नवीन समाचार, चम्पावत, 30 जुलाई 2026 (No Entry for YouTubers and Reel-Makers)। चम्पावत जनपद का स्वाला गांव अब सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अपनी ‘भूतिया गांव’ की छवि से बाहर निकलना चाहता है। वर्षों से यूट्यूब और सोशल मीडिया पर गांव को ‘हॉन्टेड विलेज’ और ‘पैरानॉर्मल’ घटनाओं से जोड़कर बनाए जा रहे वीडियो के बीच ग्राम पंचायत ने बड़ा निर्णय लिया है। पंचायत ने गांव के प्रवेश मार्ग पर चेतावनी बोर्ड लगाकर बिना पूर्व अनुमति यूट्यूबर, ब्लॉगर, सोशल मीडिया क्रिएटर्स और अन्य बाहरी लोगों की वीडियोग्राफी तथा शूटिंग पर रोक लगा दी है। आप यह संबंधित वीडियो भी जरूर देखना चाहेंगे :
गांव के प्रवेश पर लगाया चेतावनी बोर्ड
ग्राम पंचायत की ओर से लगाए गए बोर्ड में कहा गया है कि कुछ लोग निजी स्वार्थ और अधिक व्यूज पाने के उद्देश्य से स्वाला गांव के बारे में भ्रामक एवं असत्य जानकारी प्रसारित कर गांव की छवि धूमिल कर रहे हैं। ऐसे में बिना पूर्व अनुमति किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश, फोटोग्राफी अथवा वीडियोग्राफी पर रोक रहेगी। यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया गया तो उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।
‘भूतिया गांव’ बताकर बनाए जा रहे थे वीडियो

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में अनेक यूट्यूबर और सोशल मीडिया क्रिएटर्स ने स्वाला गांव को ‘भूतिया गांव’ बताकर वीडियो और रील बनाई हैं। इनमें कथित पैरानॉर्मल घटनाओं और रहस्यमयी दावों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया, जिससे देशभर से लोग केवल इसी छवि के कारण गांव पहुंचने लगे।
ग्रामीणों के अनुसार अधिकांश वीडियो तथ्यों पर आधारित नहीं हैं, बल्कि अधिक व्यूज और लोकप्रियता हासिल करने के लिए डर और अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं। इससे गांव की सामाजिक छवि प्रभावित हुई है।
1952 की दुर्घटना से जुड़ी हैं चर्चाएं
स्वाला गांव का नाम वर्ष 1952 में पीएसी जवानों को ले जा रहे एक वाहन की दुर्घटना के बाद चर्चाओं में आया था। समय के साथ इस घटना से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हो गयीं और बाद में इन्हें रहस्य एवं अंधविश्वास से जोड़कर प्रस्तुत किया जाने लगा।
हालांकि गांव के बुजुर्ग इन दावों को स्वीकार नहीं करते। उनका कहना है कि गांव के खाली होने का कारण कोई रहस्यमयी घटना नहीं, बल्कि वर्षों तक सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव तथा पलायन रहा है।
इतिहास और संस्कृति से बनाना चाहते हैं पहचान
ग्राम पंचायत का कहना है कि स्वाला गांव की वास्तविक पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और यहां के लोगों के संघर्ष से है। पंचायत चाहती है कि गांव को अफवाहों और अंधविश्वास से नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जाना जाए। इसी उद्देश्य से बिना अनुमति शूटिंग और भ्रामक प्रचार पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
