नवीन समाचार, देहरादून, 2 अगस्त 2026 (Declining Breastfeeding in Uttarakhand)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य से जुड़ी एक चिंताजनक तस्वीर सामने आयी है। मां का दूध, जिसे शिशु के लिए प्रकृति का अमृत और पहला प्राकृतिक टीका माना जाता है, उससे दूर होते बच्चों की संख्या बढ़ रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6: National Family Health Survey-6), 2023-24 के अनुसार राज्य में जन्म के बाद पहले छह माह तक केवल मां का दूध पाने वाले शिशुओं का प्रतिशत 52.5 से घटकर 40.8 रह गया है। यही नहीं, जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने की दर भी 90.2 प्रतिशत से घटकर 87.4 प्रतिशत रह गयी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे केवल स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के शारीरिक और मानसिक विकास से जुड़ा गंभीर विषय मान रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि जन्म के तुरंत बाद और जीवन के शुरुआती छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध नहीं मिलता है, तो संक्रमण, कुपोषण और अनेक बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। यही कारण है कि विश्व स्तनपान सप्ताह (World Breastfeeding Week) के अवसर पर इस विषय पर विशेष चिंता व्यक्त की जा रही है।
मां का दूध केवल भोजन नहीं, शिशु का पहला प्राकृतिक सुरक्षा कवच
हिमालयन चिकित्सालय (Himalayan Hospital), जौलीग्रांट (Jolly Grant) के बाल रोग विशेषज्ञ तथा भारतीय बाल रोग अकादमी (IAP-Indian Academy of Pediatrics) उत्तराखंड शाखा के सचिव डॉ. राकेश कुमार (Dr. Rakesh Kumar) के अनुसार मां का दूध नवजात के लिए केवल भोजन नहीं, बल्कि प्रकृति का सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है। यह शिशु का पहला प्राकृतिक टीका है, जो उसे अनेक संक्रमणों से बचाता है, कुपोषण की आशंका कम करता है तथा उसके शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास की मजबूत नींव रखता है। उनका कहना है कि जीवन की शुरुआत में मिलने वाला यह पोषण आगे चलकर पूरे जीवन के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
क्यों घट रही है अनन्य स्तनपान की दर?
डॉ. राकेश कुमार के अनुसार उत्तराखंड में अनन्य स्तनपान की घटती दर के पीछे अनेक सामाजिक और व्यावहारिक कारण हैं। विशेषकर शल्य प्रसव (सीजेरियन डिलीवरी) के बाद अनेक माताओं को समय पर स्तनपान शुरू कराने के लिए आवश्यक सहयोग और विशेषज्ञ परामर्श नहीं मिल पाता। चिकित्सालय से छुट्टी मिलने के बाद भी स्तनपान संबंधी नियमित मार्गदर्शन का अभाव बना रहता है।
इसके अतिरिक्त अनेक परिवारों में आज भी जन्म के तुरंत बाद शहद, घुट्टी अथवा पानी पिलाने जैसी पारंपरिक भ्रांतियां प्रचलित हैं। इससे पहले छह माह तक केवल मां का दूध देने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में प्रभावी स्तनपान परामर्श, आशा (ASHA) और आंगनबाड़ी (Anganwadi) कार्यकर्ताओं की नियमित सलाह तथा पिता और परिवार के अन्य सदस्यों की सक्रिय भागीदारी के बिना इस स्थिति में अपेक्षित सुधार कठिन होगा।
क्या कहते हैं विश्व स्वास्थ्य संगठन और राष्ट्रीय दिशा-निर्देश?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO-World Health Organization) तथा भारत सरकार की शिशु एवं बाल आहार (IYCF-Infant and Young Child Feeding) गाइडलाइन के अनुसार—
- जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान अवश्य शुरू कराया जाना चाहिए।
- पहले छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए। इस अवधि में पानी, शहद, घुट्टी अथवा अन्य कोई आहार नहीं देना चाहिए।
- छह माह बाद पौष्टिक पूरक आहार शुरू करते हुए दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखना चाहिए।
- स्तनपान की सफलता के लिए मां के साथ पूरे परिवार का सहयोग तथा स्वास्थ्यकर्मियों का नियमित मार्गदर्शन आवश्यक है।
केवल मां की नहीं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का कहना है कि स्तनपान केवल मां का दायित्व नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि परिवार सहयोगी वातावरण उपलब्ध कराए, कार्यस्थलों पर मातृत्व अनुकूल सुविधाएं बढ़ें और स्वास्थ्य तंत्र समय पर परामर्श उपलब्ध कराए, तो स्तनपान की दर में सुधार संभव है। इससे न केवल शिशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि भविष्य में अनेक बीमारियों का जोखिम भी कम किया जा सकेगा।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
