नवीन समाचार, देहरादून, 12 अक्टूबर 2026 (Elder couple Swindled out 45 Lakh)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) के प्रेमनगर क्षेत्र के बिधौली (Bidholi) में साइबर ठगों ने आतंकवादी घटना की जांच में फंसाने का भय दिखाकर एक सेवानिवृत्त बुजुर्ग दंपति से 45.85 लाख रुपये ठग लिए। आरोपितों ने स्वयं को महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) और मुंबई अपराध शाखा (Mumbai Crime Branch) का अधिकारी बताकर दंपति को लगभग 60 घंटे तक फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा।
इस दौरान उन्हें घर से बाहर निकलने और सामान्य गतिविधियां करने तक में रोक-टोक का सामना करना पड़ा। मामले का खुलासा तब हुआ, जब उनकी बेटी उनसे मिलने पहुंची और माता-पिता के असामान्य व्यवहार पर उसे संदेह हुआ।
पुलिस ने पीड़ित दंपति की शिकायत पर अज्ञात साइबर अपराधियों के विरुद्ध सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act) और भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita-BNS) की संबंधित धाराओं में अभियोग दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
60 घंटे तक डराकर रखा, बच्चों की सुरक्षा का भी भय दिखाया
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मूल रूप से उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सहारनपुर (Saharanpur) निवासी 72 वर्षीय सेवानिवृत्त विजयपाल धीमान अपनी पत्नी पुष्पा धीमान के साथ देहरादून के बिधौली क्षेत्र में रहते हैं। उनकी एक विवाहित बेटी देहरादून में ही रहती है, जबकि बेटा बाहर नौकरी करता है।
बताया गया है कि 16 अगस्त के आसपास दंपति के मोबाइल फोन पर अज्ञात लोगों के फोन आने लगे। फोन करने वाले ने स्वयं को महाराष्ट्र अपराध शाखा का उपनिरीक्षक ‘रंजीत कुमार’ बताया। आरोपितों ने दावा किया कि परिवार के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल एक बड़े आतंकवादी हमले और आतंकवादी गतिविधियों में हुआ है तथा परिवार जांच के घेरे में है।
इसके बाद ठगों ने दंपति के तीनों बच्चों से संबंधित जानकारी का उल्लेख कर उनकी जान को खतरा होने का भय दिखाया। इससे बुजुर्ग दंपति मानसिक दबाव में आ गए और ठगों के निर्देशों का पालन करने लगे।
‘आरबीआई खाते’ में धनराशि जमा कराने के नाम पर ठगी
आरोपितों ने दंपति से कहा कि जांच पूरी होने तक उनकी जमा पूंजी को सुरक्षा के लिहाज से भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) के खाते में जमा कराना होगा। उन्हें आश्वासन दिया गया कि जांच में निर्दोष पाए जाने के बाद धनराशि वापस कर दी जाएगी।
बताया गया है कि ठगों ने लगभग 60 घंटे तक दंपति को फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से अपने नियंत्रण में रखा। इस दौरान उन्हें शौचालय जाने के लिए भी पूछना पड़ता था और लगातार निगरानी तथा रोक-टोक की जाती थी।
भयभीत दंपति ने बैंक जाकर चार बार वास्तविक समय सकल निपटान (Real Time Gross Settlement-RTGS) और एक बार नकद जमा के माध्यम से अलग-अलग खातों में कुल 45.85 लाख रुपये स्थानांतरित कर दिए। इसके बाद भी ठगों ने उन पर जमीन बेचकर और धनराशि देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
बेटी ने माता-पिता को कमरे में देखा, तब हुआ खुलासा
घटना में निर्णायक मोड़ 3 अक्टूबर को आया, जब दंपति की विवाहित बेटी उनसे मिलने घर पहुंची। उसने देखा कि उसके माता-पिता दूसरे कमरे में मोबाइल फोन लेकर बैठे हैं और बाहर नहीं निकल रहे हैं।
बेटी ने अपनी मां का चेहरा लाल और घबराया हुआ देखा तो उसे संदेह हुआ। इसके बाद उसने चुपचाप उनकी बातचीत सुन ली। बेटी को सामने देखते ही दंपति ने वीडियो कॉल काट दी। बेटी ने जब सख्ती से पूछताछ की तो दंपति ने पूरी घटना बताई। इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ।
शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच
जानकारी के अनुसार, पीड़ित दंपति 7 अक्टूबर को प्रेमनगर थाने पहुंचे और 8 अक्टूबर को लिखित शिकायत दी। पुलिस ने 10 अक्टूबर को अज्ञात साइबर अपराधियों के विरुद्ध अभियोग दर्ज कर जांच शुरू की।
मामले में पुलिस आरोपितों, धनराशि जिन खातों में भेजी गई, और ठगी में इस्तेमाल किए गए फोन तथा डिजिटल माध्यमों से संबंधित तथ्यों की जांच कर रही है। उपलब्ध विवरण में आरोपितों की पहचान और ठगी गई पूरी धनराशि की बरामदगी की पुष्टि नहीं हुई है।
यह घटना एक बार फिर स्पष्ट करती है कि कोई भी वास्तविक जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ करके उसकी धनराशि किसी कथित सुरक्षित खाते में जमा कराने का वैध निर्देश नहीं देती। ऐसे फोन आने पर घबराकर धनराशि स्थानांतरित करने के बजाय स्वतंत्र रूप से संबंधित पुलिस थाने या आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना चाहिए।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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