भाजपा प्रत्याशी को हराकर बनीं श्रीनगर की पहली मेयर आरती भंडारी की भाजपा में वापसी, 10 पार्षद भी आए साथ; 2027 से पहले बदले राजनीतिक समीकरण

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नवीन समाचार, देहरादून, 19 अगस्त 2026 (Srinagar Mayor Aarti Joined BJP)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) जनपद के श्रीनगर (Srinagar) में नगर निगम की निर्दलीय मेयर आरती भंडारी (Aarti Bhandari) ने लगभग डेढ़ वर्ष बाद भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party-BJP) में वापसी कर ली है। उनके साथ नगर निगम के 10 पार्षदों ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। वर्ष 2025 के नगर निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को हराकर श्रीनगर नगर निगम की पहली मेयर बनने वाली आरती भंडारी का यह निर्णय नगर निगम की राजनीति के साथ गढ़वाल की आगामी राजनीतिक दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Srinagar Mayor Aarti Joined BJP प्रदेश अध्यक्ष बीजेपी महेंद्र भट्‌ट और कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत की उपस्थिति में श्रीनगर की निर्दलीय मेयर आरती भंडारी ने बीजेपी में वापसी की। - Dainik Bhaskarदेहरादून से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट (Mahendra Bhatt) और कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत (Dhan Singh Rawat) की उपस्थिति में आरती भंडारी ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इनके साथ नगर निगम के 10 पार्षद भी पार्टी में शामिल हुए। वर्ष 2025 के चुनाव के बाद 40 सदस्यीय श्रीनगर नगर निगम में 18 निर्दलीय, 16 भाजपा और छह कांग्रेस पार्षद चुने गये थे। अब मेयर सहित 10 निर्दलीय पार्षदों के भाजपा में शामिल होने से नगर निगम में पार्टी की स्थिति पहले की तुलना में मजबूत हुई है।

भाजपा से बगावत कर जीती थीं मेयर का चुनाव

वर्ष 2025 के नगर निकाय चुनाव में आरती भंडारी ने भाजपा के प्रत्याशी के विरुद्ध निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। इन्होंने भाजपा प्रत्याशी आशा उपाध्याय (Asha Upadhyay) को 1,639 मतों से हराकर श्रीनगर नगर निगम की पहली मेयर बनने का रिकॉर्ड बनाया था। आरती भंडारी को लगभग 7,959 मत मिले थे जबकि भाजपा प्रत्याशी को 6,320 मत प्राप्त हुए थे। चुनाव के दौरान आरती भंडारी के पति लखपत भंडारी (Lakhpat Bhandari), जो भाजपा से जुड़े रहे हैं, को पार्टी ने छह वर्ष के लिए निष्कासित किया था।

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अब लगभग डेढ़ वर्ष बाद आरती भंडारी का भाजपा में लौटना उस राजनीतिक घटनाक्रम का दूसरा चरण माना जा रहा है, जिसमें एक ओर भाजपा से अलग होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की गयी और दूसरी ओर उसी चुनावी जीत के बाद अब भाजपा में वापसी हुई है। इससे भाजपा को श्रीनगर में अपने पुराने संगठनात्मक ढांचे के साथ एक निर्वाचित स्थानीय चेहरे का समर्थन भी मिला है।

नगर निगम में भाजपा का संख्याबल बढ़ा

चुनाव के बाद श्रीनगर नगर निगम में भाजपा के 16 पार्षद थे। आरती भंडारी के साथ 10 पार्षदों के भाजपा में शामिल होने से पार्टी खेमे में 26 पार्षद हो गये हैं। यदि शामिल हुए सभी पार्षद आगे भी निगम में भाजपा के साथ मतदान करते हैं तो बजट, विकास कार्यों और महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भाजपा समर्थित खेमे की स्थिति पहले से मजबूत होगी।

मेयर के रूप में आरती भंडारी को भी निगम की बैठकों में अधिक राजनीतिक समर्थन मिल सकता है। वहीं 18 निर्दलीय पार्षदों में से 10 के भाजपा में जाने के बाद निर्दलीय खेमे का संख्याबल घटकर आठ रह गया है। कांग्रेस के छह पार्षद पहले की तरह अलग राजनीतिक खेमे में हैं।

निर्दलीय राजनीति के लिए भी बड़ा बदलाव

श्रीनगर नगर निगम चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा था। 40 वार्डों वाले निगम में 18 निर्दलीय पार्षद चुने गये थे जबकि भाजपा को 16 और कांग्रेस को छह सीटें मिली थीं। ऐसे में मेयर सहित 10 निर्दलीय पार्षदों का भाजपा में शामिल होना चुनाव के बाद बने राजनीतिक समीकरण में बड़ा परिवर्तन है।

इससे यह संकेत भी मिलता है कि स्थानीय निकाय चुनाव में स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के साथ जीत दर्ज करने वाले निर्वाचित प्रतिनिधि बाद में किसी बड़े राजनीतिक दल के साथ जुड़ सकते हैं। अब शेष आठ निर्दलीय पार्षदों की राजनीतिक स्थिति भी नगर निगम की आगामी राजनीति में महत्वपूर्ण हो सकती है।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी चर्चा

आरती भंडारी की भाजपा में वापसी का असर केवल नगर निगम तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र (Srinagar Assembly Constituency) गढ़वाल की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है। मेयर के रूप में आरती भंडारी की अपनी चुनावी पहचान और स्थानीय राजनीतिक आधार है। वर्ष 2025 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को हराकर जीत दर्ज करने के कारण पार्टी में इनकी वापसी को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

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भाजपा को श्रीनगर शहर में पहले से चुनाव जीत चुकी स्थानीय नेता का साथ मिलने से शहरी मतदाताओं के बीच संगठन और जनसंपर्क मजबूत करने में राजनीतिक लाभ मिल सकता है। हालांकि 2027 के विधानसभा चुनाव में आरती भंडारी की कोई निश्चित भूमिका क्या होगी, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आयी है।

गढ़वाल की राजनीति में क्या बदल सकता है

भाजपा के लिए आरती भंडारी और 10 पार्षदों का साथ आना श्रीनगर नगर निगम में संख्याबल बढ़ाने के साथ संगठनात्मक विस्तार का अवसर है। वहीं कांग्रेस के लिए श्रीनगर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा यदि इस स्थानीय राजनीतिक आधार को व्यापक जनसंपर्क में बदलती है तो इसका प्रभाव श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन नगर निगम के भीतर दिखाई दे रहा है। मेयर सहित 26 पार्षद भाजपा के साथ होने की स्थिति में निगम के बजट, विकास योजनाओं और महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर राजनीतिक समीकरण पहले से अलग होंगे। आगे यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि शेष निर्दलीय पार्षद किस राजनीतिक दिशा में जाते हैं और आरती भंडारी को भाजपा संगठन में किस प्रकार की भूमिका मिलती है। क्या यह केवल नगर निगम की राजनीति में बदलाव है या 2027 के लिए गढ़वाल में भाजपा की बड़ी राजनीतिक रणनीति की शुरुआत भी है।

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