अंतिम सांस ली।

सैन्य सम्मान के साथ पैतृक घाट पर होगी अंत्येष्टि

दीपक सिंह जेठी के पार्थिव शरीर (Mortal Remains) को सड़क मार्ग से उनके पैतृक गांव गणाई लाया जा रहा है। मंगलवार को पार्थिव शरीर गांव पहुँचने की संभावना है, जहाँ ग्रामीण और क्षेत्रवासी अपने वीर सपूत के अंतिम दर्शन करेंगे। इसके पश्चात स्थानीय हंसेश्वर घाट (Hanseshwar Ghat) पर पूर्ण सैन्य सम्मान (Military Honors) के साथ उनकी अंत्येष्टि (Last Rites) की जाएगी। सेना के अधिकारियों (Officers) ने बलिदानी के परिजनों को सूचित कर दिया है, जिसके पश्चात गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।

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बलिदानी जवान अपने पीछे पत्नी रीना जेठी (Reina Jethi), पांच वर्षीय पुत्र काव्यांश (Kavyansh), वृद्ध माता और दो बड़े भाइयों को छोड़ गये हैं। उनके पिता भवान सिंह (Bhawan Singh) का पूर्व में ही निधन हो चुका है। वर्तमान में दीपक का परिवार उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में रह रहा है। एक छोटे बालक के सिर से पिता का साया उठने और वृद्ध माता द्वारा पुत्र को खोने की घटना ने पूरे क्षेत्र को मर्माहत कर दिया है। सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने इस अपूरणीय क्षति पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए वीर जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की है।

सियाचिन की दुर्गम चुनौतियां और सैनिकों का समर्पण

यह घटना पुनः उन दुर्गम चुनौतियों को रेखांकित करती है, जिनका सामना हमारे सैनिक शून्य से भी नीचे के तापमान में देश की सीमाओं की रक्षा हेतु करते हैं। क्या आम जनमानस उन कठिन परिस्थितियों की कल्पना कर सकता है जहाँ केवल सांस लेना भी एक संघर्ष है? सियाचिन जैसे क्षेत्रों में तैनात सैनिकों का स्वास्थ्य अक्सर उच्च ऊंचाई वाली बीमारियों (High Altitude Sickness) के कारण प्रभावित होता है। दीपक सिंह जेठी का बलिदान देश के प्रति उनके अटूट समर्पण का प्रतीक है।

शासन और प्रशासन (Administration) द्वारा बलिदानी परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने कहा है कि वीर सैनिक का यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और आने वाली पीढ़ियां उनके शौर्य से प्रेरणा लेंगी। मंगलवार को होने वाली अंतिम विदाई में भारी संख्या में लोगों और सैन्य अधिकारियों के सम्मिलित होने की संभावना है।

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