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हाईकोर्ट स्थानांतरण के खिलाफ पुनर्विचार याचिका की तैयारी, अंतरधार्मिक प्रेमी जोड़े को सुरक्षा के आदेश, हत्यारोपित की जमानत रद्द व अतिक्रमण के मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा

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नैनीताल से हाईकोर्ट स्थानांतरण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका की तैयारी, राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता संघ ने बनाई रणनीति

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 अगस्त 2026 (Nainital High Court News 17 Aug 2026)। नैनीताल। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता संघ (Uttarakhand State Agitator Advocates Association) ने नैनीताल से हाईकोर्ट (High Court) को हल्द्वानी स्थानांतरित करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर करने की तैयारी कर ली है। सोमवार को बार सभागार में हुई अधिवक्ताओं की बैठक में प्रस्तावित स्थानांतरण के साथ ही हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र की आरक्षित वन भूमि को हाईकोर्ट के लिए स्थानांतरित करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव तथा राज्य पुनर्गठन विधेयक में नैनीताल में हाईकोर्ट की प्रधान पीठ स्थापित करने के उल्लेख सहित विभिन्न कानूनी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में बताया गया कि आंदोलनकारी अधिवक्ता संघ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के संबंध में पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी कर ली है। साथ ही राज्य सरकार द्वारा हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र की आरक्षित वन भूमि को हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव के खिलाफ भी कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी की गई है।

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अधिवक्ताओं ने इस प्रश्न पर भी चर्चा की कि राज्य पुनर्गठन विधेयक में हाईकोर्ट की प्रधान पीठ नैनीताल में स्थापित करने का उल्लेख होने के बाद क्या राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना इसे किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। संघ ने कहा कि यह केवल हाईकोर्ट को पहाड़ से मैदान में स्थानांतरित करने का मुद्दा नहीं है, बल्कि पर्वतीय प्रदेश की मूल अवधारणा से जुड़ा प्रश्न है। संघ ने सवाल उठाया कि यदि राज्य के सभी प्रमुख संस्थान मैदान में ही स्थापित होने हैं तो पर्वतीय राज्य के गठन का क्या औचित्य रह जाएगा।

Nainital High Court News 17 Aug 2026) Profile imageराज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रमन शाह (Raman Shah) के नेतृत्व में हुई बैठक में पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र पाल सिंह (Dr. Mahendra Pal Singh), वरिष्ठ अधिवक्ता एवं प्रमुख राज्य आंदोलनकारी अवतार सिंह रावत (Avtar Singh Rawat), पुष्पा जोशी (Pushpa Joshi), त्रिभुवन फर्त्याल (Tribhuvan Fartyal), एमसी पंत (M.C. Pant), दुर्गा सिंह मेहता (Durga Singh Mehta), प्रेम सिंह सौन (Prem Singh Saun), पूर्व मुख्य स्थायी अधिवक्ता चंद्रशेखर सिंह रावत (Chandrashekhar Singh Rawat), कौशल साह जगाती (Kaushal Sah Jagati), नवनीश नेगी (Navneesh Negi), भुवनेश जोशी (Bhuvanesh Joshi), योगेश पचौलिया (Yogesh Pacholia),

कार्तिकेय हरि गुप्ता (Kartikey Hari Gupta), सूरज पांडे (Suraj Pandey), एमएस भंडारी (M.S. Bhandari), राजीव पाठक (Rajiv Pathak), बीएस कोरंगा (B.S. Koranga), सुभाष गुप्ता (Subhash Gupta), कौशल पांडे (Kaushal Pandey), अंबजीत चड्ढा (Ambjeet Chadha), शिवानंद भट्ट (Shivanand Bhatt), अभिषेक वर्मा (Abhishek Verma), कैलाश चंद्र तिवारी (Kailash Chandra Tiwari), पीएस बिष्ट (P.S. Bisht) और रवि बिष्ट (Ravi Bisht) सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।

अंतरधार्मिक प्रेमी जोड़े की याचिका पर हाईकोर्ट ने दिए सुरक्षा के आदेश, अगली सुनवाई 19 अगस्त को

नैनीताल। हाईकोर्ट (High Court) की न्यायमूर्ति आलोक महरा (Justice Alok Mehra) की एकलपीठ ने अंतरधार्मिक प्रेमी जोड़े की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी जान-माल और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता अज़हरुद्दीन अली (Azharuddin Ali) और उनकी साथी ने अदालत को बताया कि दोनों बालिग हैं और अपनी इच्छा से विवाह करना चाहते हैं, लेकिन अलग-अलग धर्मों से होने के कारण युवती के परिजनों द्वारा उन्हें तथा युवक के परिवार को लगातार धमकियां दी जा रही हैं।

याचिका के अनुसार युवती सिख परिवार से है और उसके पूरे परिवार को मामले में प्रतिवादी बनाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने कुंडा (Kunda), काशीपुर (Kashipur) और केलाखेड़ा (Kelakhera) थाना पुलिस को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing) के माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया। पुलिस अधिकारियों ने अदालत को आश्वस्त किया कि जोड़े और युवक के परिजनों को पर्याप्त सुरक्षा दी जाएगी तथा युवती के परिजनों को कानून हाथ में न लेने की सख्त हिदायत दी जाएगी।

अदालत ने विवाह पंजीकरण तथा युवती के शैक्षणिक दस्तावेज उसके मायके से दिलाने में भी पुलिस को सहयोग करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि बालिग होने के नाते दोनों को अपने जीवन के संबंध में निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार है। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी।

हाईकोर्ट ने हत्यारोपित मोत्सिन की जमानत तत्काल प्रभाव से रद्द की, आत्मसमर्पण का आदेश

नैनीताल। हाईकोर्ट (High Court) ने हत्यारोपी मोत्सिन (Motsin) को दी गई जमानत (Bail) तत्काल प्रभाव से रद्द करते हुए उसे संबंधित विचारण न्यायालय (Trial Court) के समक्ष तुरंत आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि जमानत मिलने के बाद आरोपी के आचरण और गतिविधियों से स्पष्ट है कि उसने न्यायपालिका द्वारा दी गई स्वतंत्रता का गंभीर दुरुपयोग किया है।

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अदालत के अनुसार आरोपी दोहरे हत्याकांड (Double Murder) जैसे गंभीर अपराध के मामलों का सामना कर रहा है और जमानत पर बाहर रहते हुए लगातार गवाहों तथा शिकायतकर्ताओं को मामला वापस लेने के लिए डराने-धमकाने का आरोप है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में न्यायालय मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता।

सुनवाई के दौरान सहारनपुर (Saharanpur) जिला अपराध अभिलेख ब्यूरो (District Crime Records Bureau-DCRB) और संबंधित थानाध्यक्षों की विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट के अनुसार जमानत अवधि में आरोपी के खिलाफ सहारनपुर के नागल (Nagal) और फतेहपुर (Fatehpur) थानों में कई नए आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) और लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। इसके अलावा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, सहारनपुर (Senior Superintendent of Police, Saharanpur) ने आरोपी को हिस्ट्रीशीटर घोषित किया है और उसे सहारनपुर जिले की सीमाओं से निष्कासित भी किया जा चुका है।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल (Justice Rakesh Thapliyal) की पीठ ने मामले की गंभीरता और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए जमानत रद्द करने की याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने 1 अप्रैल 2025 को दिए गए जमानत आदेश को वापस लेते हुए आरोपी को अविलंब आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि यदि आरोपी स्वयं आत्मसमर्पण नहीं करता है तो संबंधित थानाध्यक्ष उसे तत्काल न्यायिक हिरासत में लें। आदेश की प्रतियां त्वरित अनुपालन के लिए संबंधित विचारण न्यायालय, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून (Senior Superintendent of Police, Dehradun) और क्लेमेनटाउन (Clement Town) थाने के प्रभारी को भेज दी गई हैं।

जसपुर में अतिक्रमण के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा

नैनीताल। हाईकोर्ट (High Court) ने ऊधम सिंह नगर जिले के जसपुर (Jaspur) में कुछ राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग-74 (NH-74) की भूमि, नहर और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण किए जाने के आरोपों से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों से दो सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों ने क्षेत्र का निरीक्षण किया, अतिक्रमण चिन्हित किए और नियमों के तहत नोटिस जारी कर उन्हें हटा दिया गया है। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि कई स्थानों पर अतिक्रमण अभी भी यथावत बना हुआ है।

इस पर मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता (Chief Justice Manoj Kumar Gupta) और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Justice Subhash Upadhyay) की खंडपीठ ने राज्य सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद नियत की।

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